{
  "type": "article",
  "title": "रितिका शर्मा से जानें असली और मिलावटी पनीर की पहचान के 5 तरीके, रक्षाबंधन पर बीमारियों से बचेगी फैमिली",
  "summary": "रक्षाबंधन और त्योहारों के दौरान बाजार में मिलावटी पनीर की बिक्री बढ़ जाती है। फरीदाबाद सर्वोदय हॉस्पिटल की न्यूट्रीशन कंसलटेंट रितिका शर्मा ने असली और ताजा पनीर पहचानने के 5 आसान तरीके तथा इसके सेहत से जुड़े फायदे और नुकसान बताए हैं।",
  "content": "भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। रक्षाबंधन जैसे पावन अवसर पर हर घर में तरह-तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। मिठाइयों के साथ-साथ पनीर से बने पकवानों की मांग इस दौरान आसमान छूने लगती है। शाही पनीर से लेकर मलाई कोफ्ता और पनीर टिक्का तक, भारतीय थाली पनीर के बिना अधूरी मानी जाती है। हालांकि, बाजार में मांग में आई इस अचानक तेजी का फायदा उठाकर कुछ अनैतिक कारोबारी मिलावटी और घटिया गुणवत्ता वाला पनीर बेचने लगते हैं। ऐसे में त्योहार की खुशियों के बीच अपनी और अपने परिवार की सेहत की सुरक्षा करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। मिलावटी या बासी पनीर न केवल आपके पकवान का स्वाद बिगाड़ सकता है, बल्कि स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए खरीदारी करते समय पूरी सावधानी और जागरूकता बरतना बेहद जरूरी है।\n\n \n\nत्योहारों के दौरान क्यों बढ़ जाता है मिलावटी पनीर का खतरा?\n\nत्योहारों के दिनों में दूध और पनीर की कुल खपत सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। आपूर्ति कम होने और मांग अधिक होने के कारण बाजार में नकली या मिलावटी पनीर का कारोबार तेजी से पैर पसारने लगता है। फरीदाबाद स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल की न्यूट्रीशन कंसलटेंट रितिका शर्मा का कहना है कि पर्व-त्योहारों के अवसर पर बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की आवक काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में आम उपभोक्ताओं को कोई भी खाद्य सामग्री खरीदते वक्त अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। रितिका शर्मा के अनुसार, थोड़ी सी लापरवाही भी पूरे परिवार के स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकती है। सही जानकारी और थोड़ी सी समझदारी से आप बाजार में बिक रहे मिलावटी पनीर की पहचान आसानी से कर सकते हैं।\n\n \n\nपैकेटबंद पनीर खरीदते समय किन बातों की जांच करें?\n\nयदि आप बाजार से पैकेटबंद यानी प्रोसेस्ड पनीर खरीद रहे हैं, तो केवल ब्रांड के नाम पर भरोसा न करें। पैकेट के ऊपर छपे लेबल को ध्यानपूर्वक पढ़ना सबसे पहला और अनिवार्य कदम है। रितिका शर्मा सलाह देती हैं कि पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट यानी अंतिम तिथि और यूज बाई डेट को अच्छी तरह जांच लें। यदि एक्सपायरी डेट निकल चुकी है या मिटाई गई है, तो ऐसा पैकेट भूलकर भी न खरीदें। इसके अलावा, पैकेट पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और खाद्य सुरक्षा का आधिकारिक लेबल जरूर देखें। FSSAI का मान्य लाइसेंस इस बात का प्रमाण होता है कि उत्पाद तय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इन शुरुआती जानकारियों की मदद से आप पनीर की बुनियादी गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकते हैं और घटिया सामान खरीदने से बच सकते हैं।