# पहाड़ी नुस्खे से घर पर बनाएं पौष्टिक मल्टीग्रेन आटा, जानिए सही अनुपात और चक्की में पिसाने की पूरी विधि

> उत्तराखंड की पारंपरिक शैली में तैयार होने वाला सतरंगी आटा गेहूं, मंडुवा, जौ और काले भट्ट के मिश्रण से बनता है, जो साधारण रोटियों में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ा देता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/pahari-nuskhe-se-ghara-para-banaen-paushtika-multigrain-ata-janie-sahi-anupata-aura-chakki-men-pisane-ki-puri-vidhi-39293 · **Language:** Hindi
**Tags:** मल्टीग्रेन आटा, घरेलू नुस्खे, मंडुवा, उत्तराखंड खानपान, जौ और मक्का, काला भट्ट, पौष्टिक आहार, सतरंगी आटा

दैनिक खानपान में केवल स्वाद ही नहीं बल्कि संपूर्ण पोषण सुनिश्चित करने के लिए अनाजों में विविधता लाना बेहद जरूरी माना जाता है। उत्तर भारत और विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में पीढ़ियों से एक से अधिक अनाजों को मिलाकर आटा तैयार करने का चलन रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में इसे पारंपरिक तौर पर नौरंगी या सतरंगी आटा पुकारा जाता है। सिर्फ गेहूं के आटे पर निर्भर रहने के बजाय इसमें मंडुवा, जौ, मक्का और स्थानीय दालों को शामिल किया जाता है, जिससे थाली में जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन अपने आप बन जाता है।

## पांच किलो आटे का सही मिश्रण और अनाज का अनुपात
पारंपरिक खानपान की जानकार संतोषी देवी के अनुसार, अलग-अलग अनाजों का एक संतुलित अनुपात में होना ही इस आटे की असली ताकत है। संतोषी देवी कहती हैं, **"मल्टीग्रेन आटे की खासियत यह है कि इसमें कई तरह के अनाज और दालों को एक साथ शामिल किया जाता है।"**

यदि आप अपने घर के लिए पांच किलोग्राम का बैच तैयार करना चाहते हैं, तो अनाजों की यह मात्रा सबसे उपयुक्त मानी जाती है

- **गेहूं:** 2.5 किलोग्राम मुख्य आधार के रूप में
- **मंडुवा (रागी):** 1 किलोग्राम
- **ओगल अथवा फापर (कुट्टू):** 500 ग्राम
- **जौ:** 500 ग्राम
- **काला भट्ट या सोयाबीन:** 250 ग्राम
- **मक्का:** 250 ग्राम

इस सटीक मिश्रण से तैयार होने वाला आटा रोटी को मुलायम बनाए रखने के साथ-साथ कई ऐसे जरूरी तत्व प्रदान करता है जो सामान्य मैदे या सादे गेहूं के आटे में नहीं मिलते।

## पोषण और पाचन के लिए क्यों फायदेमंद है यह मिश्रण
इस आटे में शामिल किया जाने वाला मंडुवा (रागी) कैल्शियम और घुलनशील फाइबर का बेहतरीन प्राकृतिक माध्यम माना जाता है। वहीं जौ की मौजूदगी आटे में फाइबर की मात्रा को और अधिक सुदृढ़ करती है। नियमित आहार में फाइबर का पर्याप्त स्तर पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने में सहायक होता है।

इसके अलावा, मिश्रण में शामिल किए जाने वाले काले भट्ट या सोयाबीन से आटे में पादप-आधारित प्रोटीन जुड़ जाता है। साधारण अनाज के साथ जब दाल या तिलहन का तालमेल होता है, तो भोजन का जैविक मूल्य बढ़ जाता है। मक्का न केवल आटे में हल्का सौंधापन और विशिष्ट स्वाद जोड़ता है, बल्कि इसमें मौजूद पोषक घटक आहार को अधिक ऊर्जावान बनाते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरत अलग होती है, इसलिए अपनी पाचन क्षमता को देखते हुए अनाजों की मात्रा में थोड़ा फेरबदल भी किया जा सकता है।

## सफाई, सुखाने और पिसाई की सही तकनीक
घर पर शुद्ध मल्टीग्रेन आटा तैयार करते समय अनाजों की प्राथमिक तैयारी सबसे अहम चरण होता है। सबसे पहले सभी अनाजों और दालों को थाली में फैलाकर कंकड़, धूल-मिट्टी और अवांछित तिनके पूरी तरह निकाल दें। इसके बाद सभी अनाजों को साफ पानी में धोकर तेज धूप में फैला दें।

अनाज को तब तक सुखाना चाहिए जब तक कि उसमें से नमी का आखिरी कतरा भी समाप्त न हो जाए। यदि पिसाई के समय किसी भी दाने में नमी रह गई, तो आटा बहुत जल्द फफूंद पकड़ सकता है या खराब हो सकता है। मिश्रण में शामिल किए जाने वाले काले भट्ट को पिसाने से पूर्व तवे पर हल्का सा भून लेना चाहिए। हल्का भूनने से इसकी कच्ची महक दूर होकर सोंधी खुशबू आती है, लेकिन इसे बहुत तेज आंच पर जलने न दें।

