रात में बच्चों के पैरों में दर्द की वजह थकान या ग्रोइंग पेन, इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलें शाम ढलते ही अक्सर बढ़ते बच्चे पैरों में तेज खिंचाव या दर्द की शिकायत करते हैं, जिसके पीछे मांसपेशियों की थकावट या विकास संबंधी बदलाव हो सकते हैं। कुछ गंभीर संकेतों पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है। बचपन में दिनभर उछलकूद और लगातार भागदौड़ के बाद कई बच्चे बिस्तर पर जाते ही पैरों में भारी दर्द की शिकायत करने लगते हैं। यह स्थिति अक्सर 6 से 11 या 12 साल के बालकों में सामने आती है, जब वे रोते हुए अपने पैरों को दबाने की गुहार लगाते हैं। अभिभावक कई बार इसे मामूली नखरा समझकर टाल देते हैं, जबकि इसके पीछे शरीर की स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रियाएं काम कर रही होती हैं। इस समस्या के बुनियादी कारणों में अत्यधिक शारीरिक मेहनत के चलते मांसपेशियों का थक जाना शामिल है, जबकि कुछ मामलों में यह ग्रोइंग पेन का रूप ले लेता है। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर एवं सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रितिश सिंह ने इस तरह के दर्द के स्वरूप और उससे जुड़े अहम पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला है। थकान और ग्रोइंग पेन के बीच का बुनियादी अंतर बच्चों में देर शाम या रात के समय उठने वाले दर्द के पीछे आमतौर पर दो प्रमुख वजहें सक्रिय होती हैं। पहली वजह फटीग पेन यानी अत्यधिक थकावट से पैदा होने वाला खिंचाव है। छोटे बच्चों का स्टैमिना और उनकी मांसपेशियों की सहनशीलता वयस्कों के बराबर मजबूत नहीं होती। जब बच्चे दिनभर लगातार दौड़ते-भागते हैं, तो उनकी नाजुक मांसपेशियां बहुत जल्दी थक जाती हैं, जिसके कारण रात को पैरों में भारीपन और टीस उठने लगती है। दूसरी बड़ी वजह ग्रोइंग पेन के रूप में पहचानी जाती है। लगभग 10 से 14 या 15 वर्ष की आयु में बच्चों की शारीरिक लंबाई बहुत तेजी से बढ़ती है, जिसे मेडिकल भाषा में ग्रोथ स्पर्ट कहा जाता है। डॉ. प्रितिश सिंह के अनुसार, जब हड्डियां तेजी से फैलती हैं, तो उनके किनारों पर खिंचाव महसूस हो सकता है। यह तकलीफ हर बच्चे को नहीं होती, बल्कि केवल 10 प्रतिशत बच्चों में ही ऐसे लक्षण उभरते हैं। इसकी खासियत यह है कि दर्द पूरी हड्डी में फैलने के बजाय केवल उसके सिरों या किनारों पर केंद्रित रहता है। साथ ही इसमें प्रभावित अंग पर किसी प्रकार की सूजन या त्वचा का लाल पड़ना नहीं देखा जाता। कब सामान्य नहीं रह जाता पैरों का दर्द अभिभावकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कौन से लक्षण किसी अंदरूनी विकार की ओर इशारा करते हैं। सामान्य ग्रोइंग पेन स्थाई नहीं रहता, बल्कि यह रुक-रुक कर आता है और आमतौर पर एक से दो दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि, अगर बच्चे की त्वचा पर लाली नजर आने लगे, प्रभावित हड्डी सामान्य से अधिक मोटी लगे या छूने पर कोई सख्त गांठ महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा यदि उस हिस्से की त्वचा छूने पर गर्म लगे, तो यह किसी संक्रमण या अन्य विकार का संकेत हो सकता है। शारीरिक गतिविधियों में अचानक बदलाव आना भी एक बड़ा चेतावनी संकेत है। यदि पहले सहजता से खेलने-कूदने वाला बच्चा अब अचानक चलने या दौड़ने में असहज महसूस करने लगे, उसके चलने के अंदाज में लचक आ जाए या वह लंगड़ाकर कदम रखने लगे, तो सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसे असामान्य लक्षण किसी दूसरी बीमारी का संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए विशेषज्ञ से जांच कराना अनिवार्य हो जाता है। एक तरफा दर्द और प्राथमिक राहत के तरीके डॉ. प्रितिश सिंह बताते हैं कि प्राकृतिक ग्रोइंग पेन आमतौर पर दोनों