# पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की जांच को लेकर भारी लापरवाही, राष्ट्रीय अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली स्थिति

> देश में 45 वर्ष से अधिक उम्र के 84 प्रतिशत पुरुष या तो प्रोस्टेट कैंसर की जांच से पूरी तरह दूर हैं या उन्हें अपनी जांच स्थिति की जानकारी ही नहीं है। नए राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार जोखिम कारकों को लेकर भी गंभीर अज्ञानता बनी हुई है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/purushon-men-prostate-cancer-ki-jancha-ko-lekara-bhari-laparavahi-rashtriya-adhyayana-men-samane-ai-chaunkane-vali-sthiti-48417 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रोस्टेट कैंसर, स्वास्थ्य जांच, पीएसए टेस्ट, डॉ देवव्रत आर्या, पुरुष स्वास्थ्य, कैंसर स्क्रीनिंग

देशभर में कैंसर के मामले लगातार पैर पसार रहे हैं, लेकिन पुरुषों से जुड़े प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता की स्थिति बेहद निराशाजनक बनी हुई है। उम्रदराज पुरुषों में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है, फिर भी बड़ी आबादी को यह तक मालूम नहीं है कि उन्होंने कभी इसकी जांच कराई भी है या नहीं। हील फाउंडेशन और साइजेन ग्लोबल इनसाइट्स एंड कंसल्टिंग द्वारा किए गए एक व्यापक राष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई है कि स्क्रीनिंग और समय पर पहचान के अभाव में यह बीमारी लगातार गंभीर रूप लेती जा रही है।

## जांच स्थिति को लेकर अनिश्चितता और उपेक्षा
इस अध्ययन में दिल्ली एनसीआर, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के 45 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 1,036 पुरुषों को शामिल किया गया था। इसमें हिस्सा लेने वाले 84 प्रतिशत पुरुष या तो ऐसे थे जिनकी कभी जांच नहीं हुई, या वे अपनी जांच स्थिति को लेकर पूरी तरह अनिश्चित थे, अथवा उन्हें लगता था कि जांच की कोई आवश्यकता ही नहीं है। अध्ययन में शामिल 10 में से 6 पुरुषों (लगभग 60.8 प्रतिशत) को यह भी नहीं पता था कि उनके जीवन में कभी प्रोस्टेट स्वास्थ्य का कोई परीक्षण हुआ है या नहीं। केवल छह में से लगभग एक पुरुष ने ही यह पुष्टि की कि उसने कभी स्क्रीनिंग कराई है।

यह स्थिति तब है जब सर्वेक्षण में शामिल लगभग दो-तिहाई पुरुषों ने बताया कि वे हर साल सामान्य स्वास्थ्य जांच अवश्य करवाते हैं। नियमित मेडिकल चेकअप कराने के बावजूद प्रोस्टेट स्वास्थ्य पर बात न होना यह दर्शाता है कि प्राथमिक जांच के दौरान यह महत्वपूर्ण विषय छूट जाता है। जब तक स्क्रीनिंग की दरें नहीं सुधरेंगी, तब तक समय रहते इस कैंसर की पहचान और कारगर इलाज सुनिश्चित करना असंभव बना रहेगा।

## जोखिम कारकों और सही उम्र की समझ में भारी कमी
अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि 68.9 प्रतिशत पुरुष प्रोस्टेट कैंसर से जुड़े किसी भी जोखिम कारक का नाम तक नहीं बता सके। केवल 13.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने यह पहचाना कि पारिवारिक इतिहास या जेनेटिक्स इस बीमारी का एक प्रमुख जोखिम कारक हो सकता है। अधिकांश पुरुषों को इस बात की तनिक भी जानकारी नहीं है कि परिवार में यदि किसी को यह बीमारी रही हो, तो उन्हें अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।

इसके अतिरिक्त, लगभग 75 प्रतिशत प्रतिभागियों का यह मानना था कि प्रोस्टेट कैंसर की नियमित निगरानी केवल 50 वर्ष की आयु या उसके बाद ही शुरू होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि 45 वर्ष की आयु पार करते ही पुरुषों को अपने व्यक्तिगत जोखिम का आकलन शुरू कर देना चाहिए। जोखिम कारकों के प्रति यह अनभिज्ञता मरीजों को अंतिम चरण में अस्पताल पहुंचाती है, जिससे समय पर बचाव के अवसर हाथ से निकल जाते हैं।

## डॉ देवव्रत आर्या की राय और विशेषज्ञ सलाह
मैक्स हेल्थकेयर, दिल्ली में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के वाइस प्रेसिडेंट डॉ देवव्रत आर्या ने इन नतीजों पर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, "जोखिम, जांच और डॉक्टर से कब बात करनी चाहिए, इसके बारे में जागरूकता सूचित, व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल संबंधी निर्णयों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहला कदम है।"

