पड़ोसी मुल्क में खसरे के कहर से मची खलबली, जानिए भारत में बच्चों की सुरक्षा का पूरा गणित बांग्लादेश में खसरे से 1,147 मासूमों की जान जाने के बाद स्वास्थ्य तंत्र सतर्क हो गया है। भारत में 95 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण के बावजूद छूटे हुए बच्चों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में खसरे के बढ़ते प्रकोप ने सीमावर्ती क्षेत्रों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है। मार्च 2026 के मध्य से शुरू हुए इस संक्रमण के कारण वहां 2 लाख से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इस जानलेवा बीमारी के कारण 1,147 मरीजों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 94 प्रतिशत बच्चे पांच वर्ष से कम उम्र के थे। इस बड़े मानवीय संकट की मुख्य वजह बच्चों के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में आई भारी गिरावट और स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच को माना गया है। इस गंभीर स्थिति के बाद अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या भारतीय बच्चों पर भी इस घातक वायरस का कोई प्रत्यक्ष खतरा मंडरा रहा है। भारत में संक्रमण का मौजूदा जोखिम और सुरक्षा घेरा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो किसी संक्रमित व्यक्ति के छींकने अथवा खांसने से निकलने वाली बूंदों के जरिए हवा में फैलती है। जब कोई बच्चा बिना टीकाकरण के ऐसे संक्रमित माहौल में आता है, तो उसके बीमार पड़ने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। हालांकि भारत की स्थिति पड़ोसी मुल्क की तुलना में काफी मजबूत मानी जा रही है। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों के 2025 के आकलनों के आधार पर भारत में खसरे के टीके की पहली खुराक का कवरेज लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। वहीं टीके की दूसरी खुराक लेने वाले बच्चों का अनुपात भी करीब 95 प्रतिशत दर्ज किया गया है। उच्च कवरेज के बावजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञ पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। देश के कुछ हिस्सों में अब भी ऐसे बच्चे मौजूद हैं, जो विभिन्न कारणों से नियमित टीकाकरण की खुराक पाने से चूक गए हैं। जून 2026 में देश की राजधानी दिल्ली के कैलाश नगर इलाके में खसरे के मामले सामने आने की जानकारी साझा की गई थी। इस तरह की छिटपुट घटनाएं यह साबित करती हैं कि वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और थोड़ी सी भी लापरवाही स्थानीय स्तर पर मामलों को अचानक बढ़ा सकती है। फिर भी व्यापक टीकाकरण दर होने के कारण बांग्लादेश जैसी भयावह महामारी की स्थिति भारत में बनने की संभावना बेहद कम है। टीकाकरण में रुकावट क्यों बन जाती है बड़ी चुनौती सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुसार खसरे के सामुदायिक प्रसार को रोकने के लिए आबादी के कम से कम 95 प्रतिशत हिस्से का प्रतिरक्षित होना अनिवार्य माना जाता है। यदि किसी क्षेत्र विशेष में बच्चों की एक बड़ी संख्या टीके से वंचित रह जाती है, तो वहां वायरस को अपनी श्रृंखला बनाने और तेजी से फैलने का अनुकूल वातावरण मिल जाता है। बांग्लादेश के मामले में बच्चों के पंजीकरण में ढिलाई, स्वास्थ्य तंत्र की अव्यवस्था और टीकों की अनुपलब्धता ने हालात को बेकाबू कर दिया था। भारत के संदर्भ में भी दूरदराज के ग्रामीण इलाकों, दुर्गम बस्तियों और बड़े शहरों की अनौपचारिक झुग्गियों में रहने वाले वंचित परिवारों तक पहुंचना एक निरंतर चुनौती बनी हुई है। इन क्षेत्रों में प्रवासन या जागरूकता की कमी के कारण खुराक छूटने का जोखिम बना रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ओर से अभिभावकों को लगातार यह सलाह दी जा रही है कि वे अपने टीकाकरण कार्ड की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि बच्चे को खसरा और रूबेला यानी एमआर वैक्सीन की दोनों जरूरी खुराकें समय पर मिल चुकी हैं या नहीं। लक्षण पहचानें और समय पर करें बचाव के उपाय खसरे के संक्रमण की शुरुआत आमतौर पर तेज बुखार, लगातार खांसी, नाक बहने और आंखों के लाल होने के साथ होती है। कुछ ही दिनों के भीतर बच्चे के चेहरे और पूरे शरीर पर दानेदार लाल चकत्ते उभरने लगते हैं। यदि संक्रमण बढ़ जाए तो यह स्थिति निमोनिया, गंभीर दस्त और मस्तिष्क में सूजन जैसी घातक जटिलताओं