पुरुषों में पेशाब रुकने और तेज दर्द के क्या हैं कारण, जानिए डॉक्टर की अहम सलाह कम उम्र के पुरुषों में पेशाब की तेज हाजत के बावजूद यूरिन न उतरने के पीछे प्रोस्टेट सूजन, नसों की संवेदनशीलता, मांसपेशियों का खिंचाव और स्टोन मुख्य वजहें हो सकते हैं। यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार जीवनशैली में सुधार और समय पर जांच से गंभीर सर्जरी से बचा जा सकता है। कम उम्र में अगर अचानक पेशाब करने में भारी रुकावट आने लगे, पेट या कमर के निचले हिस्से में असहनीय दर्द उठे और तेज हाजत होने के बाद भी यूरिन खुलकर न आए, तो यह केवल एक सामान्य असहजता नहीं बल्कि मूत्र तंत्र से जुड़ी किसी गंभीर गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। कॉरपोरेट दफ्तरों में काम करने वाले कई युवा जो शारीरिक रूप से पूरी तरह तंदुरुस्त दिखते हैं और नियमित दिनचर्या का पालन करते हैं, वे भी इस तरह की अचानक आई शारीरिक विपत्ति के शिकार बन रहे हैं। शुरुआत में यह समस्या केवल कुछ दिनों के लिए महसूस होती है, जहां यूरिन पास करने के लिए बहुत अधिक जोर लगाना पड़ता है। बाद में कुछ दिनों तक स्थिति सामान्य लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह परेशानी भयानक रूप अख्तियार कर लेती है। बार-बार पेशाब की इच्छा महसूस होना, ब्लैडर भरा हुआ सा लगना, शरीर के एक हिस्से में तेज दर्द उठना और अंततः अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाना इस स्थिति के प्रमुख चरण हैं। पथरी के कारण यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट और सर्जरी का जोखिम अचानक पैदा होने वाले इस तरह के मूत्र अवरोध के पीछे एक बड़ा कारण यूरिनरी ट्रैक्ट यानी पेशाब की नली में पथरी का फंसना होता है। जब किडनी में बनने वाले छोटे-छोटे स्टोन नीचे खिसककर यूरेटर या लिंग की नली यानी यूरेथ्रा में आ जाते हैं, तो वे पेशाब के स्वाभाविक प्रवाह को रोक देते हैं। ऐसे स्टोन जब हिलते-डुलते हैं, तो शरीर के निचले या बाएं हिस्से में बेहद तेज दर्द पैदा करते हैं। यूरोलॉजिस्ट और एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, विशेष रूप से पांच से छह मिलीमीटर से छोटे आकार के स्टोन अत्यधिक दर्द पैदा करते हैं क्योंकि वे नली में अटकते रहते हैं। शुरुआत में ऐसी स्थिति में दवाओं के जरिए राहत पहुंचाने की कोशिश की जाती है, लेकिन यदि स्टोन का आकार कम नहीं होता या वह नली की दीवार में पूरी तरह फंस जाता है, तो मरीज को तत्काल सर्जिकल प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है। युवाओं में प्रोस्टेट इंफेक्शन और प्रोस्टेटाइटिस की समस्या आमतौर पर प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी परेशानियां 55 साल की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों में देखी जाती हैं, जिसे बीपीएच या बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया कहा जाता है। इसमें प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। हालांकि, कम उम्र के पुरुषों में होने वाली समस्या इससे पूरी तरह अलग है। युवाओं में प्रोस्टेट ग्रंथि के अंदर संक्रमण होने के चलते सूजन आ जाती है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में प्रोस्टेटाइटिस कहा जाता है। डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, यह समस्या विशेष रूप से उन लोगों में अधिक देखने को मिलती है जिन्हें लंबे समय तक पेशाब रोककर रखने की आदत होती है। काम के दबाव या यात्रा के दौरान यूरिन को होल्ड करना इस संक्रमण का बड़ा कारण बनता है। इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज भी प्रोस्टेट में संक्रमण और यूरिन रुकावट की वजह बन सकती है। मांसपेशियों का खिंचाव और ब्लैडर नेक ऑब्सट्रक्शन कई पुरुषों में शारीरिक रूप से अंगों को अत्यधिक टाइट रखने या पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों के लगातार तनाव में रहने से भी मूत्र मार्ग प्रभावित होता है। डॉ. विनीत मल्होत्रा स्पष्ट करते हैं कि जो लोग बहुत भारी वजन उठाने वाली कसरत करते हैं या कठिन शारीरिक श्रम करते हैं, उनके शरीर और प्रजनन अंगों की मांसपेशियां अत्यंत सख्त हो जाती हैं। लिंग और अंडकोष के आसपास की मांसपेशियों में अत्यधिक खिंचाव रहने से ब्लैडर नेक ऑब्सट्रक्शन की स्थिति बन जाती है। इस विकार के कारण पेशाब की थैली एक बार में पूरी तरह खाली नहीं हो पाती। ब्लैडर में यूरिन बाकी रह जाने के चलते व्यक्ति को बार-बार टॉयलेट जाने की तलब महसूस होती है। