पटाखों के तेज धमाकों से फट सकता है कान का पर्दा, मेरठ मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विशेषज्ञ की बड़ी चेतावनी दीपावली पर अत्यधिक तेज आवाज वाले पटाखों की ध्वनि तरंगें कान के पर्दे को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसके चलते गंभीर मामलों में सर्जरी तक की नौबत आ सकती है। दीपावली के उल्लास के बीच पटाखों का अंधाधुंध इस्तेमाल कई बार गंभीर शारीरिक नुकसान का कारण बन जाता है। त्योहार के मौसम में तेज आवाज और भारी धमाकों वाले पटाखे इंसानी कानों की सुनने की क्षमता पर सीधा और बेहद घातक आघात पहुंचाते हैं। इस संवेदनशील विषय पर मेरठ मेडिकल कॉलेज के नाक, कान एवं गला (ईएनटी) रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ विनीत शर्मा ने त्योहार की खुशियों के बीच स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि लापरवाही के कारण होने वाली कानों की क्षति कई बार जीवनभर के लिए परेशानी बन सकती है। ओपीडी में लगातार बढ़ रहे हैं कान की बीमारियों के मामले अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन पहुंचने वाले मरीजों की स्थिति पर बात करते हुए डॉ विनीत शर्मा ने रेखांकित किया कि इन दिनों कान से जुड़ी विभिन्न समस्याओं से ग्रस्त लोगों की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। पहले जहां कान के गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों में बुजुर्गों की तादाद अधिक देखी जाती थी, वहीं अब परिदृश्य काफी बदल चुका है। इस पृष्ठभूमि में दीपावली के आगमन को देखते हुए उन्होंने लोगों से अत्यधिक शोर उत्पन्न करने वाले आतिशबाजी और पटाखों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने का आग्रह किया है। उनके अनुसार तेज आवाज सीधे तौर पर श्रवण क्षमता को दुर्बल बना देती है। धमाकों की घातक तरंगें और कान के पर्दे में छेद का खतरा डॉ विनीत शर्मा के अनुसार हर साल दीपावली उत्सव समाप्त होने के बाद अस्पतालों में कान की गंभीर समस्याओं से जूझते मरीजों की तादाद में भारी उछाल आता है। इनमें से अधिकांश मरीज पटाखों के फटने से निकलने वाली तीव्र ध्वनि तरंगों की चपेट में आकर बीमार होते हैं। ये प्रचंड तरंगें कान के संवेदनशील पर्दे पर सीधे प्रहार करती हैं, जिससे पर्दे में छेद होने की गंभीर आशंका पैदा हो जाती है। जब यह स्थिति अत्यधिक विकराल रूप धारण कर लेती है, तो कान की कार्यप्रणाली को बहाल करने के लिए डॉक्टरों को ऑपरेशन का सहारा लेना पड़ता है। इसी खतरे को भांपते हुए उन्होंने नागरिकों को केवल सीमित मात्रा में और नियंत्रित तरीके से ग्रीन पटाखों का उपयोग करने की सलाह दी है, ताकि वायु प्रदूषण को कम रखा जा सके और आम जनता का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे। नवजात शिशुओं और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर अचानक होने वाले भीषण धमाकों के प्रभाव को साझा करते हुए डॉ विनीत शर्मा ने कहा, "जैसे ही कोई तेज आवाज का पटाखा छूटता है तो चाहे छोटे बच्चे हों, बुजुर्ग हों या युवा हों, सभी एकदम सुन्न हो जाते हैं।" कई मामलों में यह सुन्नता कुछ पलों के बाद स्वतः दूर हो जाती है, किंतु जब ध्वनि का स्तर सामान्य सीमा से अत्यधिक अधिक हो तो यह सुन्नपन और बहरापन जीवनभर की स्थायी व्याधि में तब्दील हो जाता है। उन्होंने विशेष रूप से नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों वाले अभिभावकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की हिदायत दी है, क्योंकि नाजुक शारीरिक बनावट के कारण ऐसे बच्चों पर पटाखों की ध्वनि का वार कहीं अधिक जानलेवा और विनाशकारी साबित होता है। इसके अलावा तेज