पेट फूलने और गैस से हैं परेशान, तो तुरंत बदल लें अपनी ये रोजाना की आदतें खाना खाने के बाद पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या आम हो सकती है, लेकिन इसके पीछे आपकी दैनिक जीवनशैली की कुछ गलत आदतें छिपी हो सकती हैं। गैस्ट्रॉलॉजिस्ट सौरभ सेठी ने ऐसी ही कुछ प्रमुख वजहों के बारे में बताया है, जिनके कारण यह परेशानी बढ़ सकती है। अगर भोजन करने के तुरंत बाद आपके पेट में अत्यधिक गैस बनने लगती है और ब्लोटिंग की तकलीफ परेशान करती है, तो इसका कारण आपकी दिनभर की कुछ सामान्य आदतें हो सकती हैं। गैस्ट्रॉलॉजिस्ट सौरभ सेठी का कहना है कि लगातार पेट फूलने की यह दिक्कत न केवल शारीरिक रूप से असहज महसूस कराती है, बल्कि आपके दैनिक कामकाज और उत्पादकता को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उन तमाम गलत आदतों से पर्दा उठाया है जो ब्लोटिंग को बढ़ावा देती हैं और इनसे छुटकारा पाने के प्रभावी उपायों का भी जिक्र किया है। शुगर-फ्री गम और मिंट का अत्यधिक सेवन दिनभर शुगर-फ्री गम चबाने की आदत आपकी पाचन क्रिया पर भारी पड़ सकती है। बाजार में मिलने वाली कई शुगर-फ्री च्यूइंग गम में सॉर्बिटोल नाम का तत्व पाया जाता है, जो एक खास तरह का शुगर अल्कोहल होता है। यह घटक आपकी आंतों के अंदर पानी को खींच सकता है, जिससे न केवल गैस बनती है बल्कि पेट फूलने की समस्या भी पैदा हो जाती है। इस परेशानी से राहत पाने के लिए विशेषज्ञ लगभग दो सप्ताह तक शुगर-फ्री गम और मिंट जैसी चीजों का सेवन पूरी तरह बंद करके देखने की सलाह देते हैं। लैक्टोज इनटॉलरेंस के बावजूद दूध पीना उम्र बढ़ने के साथ-साथ बहुत से लोगों के शरीर में लैक्टेज एंजाइम का प्राकृतिक उत्पादन कम होने लगता है। ऐसे में जब आप दूध या डेयरी उत्पादों का सेवन करते हैं, तो बिना पचा हुआ लैक्टोज आंतों में मौजूद बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंट होने लगता है, जिससे भारी मात्रा में गैस उत्पन्न होती है। यदि आपको भी ऐसी समस्या है, तो आप करीब दो सप्ताह तक लैक्टोज-फ्री दूध का इस्तेमाल करके यह जांच सकते हैं कि आपके लक्षणों में कोई सुधार होता है या नहीं। हेवी और अत्यधिक ऑयली खान-पान की आदत बहुत ज्यादा तेलीय और मसालेदार भोजन का सेवन करना आपके पाचन तंत्र के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। अत्यधिक ऑयली फूड्स आंतों की सामान्य गतिशीलता और गैस को नियंत्रित करने की शारीरिक क्षमता को कमजोर कर देते हैं, जिससे पेट फूलने की शिकायत तेजी से बढ़ने लगती है। यह समस्या विशेष रूप से उन लोगों में ज्यादा गंभीर होती है जो पहले से ही आईबीएस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। इसलिए वसायुक्त और तली-भुनी चीजों से परहेज करें और इसके बजाय अपने आहार में ग्रिल्ड प्रोटीन तथा अच्छी तरह पकी हुई सब्जियों को शामिल करें। भोजन करने के तुरंत बाद बैठ जाना खाना खाने के तुरंत बाद आराम की मुद्रा में बैठ जाना या लेट जाना भी ब्लोटिंग के प्रमुख कारणों में से एक है। भोजन के उपरांत यदि आप मात्र 10 से 15 मिनट के लिए धीमी गति से टहलते हैं, तो यह पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। नियमित रूप से थोड़ा चलने से पेट फूलने, बार-बार डकार आने और पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाली तकलीफ से काफी हद तक राहत मिलती है, इसलिए इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं। कब्ज की समस्या को नजरअंदाज करना कब्ज की स्थिति को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। डॉक्टर सौरभ सेठी द्वारा कब्ज से पीड़ित 2,203 मरीजों पर किए गए एक अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि इनमें से लगभग 92 प्रतिशत लोगों ने पेट फूलने की गंभीर शिकायत की थी। इसलिए शरीर द्वारा मिलने