शरीर से फैट कैसे होता है गायब, शोधकर्ताओं ने समझाया वजन घटने पर चर्बी का फेफड़ों से बाहर निकलने का विज्ञान वजन घटाने के दौरान पिघलने वाली चर्बी का अधिकांश हिस्सा पसीने से नहीं बल्कि सांस छोड़ते समय कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में बाहर निकलता है। वजन कम करने की कोशिश में जुटे लोग अक्सर संतुलित खानपान, कसरत और रोजाना टहलने का सहारा लेते हैं। जब धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है, तो शरीर के अलग-अलग हिस्सों में जमा जिद्दी चर्बी भी घटने लगती है। अधिकांश लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर यह चर्बी गायब होकर जाती कहां है। आम धारणा यही रही है कि यह पसीने के जरिए बह जाती है, लेकिन विज्ञान का खुलासा इससे बिल्कुल अलग और हैरान करने वाला है। सांस के जरिए बाहर निकलती है अधिकांश चर्बी यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के दो शोधकर्ताओं ने द कन्वरसेशन में छपे एक अध्ययन में इस शारीरिक क्रिया को विस्तार से समझाया है। उनके अनुसार, जब शरीर का वजन घटता है, तो चर्बी का सबसे बड़ा हिस्सा सांस छोड़ने के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड बनकर बाहर निकलता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि शरीर से फैट घटाने की प्रक्रिया में फेफड़ों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि सिर्फ जानबूझकर तेज सांस लेने से चर्बी गलने लगेगी। इसके लिए शरीर को जितनी ऊर्जा भोजन से मिलती है, उससे कहीं अधिक ऊर्जा दैनिक गतिविधियों और कसरत में खर्च करनी पड़ती है। शरीर में चर्बी जमा होने की जैविक प्रक्रिया हमारे शरीर में चर्बी जमा होने का एक खास जैविक चक्र होता है। जब भी हम भोजन ग्रहण करते हैं, हमारा पाचन तंत्र उसमें मौजूद वसा को फैटी एसिड में तब्दील कर देता है। हमारा शरीर इन फैटी एसिड का इस्तेमाल कई अहम कार्यों में करता है, जिनमें नई कोशिकाएं बनाना, हार्मोन का सही संचालन सुनिश्चित करना और आंतरिक अंगों को सुरक्षा प्रदान करना शामिल है। जब आहार के जरिए जरूरत से ज्यादा ऊर्जा शरीर में पहुंचती है, तो शरीर उसे ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में फैट सेल्स यानी वसा कोशिकाओं में सहेज कर रख लेता है। मानव शरीर में चर्बी का भंडारण मुख्य रूप से दो हिस्सों में देखने को मिलता है। पहला हिस्सा त्वचा की ठीक निचली परत पर होता है, जिसे सबक्यूटेनियस फैट कहा जाता है। दूसरा हिस्सा हमारे पेट और अंदरूनी अंगों के इर्द-गिर्द इकट्ठा होता है, जिसे मेडिकल भाषा में विसरल फैट के नाम से जाना जाता है। विसरल फैट का ज्यादा बढ़ना सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदेह माना जाता है। ऊर्जा की कमी होने पर कैसे टूटता है फैट जब कोई व्यक्ति भोजन के माध्यम से मिलने वाली कैलोरी से ज्यादा कैलोरी शारीरिक गतिविधियों में खर्च करता है, तब शरीर में ऊर्जा की कमी पैदा होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए शरीर जमा चर्बी का इस्तेमाल ईंधन के रूप में करने लगता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान शरीर का नर्वस सिस्टम और खास हार्मोन मिलकर फैट सेल्स में जमा ट्राइग्लिसराइड्स को तोड़ने का संकेत भेजते हैं। इस जैविक प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में लिपोलाइसिस कहा जाता है। लिपोलाइसिस के बाद मुक्त हुए फैटी एसिड रक्त के जरिए कोशिकाओं के पावरहाउस यानी माइटोकॉन्ड्रिया तक पहुंचते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया में बीटा-ऑक्सीडेशन नामक प्रक्रिया शुरू होती है, जिसके जरिए इन फैटी एसिड को तोड़कर जरूरी ऊर्जा बनाई जाती है। ऊर्जा उत्पादन की इसी प्रक्रिया के सह-उत्पाद के तौर पर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी तैयार होते हैं। किस रास्ते से बाहर निकलती है टूटी हुई चर्बी वैज्ञानिक शोध के आंकड़ों के अनुसार, वजन घटने पर टूटने वाली चर्बी का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा कार्बन डाइऑक्साइड में तब्दील हो जाता है। यह गैस रक्त के जरिए फेफड़ों तक पहुंचती है और सांस बाहर छोड़ते समय शरीर से निकल जाती है। बाकी बचा हुआ लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा पानी में बदलता है। यह पानी पसीने, यूरिन और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के जरिए उत्सर्जित होता है। हालांकि ये आंकड़े अनुमानों पर आधारित हैं, लेकिन इनसे यह साफ हो जाता है कि पसीना चर्बी निकलने का अकेला या मुख्य रास्ता नहीं है, बल्कि सांस ही फैट उत्सर्जन का प्रमुख माध्यम है। क्या सिर्फ गहरी सांसें लेने से घट सकता है वजन अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि अगर सांस के रास्ते चर्बी बाहर निकलती है, तो तेज सांसें लेने से वजन जल्दी घट जाएगा। विशेषज्ञों ने साफ किया है कि केवल तेजी से सांस लेने या हाइपरवेंटिलेशन से चर्बी नहीं जलती। फैट को तोड़ने के लिए कोशिकाओं के स्तर पर ऊर्जा की मांग पैदा करना अनिवार्य है, जो सिर्फ कैलोरी की खपत कम करने और शारीरिक मेहनत बढ़ाने से ही संभव है। स्वस्थ व संतुलित आहार लेने के साथ नियमित कसरत की दिनचर्या अपनाना ही वजन घटाने का एकमात्र सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीका है। इसका आप पर असर यह जानकारी वजन घटाने के प्रति आपके नजरिए और फिटनेस रूटीन की समझ को पूरी तरह बदल देती है। • पसीने का भ्रम: ज्यादा पसीना बहाने का मतलब ज्यादा चर्बी गलना बिल्कुल नहीं होता है। पसीना केवल शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए पानी बाहर निकालता है, जबकि फैट का मुख्य हिस्सा सांस के जरिए घटता है। • कसरत का सही तरीका: केवल तेजी से सांस लेने के बजाय एरोबिक और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर ध्यान दें। ऐसी कसरत से मांसपेशियों में ऑक्सीजन की खपत बढ़ती है, जिससे फैट का ऑक्सीडेशन तेज होता है। • डाइट पर फोकस: जब तक आप अपनी जरूरत से कम कैलोरी नहीं खाएंगे, तब तक फैट ब्रेकडाउन शुरू नहीं होगा। संतुलित खानपान ही शरीर को जमा ट्राइग्लिसराइड्स इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करता है। • वजन मापने की समझ: कसरत के तुरंत बाद वजन कम दिखना केवल पानी की कमी हो सकती है। असली चर्बी घटने में समय लगता है क्योंकि वह धीरे-धीरे सांस के रास्ते गैस बनकर निकलती है। ऐसा क्यों हुआ मानव शरीर में फैट स्टोरेज और उसके मेटाबॉलिज्म के पीछे एक गहरा बायोकेमिकल कारण मौजूद है, जिसे समझना बेहद जरूरी है। • ऊर्जा का भंडारण: हमारे पूर्वजों के समय से ही शरीर भोजन की अतिरिक्त ऊर्जा को आपात स्थिति के लिए वसा के रूप में सुरक्षित रखने के लिए प्रोग्राम किया गया है। जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेते हैं, तो फैटी एसिड ट्राइग्लिसराइड्स बनकर फैट कोशिकाओं में जमा हो जाते हैं। • ऊर्जा संकट का संकेत: जब भोजन कम मिलता है या शारीरिक गतिविधि बढ़ जाती है, तो हार्मोनल सिग्नल ट्राइग्लिसराइड्स को तोड़ने के लिए लिपोलाइसिस की शुरुआत करते हैं। यही कमी शरीर को अपने जमा ईंधन भंडार को खोलने पर मजबूर करती है। • माइटोकॉन्ड्रिया में दहन: मुक्त हुए फैटी एसिड को जब ऊर्जा में बदला जाता है, तो कार्बन और हाइड्रोजन के अणु टूटते हैं। ऑक्सीजन के साथ मिलकर कार्बन से कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन से पानी बनता है, जो प्राकृतिक उत्सर्जी मार्गों से बाहर आता है। सवाल-जवाब 1. वजन घटने पर शरीर की चर्बी सबसे ज्यादा किस रास्ते बाहर निकलती है? वजन कम होने पर पिघलने वाली लगभग 84 प्रतिशत चर्बी कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में सांस छोड़ते समय फेफड़ों के जरिए बाहर निकलती है। 2. चर्बी का बाकी 16 प्रतिशत हिस्सा किस रूप में शरीर से बाहर जाता है? बाकी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा पानी में बदल जाता है, जो पसीने, यूरिन और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के जरिए बाहर निकलता है। 3. क्या तेजी से सांस लेने से सीधे तौर पर वजन कम हो सकता है? नहीं, केवल जानबूझकर तेजी से सांस लेने से फैट नहीं घटता। इसके लिए शरीर में कैलोरी की कमी और नियमित शारीरिक मेहनत जरूरी है। 4. शरीर में चर्बी मुख्य रूप से किन दो जगहों पर जमा होती है? शरीर में वसा मुख्य रूप से त्वचा के नीचे सबक्यूटेनियस फैट के रूप में और आंतरिक अंगों के चारों ओर विसरल फैट के रूप में जमा होती है। 5. फैट को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को विज्ञान में क्या कहा जाता है? फैट सेल्स में ट्राइग्लिसराइड्स के टूटने को लिपोलाइसिस और माइटोकॉन्ड्रिया में ऊर्जा बनने की प्रक्रिया को बीटा-ऑक्सीडेशन कहा जाता है। https://trendkia.com/health/sharira-se-phaita-kaise-hota-hai-gayaba-shodhakartaon-ne-samajhaya-vajana-ghatane-para-charbi-ka-phepharon-se-bahara-nikalane-ka-v-48912 TrendKia — Har trend, sabse pehle.