पैरों में खून की नसें बंद होने से बढ़ रहा खतरा, समय पर इलाज न मिलने पर जा सकता है अंग चिकित्सा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि रक्त वाहिकाओं में रुकावट के कारण पैरों में रक्त संचार रुक सकता है, जिससे गंभीर मामलों में विच्छेदन की स्थिति बन सकती है। रक्त धमनियों में रुकावट केवल हृदय तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह निचले अंगों में भी अचानक रक्त प्रवाह को पूरी तरह ठप कर सकती है। निचले अंगों में रक्त वाहिकाओं के अवरुद्ध होने से ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे गंभीर क्षति पहुंचने लगती है। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जानकारी के अभाव में लोग इस स्थिति के शुरुआती लक्षणों की पहचान समय रहते नहीं कर पाते, जिसके चलते कई बार प्रभावित अंग को सर्जरी द्वारा अलग करने की नौबत आ जाती है। स्वास्थ्य ढांचे में विशेषज्ञता और सुविधाओं की कमी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में संवहनी विकारों से निपटने के लिए संसाधनों की व्यापक कमी देखी जा रही है। चिकित्सा सम्मेलनों में साझा की गई जानकारी के अनुसार, प्रमुख सरकारी अस्पतालों और यहां तक कि राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में भी इस विशिष्ट क्षेत्र के लिए समर्पित अलग विभागों का अभाव है। बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित सर्जनों की कमी के कारण मरीजों को समय पर सही परामर्श नहीं मिल पाता। हाल ही में उनतीस वर्ष के एक युवक को पैरों में अचानक चलने की क्षमता प्रभावित होने के बाद अस्पताल लाया गया, जहां समय रहते चिकित्सा सहायता मिलने से उसकी स्थिति को संभाल लिया गया, अन्यथा थोड़ी सी भी देरी उसके पैर के लिए स्थायी नुकसानदेह साबित हो सकती थी। यह महत्वपूर्ण विवरण राजधानी में आयोजित चिकित्सा संगोष्ठी में सामने आए। लक्षणों की पहचान और जटिलताओं का खतरा संवहनी प्रणाली के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निचले अंगों में असमान तापमान, त्वचा का रंग बदलना और चलते समय अत्यधिक दर्द होना गंभीर खतरे का संकेत हैं। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. तापिश साहू के अनुसार, यदि एक पैर ठंडा और दूसरा गर्म महसूस हो तथा दर्द असहनीय हो जाए, तो इसे सामान्य थकान समझने की भूल कतई नहीं करनी चाहिए। रक्त प्रवाह रुक जाने की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराना अनिवार्य है। वहीं मेदांता संस्थान के वरिष्ठ निदेशक डॉ. तरुण ग्रोवर ने गहरी नसों में रक्त का थक्का जमने से जुड़ी जटिलता पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में खून का जमाव फेफड़ों तक पहुंचकर श्वसन तंत्र को अवरुद्ध कर सकता है, जिससे जीवन के लिए सीधा संकट उत्पन्न हो जाता है। इसके अतिरिक्त, वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया से जुड़े डॉ. भूपेश गर्ग ने रेखांकित किया कि जीवनशैली में आवश्यक सुधार लाकर इन विकारों की संभावना को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जोखिम कारक और बचाव के व्यावहारिक उपाय नसों से जुड़ी इन गंभीर समस्याओं के पीछे अनियंत्रित दिनचर्या और पुरानी बीमारियां मुख्य कारण बनकर उभरती हैं। मेदांता अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राजीव पारख ने बताया कि तंबाकू और धूम्रपान की लत रक्त नलिकाओं को संकरा कर देती है, जबकि अनियंत्रित मधुमेह इस क्षति को तेजी से बढ़ाता है। रक्त संचार बाधित रहने से जब ऊतक मृत होने लगते हैं, तो गैंग्रीन की स्थिति बन जाती है, जिसमें संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए शल्य चिकित्सा द्वारा पैर काटना पड़ सकता है। यह समस्या अनुवांशिक प्रवृत्तियों के कारण भी उत्पन्न हो सकती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि रक्त में शर्करा, रक्तचाप तथा वसा के स्तर की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। शारीरिक निष्क्रियता से बचते हुए दैनिक व्यायाम, पर्याप्त जल का सेवन, गहरी नींद और पैरों की