साकेत के मैक्स अस्पताल में 8 अजनबियों ने पेश की इंसानियत की मिसाल, हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद एक साथ सफल हुए 4 किडनी ट्रांसप्लांट दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में नागालैंड, कश्मीर, पंजाब और बिहार के चार परिवारों के बीच 4-तरफा किडनी स्वैप का ऐतिहासिक ऑपरेशन पूरा हुआ। कानूनी बाधाएं पार करने के बाद 5 ऑपरेशन थिएटरों में 11 घंटे तक चली सर्जरी से 4 मरीजों को नया जीवन मिला। अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे गंभीर मरीजों के लिए सही डोनर का मिलना और एक सफल सर्जरी का होना किसी महासंग्राम को जीतने से कम नहीं होता। जब कोई अपना इंसान किसी बीमारी से जूझ रहा हो तो परिवार का हर सदस्य उसकी रक्षा के लिए अपनी जान तक दांव पर लगाने को तैयार हो जाता है। ऐसा ही एक अद्भुत और दिल को छू लेने वाला मामला देश की राजधानी दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से सामने आया है। यहां भारत के चार अलग-अलग कोनों से आए आठ अजनबियों ने आपसी उदारता, त्याग और सामूहिक भरोसे की ऐसी अनूठी मिसाल कायम की है, जिसने न केवल चिकित्सा जगत में एक नया इतिहास रचा बल्कि चार परिवारों के बुझते चिरागों को नई रोशनी भी प्रदान की। इस पूरी प्रक्रिया में नागालैंड, कश्मीर, पंजाब और बिहार से आए चार परिवारों के आठ सदस्यों ने भाग लिया, जिनमें चार किडनी डोनर और चार मरीज शामिल थे। पारिवारिक असंगति से पैदा हुई नई राह इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब नागालैंड, कश्मीर, पंजाब और बिहार के चार परिवार अपने-अपने परिजनों का इलाज कराने के उद्देश्य से अलग-अलग समय पर मैक्स अस्पताल पहुंचे। इन सभी परिवारों में मरीज को किडनी देने के लिए उनके अपने सगे-संबंधी पूरी तरह तैयार थे। हालांकि, जब डॉक्टरों ने मरीज और उनके संबंधित पारिवारिक डोनर के बीच क्रॉस मैच टेस्ट किया, तो परिणाम पॉजिटिव आए। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार क्रॉस मैच पॉजिटिव आने का सीधा अर्थ यह होता है कि डोनर की किडनी मरीज के शरीर में स्वीकार नहीं होगी और ऐसा ट्रांसप्लांट जानलेवा साबित हो सकता है। इस स्थिति के चलते सभी मरीजों का ट्रांसप्लांट अनिश्चितकाल के लिए टल गया और परिवार घोर निराशा में डूब गए। इसी बीच अस्पताल के एक दूरदर्शी डॉक्टर ने इन परिवारों के सामने एक नया सुझाव रखा। उन्होंने सलाह दी कि क्यों न इन चारों डोनरों और चारों मरीजों का आपस में क्रॉस मैच टेस्ट कराकर देखा जाए। यद्यपि ये चारों परिवार एक-दूसरे के लिए पूरी तरह अनजान थे और देश के अलग-अलग राज्यों से ताल्लुक रखते थे, फिर भी मरीज की जान बचाने के लिए सभी पक्ष आपसी क्रॉस मैच के लिए तुरंत सहमत हो गए। जब डॉक्टरों ने चारों परिवारों के बीच क्रॉस मैच का परीक्षण किया, तो इसके परिणाम बेहद सुखद और चमत्कारिक रहे। चारों डोनर अपने-अपने परिजनों के बजाय एक-दूसरे के मरीजों के साथ पूरी तरह मैच कर गए। इस रिपोर्ट के सामने आते ही चारों डोनर और मरीज बिना किसी झिझक के अजनबियों को अपनी किडनी दान करने और उनसे ट्रांसप्लांट कराने के लिए तैयार हो गए। कानूनी अड़चन और दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला चिकित्सीय स्तर पर समस्या हल होने के बाद सबसे बड़ी अड़चन देश का मौजूदा कानून बन गया। मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत सामान्यतः केवल दो परिवारों के बीच ही किडनी स्वैप की अनुमति दी जाती थी। चार अलग-अलग परिवारों के बीच एक साथ बहु-पक्षीय यानी 4-वे स्वैप को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इस प्रशासनिक और कानूनी गतिरोध को तोड़ने के लिए चारों डोनरों और मरीजों ने एकजुट होकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और याचिका दायर की। मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 मई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौराव ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कानून में उल्लेखित 'पहला दाता' और 'दूसरा दाता' जैसे शब्द केवल उदाहरण के तौर पर दिए गए हैं और इनका उद्देश्य दो से अधिक जोड़ों पर रोक लगाना बिल्कुल नहीं है। अदालत ने पुराने restrictive आदेशों को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि यदि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का व्यावसायिक लेनदेन या व्यापार शामिल नहीं है, तो चार-तरफा स्वैप आवेदन पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। हाई कोर्ट की इस हरी झंडी ने आठों अजनबियों के लिए नई जिंदगी का रास्ता साफ कर दिया। 11 घंटे का महा-ऑपरेशन और 5 थिएटरों का तालमेल अदालत की मंजूरी मिलने के बाद मैक्स अस्पताल के प्रशासनिक और सर्जिकल विभाग ने बिना समय गंवाए ट्रांसप्लांट की तैयारियां शुरू कर दीं। 