डॉ देवव्रत आर्या का कहना है कि जब 10 में से लगभग 7 पुरुष एक भी खतरे की पहचान नहीं कर पाते और 10 में से 6 को अपनी जांच स्थिति का भान नहीं होता, तो यह साफ है कि 45 साल से अधिक उम्र के पुरुषों के लिए प्रोस्टेट स्वास्थ्य को दैनिक चिकित्सकीय बातचीत का अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने जोर दिया कि लोगों को जोखिम और जांच की प्रक्रिया समझाने के लिए अभी बड़े पैमाने पर काम करने की आवश्यकता है, ताकि व्यक्तिगत स्वास्थ्य फैसले सही समय पर लिए जा सकें।

## पीएसए रक्त जांच और विशेषज्ञ चयन पर उलझन
प्रोस्टेट कैंसर की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले पीएसए (प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन) रक्त परीक्षण को लेकर भी बेहद कम समझ देखने को मिली। अध्ययन में शामिल पुरुषों में से केवल 31 प्रतिशत ने ही पीएसए टेस्ट के बारे में सुना था। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह रही कि सिर्फ 14 प्रतिशत पुरुषों ने कभी स्वेच्छा से डॉक्टर से इस विशेष रक्त परीक्षण की मांग की थी।

चिकित्सकों पर भरोसा होने के बावजूद सही विशेषज्ञ तक पहुंचने में भी असमंजस नजर आया। करीब 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे किसी भी सलाह के लिए डॉक्टरों पर सर्वाधिक भरोसा करते हैं, लेकिन केवल 36 प्रतिशत पुरुष ही यह सही पहचान कर सके कि प्रोस्टेट कैंसर के निदान और उपचार के लिए यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग विशेषज्ञ) उपयुक्त विशेषज्ञ होते हैं। दूसरी ओर, 44 प्रतिशत प्रतिभागियों ने यह इच्छा जताई कि वे कोई भी उपचार शुरू करने से पहले दूसरी चिकित्सीय राय (सेकंड ओपिनियन) लेना चाहेंगे, जिससे साफ होता है कि वे सही निर्णय तो लेना चाहते हैं, पर इलाज की पूरी प्रक्रिया की समझ उनमें अधूरी है।

## संकोच की दीवार और डिजिटल माध्यमों पर निर्भरता
अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि हमारे समाज में प्रोस्टेट स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना अब भी पुरुषों के लिए एक बड़ी झिझक का विषय है। राष्ट्रीय स्तर पर 59.5 प्रतिशत पुरुषों ने स्वीकार किया कि वे डॉक्टर के साथ प्रोस्टेट स्क्रीनिंग या इसके उपचार के बारे में बात करने में असहज महसूस करते हैं। केवल 18 प्रतिशत पुरुष ऐसे थे जिन्होंने कहा कि वे खुद आगे बढ़कर डॉक्टर से इस विषय पर चर्चा शुरू कर सकते हैं।

इस झिझक के बीच लोग जानकारी जुटाने के लिए इंटरनेट का सहारा ले रहे हैं। अध्ययन के अनुसार 84 प्रतिशत पुरुष स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों के लिए ऑनलाइन खोज करते हैं। वहीं 48 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि परिवार या दोस्तों के साथ हुई बातचीत ने प्रोस्टेट कैंसर के बारे में उनकी पहली समझ को प्रभावित किया। हालांकि केवल ऑनलाइन जानकारी या घरेलू चर्चाएं चिकित्सकीय जांच का विकल्प नहीं बन सकतीं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पुरुष संकोच छोड़कर अपने डॉक्टरों से सीधे सवाल नहीं पूछेंगे, तब तक इस बीमारी की रोकथाम और शुरुआती पहचान एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

## इसका आप पर असर
यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि 45 की उम्र पार कर चुके पुरुषों को अपने वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण में प्रोस्टेट स्क्रीनिंग को प्राथमिकता से शामिल कराना चाहिए।

