ऋषिकेश की मंडियों में पहुंचा दुर्लभ जापानी फल, टमाटर जैसे दिखने वाले पर्सिमन की बढ़ी मांग ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम बाजार में सर्दियों के दौरान लाल-नारंगी रंग का जापानी फल पर्सिमन लोगों को आकर्षित कर रहा है, जो साल में केवल एक महीने बिकता है और स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। सर्दियों के महीनों में आमतौर पर फलों की दुकानों पर सेब और संतरे का दबदबा देखने को मिलता है, लेकिन उत्तराखंड के ऋषिकेश में इन दिनों एक अनोखा मौसमी फल लोगों के बीच कौतूहल और पसंद का विषय बना हुआ है। लाल और नारंगी आभा वाला यह फल देखने में किसी चमकदार टमाटर जैसा प्रतीत होता है, परंतु इसका अनूठा स्वाद और पौष्टिकता इसे साधारण फलों से बिल्कुल अलग दर्जा देती है। आम बोलचाल में लोग इसे पर्सिमन या जापानी फल कहते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में इसे रामफल के नाम से भी पुकारा जाता है। स्थानीय बाजारों में अपनी विशिष्ट बनावट और स्वाद की वजह से यह फल हर आने-जाने वाले का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। साल में केवल एक महीने का सीमित सीजन ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में फल की दुकान चलाने वाली विक्रेता राधा के अनुसार, इस फल की आवक बेहद सीमित समय के लिए होती है। पर्सिमन पूरे साल में केवल एक माह के लिए ही बाजार में उपलब्ध होता है। इसका उत्पादन चक्र और तुड़ाई का समय इतना छोटा है कि जो लोग इसके स्वाद के कायल हैं, वे साल भर इसके आने की प्रतीक्षा करते हैं। मौसम खत्म होते ही यह बाजार से पूरी तरह गायब हो जाता है, जिससे इसकी मांग और उत्सुकता हमेशा बनी रहती है। स्वाद, किस्म और कीमतों का गणित बाजार में पर्सिमन की अलग-अलग किस्में देखने को मिलती हैं, जो अपने आकार और स्वाद के आधार पर विभाजित हैं। राधा बताती हैं कि कुछ फल पूरी तरह गोल होते हैं, जिनमें पकने से पहले हल्का कड़वा या कसैला स्वाद महसूस हो सकता है। इसके विपरीत, चपटे और गोल आकार वाले फल पूरी तरह मीठे, रसीले और स्वादिष्ट होते हैं। यही कारण है कि खरीदार चपटी और गोल बनावट वाली मीठी किस्म को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। मूल्य की बात करें तो बाजार में इसकी कीमत 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। यदि कोई ग्राहक खुला फल खरीदना चाहता है, तो आकार के अनुसार एक छोटा पीस 50 से 60 रुपये में बिक रहा है। विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद, भारतीय खरीदार भी उत्सुक स्वर्गाश्रम में जानकी झूले के पास खरीदारी करने आए ग्राहक अंकित का कहना है कि यह फल अपनी चटख रंगत की वजह से दूर से ही नजर आ जाता है। उन्होंने बताया कि भारत में अभी भी आम लोगों के बीच इस फल को लेकर जागरूकता सीमित है, इसलिए भारतीय खरीदार इसे धीरे-धीरे आजमा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, ऋषिकेश आने वाले विदेशी सैलानी पर्सिमन से भली-भांति परिचित हैं और वे इसे अत्यधिक चाव से खरीदते हैं। दिखने में बेहद आकर्षक होने के साथ-साथ जब इसे खाया जाता है, तो इसकी मिठास और मुलायम बनावट किसी भी अन्य स्थानीय फल की तुलना में काफी अलग और ताजी लगती है। पोषक तत्वों का खजाना: आंखों और पाचन के लिए वरदान स्वाद के अलावा यह जापानी फल सेहत के नजरिए से भी औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी और डायट्री फाइबर पाया जाता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से आंखों की रोशनी बेहतर होती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी मजबूत बनती है। फल में मौजूद प्राकृतिक फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और पेट को साफ रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके