पाचन तंत्र और आंतों के माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में मददगार साबित होते हैं ये खास ड्रिंक्स डबल बोर्ड-सर्टिफाइड फिजिशियन और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. जोसेफ सलहब के अनुसार क्रैनबेरी, ब्लूबेरी, संतरा, कीवी और हॉट कोको आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देते हैं। पाचन तंत्र की सेहत सीधे तौर पर आंतों में मौजूद सूक्ष्म जीवों यानी माइक्रोबायोम के संतुलन पर निर्भर करती है। जब आंतों के भीतर लाभकारी जीवाणुओं की संख्या संतुलित रहती है, तो शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है और कई तरह की शारीरिक परेशानियां दूर रहती हैं। डबल बोर्ड-सर्टिफाइड फिजिशियन और इंटरनल मेडिसिन व गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. जोसेफ सलहब ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करके इस बात की जानकारी दी है कि किन खास ड्रिंक्स की मदद से आंतों के लाभकारी बैक्टीरिया को पोषण दिया जा सकता है। इन पेय पदार्थों में पाए जाने वाले प्रीबायोटिक्स, प्रोबायोटिक्स, फाइबर और पॉलीफेनोल्स गट माइक्रोबायोम को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। क्रैनबेरी और ब्लूबेरी से मिलने वाले शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट आंतों के माइक्रोबायोम की सुरक्षा के लिए जामुन की प्रजाति के फल बेहद उपयोगी माने जाते हैं। क्रैनबेरी के रस में प्रचुर मात्रा में पॉलीफेनोल्स पाए जाते हैं, जो स्वस्थ गट बैक्टीरिया के विकास को गति देने में मददगार होते हैं। इस रस में शामिल बायोएक्टिव यौगिक एक प्राकृतिक प्रीबायोटिक के रूप में भूमिका निभाते हैं, जिससे आंत में रहने वाले अच्छे जीवाणुओं को सीधे पोषण मिलता है। इसी तरह ब्लूबेरी का रस एंथोसायनिन का एक बहुत बड़ा स्रोत माना जाता है। एंथोसायनिन दरअसल बेहद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो पाचन तंत्र के आंतरिक वातावरण को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। ब्लूबेरी के रस में उपस्थित यह खास तत्व आंतों में पहुंचकर लाभकारी जीवाणुओं की तादाद बढ़ाने का काम करता है, जिससे सूक्ष्म जीवों का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित बना रहता है। विटामिन सी और फाइबर से भरपूर संतरा और कीवी खट्टे और गूदेदार फल पाचन क्रिया को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। संतरे का रस विटामिन सी और विभिन्न पादप यौगिकों यानी प्लांट कंपाउंड्स से समृद्ध होता है, जो पाचन स्वास्थ्य को नई मजबूती देते हैं। यदि संतरे के रस में उसका गूदा और फाइबर वाला हिस्सा शामिल रखा जाए, तो यह मल त्याग की प्रक्रिया को नियमित बनाए रखता है। इससे कब्ज जैसी समस्या से बचाव होता है और आंत के फायदेमंद बैक्टीरिया को भी जरूरी आहार मिलता है। कीवी का रस भी शरीर को प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और सक्रिय प्लांट कंपाउंड्स उपलब्ध कराता है। हालांकि पूरी कीवी का सेवन करने से शरीर को भरपूर फाइबर भी मिलता है, जो आंतों की सक्रियता बढ़ाकर कब्ज की शिकायत से राहत दिलाता है और पेट की नियमित सफाई सुनिश्चित करता है। हॉट कोको और ड्रिंक्स तैयार करने का सही तरीका स्वादिष्ट गर्म पेय के तौर पर पसंद किया जाने वाला हॉट कोको भी पाचन तंत्र के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। हॉट कोको में कोको पॉलीफेनोल्स मौजूद होते हैं, जो आंतों के बैक्टीरिया पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। वैज्ञानिक रूप से यह देखा गया है कि यह तत्व बिफिडोबैक्टीरिया जैसे महत्वपूर्ण और लाभकारी जीवाणुओं की सेहत को बेहतर करने में मदद करता है। इन सभी पेय पदार्थों का पूरा फायदा हासिल करने के लिए तैयारी की विधि पर ध्यान देना अनिवार्य है। डॉ. जोसेफ सलहब के अनुसार, फलों का पारंपरिक तरीके से रस निचोड़कर निकालने के बजाय उन्हें ब्लेंड करना अधिक फायदेमंद होता है। जब फलों को ब्लेंडर में पीसा जाता है, तो उनका प्राकृतिक फाइबर पूरी तरह बरकरार रहता है। यह फाइबर आंतों के अंदर