सक्रियता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। काम के दौरान एक ही मुद्रा में लंबे समय तक लगातार बैठे या खड़े रहने से बचना चाहिए। किसी भी संदेहास्पद बदलाव या दर्द के प्रकट होते ही बिना विलंब चिकित्सकीय परामर्श लेना जीवन और अंग दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इसका आप पर असर पैरों की नसों में अवरोध को नजरअंदाज करने से स्थायी शारीरिक अक्षमता और अंग गंवाने का खतरा बढ़ सकता है। • भारत में: देश भर में संवहनी रोगों के प्रति जागरूकता और समर्पित सरकारी सुविधाओं की भारी कमी है। यदि किसी भी व्यक्ति को पैरों में अचानक असहनीय दर्द या तापमान में अंतर महसूस हो, तो उसे बिना समय गंवाए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में संवहनी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। • मधुमेह और धूम्रपान करने वालों के लिए: उच्च शर्करा स्तर और तंबाकू का सेवन नसों को संकरा कर रक्त संचार को बुरी तरह प्रभावित करता है। ऐसे व्यक्तियों को अपने रक्तचाप और शुगर की नियमित जांच करानी चाहिए और दैनिक जीवन में पैरों के व्यायाम को प्राथमिकता देनी चाहिए। • डेस्क जॉब और गतिहीन दिनचर्या वालों के लिए: लगातार कई घंटों तक बैठे रहने या खड़े रहने से नसों में थक्का जमने का खतरा बढ़ जाता है। काम के दौरान हर एक घंटे में छोटा ब्रेक लें और पैरों को सक्रिय रखने के लिए खिंचाव वाले व्यायाम अपनाएं। • लक्षणों के प्रति सजगता: यदि एक पैर का रंग बदल रहा हो या वह दूसरे की तुलना में ठंडा पड़ रहा हो, तो यह आपातकालीन स्थिति हो सकती है। ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। ऐसा क्यों हुआ पैरों की नसों में रुकावट और थक्के बनने की समस्या अस्वस्थ जीवनशैली, अनियंत्रित बीमारियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में जागरूकता की कमी के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न होती है। • सीधा कारण: रक्त वाहिकाओं के भीतर पट्टिका या रक्त का थक्का जमने से अंगों तक पहुंचने वाला परिसंचरण अवरुद्ध हो जाता है। जब ऊतकों को आवश्यक ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और गैंग्रीन का रूप ले लेती हैं। • जोखिम भरी स्थितियां: तंबाकू, धूम्रपान, उच्च कोलेस्ट्रॉल और अनियंत्रित मधुमेह नसों की अंदरूनी दीवारों को कमजोर और संकरा बना देते हैं। इसके साथ ही शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से रक्त जमाव की संभावना बढ़ जाती है। • संस्थागत चुनौतियां: देश के बड़े सार्वजनिक अस्पतालों में स्वतंत्र संवहनी विभागों की कमी के चलते शुरुआती स्तर पर निदान नहीं हो पाता। सही समय पर उपचार न मिलने से सामान्य रक्त रुकावट जानलेवा जटिलताओं में बदल जाती है। सवाल-जवाब 1. पैरों में वैस्कुलर ब्लॉकेज होने के मुख्य लक्षण क्या हैं? चलने में अत्यधिक दर्द, एक पैर का दूसरे की तुलना में असामान्य रूप से ठंडा होना और त्वचा के रंग में बदलाव इसके प्रमुख संकेत हैं। 2. डीप वेन थ्रॉम्बोसिस मरीज के लिए खतरनाक क्यों साबित हो सकता है? गहरी नसों में बना थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जिससे श्वसन तंत्र में गंभीर अवरोध उत्पन्न होकर जान का जोखिम बन जाता है। 3. पैरों में रक्त संचार बाधित होने से अंग काटने की नौबत क्यों आती है? रक्त प्रवाह रुकने से जब ऊतकों को ऑक्सीजन नहीं मिलती तो वे मृत होने लगते हैं, जिससे गैंग्रीन फैल जाता है और पैर काटना पड़ सकता है। 4. इस बीमारी के प्रमुख जोखिम कारक कौन से बताए गए हैं? तंबाकू व सिगरेट का सेवन, अनियंत्रित मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, गतिहीन दिनचर्या और आनुवंशिक प्रभाव इसके मुख्य कारण हैं। 5. वैस्कुलर रोगों से बचाव के लिए किन आदतों को अपनाना चाहिए? रक्तचाप व शुगर नियंत्रित रखें, तंबाकू से दूर रहें, नियमित व्यायाम करें और लंबे समय तक लगातार बैठे या खड़े रहने से बचें। https://trendkia.com/health/pairon-men-khuna-ki-nasen-bnda-hone-se-barha-raha-khatara-samaya-para-ilaja-na-milane-para-ja-sakata-hai-anga-46260 TrendKia — Har trend, sabse pehle.