साथ ही, इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं। इन्हीं खूबियों के चलते स्वास्थ्य के प्रति सजग लोग सर्दियों के इस सीमित मौसम में इसे अपनी डाइट में शामिल करना बेहद फायदेमंद मान रहे हैं। इसका आप पर असर ऋषिकेश के बाजारों में बिक रहे इस दुर्लभ मौसमी फल से उपभोक्ताओं और पर्यटकों पर सीधा असर पड़ रहा है। • भारत में: विदेशी फलों के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते देश के स्वास्थ्य के प्रति सजग लोग इसे सर्दियों की डाइट में शामिल कर रहे हैं। इसकी मांग से स्थानीय फल बाजारों में पारंपरिक फलों के साथ-साथ दुर्लभ फलों के व्यापार को भी बढ़ावा मिल रहा है। • ऋषिकेश में: स्वर्गाश्रम और जानकी झूले के पास स्थित मंडियों में यह फल 250 रुपये प्रति किलो और 50 से 60 रुपये प्रति पीस के भाव पर बिक रहा है। सीमित आपूर्ति और महज एक महीने की उपलब्धता के कारण खरीदारी करने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों को इसका लाभ उठाने के लिए तुरंत फैसला लेना होगा। • पोषण और स्वास्थ्य: विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण यह मौसमी बदलाव में सर्दी-जुकाम से बचाव और आंखों की सेहत में मददगार है। पाचन में सुधार चाहने वाले लोग इसे दैनिक आहार का हिस्सा बना सकते हैं। • बजट पर प्रभाव: सामान्य फलों जैसे सेब और संतरों की तुलना में यह काफी महंगा है। बजट का ध्यान रखने वाले खरीदारों को इसे नियमित फल की जगह एक विशेष मौसमी उपचार के तौर पर खरीदना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ पर्सिमन की सीमित उपलब्धता और बाजार में इसकी अचानक मांग बढ़ने के पीछे फसल चक्र और उपभोक्ता प्राथमिकताओं का सीधा संबंध है। • प्राकृतिक तुड़ाई चक्र: यह फल वर्ष में केवल एक निश्चित अवधि में ही तैयार होता है, जिसके चलते इसकी तुड़ाई का समय केवल एक महीने तक सीमित रहता है। इसी जैविक चक्र की वजह से बाजार में इसकी उपलब्धता साल भर नहीं रह सकती। • किस्मों का स्वाद विभाजन: फल की गोल किस्में पकने से पहले हल्की कड़वी होती हैं, जबकि चपटी और गोल किस्में प्राकृतिक रूप से मीठी होती हैं। उपभोक्ताओं द्वारा मीठी किस्म की लगातार मांग होने के कारण केवल विशिष्ट लॉट ही तेजी से बिक रहे हैं। • विदेशी ग्राहकों की पहचान: ऋषिकेश आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटक इस फल से अपने देशों में पहले से परिचित हैं। स्थानीय आबादी में जागरूकता कम होने के बावजूद विदेशी पर्यटकों की नियमित खरीद ने इसे बाजार में टिकाए रखा है। सवाल-जवाब 1. पर्सिमन को अन्य किस नाम से जाना जाता है? पर्सिमन को सामान्यतः जापानी फल कहा जाता है, जबकि कई क्षेत्रों में लोग इसे रामफल के नाम से भी जानते हैं। 2. यह फल बाजार में कितने समय तक मिलता है? यह फल साल में केवल एक महीने के लिए सर्दियों के मौसम में बाजार में उपलब्ध होता है। 3. ऋषिकेश के बाजार में जापानी फल की कीमत क्या है? ऋषिकेश में यह फल 250 रुपये प्रति किलोग्राम अथवा 50 से 60 रुपये प्रति पीस की दर से बिक रहा है। 4. पर्सिमन की कौन सी किस्म खाने में मीठी होती है? चपटे और गोल आकार वाले फल खाने में मीठे और स्वादिष्ट होते हैं, जबकि कुछ पूरी तरह गोल फल हल्के कड़वे हो सकते हैं। 5. जापानी फल में कौन से मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं? इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं। 6. यह फल किन शारीरिक समस्याओं में लाभकारी माना जाता है? यह आंखों की रोशनी सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। https://trendkia.com/health/rishikesh-ki-mndiyon-men-pahuncha-durlabha-japani-phala-tamatara-jaise-dikhane-vale-persimmon-ki-barhi-manga-56041 TrendKia — Har trend, sabse pehle.