13 जुलाई 2026 को आठों व्यक्तियों को दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुबह 7 बजे अस्पताल के 5 ऑपरेशन थिएटरों में एक साथ इस ऐतिहासिक सर्जरी की शुरुआत हुई। इस जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. अनंत कुमार कर रहे थे। सर्जिकल टीम ने किसी युद्ध स्तर की रणनीति की तरह पूरी जिम्मेदारी आपस में बांट ली। सर्जरी के दौरान हर मिनट बेहद कीमती था। जैसे ही एक ऑपरेशन थिएटर में किसी डोनर की किडनी निकाली जाती, उसे तुरंत बर्फ के विशेष कटोरे में सुरक्षित रखकर दूसरे थिएटर में पहुंचाया जाता, जहां मरीज को पहले से सर्जरी के लिए तैयार रखा गया था। वहां किडनी पहुंचते ही प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती। सुबह 7 बजे शुरू हुआ यह सिलसिला लगातार 11 घंटे तक बिना रुके चलता रहा और शाम 6 बजे तक चारों किडनियां एक परिवार से दूसरे परिवार तक सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की जा चुकी थीं। अतुलनीय भरोसा और खुशहाली का अंतिम मोड़ इस पूरी मैराथन प्रक्रिया के दौरान जोखिम और तनाव का स्तर अत्यधिक ऊंचा था। यदि सर्जरी के दौरान कोई भी एक डोनर अंतिम समय पर पीछे हट जाता या किसी मरीज को अचानक बुखार आ जाता, तो पूरी 4-वे स्वैप चेन वहीं टूट जाती और बाकी तीनों मरीजों का इंतजार अधूरा रह जाता। इसके अलावा, यदि किसी का शरीर नई किडनी को स्वीकार न करता तो वर्षों की मेहनत व्यर्थ हो जाती। इसके बावजूद आठों लोगों ने एक-दूसरे की नीयत और डॉक्टरों पर अटूट विश्वास बनाए रखा। शाम 6 बजे जब ऑपरेशन थिएटर की लाइटें बंद हुईं और डॉक्टरों ने सभी चार ट्रांसप्लांट के पूरी तरह सफल होने की घोषणा की, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। चारों डोनर पूरी तरह स्वस्थ और प्रसन्न थे, जबकि चारों मरीजों को एक नया जीवन मिल चुका था। सभी मरीजों के शरीर में प्रत्यारोपित की गई नई किडनियां सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही थीं और सुचारू रूप से कार्य कर रही थीं। यह घटना न केवल चिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि है बल्कि यह दर्शाती है कि जब इंसानियत और सामूहिक प्रयास एक साथ आते हैं तो कानून और समाज की हर बाधा दूर हो जाती है। इसका आप पर असर भारत में: यह मामला देश भर में अंगदान और स्वैप ट्रांसप्लांट के नियमों को आसान बनाने तथा कई परिवारों के बीच बहु-पक्षीय (multi-way) किडनी एक्सचेंज का कानूनी रास्ता साफ करता है। दिल्ली में: दिल्ली हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख अस्पतालों में जटिल और बहु-पक्षीय ट्रांसप्लांट के मामलों के लिए नया कानूनी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलेगा। सवाल-जवाब 1. यह 4-वे किडनी स्वैप किस अस्पताल में हुआ? यह ऐतिहासिक ट्रांसप्लांट दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में संपन्न हुआ। 2. डोनर और मरीज भारत के किन राज्यों से आए थे? चारों डोनर और मरीज भारत के चार अलग-अलग राज्यों नागालैंड, कश्मीर, पंजाब और बिहार से आए थे। 3. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या फैसला सुनाया? 26 मई 2026 को जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौराव ने निर्णय दिया कि कानून में 'पहला दाता' और 'दूसरा दाता' केवल उदाहरण हैं, तथा गैर-व्यावसायिक 4-तरफा स्वैप पर कोई कानूनी रोक नहीं है। 4. इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व किसने किया और इसमें कितना समय लगा? डॉ. अनंत कुमार के नेतृत्व में 13 जुलाई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक 5 ऑपरेशन थिएटरों में 11 घंटे तक यह सर्जरी चली। 5. स्वैप ट्रांसप्लांट की जरूरत क्यों पड़ी? क्योंकि प्रत्येक मरीज का उनके अपने पारिवारिक डोनर के साथ क्रॉस मैच टेस्ट पॉजिटिव आया था, जिससे डायरेक्ट ट्रांसप्लांट चिकित्सकीय रूप से असंभव था। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सबक: • सामूहिक भरोसा: अनजान लोगों के बीच एक-दूसरे पर किया गया गहरा विश्वास असंभव दिखने वाली चिकित्सा चुनौतियों को भी आसान बना देता है। • उदारता और निस्वार्थता: किसी अजनबी की जान बचाने के लिए आगे बढ़ना इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल है। • कानूनी बाधाओं से आगे सोच: सही नीयत और तार्किक कानूनी पैरवी से स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सख्त नियमों में भी मानवीय हित में सुधार संभव है। https://trendkia.com/health/saket-ke-max-hospital-men-8-ajanabiyon-ne-pesha-ki-insaniyata-ki-misala-high-court-ki-mnjuri-ke-bada-eka-satha-saphala-hua-4-kidne-18776 TrendKia — Har trend, sabse pehle.