प्रीबायोटिक का काम करता है और लाभकारी बैक्टीरिया का मुख्य पोषण बनता है। इसके विपरीत, रस छानकर निकालने से उसका अधिकांश फाइबर बाहर निकल जाता है, जिससे ड्रिंक की गुणवत्ता कम हो जाती है। इसका आप पर असर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषित करने वाली सही ड्रिंक्स चुनने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और कब्ज जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है। • पाचन सुधार: फलों को रस निकालने के बजाय ब्लेंड करके पीने से फाइबर शरीर को मिलता रहता है। यह फाइबर आंतों के भीतर प्रीबायोटिक का काम करके भोजन पचाने में मदद करता है। • कब्ज से राहत: गूदेदार संतरे और कीवी का नियमित इस्तेमाल आंतों की सक्रियता बढ़ाता है। इससे पेट साफ रहने में आसानी होती है और अनियमित मल त्याग की समस्या कम होती है। • बैक्टीरिया का पोषण: क्रैनबेरी, ब्लूबेरी और हॉट कोको से मिलने वाले पॉलीफेनोल्स और एंथोसायनिन सीधे अच्छे बैक्टीरिया को खुराक देते हैं। इससे बिफिडोबैक्टीरिया जैसे जरूरी जीवाणुओं की संख्या आंतों में बढ़ती है। • तैयारी का नियम: सामान्य जूसर में फल निचोड़ने से सारा जरूरी फाइबर छनकर बाहर निकल जाता है। ड्रिंक तैयार करते समय ब्लेंडर का उपयोग करें ताकि जरूरी पोषक तत्व बेकार न जाएं। ऐसा क्यों हुआ आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए ऐसे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जो अच्छे सूक्ष्म जीवों को पोषण दें और पाचन नलिका की सूजन को नियंत्रित रखें। फलों के पॉलीफेनोल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स आंतों के माइक्रोबायोम के लिए आवश्यक घटक माने जाते हैं। • बायोएक्टिव तत्वों की भूमिका: क्रैनबेरी और ब्लूबेरी में मौजूद पॉलीफेनोल्स और एंथोसायनिन शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये तत्व सीधे आंतों के आंतरिक वातावरण को पोषण प्रदान करते हैं और अच्छे जीवाणुओं की वृद्धि में सहायक होते हैं। • फाइबर और प्रीबायोटिक्स का महत्व: संतरे और कीवी में विटामिन सी के साथ घुलनशील व अघुलनशील फाइबर मौजूद होता है। यह फाइबर पचने के बजाय आंत के निचले हिस्से में जाकर लाभकारी बैक्टीरिया का मुख्य आहार बन जाता है। • कोको पॉलीफेनोल्स का प्रभाव: हॉट कोको में उपस्थित कोको पॉलीफेनोल्स आंत के सूक्ष्म जीवों की संरचना को सकारात्मक दिशा में प्रभावित करते हैं। इनसे बिफिडोबैक्टीरिया जैसे सुरक्षात्मक जीवाणुओं की संख्या में सुधार दर्ज किया गया है। • फाइबर खोने का कारण: फलों को पारंपरिक तरीके से निचोड़कर जूस निकालने पर उनका गूदा अलग हो जाता है। गूदे के अलग होते ही प्रीबायोटिक फाइबर समाप्त हो जाता है, जिससे केवल ब्लेंड करने की सलाह दी जाती है। सवाल-जवाब 1. गट हेल्थ के लिए कौन से फलों के जूस फायदेमंद बताए गए हैं? क्रैनबेरी, ब्लूबेरी, संतरा और कीवी के रस के साथ-साथ हॉट कोको को आंतों के बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद बताया गया है। 2. क्रैनबेरी और ब्लूबेरी जूस आंतों के लिए कैसे काम करते हैं? क्रैनबेरी में पॉलीफेनोल्स होते हैं जो प्रीबायोटिक की तरह काम करते हैं, जबकि ब्लूबेरी में मौजूद एंथोसायनिन अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं। 3. संतरे और कीवी से पाचन क्रिया को क्या लाभ मिलता है? इनमें विटामिन सी, प्लांट कंपाउंड्स और फाइबर होते हैं जो कब्ज से बचाते हैं और नियमित मल त्याग में मदद करते हैं। 4. हॉट कोको आंत के किस बैक्टीरिया को प्रभावित करता है? हॉट कोको में पाए जाने वाले कोको पॉलीफेनोल्स आंत के बैक्टीरिया को प्रभावित करते हैं, जिनमें बिफिडोबैक्टीरिया भी शामिल हैं। 5. डॉक्टर जूस निकालने के बजाय फलों को ब्लेंड करने की सलाह क्यों देते हैं? ब्लेंड करने से फलों का फाइबर बना रहता है जो प्रीबायोटिक का काम करता है, जबकि रस निकालने से अधिकांश फाइबर अलग हो जाता है। https://trendkia.com/health/pachana-tntra-aura-anton-ke-maikrobayoma-ko-majabuta-banane-men-madadagara-sabita-hote-hain-ye-khasa-drinksa-55976 TrendKia — Har trend, sabse pehle.