पैरों में एक साथ और बराबर तीव्रता से होता है। इसके विपरीत, यदि दर्द केवल किसी एक पैर में हो और उसके साथ सूजन, लंगड़ाहट, त्वचा का लाल होना या स्थानीय तापमान बढ़ना जैसे लक्षण मौजूद हों, तो बिना देर किए ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। यदि परेशानी महज दिनभर की गतिविधियों की थकान से जुड़ी है, तो बच्चे को आराम करवाना सबसे बेहतर उपाय है। हल्के हाथों से पैरों की मालिश करने से भी मांसपेशियों का तनाव घटता है और बच्चे को तुरंत सुकून मिलता है। वहीं, ग्रोइंग पेन की स्थिति में ठंडे पानी की सिकाई करना या कोल्ड पैक का उपयोग करना काफी असरदार साबित होता है। इस तरह के सामान्य दर्द में बच्चे के नियमित खेलकूद या दैनिक क्रियाकलापों पर पाबंदी लगाने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। बच्चा अपनी सामान्य गतिविधियां जारी रख सकता है क्योंकि एक-दो दिन के आराम के बाद यह तकलीफ अपने आप शांत हो जाती है। इसका आप पर असर माता-पिता के लिए यह खबर बच्चों के शारीरिक विकास और उनके स्वास्थ्य की सही देखभाल में मददगार साबित होगी। • पहचान और सतर्कता: दोनों पैरों में सामान्य दर्द थकान या विकास का संकेत हो सकता है। यदि दर्द सिर्फ एक पैर में हो या सूजन और लाली दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। • घरेलू उपचार: थकान होने पर हल्की मालिश और ग्रोइंग पेन में कोल्ड पैक लगाने से तुरंत राहत मिलती है। इससे बच्चे को बेवजह भारी दर्द निवारक दवाएं देने की जरूरत नहीं पड़ती। • दैनिक दिनचर्या: सामान्य ग्रोइंग पेन के दौरान बच्चे की खेलकूद या अन्य गतिविधियों पर रोक न लगाएं। यह तकलीफ आमतौर पर एक से दो दिन में खुद ही शांत हो जाती है। • शारीरिक क्षमता का ध्यान: बढ़ते बच्चों की मांसपेशियां वयस्कों जितनी मजबूत नहीं होतीं। ज्यादा खेलने के बाद उनके शरीर को पर्याप्त आराम देना जरूरी होता है। ऐसा क्यों हुआ बच्चों में यह दर्द मुख्यतः विकास संबंधी शारीरिक बदलावों और अविकसित मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ने के कारण होता है। • मांसपेशियों की थकान: बच्चों की मांसपेशियों की कार्यक्षमता और स्टैमिना अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता। दिनभर अत्यधिक भागदौड़ करने पर उनकी मांसपेशियां बड़ों की तुलना में बहुत जल्दी थक जाती हैं। • ग्रोथ स्पर्ट का प्रभाव: लगभग 10 से 14-15 साल की उम्र में बच्चों की शारीरिक लंबाई बहुत तेजी से बढ़ती है। इस दौरान तेजी से बढ़ती हड्डियों के किनारों पर खिंचाव पैदा होने से दर्द महसूस हो सकता है। • सीमित प्रसार: यह विकास संबंधी दर्द हर बच्चे को नहीं होता बल्कि केवल करीब 10 प्रतिशत बच्चों में ही इसके लक्षण दिखाई देते हैं। सवाल-जवाब 1. बच्चों में ग्रोइंग पेन किस उम्र में अधिक देखा जाता है? यह समस्या मुख्य रूप से 10 से 14 या 15 वर्ष की उम्र के दौरान तेजी से लंबाई बढ़ने के समय देखी जाती है। 2. कितने प्रतिशत बच्चों में ग्रोइंग पेन की समस्या होती है? डॉक्टर के अनुसार केवल लगभग 10 प्रतिशत बच्चों में ही ग्रोइंग पेन के लक्षण सामने आते हैं। 3. ग्रोइंग पेन और किसी गंभीर बीमारी के लक्षणों में क्या अंतर है? ग्रोइंग पेन दोनों पैरों में होता है और इसमें सूजन नहीं होती, जबकि किसी बीमारी में केवल एक पैर में दर्द, सूजन, त्वचा का लाल होना या लंगड़ाहट हो सकती है। 4. रात में पैरों के दर्द से बच्चे को आराम दिलाने के लिए क्या करें? थकान होने पर हल्की मालिश करें और ग्रोइंग पेन की स्थिति में ठंडे पानी की सिकाई या कोल्ड पैक का इस्तेमाल करें। https://trendkia.com/health/rata-men-bachchon-ke-pairon-men-darda-ki-vajaha-thakana-ya-groinga-pena-ina-lakshanon-para-turnta-doktara-se-milen-42551 TrendKia — Har trend, sabse pehle.