का रूप ले सकती है, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित होती हैं। यदि किसी बच्चे में ऐसे कोई भी प्रारंभिक लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत अन्य बच्चों से अलग रखना चाहिए ताकि संक्रमण का प्रसार रुक सके। इसके साथ ही बिना देर किए नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या बाल रोग विशेषज्ञ से चिकित्सकीय परामर्श लेना बेहद जरूरी है। इसका आप पर असर बांग्लादेश में फैले गंभीर संक्रमण के बाद माता-पिता के लिए अपने बच्चों के टीकाकरण रिकॉर्ड की तत्काल जांच करना सबसे जरूरी काम बन गया है। • टीकाकरण की पुष्टि: अभिभावक तुरंत बच्चे के टीकाकरण कार्ड की जांच करें कि एमआर टीके की दोनों खुराकें लगी हैं या नहीं। यदि कोई खुराक छूट गई है तो नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर इसे बिना किसी शुल्क के पूरा करवाएं। • शुरुआती लक्षणों की निगरानी: बुखार, खांसी, आंखें लाल होने और शरीर पर चकत्ते दिखने पर बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। घरेलू उपचार के बजाय समय पर चिकित्सीय सलाह लेने से निमोनिया या दिमागी सूजन जैसी जटिलताओं को रोका जा सकता है। • संक्रमण से बचाव: लक्षण दिखने पर बच्चे को स्कूल या बाहर भेजने से रोकें और अन्य बच्चों से पूरी तरह अलग रखें। खसरा हवा के जरिए तेजी से फैलता है, इसलिए घर के भीतर भी उचित दूरी और स्वच्छता बनाए रखें। • स्वास्थ्य कर्मियों से संपर्क: दूरदराज या घनी बस्तियों में रहने वाले परिवार स्थानीय आशा या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए रखें। नियमित जांच अभियानों का लाभ उठाकर यह सुनिश्चित करें कि आपके आसपास कोई भी बच्चा टीके से वंचित न रहे। ऐसा क्यों हुआ बांग्लादेश में खसरे का यह भीषण संकट नियमित बाल टीकाकरण में आई भारी गिरावट और कमजोर स्वास्थ्य निगरानी का सीधा परिणाम है। समय पर टीके न मिलने से बड़ी संख्या में बच्चे इस जानलेवा संक्रामक रोग के सामने पूरी तरह असुरक्षित हो गए। • टीकाकरण कवरेज में गिरावट: बांग्लादेश में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच और पंजीकरण में कमी के कारण लाखों बच्चे टीके से वंचित रह गए। किसी भी क्षेत्र में कवरेज 95 प्रतिशत से नीचे गिरने पर वायरस को बेरोकटोक फैलने का मौका मिल जाता है। • अत्यधिक संक्रामक प्रकृति: खसरा हवा में खांसने और छींकने से निकलने वाली बूंदों से बहुत तेजी से फैलता है। जहां बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर या अधूरी होती है, वहां यह आग की तरह फैलता है। • कुपोषण और सीमित चिकित्सा: गरीब परिवारों में बच्चों का स्वास्थ्य पहले से कमजोर होने के कारण संक्रमण तेजी से जानलेवा जटिलताओं में बदल गया। अस्पताल देरी से पहुंचने के कारण मरने वालों में 94 प्रतिशत पांच साल से छोटे बच्चे रहे। • जांच और निगरानी की कमी: संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान और अलगाव न होने से संक्रमण एक बच्चे से दूसरे बच्चे में फैलता चला गया। जब तक नियंत्रण के उपाय किए गए, तब तक 2 लाख से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके थे। सवाल-जवाब 1. बांग्लादेश में खसरे के कारण कितने बच्चों की मौत हुई है? बांग्लादेश में खसरे से 1,147 लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से 94 प्रतिशत पांच साल से कम उम्र के बच्चे हैं। 2. भारत में खसरे के टीके की कवरेज दर क्या है? वैश्विक आकलनों के अनुसार भारत में पहली खुराक का कवरेज 98 प्रतिशत और दूसरी खुराक का कवरेज 95 प्रतिशत के करीब है। 3. क्या भारत में हाल ही में खसरे का कोई प्रकोप देखा गया है? जून 2026 में देश की राजधानी दिल्ली के कैलाश नगर में खसरे के प्रकोप का मामला दर्ज किया गया था। 4. खसरे के प्रमुख लक्षण कौन से होते हैं? इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, बहती नाक, लाल आंखें और त्वचा पर उभरने वाले लाल दाने या चकत्ते शामिल हैं। 5. खसरे से बचाव के लिए आबादी का कितना टीकाकरण जरूरी है? सामुदायिक स्तर पर संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए कम से कम 95 प्रतिशत आबादी का प्रतिरक्षित होना आवश्यक माना जाता है। https://trendkia.com/health/parosi-mulka-men-khasare-ke-kahara-se-machi-khalabali-janie-india-men-bachchon-ki-suraksha-ka-pura-ganita-50342 TrendKia — Har trend, sabse pehle.