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति के प्रजनन अंगों पर कभी कोई अंदरूनी चोट लगी हो, तो वह चोट भी आगे चलकर पेशाब के मार्ग में बार-बार रुकावट खड़ी कर सकती है। संवेदनशील नसें और ब्लैडर की ओवरएक्टिविटी कुछ मामलों में मरीज के मूत्र मार्ग में किसी भी प्रकार की शारीरिक रुकावट या पथरी मौजूद नहीं होती, फिर भी उसे बार-बार तेज पेशाब आने का भ्रम होता है। इसे ब्लैडर की ओवरएक्टिविटी या ब्लैडर इनस्टेबिलिटी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति के मूत्र तंत्र से जुड़ी नसें अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। नतीजतन, जब पेशाब की थैली में बिल्कुल भी यूरिन नहीं होता या नाममात्र का तरल होता है, तब भी नसों की अति-सक्रियता के चलते दिमाग को बार-बार यह सिग्नल जाता है कि तुरंत पेशाब करना जरूरी है। मरीज को लगता है कि उसकी थैली पूरी तरह भर चुकी है, लेकिन यूरिन पास करने जाने पर कुछ भी नहीं निकलता। यह न्यूरोलॉजिकल और मस्कुलर सामंजस्य की गड़बड़ी के कारण होता है। यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर और सर्जरी की अनिवार्यता यूरिनरी समस्याओं का अधिकांश इलाज सामान्य दवाओं और तरल पदार्थों के सेवन से संभव हो जाता है, लेकिन कुछ गंभीर स्थितियों में ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प बचता है। यदि मरीज को यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर की समस्या हो गई हो, तो दवाइयां पूरी तरह बेअसर साबित होती हैं। यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर में पेशाब की नली के अंदर सिकुड़न आ जाती है या अंदरूनी चोट के कारण फाइब्रोसिस विकसित हो जाता है, जिससे नली का रास्ता बेहद संकरा हो जाता है। इसी तरह यदि कोई कड़ा स्टोन यूरेथ्रा की दीवार में धंस जाता है, तो मूत्र मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। इस ब्लॉकेज को हटाने और पेशाब की नली को दोबारा खोलने के लिए डॉक्टरों को सर्जिकल प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ता है। बचाव के उपाय और जीवनशैली में जरूरी बदलाव इस प्रकार के यूरिनरी संकट से बचने के लिए विशेषज्ञों ने खान-पान और दैनिक आदतों में सुधार करने पर विशेष जोर दिया है। हालांकि हर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता, फिर भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है। डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे बुनियादी और जरूरी नियम है। बाहर का अस्वच्छ या अत्यधिक तेल-मसाले वाला खाना खाने से परहेज करना चाहिए। अपने दैनिक आहार में नमक की मात्रा को सीमित रखना जरूरी है। इसके साथ ही रेड मीट और कृत्रिम प्रिजर्वेटिव्स वाले प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए ताकि शरीर में पथरी और संक्रमण का खतरा न्यूनतम स्तर पर रहे। इसका आप पर असर पेशाब में रुकावट और तेज दर्द को नजरअंदाज करना गुर्दे और मूत्र प्रणाली के लिए बेहद जोखिम भरा हो सकता है। • पेशाब रोकने से बचें: दफ्तर या यात्रा के दौरान यूरिन को लंबे समय तक दबाकर रखने से प्रोस्टेट ग्रंथि में संक्रमण और सूजन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नियमित अंतराल पर पेशाब पास करें ताकि बैक्टीरिया एकत्र न हों। • पर्याप्त पानी का सेवन: रोजाना भरपूर मात्रा में साफ पानी पीने से मूत्र मार्ग में बनने वाली छोटी पथरी प्राकृतिक रूप से बाहर निकल जाती है। शरीर में पानी की कमी होने पर स्टोन बनने और नली में फंसने की संभावना बढ़ जाती है। • वर्कआउट और कसरत में संतुलन: अत्यधिक वजन उठाने या हैवी कसरत करने वाले पुरुषों को पेल्विक मांसपेशियों