सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की चौंकाने वाली रिसर्च, डायबिटीज और थायराइड के मेल से बढ़ रहा है अंधापन का खतरा सागर में हुई एक नई रिसर्च के मुताबिक डायबिटीज के मरीजों में थायराइड की समस्या होने पर डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा काफी बढ़ जाता है। समय पर जांच और इलाज न कराने पर यह बीमारी आंखों की रोशनी पूरी तरह छीन सकती है। भारत में डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इसके साथ ही कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। इनमें से ही एक गंभीर समस्या डायबिटिक रेटिनोपैथी है, जो सीधे तौर पर आंखों के पर्दे को प्रभावित करती है। इस बीमारी में धीरे-धीरे मरीज की आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती है और यदि वक्त रहते इसका सही इलाज न करवाया जाए, तो व्यक्ति हमेशा के लिए अपनी दृष्टि खो सकता है। देश में बढ़ते शुगर के मामलों के बीच यह स्थिति चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की रिसर्च के चौंकाने वाले खुलासे सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंजलि बीरानी पटेल ने इस विषय पर एक महत्वपूर्ण शोध किया है। इस रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों को डायबिटीज के साथ-साथ थायराइड की भी समस्या है, उनमें भविष्य में डायबिटिक रेटिनोपैथी होने की संभावना काफी अधिक बढ़ जाती है। शोध के अनुसार, यदि समय रहते थायराइड की बीमारी का सही उपचार कर लिया जाए, तो इस गंभीर नेत्र विकार के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मरीजों की आंखों को बचाया जा सकता है। डायबिटीज कैपिटल बनते भारत में गंभीर होती स्थिति शोधकर्ता डॉक्टर अंजलि बीरानी पटेल का कहना है कि आज के समय में भारत को दुनिया की डायबिटीज कैपिटल कहा जाने लगा है, क्योंकि हमारे देश में शुगर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जितने भी लोग डायबिटीज से पीड़ित होते हैं, उनमें जीवन में कभी न कभी डायबिटिक रेटिनोपैथी होने का जोखिम हमेशा बना रहता है। इस बीमारी के शिकार लोगों को कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है, जो अंततः उन्हें अंधेपन की ओर धकेल सकती हैं। इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि समय रहते इसकी पहचान की जाए और नियमित रूप से स्क्रीनिंग कराई जाए, ताकि दृष्टि हानि के जोखिम को टाला जा सके। गंभीरता बढ़ाने वाले शारीरिक कारक और थायराइड का कनेक्शन इस शोध के दौरान कई ऐसे शारीरिक कारकों की पहचान करने की कोशिश की गई जो डायबिटिक रेटिनोपैथी की गंभीरता को बढ़ाते हैं। चिकित्सा विज्ञान में पहले से ही कई कारक स्थापित हैं जैसे कि व्यक्ति की उम्र, उसे डायबिटीज से पीड़ित हुए कितना समय हो चुका है और उसका ब्लड शुगर पर कितना नियंत्रण है। इसके साथ ही इस शोध में यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि क्या थायराइड की बीमारी डायबिटिक रेटिनोपैथी की गंभीरता को और बढ़ा सकती है। शोध के परिणाम में यह पाया गया कि जिन मरीजों में गंभीर किस्म की डायबिटिक रेटिनोपैथी थी, वे साथ ही थायराइड विकारों से भी ग्रस्त थे और उनका थायराइड ठीक से काम नहीं कर रहा था। ऐसी स्थिति में, यदि आगे चलकर थायराइड विकार का सही उपचार किया जाए, तो रेटिनोपैथी के बढ़ते प्रभाव को रोकने में मदद मिल सकती है। इस तरह का लक्षित उपचार मरीजों के स्वास्थ्य सुधार में एक बड़ा योगदान दे सकता है। नियमित आंखों की जांच और समय पर स्क्रीनिंग का महत्व डायबिटीज के प्रत्येक मरीज को यह बात अच्छी तरह पता होनी चाहिए कि जिस दिन उन्हें इस बीमारी का पता चलता है, उसी दिन से उन्हें अपनी आंखों की जांच शुरू करवा देनी चाहिए। आंखों की मौजूदा स्थिति के आधार पर डॉक्टर यह तय करते हैं कि मरीज को कितने अंतराल पर अपनी आंखों की स्क्रीनिंग कराते रहना चाहिए। सामान्य तौर पर यह सलाह दी जाती है कि साल में कम से कम एक बार संपूर्ण आई चेकअप जरूर करवाया जाए, लेकिन अक्सर लोग इस तरफ ध्यान नहीं दे पाते हैं। यदि इस रूटीन का नियमित रूप से पालन किया जाए, तो डायबिटिक रेटिनोपैथी को शुरुआती अवस्था में ही पकड़ा जा सकता है और इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसका आप पर असर डायबिटीज और थायराइड के मरीजों को समय रहते अपनी आंखों की विशेष जांच करानी चाहिए, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। • भारत में: देश भर के सभी शुगर मरीजों को अपनी दिनचर्या में सालाना आई चेकअप को अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। शुरुआती दौर में जांच कराने से अंधेपन के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। • सागर में: स्थानीय बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की रिसर्च के बाद क्षेत्र के मरीजों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे डायबिटीज के साथ अपने थायराइड स्तर की भी नियमित जांच करवाएं। इससे समय रहते उचित इलाज पाकर आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह शोध इस बात की पड़ताल करने के लिए किया गया था कि क्या अन्य शारीरिक बीमारियां आंखों के पर्दे पर असर डालने वाली बीमारी को और गंभीर बना सकती हैं। • सीधे कारण: शरीर में लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लेवल और असंतुलित थायराइड फंक्शन सीधे तौर पर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। • रोग की प्रक्रिया: जब डायबिटीज के साथ थायराइड ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में चयापचय से जुड़ी जटिलताएं बढ़ जाती हैं जो आंखों की गंभीर बीमारियों को ट्रिगर करती हैं। • जांच का दायरा: शोधकर्ताओं ने यह जानने का प्रयास किया कि क्या सीरियस डायबिटिक रेटिनोपैथी के पीछे थायराइड विकार एक मुख्य उत्प्रेरक के रूप में काम कर रहा है। सवाल-जवाब 1. डायबटिक रेटिनोपैथी क्या है? यह डायबिटीज के कारण होने वाली आंखों के पर्दे की एक गंभीर बीमारी है, जिससे धीरे-धीरे रोशनी कम होने लगती है। 2. यह रिसर्च किसने और कहां की है? यह रिसर्च सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और आंखों की डॉक्टर अंजलि बीरानी पटेल ने की है। 3. डायबिटीज के मरीजों को आंखों की जांच कब करवानी चाहिए? जिस दिन आपको डायबिटीज का पता चले, उसी दिन से आंखों की जांच शुरू करवा देनी चाहिए और साल में कम से कम एक बार चेकअप कराना जरूरी है। 4. थायराइड का इस बीमारी से क्या संबंध है? शोध के अनुसार जिन मरीजों को डायबिटीज के साथ थायराइड की समस्या होती है, उनमें गंभीर डायबिटिक रेटिनोपैथी होने की संभावना बढ़ जाती है। 5. क्या इस बीमारी से बचा जा सकता है? हाँ, समय पर स्क्रीनिंग करवाकर, ब्लड शुगर और थायराइड को नियंत्रित रखकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। https://trendkia.com/health/sagara-ke-bundelakhnda-medikala-koleja-ki-chaunkane-vali-risarcha-dayabitija-aura-thayaraida-ke-mela-se-barha-raha-hai-andhapana-k-52570 TrendKia — Har trend, sabse pehle.