# रास्तों के किनारे उगने वाला अपामार्ग छिपाए है कई औषधीय गुण, वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र ने दी सही इस्तेमाल की सलाह

> सड़क किनारे सामान्य खरपतवार समझा जाने वाला अपामार्ग यानी लहचिचरा पारंपरिक चिकित्सा में खास स्थान रखता है, लेकिन बिना विशेषज्ञ परामर्श इसका प्रयोग जोखिम भरा हो सकता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/raston-ke-kinare-ugane-vala-apamarga-chhipae-hai-kai-aushadhiya-guna-vaidya-dr-abhishek-kumar-mishra-ne-di-sahi-istemala-ki-salaha-54538 · **Language:** Hindi
**Tags:** अपामार्ग, लहचिचरा, आयुर्वेद, घरेलू उपचार, पारंपरिक चिकित्सा, स्वास्थ्य सावधानियां, औषधीय पौधे

अक्सर रास्तों के किनारों, खुले मैदानों और खेतों की मेड़ों पर उगने वाली वनस्पतियों को लोग बेकार खरपतवार मानकर उखाड़ फेंकते हैं। इन्हीं में एक ऐसा पौधा भी शामिल है जिसे ग्रामीण इलाकों में लहचिचरा और आयुर्वेद में अपामार्ग के नाम से जाना जाता है। लोक परंपराओं और प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति में इस साधारण से दिखने वाले पौधे को विभिन्न शारीरिक समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि इसके पारंपरिक महत्व के बावजूद इसके उपयोग को लेकर पूरी सावधानी बरतना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।

## पौधे के विभिन्न अंगों का पारंपरिक उपयोग और पहचान
वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र के अनुसार, अपामार्ग के विभिन्न हिस्से जैसे जड़, पत्तियां और तना पारंपरिक नुस्खों में अलग-अलग ढंग से उपयोग में लाए जाते रहे हैं। इस पौधे की एक विशेष शारीरिक संरचना यह होती है कि इसमें फूल और फल एक साथ दिखाई देते हैं। पुराने जमाने में कई क्षेत्रों में इसके बीजों का प्रयोग आहार के रूप में भी किया जाता था। लोक मान्यताओं में यह दावा किया जाता रहा है कि इसके बीज पाचन क्रिया को धीमा कर लंबे समय तक भूख का अहसास नहीं होने देते, यद्यपि इस तरह के दावों की आधुनिक वैज्ञानिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है। किसी भी तरह के प्रयोग से पूर्व पौधे की प्रामाणिक पहचान सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होता है।

## मुख स्वास्थ्य और दातुन की परंपरा
पारंपरिक दिनचर्या में लहचिचरा की टहनियों को दातुन की तरह इस्तेमाल करने का पुराना चलन रहा है। वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र बताते हैं कि लोक विश्वास के आधार पर लोग दांतों को साफ रखने तथा मसूड़ों की हल्की तकलीफों से बचाव के लिए इसकी दातुन करते आए हैं। इसके बावजूद यदि किसी व्यक्ति को मसूड़ों से खून आने, तेज दांत दर्द अथवा पायरिया जैसी गंभीर शिकायत हो, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य दंत चिकित्सक से विधिवत परीक्षण कराना अनिवार्य है।

## पथरी, पाचन और वजन नियंत्रण से जुड़ी मान्यताएं
पारंपरिक चिकित्सा की विविध पद्धतियों में लहचिचरा का उल्लेख पेट संबंधी विकारों और गुर्दे की पथरी जैसी तकलीफों में भी मिलता है। कुछ घरेलू उपचारों में इसे वजन घटाने के सहायक साधन के तौर पर भी आजमाया जाता रहा है। इसके साथ ही प्राचीन समय में जब आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सुलभ नहीं थीं, तब बिच्छू के डंक मारने पर इसकी जड़ का लेप लगाने का प्रचलन भी देखा जाता था। वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र स्पष्ट करते हैं कि बिच्छू के दंश जैसी आपात स्थिति में घरेलू उपचारों के सहारे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि बिना समय गंवाए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर तत्काल चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करना चाहिए। साथ ही, वजन नियंत्रण और पथरी संबंधी इन पारंपरिक प्रयोगों के पक्ष में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