सूखने के बाद इन अनाजों को स्थानीय घराट (पारंपरिक पनचक्की) या आधुनिक आटा चक्की में ले जाकर एक साथ अथवा अलग-अलग पिसवाया जा सकता है। पारंपरिक स्वाद और चोकर का लाभ लेने के लिए हल्का दरदरा पिसाव अच्छा रहता है, जबकि बारीक रोटियां पसंद करने वाले लोग इसे छलनी से छानकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

## भंडारण के नियम और रसोइ में उपयोग
ताजा पिसे हुए आटे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे हमेशा किसी साफ, पूरी तरह सूखे और हवा-बंद (एयरटाइट) डिब्बे में ही रखना चाहिए। नमी वाले स्थान, सीधी धूप और कीड़ों से इस आटे का डिब्बा दूर रखना अनिवार्य है, ताकि इसके प्राकृतिक पोषक तत्व और स्वाद महीनों तक बरकरार रहें।

इस मल्टीग्रेन आटे का उपयोग केवल रोजाना की रोटियां या पराठे बनाने तक ही सीमित नहीं है। इससे बेहद स्वादिष्ट और सुपाच्य पूरियां, पौष्टिक चीला, हलवा और पारंपरिक नमकीन पकवान भी तैयार किए जा सकते हैं। अपनी दैनिक खुराक में विविध अनाजों को शामिल करने का यह सबसे सुलभ और सुरक्षित घरेलू उपाय है।

## इसका आप पर असर
घर पर शुद्ध मल्टीग्रेन आटा तैयार करने से दैनिक रोटियों में प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

- **दैनिक पोषण में सुधार:** केवल गेहूं की तुलना में यह आटा शरीर को आवश्यक फाइबर और पौधे आधारित प्रोटीन प्रदान करता है। इससे पाचन दुरुस्त रहता है और लंबे समय तक ऊर्जा बनी रहती है।
- **घर पर बचत और शुद्धता:** बाजार के महंगे पैकेटबंद मल्टीग्रेन आटे की तुलना में साबुत अनाज खरीदकर पिसवाना अधिक किफायती और मिलावट मुक्त रहता है। आप बिना किसी प्रिजर्वेटिव के शुद्ध अनाज का उपयोग कर सकते हैं।
- **कस्टमाइज करने की सुविधा:** परिवार की उम्र और स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार अनाजों का अनुपात घटाया या बढ़ाया जा सकता है। उदाहरण के लिए प्रोटीन बढ़ाने के लिए भट्ट की मात्रा थोड़ी बढ़ाई जा सकती है।
- **लंबी शेल्फ लाइफ के लिए सावधानी:** घर के आटे में कोई रसायन नहीं होता, इसलिए इसे हमेशा धूप में सुखाकर और एयरटाइट डिब्बे में रखना जरूरी है। ऐसा करने से आटा कीटों और नमी से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पारंपरिक विधि इसलिए लोकप्रिय हो रही है क्योंकि आधुनिक जीवनशैली में एक ही अनाज के अत्यधिक सेवन से आहार में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों और फाइबर की कमी हो जाती है।

- **अनाजों की सीमित विविधता:** शहरी खानपान में केवल पॉलिश किए गए गेहूं या चावल पर अत्यधिक निर्भरता देखी जाती है। पारंपरिक पहाड़ी आहार में शामिल मंडुवा और जौ जैसे अनाज इस पोषण अंतर को पाटने में मदद करते हैं।
- **पारंपरिक ज्ञान की प्रासंगिकता:** उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कठोर मौसम और शारीरिक श्रम के लिए सतरंगी आटे का इस्तेमाल ऊर्जा और मजबूती के लिए सदियों से किया जाता रहा है। यही पारंपरिक संतुलन अब आधुनिक पोषण विज्ञान द्वारा भी सराहा जा रहा है।
- **प्रोटीन और फाइबर का मेल:** अनाजों में दालों (काला भट्ट/सोयाबीन) को मिलाने से कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ अमीनो एसिड और कैल्शियम की भरपाई एक ही खुराक में हो जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. 5 किलो मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए कौन-से अनाज और कितनी मात्रा चाहिए?
5 किलो के लिए 2.5 किलो गेहूं, 1 किलो मंडुवा, 500 ग्राम ओगल/फापर, 500 ग्राम जौ, 250 ग्राम काला भट्ट या सोयाबीन और 250 ग्राम मक्का मिलाएं।

### 2. अनाज पिसवाने से पहले काले भट्ट को भूनना क्यों जरूरी है?
काले भट्ट को हल्का भूनने से उसका कच्चापन दूर होता है और आटे में अच्छी खुशबू व सौंधा स्वाद आता है।

### 3. घर पर तैयार मल्टीग्रेन आटे को खराब होने से कैसे बचाएं?
अनाजों को धोने के बाद धूप में पूरी तरह सुखाएं और पिसे हुए आटे को साफ, सूखे एयरटाइट डिब्बे में नमी व कीड़ों से दूर रखें।

### 4. पहाड़ी इलाकों में मल्टीग्रेन आटे को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से इसे नौरंगी या सतरंगी आटा कहा जाता है।

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