# क्यूडेंगा टीका भारत में 2027 तक देगा दस्तक, चारों सीरोटाइप से मिलेगी सुरक्षा

> जापानी दवा निर्माता टाकेडा और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज की साझेदारी के तहत भारत में 2027 तक क्यूडेंगा डेंगू टीका उपलब्ध कराने की तैयारी है, जिसे सीडीएससीओ की मंजूरी मिल चुकी है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/qdenga-tika-bharata-men-2027-taka-dega-dastaka-charon-sirotaipa-se-milegi-suraksha-33728 · **Language:** Hindi
**Tags:** डेंगू वैक्सीन, क्यूडेंगा, सीडीएससीओ, डॉ रेड्डीज, टाकेडा, डेंगू उपचार, स्वास्थ्य समाचार

बरसात के दिनों में देश भर के अस्पतालों में मच्छरों से फैलने वाले बुखार के मरीजों की संख्या में भारी उछाल आता है। एडीज मच्छर के जरिए फैलने वाला यह संक्रमण हर साल लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले लेता है और कई बार जानलेवा साबित होता है। इस गंभीर मौसमी संकट से निपटने के लिए भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। देश में वर्ष 2027 तक क्यूडेंगा नाम का टीका बाजार में उतारने की दिशा में काम तेजी से चल रहा है। जापान की प्रसिद्ध फार्मा कंपनी टाकेडा और भारत की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने इसके वितरण और उपलब्धता के लिए एक अहम समझौता किया है। भारतीय औषधि महानियंत्रक यानी सीडीएससीओ पहले ही इस टीके के उपयोग को अपनी हरी झंडी दे चुका है।

## मच्छर जनित संक्रमण की जटिलता और खतरे
यह संक्रमण सामान्य वायरल बुखार की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक माना जाता है। शरीर में प्रवेश करने के बाद यह तेजी से रक्त की प्लेटलेट्स को घटाने लगता है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव का गंभीर जोखिम पैदा हो जाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के रजिस्टर्ड आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी आबादी इससे प्रभावित होती है। बारिश का मौसम खत्म होते ही इसके मामलों में अचानक तेजी दर्ज की जाती है।

इस फैलाव की मुख्य वजह यह है कि इसका वाहक मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में अपने अंडे देता है। घरों की छतों पर खुला पड़ा कबाड़, गमलों के नीचे रखी तश्तरियां और बंद पड़े कूलरों में जमा पानी इनके पनपने के सबसे मुफीद ठिकाने बन जाते हैं। इस मच्छर की सबसे बड़ी चुनौती इसका दिन के समय सक्रिय होना है। आमतौर पर लोग रात में सोने के दौरान मच्छरदानी, अगरबत्ती या कॉइल जैसी चीजों से बचाव कर लेते हैं, लेकिन दिन की व्यस्त दिनचर्या में इनसे बचना बेहद कठिन हो जाता है। पिछले कुछ सालों के दौरान कई राज्यों में संक्रमण के नए रिकॉर्ड बने हैं, जिससे एक प्रभावी सुरक्षा कवच की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

## चारों स्ट्रेन पर प्रभावी प्रतिरक्षा तंत्र
वैश्विक स्तर पर विकसित गिने-चुने टीकों में क्यूडेंगा को काफी उन्नत माना गया है। इसकी सबसे प्रमुख खूबी यह है कि यह डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप्स, यानी डीईएनवी-1, डीईएनवी-2, डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4 के विरुद्ध एक साथ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार डेंगू किसी एक वायरस से नहीं बल्कि चार अलग-अलग स्वरूपों से फैलता है। अगर किसी व्यक्ति को जीवन में एक बार यह संक्रमण हो चुका हो, तो भविष्य में किसी दूसरे स्ट्रेन का हमला पहले से कहीं अधिक घातक और जानलेवा साबित हो सकता है।

यह टीका मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को पहले से ही प्रशिक्षित कर देता है। इसके निर्माण में वायरस के बेहद कमजोर रूप का उपयोग किया गया है। जब यह खुराक दी जाती है, तो शरीर का सुरक्षा तंत्र इसके प्रति एंटीबॉडीज तैयार कर लेता है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि अगर कभी असली और सक्रिय वायरस शरीर में पहुंचता है, तो प्रतिरोधक कोशिकाएं बिना समय गंवाए तुरंत सक्रिय होकर उसे निष्प्रभावी कर देती हैं।

## खुराक का नियम और व्यापक पात्रता
इस टीके की पूरी प्रक्रिया दो खुराकों पर आधारित है। पहली खुराक दिए जाने के ठीक तीन महीने बाद दूसरी खुराक लगाई जाती है। नियामक प्राधिकरण ने इसे 4 वर्ष के बच्चों से लेकर 60 वर्ष तक के वयस्कों के लिए उपयुक्त माना है। इस टीके की एक और असाधारण विशेषता इसकी सार्वभौमिक पात्रता है। पहले विकसित हुए कुछ टीकों के साथ यह बाध्यता थी कि व्यक्ति को अतीत में संक्रमण हुआ था या नहीं, इसकी जांच करानी पड़ती थी। इसके विपरीत, क्यूडेंगा उन लोगों को भी सुरक्षित रूप से दिया जा सकता है जो पहले कभी इस वायरस की चपेट में नहीं आए हैं।

## सतर्कता और स्वच्छता अब भी अनिवार्य
चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि टीका उपलब्ध होने के बावजूद व्यक्तिगत और सामूहिक स्वच्छता से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं। टीका एक बेहद मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार करेगा, लेकिन मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाना बुनियादी जरूरत बना रहेगा। इसके लिए बुनियादी सावधानियों का पालन निरंतर जरूरी रहेगा

