# फरीदाबाद की टूटी सड़कों पर संभलकर चलें, जरा सा झटका दे सकता है रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट

> बरसात के मौसम में फरीदाबाद की सड़कों पर बने गड्ढे और जलभराव वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं। अचानक झटके लगने से रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों पर बुरा असर पड़ता है, जिस पर न्यूरोसर्जन डॉ. सचिन गोयल ने जरूरी सावधानियां बताई हैं।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/pharidabada-ki-tuti-sarakon-para-snbhalakara-chalen-jara-sa-jhataka-de-sakata-hai-rirha-ki-haddi-men-gnbhira-chota-32036 · **Language:** Hindi
**Tags:** फरीदाबाद, सड़क सुरक्षा, रीढ़ की हड्डी, मानसून, स्वास्थ्य, डॉ सचिन गोयल

फरीदाबाद में हर मार्ग उच्च श्रेणी के एक्सप्रेसवे जैसा सुगम नहीं है, जहां वाहन फर्राटा भरते हुए चंद मिनटों में राजधानी दिल्ली पहुंच जाएं। शहर से ग्रामीण इलाकों की तरफ रुख करने पर कई मार्गों पर बिखरे गड्ढे और बदहाल डामर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। साहुपुरा मार्ग से रोजाना लगभग बीस गांवों के बाशिंदे आवागमन करते हैं, वहीं पल्ला थाना मार्ग, जिसे पल्ला-बसंतपुर या पल्ला-सेहतपुर मुख्य सड़क भी कहा जाता है, लंबे अरसे से अपनी खस्ताहाली के कारण परेशानी का सबब बना हुआ है। मानसून के दौरान ये गड्ढे जलभराव से पूरी तरह ढक जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडराने लगता है। सड़क पर अचानक वाहन धंसने से रीढ़ और कटि प्रदेश पर पड़ने वाले दबाव, दुर्घटना के बाद बरती जाने वाली प्राथमिक सावधानियों और कमर दर्द के विकराल रूप धारण करने के संकेतों को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों ने अहम जानकारियां साझा की हैं।

## बरसात के दिनों में हादसों का बढ़ता ग्राफ
फरीदाबाद के मैरेंगो एशिया अस्पताल के न्यूरोसर्जन एवं विभाग अध्यक्ष डॉ. सचिन गोयल का कहना है कि वर्षा ऋतु के दौरान सड़क के गड्ढे बड़ी चुनौती बन जाते हैं। जब आप दोपहिया वाहन चला रहे होते हैं और मार्ग पर पानी जमा होता है, तो गढ्ढे का सही आकलन करना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में बाइक या स्कूटी का संतुलन बिगड़ सकता है और चालक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। अस्पताल में सिर पर गंभीर चोटों के साथ कई मरीज पहुंचते हैं, जबकि कुछ मामलों में स्पाइनल कॉर्ड में फ्रैक्चर तक की शिकायतें सामने आती हैं। इसलिए दोपहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट पहनना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बारिश के मौसम में सड़कों की खराब हालत जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है.

## गड्ढों में वाहन धंसने से रीढ़ पर सीधा असर
डॉ. सचिन गोयल स्पष्ट करते हैं कि गड्ढे में वाहन के अचानक उतरने या जोरदार उछाल आने से रीढ़ की हड्डी को भारी क्षति पहुंच सकती है। कई परिदृश्यों में रीढ़ की हड्डी टूटने यानी फ्रैक्चर होने का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है। विशेष तौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक साबित होती है, क्योंकि ढलती उम्र के साथ उनकी हड्डियां प्राकृतिक रूप से कमजोर होने लगती हैं। अक्सर बुजुर्ग परिवार के किसी सदस्य के साथ दोपहिया वाहन पर पीछे बैठे होते हैं और जलभराव के बीच गाड़ी फिसलने या तीव्र झटके के कारण नीचे गिर जाते हैं, जिससे उन्हें स्पाइनल फ्रैक्चर होने की आशंका काफी बढ़ जाती है.

## दुर्घटना के तुरंत बाद खुद को परखें
डॉ. सचिन गोयल सलाह देते हैं कि यदि आप सड़क के किसी गड्ढे के कारण दुर्घटना का शिकार हो जाएं, तो सबसे पहले मानसिक रूप से संयम रखकर अपनी स्थिति का जायजा लें। सबसे पहले यह जांचें कि क्या आपके सिर पर कोई आघात तो नहीं पहुंचा है। शरीर के अन्य हिस्सों में लगी चोटों और रक्तस्राव की स्थिति को देखें। यदि किसी अंग से अधिक खून बह रहा है, तो उसे प्राथमिक तौर पर हाथ से दबाकर रोकने का प्रयास करें। हादसे के बाद यह सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है कि आपकी कमर सुरक्षित है या नहीं तथा हाथ-पैर हिलाने में किसी तरह की असहजता या बाधा तो महसूस नहीं हो रही है.

## गंभीर चोट की स्थिति में शरीर को रखें स्थिर
डॉ. सचिन गोयल के अनुसार, यदि आपको यह आभास हो कि चोट गंभीर प्रकृति की है या कटि क्षेत्र में असहनीय पीड़ा हो रही है, तो अपनी जगह से बिल्कुल न हिलें। ऐसी दुर्घटना के बाद शरीर को अनावश्यक रूप से मोड़ने या उठने-बैठنے से बचना चाहिए। जब तक चिकित्सा सहायता या एम्बुलेंस मौके पर न पहुंचे, तब तक जमीन पर लेटे रहना ही बुद्धिमानी है। बरसात के इस मौसम में इस तरह की चोटों से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जाता है और आपातकालीन विभाग में हर रोज तीन से चार ऐसे मामले पहुंच जाते हैं.