## किन लोगों को रखनी चाहिए विशेष सावधानी
यद्यपि लहचिचरा एक जाना-पहचाना औषधीय पौधा है, परंतु इसका अनियंत्रित अथवा बिना सोचे-समझे किया गया सेवन शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है। गर्भवती महिलाओं को इस पौधे के किसी भी अंग के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त छोटे बच्चों, वृद्धजनों और पहले से किसी पुरानी बीमारी का इलाज करा रहे व्यक्तियों को इसका प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य या चिकित्सक की राय अवश्य लेनी चाहिए। इस पौधे से जुड़े कई लाभ केवल पारंपरिक मान्यताओं पर टिके हैं, इसलिए इसे किसी प्रमाणित दवा का विकल्प मानकर बिना चिकित्सीय परामर्श ग्रहण नहीं करना चाहिए।

## इसका आप पर असर
सड़क किनारे उगने वाले इस पौधे को बिना चिकित्सीय परामर्श के दवा समझने की भूल न करें।

- **आम लोगों के लिए:** किसी भी जंगली पौधे को घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल करने से पहले उसकी सही पहचान और चिकित्सक की सलाह जरूरी है। बिना पुष्टि किए इसके बीज या जड़ का सेवन करने से पाचन संबंधी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
- **गर्भवती महिलाओं के लिए:** पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार लहचिचरा का सेवन गर्भवती महिलाओं के लिए वर्जित और जोखिम भरा बताया गया है। गर्भावस्था के दौरान इसके किसी भी हिस्से का सेवन करने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
- **दांतों की समस्या से पीड़ितों के लिए:** मसूड़ों से खून आने या पायरिया में केवल अपामार्ग की दातुन के भरोसे न रहें। तुरंत दंत चिकित्सक के पास जाकर सही जांच और उचित इलाज कराना जरूरी है।
- **आपातकालीन स्थिति में:** बिच्छू के डंक जैसी स्थितियों में घरेलू उपचार के चक्कर में समय नष्ट न करें। मरीज को बिना देर किए तत्काल निकटतम अस्पताल या डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
अपामार्ग के पौधे को औषधीय माने जाने के पीछे प्राचीन भारतीय चिकित्सा परंपराएं और स्थानीय लोक ज्ञान का लंबा इतिहास रहा है।

- **पारंपरिक चिकित्सा का आधार:** पुराने समय में आधुनिक दवाओं की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीण समाज आसपास उगने वाली वनस्पतियों पर निर्भर रहता था। उसी अनुभवजन्य ज्ञान के चलते अपामार्ग की जड़, तने और पत्तियों का इस्तेमाल विभिन्न व्याधियों के लिए शुरू हुआ।
- **विशेष वानस्पतिक लक्षण:** इस पौधे में फल और फूल एक साथ आने की अनोखी विशेषता पाई जाती है, जिसके कारण प्राचीन वैद्यों का ध्यान इसके बीजों और अन्य अंगों के अध्ययन की ओर आकर्षित हुआ।
- **वैज्ञानिक प्रमाणों का अभाव:** आधुनिक समय में कई घरेलू दावों जैसे वजन घटाने या पथरी के उपचार की पर्याप्त वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी कारण विशेषज्ञ इसे आंख मूंदकर इस्तेमाल करने के बजाय वैज्ञानिक जांच और सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अपामार्ग या लहचिचरा का पौधा आमतौर पर कहां पाया जाता है?
यह पौधा मुख्य रूप से खेतों की मेड़ों, खाली पड़ी जमीनों और रास्तों के किनारे प्राकृतिक रूप से उगता हुआ मिल जाता है।

### 2. इस पौधे के कौन से हिस्से पारंपरिक उपचार में उपयोग किए जाते हैं?
पारंपरिक चिकित्सा में अपामार्ग की जड़, पत्तियां और तने का उपयोग विभिन्न आवश्यकताओं के लिए किया जाता रहा है।

### 3. क्या अपामार्ग के बीजों को लेकर किए गए दावों की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है?
नहीं, पाचन और लंबे समय तक पेट भरा रखने से जुड़े इसके बीजों के पारंपरिक दावों की पर्याप्त वैज्ञानिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है।

### 4. दांतों की सफाई के लिए इसका उपयोग कैसे किया जाता है?
परंपरागत रूप से इसकी टहनियों का उपयोग दातुन के तौर पर दांत साफ करने और मसूड़ों की समस्याओं में राहत के लिए किया जाता रहा है।

### 5. किन लोगों को लहचिचरा के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, जबकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को बिना विशेषज्ञ सलाह इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

### 6. बिच्छू के डंक मारने पर क्या इस पौधे की जड़ का प्रयोग सुरक्षित है?
बिच्छू के डंक पर घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सकीय सहायता दिलानी चाहिए।

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