के तनाव पर ध्यान देना चाहिए। जरूरत से ज्यादा मांसपेशियों को टाइट रखने से ब्लैडर नेक ऑब्सट्रक्शन की समस्या पैदा हो सकती है। • खान-पान में तुरंत बदलाव: अपने दैनिक भोजन में नमक की अत्यधिक मात्रा कम करें और प्रिजर्वेटिव्स युक्त प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। रेड मीट और बाहर के अस्वच्छ भोजन से परहेज करने से यूरिनरी स्टोन का खतरा घटता है। • लक्षण दिखते ही जांच: पेशाब में हल्का दर्द या रुकावट महसूस होने पर स्वयं दवाएं लेने के बजाय यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें। समय रहते स्टोन या सिकुड़न की पहचान होने पर बड़ी सर्जरी से बचा जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ युवा पुरुषों में तीव्र मूत्र अवरोध और पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या मूत्र प्रणाली के आंतरिक अंगों में रुकावट, संक्रमण या नसों की खराबी के कारण उत्पन्न होती है। • स्टोन द्वारा मार्ग का अवरोध: गुर्दे से फिसलकर नीचे आए छोटे-छोटे स्टोन यूरेटर या लिंग की नली में फंस जाते हैं। पांच से छह मिलीमीटर से कम आकार के स्टोन नली में हिलने-डुलने पर तेज चुभन और रुकावट पैदा करते हैं। • प्रोस्टेटाइटिस का संक्रमण: युवाओं में लंबे समय तक पेशाब दबाकर रखने या सेक्शुअली ट्रांसमिटेड संक्रमण के कारण प्रोस्टेट ग्रंथि में सूजन आ जाती है। सूजन से यूरिनरी पाइप संकरा हो जाता है और पेशाब रुक जाता है। • अत्यधिक मांसपेशियों का खिंचाव: भारी कसरत करने या पेल्विक अंगों को लगातार टाइट रखने से ब्लैडर नेक पर दबाव बढ़ जाता है। इससे ब्लैडर एक बार में पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। • हाइपरसेंसिटिव नसों का भ्रम: नसों की अत्यधिक संवेदनशीलता के कारण मस्तिष्क को बार-बार पेशाब की थैली भरी होने का गलत संदेश मिलता है। इसके चलते बिना यूरिन बने भी मरीज को बार-बार तेज हाजत का आभास होता रहता है। • यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर की विकृति: नली में किसी पुरानी अंदरूनी चोट या फाइब्रोसिस के कारण पेशाब का मार्ग स्थायी रूप से सिकुड़ जाता है। ऐसी स्थिति में केवल दवाइयां काम नहीं करतीं और नली को खोलने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। सवाल-जवाब 1. कम उम्र के पुरुषों में पेशाब न उतरने का क्या कारण हो सकता है? इसके मुख्य कारणों में यूरिनरी ट्रैक्ट में स्टोन का फंसना, प्रोस्टेट ग्रंथि में संक्रमण यानी प्रोस्टेटाइटिस, अत्यधिक मांसपेशियों का खिंचाव और संवेदनशील नसें शामिल हैं। 2. प्रोस्टेटाइटिस और बुजुर्गों में होने वाली बीपीएच की बीमारी में क्या अंतर है? बीपीएच 55 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने से होता है, जबकि युवाओं में प्रोस्टेटाइटिस संक्रमण और पेशाब रोकने की गलत आदत के कारण आई सूजन से होता है। 3. मूत्र मार्ग में कितने आकार का स्टोन अधिक दर्द पैदा करता है? पांच से छह मिलीमीटर से कम आकार के छोटे स्टोन नली में हिलते-डुलते रहते हैं और फंसने पर बहुत तीव्र दर्द उत्पन्न करते हैं। 4. क्या ब्लैडर में यूरिन न होने पर भी पेशाब की इच्छा हो सकती है? हां, नसों की अति-सक्रियता या ब्लैडर इनस्टेबिलिटी के कारण मस्तिष्क को गलत सिग्नल मिलते हैं, जिससे थैली खाली होने पर भी भारीपन और पेशाब की इच्छा महसूस होती है। 5. यूरिनरी रुकावट के किन मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है? जब स्टोन पेशाब की नली में गहराई से फंस जाए या यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर के कारण नली सिकुड़ जाए, तब दवाओं के बेअसर होने पर सर्जरी अनिवार्य हो जाती है। 6. इस तरह की मूत्र समस्याओं से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, पेशाब को देर तक न रोकें, नमक कम खाएं, बाहर का तला-भुना भोजन छोड़ें और रेड मीट व प्रिजर्वेटिव्स वाले आहार से परहेज करें। https://trendkia.com/health/purushon-men-peshaba-rukane-aura-teja-darda-ke-kya-hain-karana-janie-doktara-ki-ahama-salaha-55840 TrendKia — Har trend, sabse pehle.