\n\n \n\nखुला पनीर खरीदते वक्त दुकान की स्वच्छता और बनावट पर दें ध्यान\n\nअगर आप किसी स्थानीय डेयरी या दुकान से खुला पनीर खरीदना पसंद करते हैं, तो सबसे पहले उस दुकान की साफ-सफाई का अवलोकन करें। जिस जगह पर पनीर रखा गया है और दुकानदार जिस काउंटर से सामान बेच रहा है, वहां स्वच्छता का होना अति आवश्यक है। गंदे वातावरण में रखा पनीर जल्दी खराब होता है और उसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बना रहता है। इसके बाद पनीर की शारीरिक बनावट की जांच करें। ताजा और असली पनीर दिखने में बिल्कुल सामान्य होता है और छूने पर हल्का स्पंजी यानी लचीला महसूस होता है। रितिका शर्मा बताती हैं कि यदि पनीर हाथों से दबाने पर बहुत सख्त महसूस हो रहा है, तो उसके बासी या खराब होने की संभावना ज्यादा होती है। इसके अलावा, खराब हो चुके पनीर का रंग हल्का पीला पड़ने लगता है। यदि पनीर की सतह पर चिपचिपापन या स्लाइमी लेयर दिखाई दे, तो ऐसे पनीर को तुरंत खारिज कर देना चाहिए।\n\n \n\nघर पर टेक्सचर, गंध और स्वाद से करें असली पनीर की जांच\n\nबाजार से पनीर खरीदकर घर लाने के बाद भी उसका इस्तेमाल करने से पहले कुछ साधारण परीक्षण किए जा सकते हैं। रसोई में खाना बनाने से पहले पनीर के टेक्सचर यानी उसकी बनावट को दोबारा जांचना चाहिए। यदि पनीर को छूने पर वह बहुत ज्यादा चिपचिपा या स्लाइमी महसूस हो, तो उसका सेवन बिल्कुल न करें। ताजगी की पहचान करने का एक और सबसे प्रभावी तरीका है पनीर को सूंघना। ताजा पनीर में दूध की एक हल्की और स्वाभाविक सुगंध होती है। यदि पनीर से पुराने दूध, फटे दूध या किसी रासायनिक पदार्थ जैसी गंध आ रही हो, तो समझ जाएं कि वह खराब हो चुका है। रितिका शर्मा स्पष्ट करती हैं कि असली और ताजे पनीर का स्वाद सामान्य और सौम्य होता है। यदि पनीर चखने पर उसमें खट्टापन महसूस हो, तो उसे खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि खट्टापन दूध के सड़ने या केमिकल के इस्तेमाल का संकेत होता है।\n\n \n\nमिलावटी पनीर बनाने में किन मिलावटी चीजों का होता है प्रयोग?\n\nबाजार में बिकने वाला हर पनीर शुद्ध दूध से नहीं बना होता। कुछ मुनाफाखोर लोग पनीर की मात्रा बढ़ाने और लागत कम करने के लिए खतरनाक मिलावटी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। रितिका शर्मा के अनुसार, कई जगहों पर असली दूध की जगह वेजिटेबल ऑयल यानी वनस्पति तेल का इस्तेमाल किया जाता है। पनीर को गाढ़ा और भारी बनाने के लिए उसमें स्टार्च मिला दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, कई स्थानों पर प्राकृतिक तरल दूध का उपयोग न करके मिल्क पाउडर और विभिन्न रसायनों से तैयार किए गए घोल से पनीर बनाया जाता है। इस प्रकार की मिलावट से पनीर का प्राकृतिक टेक्सचर, स्वाद और पोषाहार पूरी तरह बदल जाता है। इसलिए केवल कम कीमत या सस्ता पनीर देखकर उसे खरीदना सेहत के लिए हानिकारक फैसला हो सकता है। सस्ती दरों पर मिलने वाला पनीर अक्सर मिलावटी होता है।\n\n \n\nनकली और खराब पनीर खाने से सेहत पर होने वाले दुष्परिणाम\n\nअशुद्ध या मिलावटी पनीर का सेवन मानव शरीर के लिए अत्यंत नुकसानदायक साबित हो सकता है। दूषित पनीर खाने से सबसे पहले पाचन तंत्र प्रभावित होता है और पेट से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। रितिका शर्मा चेतावनी देती हैं कि खराब पनीर के सेवन से फूड पॉइजनिंग का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसके कारण मरीज को अचानक उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं। शरीर में टॉक्सिन्स फैलने की वजह से कुछ लोगों को तेज बुखार और अत्यधिक कमजोरी भी महसूस हो सकती है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिससे उन पर खराब पनीर का असर ज्यादा तेजी से और गंभीर रूप में दिखाई देता है। इसलिए स्वाद के चक्कर में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।