## बारिश के दिनों में ड्राइविंग के वक्त बरतें एहतियात
डॉ. सचिन गोयल बताते हैं कि गड्ढों के खतरे से बचने के लिए वर्षा के समय वाहनों की रफ्तार धीमी रखनी चाहिए। मार्ग पर बने गड्ढे जब बारिश के पानी में छिप जाते हैं, तो उनकी गहराई का अनुमान लगाना मु मुमकिन नहीं रहता। इसलिए बाइक या कार को नियंत्रण में और कम गति पर चलाना ही सुरक्षा की गारंटी है। दोपहिया चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता जीवनरक्षा के लिहाज से सबसे अहम कदम है, जिसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए.

## तीव्र झटके से मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या
डॉ. सचिन गोयल का कहना है कि जब कोई बाइक या स्कूटी किसी गहरे गड्ढे से गुजरती है, तो शरीर को एक तेज और अचानक झटका लगता है। इस तीव्र आघात के कारण कमर की मांसपेशियों में गंभीर खिंचाव पैदा हो सकता है। कई बार इस प्रकार के मस्कुलर दर्द को पूरी तरह ठीक होने में एक महीने तक का वक्त भी लग सकता है। यदि आपको वाहन चलाते समय ऐसा कोई तेज झटका लगा है और उसके बाद भी शरीर में लगातार दर्द बना हुआ है, तो बिना देर किए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

## इसका आप पर असर
बरसात के मौसम में टूटे रास्तों और गड्ढों से वाहन चलाते समय अचानक गिरने या तेज झटका लगने पर रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों में गंभीर चोट का खतरा बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की आवाजाही और स्वास्थ्य पर पड़ता है।

- **भारत में:** वर्षा ऋतु के दौरान देश के विभिन्न शहरों में खस्ताहाल सड़कों और जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ जाती है। चालकों को सलाह दी जाती है कि वे खराब रास्तों पर अपनी गति नियंत्रित रखें और हमेशा गुणवत्तापूर्ण हेलमेट का इस्तेमाल करें।
- **फरीदाबाद में:** साहुपुरा मार्ग और पल्ला थाना क्षेत्र जैसे प्रमुख रास्तों पर बने गड्ढों के कारण स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों को रोज भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि किसी को वाहन चलाते वक्त तेज झटका लगे या कमर में लगातार दर्द बना रहे, तो तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र से संपर्क करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
सड़कों की खस्ताहाली और जलभराव के कारण वाहन चालकों को अनजाने गड्ढों का सामना करना पड़ता है, जिससे अचानक झटके लगने के मामले बढ़ जाते हैं।

- **जलभराव और दृश्यता में कमी:** बरसात के पानी से सड़कों के गड्ढे पूरी तरह छिप जाते हैं, जिसके चलते चालकों को उनकी गहराई का सही अंदाजा नहीं मिल पाता है।
- **वाहन का संतुलन बिगड़ना:** पानी से भरी सड़कों पर अचानक पहिया गड्ढे में उतरने से बाइक या स्कूटी का संतुलन बिगड़ जाता है और चालक सड़क पर गिर जाते हैं।
- **शारीरिक संवेदनशीलता:** बुजुर्गों की कमजोर हड्डियों और अचानक लगने वाले तीव्र झटकों के कारण रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे फ्रैक्चर या खिंचाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. फरीदाबाद में कौन सी मुख्य सड़कें लंबे समय से खराब हैं?
साहुपुरा रोड और पल्ला थाना रोड (पल्ला-बसंतपुर या पल्ला-सेहतपुर मुख्य मार्ग) लंबे समय से बदहाल हैं।

### 2. बरसात के मौसम में बाइक चालकों को किस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
बरसात में गड्ढे पानी से भर जाने के कारण वाहन की गति धीमी रखनी चाहिए और हमेशा हेलमेट पहनना चाहिए।

### 3. गड्ढे में वाहन गिरने से शरीर के किस हिस्से पर सबसे ज्यादा खतरा होता है?
गड्ढे में वाहन गिरने के झटके से सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने या फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है।

### 4. दुर्घटना के बाद गिरने पर सबसे पहले क्या जांचना चाहिए?
सबसे पहले यह देखें कि सिर में चोट तो नहीं लगी है, शरीर से खून तो नहीं बह रहा है और हाथ-पैर सही से हिल रहे हैं या नहीं।

### 5. कमर में तेज दर्द या गंभीर चोट लगने पर क्या करना चाहिए?
ऐसी स्थिति में खुद को स्थिर रखना चाहिए और चिकित्सा सहायता मिलने तक ज्यादा हिलने-डुलने से बचना चाहिए।

### 6. अचानक झटके लगने से मांसपेशियों पर क्या असर पड़ता है?
जोरदार झटके की वजह से कमर की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है और दर्द ठीक होने में एक महीने तक का समय लग सकता है।

### 7. फरीदाबाद के किस अस्पताल के डॉक्टर ने यह सलाह दी है?
मैरेंगो एशिया अस्पताल के न्यूरोसर्जन और डिपार्टमेंट हेड डॉ. सचिन गोयल ने यह जरूरी सावधानियां बताई हैं।

### 8. अस्पताल की इमरजेंसी में ऐसे कितने मरीज रोजाना आते हैं?
बरसात के दिनों में ऐसे मामलों से जुड़े करीब तीन से चार मरीज रोज इमरजेंसी में पहुंचते हैं।

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