वाले संकेतों को समझें और कभी भी शौच जाने की इच्छा को टालें या नजरअंदाज न करें। जल्दबाजी में भोजन खाना जो लोग बहुत तेजी से खाना खाते हैं, वे भोजन के साथ अनजाने में बहुत अधिक मात्रा में हवा भी अंदर निगल जाते हैं। यह फंसी हुई हवा आगे चलकर पेट में गैस, ब्लोटिंग और बार-बार डकार आने की परेशानी को और अधिक बढ़ा देती है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप हमेशा तसल्ली से भोजन करें, कौर छोटे आकार के रखें और प्रत्येक निवाले को अच्छी तरह चबाकर खाएं। इसका आप पर असर पेट फूलने और ब्लोटिंग की इन आम आदतों में सुधार करने से आपके दैनिक जीवन, ऊर्जा के स्तर और पाचन संबंधी स्वास्थ्य में सीधा और सकारात्मक बदलाव आ सकता है। • दैनिक खानपान: अपने भोजन में तली-भुनी चीजों की जगह ग्रिल्ड प्रोटीन और पकी हुई सब्जियां शामिल करने से पाचन तंत्र पर दबाव कम होता है। इससे दिनभर ऊर्जा बनी रहती है और भारीपन की समस्या से छुटकारा मिलता है। • भोजन की गति: जल्दी-जल्दी खाने की आदत छोड़कर छोटे निवाले धीरे-धीरे चबाने से पेट में हवा जाने की मात्रा घट जाती है। यह बदलाव तुरंत ही डकार और पेट की ऐंठन जैसी परेशानियों को कम कर देता है। • शारीरिक गतिविधि: खाना खाने के बाद 10 से 15 मिनट टहलने की नई आदत डालने से भोजन आसानी से पचता है। यह छोटा सा कदम गैस और ब्लोटिंग को प्रभावी ढंग से रोकता है। • डेयरी विकल्प: यदि आपको लैक्टोज इनटॉलरेंस है, तो लैक्टोज-फ्री दूध अपनाने से दो सप्ताह के भीतर गैस की तकलीफ में राहत मिल सकती है। इससे खानपान से जुड़े निर्णय लेने में आसानी होती है। ऐसा क्यों हुआ पेट फूलने और गैस की समस्या का सीधा संबंध हमारे शरीर की आंतरिक पाचन प्रक्रिया और खानपान से जुड़ी कुछ अनजाने गलतियों से होता है। इन कारणों को समझकर ही इस परेशानी से स्थायी रूप से निजात पाई जा सकती है। • सॉर्टिबोल का असर: शुगर-फ्री गम और मिंट में पाया जाने वाला सॉर्बिटोल नाम का घटक आंतों में अतिरिक्त पानी खींच लेता है, जिससे गैस और ब्लोटिंग पैदा होती है। • एंजाइम की कमी: उम्र बढ़ने के साथ लैक्टेज एंजाइम का उत्पादन घटने से लैक्टोज का सही से पाचन नहीं हो पाता, और बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंटेशन से गैस बनती है। • आंतों की गतिशीलता: अत्यधिक वसायुक्त और ऑयली भोजन आंतों की गति को धीमा कर देते हैं, जिससे गैस नियंत्रण बिगड़ता है और ब्लोटिंग बढ़ती है। • निगली गई हवा: जल्दबाजी में भोजन करने से अतिरिक्त हवा पेट में चली जाती है, जो बाद में डकार और पेट फूलने के रूप में सामने आती है। • कब्ज का प्रभाव: मल त्याग की इच्छा को दबाने से आंतों पर दबाव बढ़ता है, और अध्ययनों के अनुसार कब्ज से पीड़ित अधिकांश लोग ब्लोटिंग का शिकार होते हैं। सवाल-जवाब 1. पेट फूलने और गैस की समस्या का मुख्य कारण क्या है? गलत खानपान की आदतें, शुगर-फ्री गम का सेवन, लैक्टोज इनटॉलरेंस और जल्दी-जल्दी खाना इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। 2. शुगर-फ्री गम चबाने से पेट क्यों फूलता है? इसमें सॉर्बिटोल होता है जो आंतों में पानी खींचता है और गैस तथा पेट फूलने का कारण बनता है। 3. भोजन के बाद कितनी देर टहलना चाहिए? खाना खाने के बाद 10 से 15 मिनट तक टहलने से पाचन में सुधार होता है और ब्लोटिंग कम होती है। 4. कब्ज और ब्लोटिंग में क्या संबंध है? अध्ययनों के अनुसार कब्ज से पीड़ित लगभग 92% लोग पेट फूलने की समस्या से भी परेशान रहते हैं। 5. लैक्टोज इनटॉलरेंस होने पर क्या उपाय करना चाहिए? लगभग दो सप्ताह तक लैक्टोज-फ्री दूध का सेवन करके लक्षणों में सुधार देखा जा सकता है। https://trendkia.com/health/pet-foolne-aur-gas-se-hain-preshan-toh-turant-badal-len-apni-yeh-rozana-ki-aadatein-48303 TrendKia — Har trend, sabse pehle.