# ऋषिकेश में मौसम परिवर्तन के दौरान गले की खराश से बचने के लिए डॉ राजकुमार ने दी 6 सब्जियों के सेवन की सलाह

> ऋषिकेश में ऋतुल बदलाव के साथ ही गले में खराश, खांसी और सांस की परेशानियां बढ़ने लगती हैं। आयुष विशेषज्ञ डॉ राजकुमार ने इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए 6 पौष्टिक सब्जियों को आहार में शामिल करने का सुझाव दिया है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/rishikesh-men-mausama-parivartana-ke-daurana-gale-ki-kharasha-se-bachane-ke-lie-dr-rajkumar-ne-di-6-sabjiyon-ke-sevana-ki-salaha-23957 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्वास्थ्य आहार, मौसम परिवर्तन, प्रतिरोधक क्षमता, ऋषिकेश समाचार, आयुष सलाह, हरी सब्जियां

ऋषिकेश क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदलते ही कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गर्मी के अचानक बारिश या ठंडक में बदलने और हवा में नमी का स्तर बढ़ने से शरीर को नए वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है। इस बदलाव के दौरान गले में खराश, लगातार खांसी, नाक बंद होना तथा सांस लेने में हल्की तकलीफ जैसे लक्षण उभरने लगते हैं। ऋषिकेश के आयुष विशेषज्ञ डॉ राजकुमार के अनुसार, यदि इस दौरान खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहते हैं। दैनिक आहार में हरी और रंग-बिरंगी सब्जियों को शामिल करने से शरीर में विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट की आपूर्ति होती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करती है।

## पालक और गाजर से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता
आहार में पोषण संतुलन बनाए रखने के लिए पालक एक उत्कृष्ट विकल्प है। डॉ राजकुमार (आयुष) के अनुसार, पालक में आयरन, फोलेट, विटामिन A, विटामिन C और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। बदलते मौसम के प्रभावों से निपटने के लिए पालक को साधारण सब्जी, दाल में मिलाकर, सूप बनाकर या पालक पनीर के रूप में खाया जा सकता है।

इसी तरह गाजर भी स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। यह न केवल आंखों की रोशनी के लिए अच्छी है, बल्कि इसमें बीटा-कैरोटीन भी प्रचुर मात्रा में होता है। मानव शरीर इस बीटा-कैरोटीन को आवश्यकतानुसार विटामिन A में परिवर्तित कर लेता है। विटामिन A शरीर के सामान्य इम्यून फंक्शन को दुरुस्त रखने तथा श्लेष्मा झिल्ली (म्यूकोसल हेल्थ) को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। गाजर का सेवन सलाद, सब्जी या गरमा-गरम सूप के तौर पर आसानी से किया जा सकता है।

## शकरकंद और लौकी से मिलेगा भरपूर पोषण और पाचन को राहत
मौसम के बदलाव के दौरान शकरकंद को दैनिक आहार का हिस्सा बनाना एक बेहतरीन निर्णय साबित होता है। शकरकंद में बीटा-कैरोटीन के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में फाइबर और अन्य आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे पानी में उबालकर या हल्का भूनकर खाया जा सकता है। स्वाद में बेहतरीन होने के साथ-साथ यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे अवांछित स्नैकिंग से बचाव होता है।

दूसरी ओर लौकी जैसी साधारण समझी जाने वाली सब्जी शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी होती है। लौकी में पानी की मात्रा अधिक होती है और यह पचाने में काफी हल्की होती है। मौसम बदलने पर जब अक्सर खान-पान की दिनचर्या प्रभावित होती है, तब हल्का और सुपाच्य भोजन शरीर को राहत पहुंचाता है। लौकी की सब्जी, स्वादिष्ट दाल या सूप के रूप में इसका सेवन किया जा सकता है।

## ब्रोकली और शिमला मिर्च से पाएं शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट
ब्रोकली को स्वास्थ्यवर्धक आहार का प्रमुख घटक माना जाता है। इसमें विटामिन C, फोलेट, फाइबर तथा अनेक प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। बदलते मौसम में शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ब्रोकली को सब्जी, सूप या सलाद में शामिल करना फायदेमंद रहता है। विशेषज्ञ की सलाह है कि ब्रोकली को बहुत अधिक पकाने के बजाय हल्का ही पकाना चाहिए, ताकि इसके प्राकृतिक पोषक तत्व सुरक्षित रह सकें।

इसके अलावा शिमला मिर्च भी डाइट को संतुलित बनाने का एक अच्छा जरिया है। विशेष रूप से लाल और पीली शिमला मिर्च में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। इसे दैनिक सब्जी, ताजे सलाद, सैंडविच या अन्य व्यंजनों में शामिल करके आसानी से खाया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
बदलते मौसम में गले और फेफड़ों के संक्रमण से बचने के लिए खान-पान में बदलाव करना तुरंत प्रभावी साबित होता है।

- **भारत भर में:** मौसमी बदलाव के दौरान आहार में विटामिन C और A से भरपूर सब्जियां शामिल करने से डॉक्टर के पास जाने की संभावना कम होती है। इससे दवाओं पर होने वाला खर्च बचता है और कार्यक्षमता बनी रहती है।
- **ऋषिकेश और पहाड़ी क्षेत्रों में:** अचानक तापमान और आर्द्रता में गिरावट आने पर स्थानीय निवासियों को श्वास संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है। मौसमी सब्जियों के सेवन से श्लेष्मा झिल्ली की सुरक्षा होती है।

## सवाल-जवाब

### 1. मौसम बदलते ही गले में खराश और खांसी क्यों होने लगती है?
तापमान और नमी में अचानक बदलाव आने से शरीर को वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली पर दबाव पड़ता है और गले में खराश या खांसी महसूस होने लगती है।

### 2. गाजर और पालक किस प्रकार इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं?
पालक में आयरन, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जबकि गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है जो शरीर में जाकर विटामिन A बनता है और श्लेष्मा झिल्ली तथा इम्यूनिटी को मजबूत करता है।

### 3. ब्रोकली को पकाते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
ब्रोकली को बहुत ज्यादा पकाने के बजाय हल्का ही पकाना या स्टीम करना चाहिए ताकि इसमें मौजूद विटामिन C और अन्य एंटीऑक्सीडेंट नष्ट न हों।

### 4. लौकी और शकरकंद मौसमी बदलाव में क्यों फायदेमंद हैं?
शकरकंद फाइबर और बीटा-कैरोटीन से भरपूर होकर पेट को भरा रखती है, जबकि लौकी हल्की और पानी से भरपूर होने के कारण पाचन को आसान बनाती है।

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