\n\n \n\nबच्चों के स्वास्थ्य पर मिलावटी पनीर का खतरनाक प्रभाव\n\nछोटे बच्चों को पनीर बेहद पसंद होता है, लेकिन खराब पनीर खिलाना उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। बच्चों का पाचन तंत्र बड़ों की तुलना में बेहद संवेदनशील होता है। रितिका शर्मा के अनुसार, मिलावटी या बासी पनीर बच्चों में अपच, पेट दर्द और लूज मोशन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। फूड पॉइजनिंग की स्थिति में बच्चों की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ सकती है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने तक की नौबत आ सकती है। इसके अलावा, यदि बच्चे लंबे समय तक घटिया गुणवत्ता वाले भोजन का सेवन करते रहते हैं, तो इससे उनके सामान्य शारीरिक विकास और पोषण स्तर पर नकारात्मक असर पड़ता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के खाने में पनीर शामिल करने से पहले उसकी गुणवत्ता की पूरी तरह पुष्टि कर लें।\n\n \n\nत्योहारों में सुरक्षित खरीदारी के लिए न्यूट्रीशनिस्ट की सलाह\n\nत्योहारों के इस व्यस्त मौसम में पनीर या कोई भी अन्य दुग्ध उत्पाद खरीदते समय जल्दबाजी करने से बचें। जल्दबाजी में की गई खरीदारी अक्सर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है। यदि आप पैकेटवाला पनीर ले रहे हैं, तो लेबल, एक्सपायरी डेट और FSSAI का लाइसेंस नंबर जरूर चेक करें। खुला पनीर खरीदते वक्त डेयरी की समग्र साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। पनीर के रंग, टेक्सचर, गंध और स्वाद की व्यक्तिगत जांच अवश्य करें। यदि पनीर में चिपचिपापन हो, दुर्गंध आ रही हो या स्वाद खट्टा हो, तो उसे खरीदने से साफ इंकार कर दें। आपकी थोड़ी सी सतर्कता और समझदारी आपके त्योहारों की मिठास और खुशियों को बीमारी से बचा सकती है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: रक्षाबंधन और त्योहारों के सीजन में डेयरी प्रोडक्ट्स की भारी मांग के कारण मिलावटी पनीर की बिक्री बढ़ जाती है, इसलिए खरीदारी के समय पैकेट पर FSSAI नंबर, एक्सपायरी डेट और टेक्सचर की जांच करना जरूरी है।\n\nफरीदाबाद में: स्थानीय डेयरी और बाजारों से खुला पनीर खरीदते वक्त दुकानों की साफ-सफाई, पनीर के रंग और गंध पर विशेष ध्यान दें ताकि फूड पॉइजनिंग से बचाव हो सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ताजा और असली पनीर की पहचान कैसे करें?\nताजा पनीर छूने पर थोड़ा स्पंजी होता है, उसका रंग सामान्य सफेद होता है और उसमें दूध जैसी हल्की सौम्य गंध होती है।\n\n2. पैकेटबंद पनीर लेते समय क्या देखना चाहिए?\nपैकेटबंद पनीर खरीदते समय उस पर छपी एक्सपायरी डेट, यूज बाई डेट और FSSAI लाइसेंस नंबर अवश्य जांचें।\n\n3. मिलावटी या नकली पनीर में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?\nमिलावटी पनीर में असली दूध की जगह वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च और मिल्क पाउडर से तैयार घोल का इस्तेमाल किया जाता है।\n\n4. खराब या नकली पनीर खाने से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है?\nदूषित या नकली पनीर खाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, फूड पॉइजनिंग, बुखार और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।\n\n5. बच्चों पर खराब पनीर खाने का क्या असर पड़ता है?\nबच्चों का पाचन तंत्र संवेदनशील होता है, जिससे उन्हें अपच, लूज मोशन और फूड पॉइजनिंग हो सकती है, जो उनके शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है।",
  "url": "https://trendkia.com/health/ritika-sharma-se-janen-asali-aura-milavati-panira-ki-pahachana-ke-5-tarike-rakshabandhan-para-bimariyon-se-bachegi-phaimili-19936",
  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-08-22",
  "tags": [
    "पनीर की पहचान",
    "मिलावटी पनीर",
    "रक्षाबंधन त्योहार",
    "खाद्य सुरक्षा",
    "सर्वोदय अस्पताल",
    "रितिका शर्मा",
    "फरीदाबाद समाचार"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}