- **भारत भर में:** 45 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को अपने वार्षिक हेल्थ चेकअप में डॉक्टर से पीएसए टेस्ट के बारे में अनिवार्य रूप से पूछना चाहिए। शुरुआती पहचान से जटिल सर्जरी और कैंसर के गंभीर चरणों से प्रभावी ढंग से बचा जा सकता है।
- **जांच केंद्रों और क्लीनिकों में:** यदि आपके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास रहा है, तो 45 वर्ष की उम्र से ही यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें। नियमित परामर्श से व्यक्तिगत जोखिम का सटीक आकलन संभव हो जाता है।
- **संकोच छोड़कर संवाद:** डॉक्टर से मिलते समय प्रोस्टेट स्वास्थ्य से जुड़े लक्षणों पर खुलकर बात करने की आदत डालें। झिझक दूर करने से समय पर सटीक चिकित्सीय मार्गदर्शन और उपचार मिल सकता है।
- **जांच रिपोर्ट की समीक्षा:** रूटीन चेकअप के दौरान यह सुनिश्चित करें कि आपके ब्लड टेस्ट पैनल में प्रोस्टेट परीक्षण शामिल है या नहीं। लैब रिपोर्ट मिलने पर हमेशा यूरोलॉजिस्ट से रिपोर्ट की पुष्टि करवाएं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राष्ट्रीय सर्वेक्षण हील फाउंडेशन और साइजेन ग्लोबल इनसाइट्स एंड कंसल्टिंग द्वारा इसलिए आयोजित किया गया ताकि भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की जांच, जोखिम समझ और चिकित्सकीय संवाद की जमीनी हकीकत का पता लगाया जा सके। अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि सामान्य स्वास्थ्य जांच कराने वाले पुरुष भी प्रोस्टेट स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रूप से अनजान हैं।

- **जांच से बाहर रहना:** लगभग दो-तिहाई पुरुष वार्षिक चेकअप कराते हैं, लेकिन इन जांच पैकेजों में प्रोस्टेट स्क्रीनिंग या पीएसए टेस्ट को नियमित रूप से शामिल नहीं किया जाता। इसी कारण 84 प्रतिशत पुरुष या तो जांच से वंचित हैं या अपनी स्थिति से अनजान हैं।
- **जोखिम कारकों की अनभिज्ञता:** अध्ययन में शामिल 68.9 प्रतिशत पुरुष प्रोस्टेट कैंसर के किसी भी जोखिम कारक से परिचित नहीं थे और केवल 13.2 प्रतिशत को पारिवारिक इतिहास के प्रभाव का पता था। इस बुनियादी जानकारी के अभाव में लोग समय रहते परीक्षण कराने की जरूरत महसूस नहीं करते।
- **उम्र संबंधी भ्रांतियां:** करीब 75 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना था कि प्रोस्टेट की निगरानी 50 साल के बाद ही शुरू होनी चाहिए, जिससे 45 से 50 वर्ष के बीच के संवेदनशील समय में जांच छूट जाती है।
- **सामाजिक संकोच:** लगभग 59.5 प्रतिशत पुरुष डॉक्टर के साथ प्रोस्टेट पर बात करने में असहज महसूस करते हैं और सिर्फ 18 प्रतिशत ही खुद चर्चा शुरू करते हैं। इस संकोच के चलते बीमारी का पता केवल अंतिम चरणों में ही चल पाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रोस्टेट कैंसर सर्वेक्षण में कितने पुरुषों को शामिल किया गया था?
इस सर्वेक्षण में दिल्ली एनसीआर, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के 45 वर्ष और उससे अधिक उम्र के कुल 1,036 पुरुषों को शामिल किया गया था।

### 2. सर्वेक्षण के अनुसार कितने पुरुष अपनी जांच स्थिति से अनजान हैं?
सर्वेक्षण में पाया गया कि 60.8 प्रतिशत पुरुषों को यह नहीं पता था कि उनकी कभी प्रोस्टेट जांच हुई है या नहीं, जबकि कुल 84 प्रतिशत या तो जांच से वंचित थे, अनिश्चित थे या इसे जरूरी नहीं मानते थे।

### 3. पीएसए (PSA) टेस्ट क्या है और कितने लोग इसके बारे में जानते हैं?
पीएसए एक रक्त परीक्षण है जो प्रोस्टेट स्वास्थ्य की जांच के लिए किया जाता है। सर्वेक्षण में केवल 31 प्रतिशत पुरुषों ने इसके बारे में सुना था और सिर्फ 14 प्रतिशत ने कभी इसकी मांग की थी।

### 4. प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए कौन सा विशेषज्ञ सही माना जाता है?
प्रोस्टेट कैंसर और इससे जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग विशेषज्ञ) सही विशेषज्ञ होते हैं, हालांकि केवल 36 प्रतिशत प्रतिभागी ही इनकी सही पहचान कर सके।

### 5. क्या पारिवारिक इतिहास प्रोस्टेट कैंसर का एक जोखिम कारक है?
हां, पारिवारिक इतिहास इसका एक प्रमुख जोखिम कारक है, लेकिन सर्वेक्षण में केवल 13.2 प्रतिशत पुरुष ही इस खतरे को पहचान पाए।

### 6. डॉक्टर से प्रोस्टेट स्वास्थ्य पर बात करने में कितने पुरुष असहज महसूस करते हैं?
राष्ट्रीय स्तर पर 59.5 प्रतिशत पुरुषों ने माना कि वे डॉक्टर से प्रोस्टेट जांच या उपचार पर बात करने में असहज महसूस करते हैं।

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