पटाखों से न केवल सुनने की क्षमता छिनती है, बल्कि शरीर के अन्य कई आवश्यक अंगों पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसका आप पर असर तेज आवाज वाले पटाखों से कान का पर्दा फटने और स्थायी बहरापन होने का सीधा खतरा बना रहता है। • भारत में: दीपावली पर अत्यधिक शोर वाले पटाखों से बचने के लिए केवल सीमित संख्या में ग्रीन पटाखों का ही चयन करें। इससे न सिर्फ त्योहार के बाद अस्पतालों में कान की सर्जरी के बढ़ते मामलों पर रोक लगेगी, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। • मेरठ में: मेरठ मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में त्योहार के बाद कान के मरीजों का दबाव तेजी से बढ़ जाता है। स्थानीय नागरिक अत्यधिक शोर से बचकर और नवजात शिशुओं को दूर रखकर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकते हैं। • अभिभावकों के लिए: छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं को पटाखों के सीधे धमाकों और तेज आवाज से बिल्कुल दूर रखें। शिशुओं के कान बेहद संवेदनशील होते हैं और लापरवाही उन्हें उम्रभर के लिए श्रवण दोष दे सकती है। • बुजुर्गों के लिए: वरिष्ठ नागरिकों को धमाके वाली जगहों से दूर बंद और सुरक्षित कमरों में रहना चाहिए। अचानक होने वाले तेज धमाके कानों को सुन्न करने के साथ-साथ घबराहट और अन्य शारीरिक समस्याएं भी बढ़ा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ दीपावली के दौरान बारूदी आतिशबाजी से उत्पन्न तीव्र ध्वनि तरंगें सीधे कान के आंतरिक तंत्र को चोट पहुंचाती हैं, जिससे यह स्वास्थ्य संकट खड़ा होता है। • सीधा कारण: तेज आवाज वाले पटाखों के अचानक फटने से भीषण ध्वनि तरंगें और दबाव पैदा होता है। यह तीव्र दबाव सीधे कान के पर्दे से टकराता है, जिससे उसमें छेद या फटने की स्थिति पैदा हो जाती है। • अस्पतालों में बढ़ता दबाव: त्योहार के दिनों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और अत्यधिक शोर वाले पटाखों का अनियंत्रित उपयोग इस स्थिति को बढ़ाता है। हर साल दीपावली बीतने के तुरंत बाद इसी लापरवाही के कारण ईएनटी ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ती है। • गंभीर परिणाम: मामूली आघात पर कान थोड़ी देर के लिए सुन्न होकर सामान्य हो सकता है, लेकिन गंभीर ध्वनि आघात स्थायी बहरापन दे देता है। ऐसे जटिल मामलों में कान की कार्यक्षमता बचाने के लिए सर्जिकल ऑपरेशन ही अंतिम विकल्प बचता है। सवाल-जवाब 1. दीपावली पर तेज पटाखों से कानों को क्या सबसे बड़ा खतरा होता है? पटाखों की तेज ध्वनि तरंगें कान के पर्दे पर सीधा असर डालती हैं, जिससे पर्दे में छेद होने और स्थायी बहरापन आने का खतरा रहता है। 2. कान का पर्दा फटने पर क्या इलाज कराना पड़ता है? स्थिति गंभीर होने पर कान के पर्दे को ठीक करने और श्रवण क्षमता बचाने के लिए ऑपरेशन करना पड़ता है। 3. अस्पताल की ओपीडी में कान के मरीजों की क्या स्थिति देखी जा रही है? ओपीडी में प्रतिदिन कान की समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 4. विशेषज्ञों ने पटाखों के उपयोग को लेकर क्या सलाह दी है? विशेषज्ञों ने तेज आवाज वाले पटाखों से पूरी तरह बचने और सीमित मात्रा में केवल ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। 5. पटाखों के धमाकों से सबसे ज्यादा खतरा किन्हें होता है? छोटे बच्चों, नवजात शिशुओं और बुजुर्गों के लिए पटाखों की तेज आवाज सबसे अधिक घातक साबित होती है। https://trendkia.com/health/patakhon-ke-teja-dhamakon-se-phata-sakata-hai-kana-ka-parda-meerut-medical-college-ke-ent-visheshajna-ki-bari-chetavani-56873 TrendKia — Har trend, sabse pehle.