# फेफड़ों की लाइलाज बीमारी पर एआई दवा का कमाल, बुढ़ापे की रफ्तार थामने का भी दावा

> इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस के इलाज के लिए तैयार की गई एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित दवा में वैज्ञानिकों ने बुढ़ापा रोकने वाले गुण भी देखे हैं। इंसिलिको मेडिसीन द्वारा विकसित इस दवा का अभी क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/phepharon-ki-lailaja-bimari-para-ai-dava-ka-kamala-burhape-ki-raphtara-thamane-ka-bhi-dava-29750 · **Language:** Hindi
**Tags:** एंटी-एंजिंग दवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंसिलिको मेडिसीन, बायोलॉजिकल एजिंग, इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस, नेचर जर्नल, एजिंग क्लॉक

स्वास्थ्य जगत में एक बेहद चौंकाने वाली खोज सामने आई है, जहां फेफड़ों की गंभीर और लाइलाज बीमारी के इलाज के लिए तैयार की गई एक खास दवा में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को थामने की क्षमता भी देखी गई है। इस दवा को पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से विकसित किया गया है। वर्तमान में यह बाजार में उपलब्ध नहीं है क्योंकि इसके परीक्षण का दौर अभी जारी है। हालांकि शुरुआती नतीजों ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है क्योंकि यह दवा शरीर की बायोलॉजिकल उम्र की रफ्तार को धीमा करने में सक्षम पाई गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस गोली के प्रभाव से शरीर के अंगों की कार्यक्षमता लंबे समय तक युवा बनी रह सकती है, जिससे साठ साल की उम्र में भी दिल और लिवर जैसी अंगों की सेहत तीस साल के युवा जैसी बरकरार रहने की उम्मीद बंधती है। इस पूरी दवा को इंसिलिको मेडिसीन नामक कंपनी ने तैयार किया है।

 

## ट्रायल और एजिंग क्लॉक के पैमाने
 इस दवा के चिकित्सीय परीक्षण से जुड़े आंकड़े प्रतिष्ठित नेचर जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दवा के शुरुआती दो चरण के ट्रायल पूरे हो चुके हैं और इनके नतीजे बेहद सकारात्मक रहे हैं। हालांकि अभी दो और चरणों के परीक्षण बाकी हैं, लेकिन शुरुआती दौर में एजिंग क्लॉक नामक एक खास टूल का उपयोग किया गया है। यह टूल किसी भी इंसान के शरीर की जैविक उम्र का आकलन करने में मदद करता है। इसमें केवल साधारण कैलेंडर वाली उम्र नहीं बल्कि शरीर के मुख्य अंगों की कोशिकाओं और टिशूज की कार्यकुशलता के आधार पर उम्र को मापा जाता है। इस पूरे अध्ययन के दौरान एजिंग क्लॉक के कुल छह अलग-अलग पैमानों की गहन जांच की गई। इन मानदंडों को तय करने में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और चीन की पीकिंग यूनिवर्सिटी ने मिलकर काम किया है।

 

## विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
 एआई ड्रग डिस्कवरी स्टार्टअप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्स जावोरोंकोव का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जैविक आयु कम मापी जाती है, तो इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि भविष्य में उसकी मृत्यु होने की संभावना काफी देर से बनती है। हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि ये नतीजे अभी बहुत शुरुआती स्तर पर हैं और इंसानों के एक बहुत बड़े समूह पर इस दवा के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया जाना अभी बाकी है। अब तक यह पूरा अध्ययन केवल बयालीस लोगों पर ही किया गया है। इस वजह से बिना व्यापक परीक्षण के इसे अंतिम सफलता नहीं माना जा सकता है।

 

## दवाओं के दोहरे इस्तेमाल पर बढ़ता शोध
 वर्तमान समय में चिकित्सा अनुसंधान का दायरा तेजी से बदल रहा है और वैज्ञानिक पुरानी दवाओं के नए और दोहरे फायदों पर बड़ा शोध कर रहे हैं। उम्र की रफ्तार को कम करने के प्रयास पहले भी होते रहे हैं, लेकिन नई एंटी-एंजिंग दवाएं बनाने के अधिकांश प्रयास अतीत में असफल साबित हुए हैं। इसके अलावा जो दवाइयां पहले से बाजार में मौजूद हैं, उनके भी लंबे समय तक पड़ने वाले प्रभावों का कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं है। लेकिन जब से मोटापे को नियंत्रित करने वाली जीएलपी-1 दवाएं चलन में आई हैं, इस पूरे सेक्टर में रिसर्च की गति अचानक तेज हो गई है। अब इन दवाओं को केवल वजन घटाने या रक्त शर्करा को नियंत्रित करने वाले माध्यम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

 बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां अब उन फॉर्मूलों पर ज्यादा जोर दे रही हैं जो एक साथ दो मोर्चों पर काम कर सकें। इंसिलिको जैसी इनोवेटिव कंपनियां अब ऐसी दवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं जो उम्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों का उपचार करने के साथ-साथ इंसान की उम्र को बढ़ाने में भी मददगार साबित हों। यह हालिया अध्ययन ट्रायल दो के परीक्षण का ही एक अहम हिस्सा है, जिसमें यह भी परखा गया कि रेंटोसर्टिब नाम की दवा इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस के मरीजों पर कितनी असरदार साबित होती है। फिलहाल चीन के भीतर फेफड़ों की इस असाध्य बीमारी के उपचार के लिए इस दवा का अंतिम चरण का क्लिनिकल ट्रायल बड़ी सावधानी से चलाया जा रहा है।

 

