रोज़ की थाली में शामिल करें ये 6 आयुर्वेदिक पौधे, पोषण की कमी होगी दूर आयुर्वेद में सदियों से इस्तेमाल हो रहे शतावरी, मोरिंगा, आंवला, ब्राह्मी, गिलोय और तुलसी को रोजाना के खानपान में शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषण मिलने में मदद मिल सकती है. घर की रसोई और बगीचे में मौजूद कुछ पौधे सदियों से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का हिस्सा रहे हैं. अगर इन्हें सही मात्रा में और सही तरीके से भोजन का हिस्सा बनाया जाए, तो शरीर को जरूरी पोषण मिलने के साथ कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में भी मदद मिल सकती है. आइए जानते हैं ऐसे छह पौधों के बारे में, जिन्हें आयुर्वेद में खास जगह दी गई है. शतावरी: महिलाओं की ऊर्जा और सेहत का पारंपरिक सहारा आयुर्वेद में शतावरी को खासकर महिलाओं की सेहत और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि यह शरीर को भीतर से मजबूती देती है और सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक होती है. इसके अलावा पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए भी इसका पारंपरिक इस्तेमाल होता आ रहा है, यानी यह सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं बल्कि पेट से जुड़ी सेहत में भी काम आती है. मोरिंगा यानी सहजन: एक ही पत्ती में कई पोषक तत्व सहजन के पेड़ की पत्तियों को पोषण का भंडार माना जाता है. इनमें प्रोटीन के साथ-साथ अलग-अलग तरह के विटामिन और मिनरल मौजूद होते हैं, जिससे रोजमर्रा के भोजन की पोषण गुणवत्ता आसानी से बढ़ाई जा सकती है. पुराने समय से मोरिंगा की पत्तियों का सेवन शरीर में ऊर्जा बनाए रखने और समग्र सेहत सुधारने के मकसद से किया जाता रहा है. आंवला: विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट का प्राकृतिक भंडार आंवले को विटामिन सी और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल माना जाता है. पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल पाचन दुरुस्त रखने और सामान्य सेहत बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र यानी इम्युनिटी को सामान्य रूप से मजबूत बनाए रखने में मददगार माने जाते हैं. ब्राह्मी: याददाश्त और मानसिक शांति से जुड़ा पौधा दिमागी सेहत से जुड़े मामलों में आयुर्वेद लंबे समय से ब्राह्मी का इस्तेमाल करता आया है. इसे याददाश्त तेज करने और एकाग्रता बढ़ाने में मददगार माना जाता है. साथ ही पारंपरिक रूप से इसे तनाव घटाने और दिमाग को शांत रखने के उद्देश्य से भी अपनाया जाता रहा है, यानी यह पौधा शारीरिक से ज्यादा मानसिक सेहत के लिए जाना जाता है. गिलोय: प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला त्रिदोष शामक गिलोय आयुर्वेद के सबसे जाने-पहचाने पौधों में गिना जाता है. इसे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य को सहारा देने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे त्रिदोष शामक यानी वात, पित्त और कफ तीनों के संतुलन से जुड़ा पौधा बताया गया है, जो इसे बाकी जड़ी-बूटियों से अलग बनाता है. तुलसी: हर घर में मिलने वाली औषधि तुलसी शायद इस सूची का सबसे परिचित नाम है, जो लगभग हर भारतीय घर के आंगन या बालकनी में आसानी से मिल जाती है. इसका पारंपरिक उपयोग श्वसन तंत्र और समग्र सेहत को ठीक रखने के लिए होता रहा है. तुलसी के पत्तों में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर को तनाव जैसी स्थितियों से निपटने में सहारा देते हैं, और यही वजह है कि इसे रोजमर्रा की सेहत के लिए फायदेमंद पौधा माना जाता है. इसका आप पर असर रोजाना के भोजन में ये पौधे शामिल करने से शरीर को अतिरिक्त सप्लीमेंट के बिना भी जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं. • घर पर उपलब्धता: तुलसी, आंवला और मोरिंगा जैसे पौधे आमतौर पर घर के आंगन, बगीचे या नजदीकी बाजार में आसानी से मिल जाते हैं. इसका मतलब है कि इन्हें डाइट में शामिल करने के लिए महंगे सप्लीमेंट या दवाओं पर खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती. • पाचन और इम्युनिटी: शतावरी, आंवला और गिलोय पाचन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहारा देने में मददगार माने जाते हैं. जिन लोगों को बार-बार पेट या मौसमी बीमारियों की शिकायत रहती है, वे इन्हें अपने रोजमर्रा के खानपान में शामिल करने पर विचार कर सकते हैं. • मानसिक सेहत: ब्राह्मी को याददाश्त, एकाग्रता और तनाव कम करने से जोड़ा जाता है. पढ़ाई या काम के दबाव से जूझ रहे लोगों के लिए यह एक पारंपरिक विकल्प हो सकता है, हालांकि इसे किसी इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. • महिलाओं के लिए खास फायदा: शतावरी को खासतौर पर महिलाओं की ऊर्जा और सेहत से जोड़ा जाता है, इसलिए महिलाएं इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपनी सेहत से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रख सकती हैं. सवाल-जवाब 1. शतावरी किसके लिए खासतौर पर फायदेमंद मानी जाती है? इसे खासतौर पर महिलाओं की सेहत और ऊर्जा बनाए रखने से जोड़कर देखा जाता है. 2. मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियों में क्या पाया जाता है? इनमें प्रोटीन के साथ कई तरह के विटामिन और मिनरल मौजूद होते हैं. 3. आंवला शरीर के लिए किस तरह उपयोगी माना जाता है? यह विटामिन सी और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट का स्रोत है और पाचन व इम्युनिटी को सहारा देता है. 4. ब्राह्मी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किसलिए किया जाता है? इसे याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने के साथ-साथ तनाव कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 5. गिलोय को त्रिदोष शामक क्यों कहा जाता है? क्योंकि आयुर्वेद में इसे वात, पित्त और कफ तीनों के संतुलन से जुड़ा पौधा माना जाता है. 6. तुलसी पारंपरिक रूप से किन समस्याओं के लिए इस्तेमाल की जाती है? इसे सांस से जुड़ी सेहत और सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. https://trendkia.com/health/roza-ki-thali-men-shamila-karen-ye-6-ayurvedika-paudhe-poshana-ki-kami-hogi-dura-28525 TrendKia — Har trend, sabse pehle.