- आस-पड़ोस और घर के आंगन में किसी भी प्रकार का जलभराव न होने दिया जाए।
- कूलर, पानी की टंकियों और बगीचे के गमलों की नियमित अंतराल पर सफाई की जाए।
- दिन और रात दोनों वक्त पूरे आस्तीन के कपड़े, मच्छरदानी और त्वचा पर लगाने वाले रिपेलेंट का उपयोग किया जाए।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में हर साल इसके सबसे ज्यादा मरीज देखने को मिलते हैं। पोलियो और हेपेटाइटिस के खिलाफ चलाए गए सफल टीकाकरण अभियानों की तरह ही विशेषज्ञों को भरोसा है कि क्यूडेंगा के आने से आने वाले वर्षों में अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों की तादाद में भारी गिरावट आएगी।

## इसका आप पर असर
भारत में वर्ष 2027 से शुरू होने वाले इस टीकाकरण से मौसमी बुखार के कारण हर साल होने वाली गंभीर बीमारियों और अस्पतालों में भर्ती होने के मामलों में भारी कमी आने की संभावना है।

- **आम जनता के लिए:** यह टीका 4 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों को डेंगू के चारों स्ट्रेन से बचाव प्रदान करेगा। लोगों को अस्पताल में भर्ती होने और प्लेटलेट्स में भारी गिरावट जैसे जानलेवा खतरों से बड़ी राहत मिल सकेगी।
- **बिना पूर्व जांच के सुविधा:** इस टीके को लगवाने से पहले यह जांचने की आवश्यकता नहीं होगी कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं। इससे आम नागरिक सीधे डॉक्टर की सलाह से यह टीका लगवा सकेंगे।
- **दो खुराकों का चक्र:** टीके का संपूर्ण प्रभाव हासिल करने के लिए तीन महीने के अंतर पर दो खुराकें लेनी होंगी। समय पर दोनों खुराकें पूरी करने से शरीर में लंबे समय तक रहने वाली एंटीबॉडीज विकसित हो सकेंगी।
- **सावधानियों की निरंतरता:** टीका लगने के बावजूद घर के आसपास साफ पानी जमा होने से रोकना और मच्छरदानी का उपयोग अनिवार्य रहेगा। व्यक्तिगत स्वच्छता और जागरूकता ही इस संक्रमण को पूरी तरह फैलने से रोक सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
भारत में मानसून के तुरंत बाद डेंगू के मामलों में अत्यधिक वृद्धि और बार-बार होने वाले घातक संक्रमणों के चलते एक प्रभावी वैक्सीन की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

- **चार अलग-अलग स्ट्रेन की मौजूदगी:** डेंगू वायरस चार अलग-अलग सीरोटाइप्स में पाया जाता है, जिसके कारण एक बार संक्रमित होने के बाद दोबारा होने वाला संक्रमण अधिक घातक साबित होता है। इसलिए चारों स्ट्रेन को निष्क्रिय करने वाले टीके का विकास अनिवार्य था।
- **दिन में सक्रिय रहने वाले मच्छर:** इसका वाहक एडीज मच्छर दिन के समय काटता है, जिससे रात में इस्तेमाल होने वाले कॉइल या मच्छरदानी के जरिए बचाव पूरी तरह कारगर नहीं हो पाता था। इस व्यावहारिक कठिनाई ने जैविक सुरक्षा की मांग को बढ़ा दिया।
- **घरेलू परिवेश में प्रजनन:** यह मच्छर छतों पर जमा पानी, कूलर और गमलों में आसानी से पनपता है, जिससे घनी आबादी वाले शहरों में संक्रमण तेजी से फैल जाता है। रोकथाम के सीमित उपायों के चलते टीकों को अंतिम समाधान के रूप में देखा गया।
- **नियामक मंजूरी और सहयोग:** भारतीय नियामक सीडीएससीओ से मंजूरी मिलने के बाद जापानी कंपनी टाकेडा और डॉ. रेड्डीज के बीच समझौता हुआ, जिसने इसके 2027 तक बाजार में आने का रास्ता साफ किया।

## सवाल-जवाब

### 1. क्यूडेंगा टीका भारत में कब तक उपलब्ध होगा?
यह टीका वर्ष 2027 तक भारतीय बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है।

### 2. इस टीके को किस भारतीय नियामक संस्था से मंजूरी मिली है?
इस टीके को भारत के औषधि नियामक सीडीएससीओ से मंजूरी प्राप्त हो चुकी है।

### 3. क्यूडेंगा टीका किन दो दवा कंपनियों की साझेदारी से लाया जा रहा है?
इसे जापान की टाकेडा और भारत की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के आपसी समझौते के तहत लाया जा रहा है।

### 4. यह टीका डेंगू के कितने प्रकार के वायरस से सुरक्षा प्रदान करता है?
यह टीका डेंगू वायरस के चारों प्रमुख प्रकारों डीईएनवी-1, डीईएनवी-2, डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4 के खिलाफ सुरक्षा देता है।

### 5. इस टीके की कितनी खुराकें दी जाएंगी और उनके बीच कितना अंतर होगा?
यह दो खुराक वाला टीका है, जिसमें पहली खुराक के तीन महीने बाद दूसरी खुराक दी जाती है।

### 6. यह टीका किस आयु वर्ग के लोगों के लिए स्वीकृत किया गया है?
इस टीके को 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है।

### 7. क्या पहले कभी डेंगू न होने वाले व्यक्ति भी यह टीका लगवा सकते हैं?
हां, यह टीका उन लोगों को भी लगाया जा सकता है जिन्हें पहले कभी डेंगू का संक्रमण नहीं हुआ है।

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