## लंबी और स्वस्थ जिंदगी के प्राकृतिक उपाय
 चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आधुनिक तकनीक अपनी जगह है, लेकिन प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर भी लंबी उम्र की कामना पूरी की जा सकती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के नेशनल सेंटर फॉर एजिंग के पूर्व निदेशक डॉ. प्रसून चटर्जी का कहना है कि जब विज्ञान इतनी उन्नत अवस्था में नहीं था, तब भी हमारे ऋषि मुनि सौ वर्षों से अधिक जीवित रहते थे। यदि कोई व्यक्ति कुदरती रूप से एक लंबी और स्वस्थ उम्र जीना चाहता है, तो उसे अपनी दिनचर्या में कुछ बुनियादी बदलाव करने चाहिए।

 विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ जीवन के लिए सबसे पहले भोजन की मात्रा कम करनी चाहिए और सूर्य ढलते ही अपना रात का भोजन कर लेना चाहिए। इसके अलावा नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करना बेहद जरूरी है। हर दिन कम से कम दो किलोमीटर पैदल जरूर चलना चाहिए और यदि आप युवा हैं तो रनिंग को अपनी आदत का हिस्सा बनाना चाहिए। खानपान के मामले में पुराने जमाने के लोगों की शैली अपनानी चाहिए, जिसमें मोटे अनाज, ताजी हरी सब्जियां, फल, सीड्स और ड्राई फ्रूट्स प्रचुर मात्रा में शामिल हों।

 मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए लोगों के साथ लगातार संवाद करना चाहिए और समाज में घुलमिल कर रहना चाहिए। अपने परिवार के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखना, नए दोस्त बनाना और जीवनभर नई-नई चीजें सीखते रहना मानसिक सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा मानसिक तनाव को खुद से दूर रखना चाहिए और हर दिन पर्याप्त मात्रा में नींद लेनी चाहिए ताकि शरीर को पूरी तरह से रिकवर होने का मौका मिल सके।

## इसका आप पर असर
यह नई खोज स्वास्थ्य और फार्मा सेक्टर में भविष्य के बदलावों का संकेत देती है, जो आने वाले समय में उम्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज का तरीका बदल सकती है।

- **भारत में:** देश के बुजुर्गों और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए आने वाले वर्षों में आधुनिक उपचार के नए विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

- **आम आदमी पर असर:** इस दवा के सफल ट्रायल पूरे होने के बाद भविष्य में उम्र बढ़ने की रफ्तार को नियंत्रित करने वाली थेरेपी आम लोगों की पहुंच में आ सकती है।

- **लागत और उपलब्धता:** वर्तमान में यह दवा शुरुआती परीक्षण के दौर में है, इसलिए बाजार में आने और इसकी कीमत तय होने में अभी लंबा समय लग सकता है।

- **दैनिक जीवनशैली:** विशेषज्ञ प्राकृतिक रूप से लंबी उम्र के लिए खानपान सुधारने और नियमित रूप से पैदल चलने की सलाह देते हैं जिसे तुरंत अपनाया जा सकता है।

- **शोध का दायरा:** फार्मा कंपनियों द्वारा दोहरे फायदों वाली दवाओं पर जोर दिए जाने से भविष्य की चिकित्सा प्रणालियों में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
वैज्ञानिकों द्वारा इस दवा में एंटी-एंजिंग गुण पाए जाने के पीछे मुख्य वजह एआई तकनीक का उपयोग और आधुनिक एजिंग क्लॉक टूल्स का विकास है।

- **एआई आधारित डिजाइन:** इंसिलिको मेडिसीन कंपनी ने पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके इस नई दवा को डिजाइन किया है, जो बायोलॉजिकल मार्करों को लक्षित करती है।

- **एजिंग क्लॉक का उपयोग:** अध्ययन के दौरान हार्वर्ड और पीकिंग यूनिवर्सिटी द्वारा तय किए गए छह पैमानों के जरिए कोशिकाओं की कार्यक्षमता का आकलन किया गया।

- **जीएलपी-1 दवाओं का प्रभाव:** हाल के वर्षों में वजन घटाने वाली जीएलपी-1 दवाओं की सफलता ने फार्मा सेक्टर का ध्यान दवाओं के दोहरे फायदों पर शोध करने की ओर आकर्षित किया है।

- **सीमित शुरुआती सैंपल:** यह शोध वर्तमान में केवल बयालीस लोगों पर किए गए शुरुआती परीक्षणों पर आधारित है, जिसके कारण दीर्घकालिक निष्कर्षों की पुष्टि होना अभी बाकी है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस दवा को किस कंपनी ने बनाया है?
इस दवा को इंसिलिको मेडिसीन नामक कंपनी ने पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से तैयार किया है।

### 2. यह दवा मूल रूप से किस बीमारी के लिए है?
यह दवा मूल रूप से इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस नामक फेफड़ों की लाइलाज बीमारी के इलाज के लिए बनाई गई है।

### 3. अध्ययन के नतीजे किस पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं?
इस दवा के ट्रायल से जुड़े सकारात्मक परिणाम नेचर जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।

### 4. बायोलॉजिकल उम्र मापने के लिए किसका उपयोग किया गया?
बायोलॉजिकल उम्र का अंदाजा लगाने के लिए एजिंग क्लॉक नामक टूल का उपयोग किया गया है जिसमें छह पैमानों का अध्ययन किया गया।

### 5. यह अध्ययन कितने लोगों पर किया गया है?
वर्तमान में यह अध्ययन केवल बयालीस लोगों पर ही किया गया है और इसके दीर्घकालिक असर का आकलन होना अभी बाकी है।

### 6. डॉ. प्रसून चटर्जी के अनुसार लंबी उम्र के लिए क्या जरूरी है?
लंबी उम्र के लिए कम भोजन करना, शाम को जल्दी डिनर करना, रोज पैदल चलना और तनाव से दूर रहना जरूरी बताया गया है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._