शिशुओं की नाजुक आंखों में काजल लगाना पड़ सकता है भारी, बाल रोग विशेषज्ञ ने गिनाए खतरे पारंपरिक तौर पर बच्चों को काजल लगाना भले ही आम रहा हो, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शुक्ला ने रसायनों और संक्रमण के जोखिम को देखते हुए इससे पूरी तरह बचने की सलाह दी है। भारतीय परिवारों में नवजात शिशुओं की आंखों में काजल लगाने का चलन सदियों पुराना रहा है। बुजुर्ग अक्सर बुरी नजर से बचाने और आंखों को धूल-धक्कड़ से सुरक्षित रखने के मकसद से बच्चों को काजल लगाते रहे हैं। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से अब स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस पारंपरिक तरीके को बच्चों की नाजुक सेहत के लिए नुकसानदेह मान रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शुक्ला का कहना है कि नवजात और छोटे बच्चों के नेत्र बेहद कोमल तथा संवेदनशील होते हैं, इसलिए काजल का नियमित प्रयोग उनकी दृष्टि और नेत्र स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। बाजार के काजल में मौजूद रसायन और बैक्टीरिया का खतरा व्यावसायिक रूप से बिकने वाले उत्पादों की गुणवत्ता हमेशा बच्चों के अनुकूल नहीं होती। डॉ. मुकेश शुक्ला के अनुसार, बाजार में उपलब्ध कई प्रकार के काजल में कृत्रिम रंग और घातक रासायनिक तत्व मिले होते हैं, जो छोटे बच्चों के लिए कतई सुरक्षित नहीं हैं। जब माता-पिता या परिजन शिशु की आंख के भीतर या पलकों के किनारों पर काजल लगाते हैं, तो संक्रमण फैलने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा, काजल लगाते समय उंगलियों का सीधा संपर्क आंखों से होता है। यदि हाथ पूरी तरह स्वच्छ न हों, तो हाथों में मौजूद बैक्टीरिया सीधे शिशु की आंखों में पहुंच जाते हैं, जिससे नेत्र संक्रमण पनपने लगता है। आंखों में जलन, एलर्जी और चोट की आशंका काजल के संपर्क में आने से बच्चों को कई तरह की शारीरिक असहजता झेलनी पड़ सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि काजल लगाने के बाद नन्हे बच्चों की आंखों में तीव्र जलन, लालिमा, अत्यधिक पानी बहना और लगातार खुजली होने की शिकायतें सामने आती हैं। यदि काजल का कोई छोटा कण भी पुतली के भीतर प्रवेश कर जाए, तो वह अंदर रगड़ पैदा करता है, जिससे तेज दर्द हो सकता है। असहजता महसूस होने पर अबोध बच्चे बार-बार अपनी उंगलियों से आंखों को मलते हैं। ऐसा करने से न केवल संक्रमण तेजी से फैलता है, बल्कि आंख की नाजुक सतह पर खरोंच या चोट लगने का डर भी बना रहता है। घर पर बने काजल की स्वच्छता पर भी सवाल अक्सर यह माना जाता है कि घर में दीपक की लौ से तैयार किया गया देसी काजल पूरी तरह सुरक्षित होता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ इस दावे से इत्तेफाक नहीं रखते। डॉ. मुकेश के मुताबिक, घरेलू स्तर पर तैयार किए जाने वाले काजल को भी पूरी तरह हानिरहित नहीं कहा जा सकता। काजल बनाने, उसे इकट्ठा करने और डिब्बी में सुरक्षित रखने के दौरान यदि स्वच्छता का कड़ा ध्यान न रखा जाए, तो उसमें हानिकारक सूक्ष्म जीव और फफूंद पनप सकते हैं। ऐसे में लंबे समय तक इसका प्रयोग बच्चों की आंखों में अज्ञात विषैले तत्व और रोगाणु पहुंचा सकता है। आंखों की सुरक्षा के सही उपाय और चिकित्सीय परामर्श नेत्रों की प्राकृतिक सुरक्षा और विकास के लिए काजल का कोई वैज्ञानिक या चिकित्सीय आधार नहीं है। बच्चों की आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए किसी भी तरह के बाहरी लेप की आवश्यकता नहीं होती। यदि कभी शिशु की आंख में धूल का कण या कोई बाहरी वस्तु चली जाए, तो उसमें घरेलू नुस्खे आजमाने या काजल लगाने के बजाय उसे केवल साफ व स्वच्छ पानी से धोना चाहिए। आंखों की सफाई के बहाने भी किसी घरेलू वस्तु को आंख के भीतर नहीं डालना चाहिए। दादी-नानी का यह नुस्खा भले ही स्नेह और लाड़-प्यार से जुड़ा हो, लेकिन आज के दौर में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि बच्चे की आंख में सूजन, लाली, लगातार पानी गिरने या दर्द के लक्षण दिखें, तो बिना कोई घरेलू उपाय किए सीधे बाल रोग विशेषज्ञ या नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। इसका आप पर असर यह परामर्श माता-पिता को नवजात शिशुओं की आंखों में पारंपरिक काजल लगाने के हानिकारक प्रभावों से सचेत करता है। • शिशुओं की सुरक्षा: बच्चों की आंखों में काजल का प्रयोग तुरंत बंद करना आवश्यक है। इससे रासायनिक एलर्जी और बैक्टीरिया के कारण होने वाले गंभीर नेत्र संक्रमण से बचाव होता है। • घरेलू नुस्खों पर रोक: घर में तैयार किए गए काजल को भी शिशुओं के लिए सुरक्षित न समझें। स्वच्छता की कमी के चलते इसमें मौजूद रोगाणु बच्चे की दृष्टि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। • आपातकालीन सफाई: आंख में धूल या कचरा जाने पर किसी भी लेप के बजाय केवल स्वच्छ पानी से आंखें धोएं। किसी भी घरेलू पदार्थ को आंख के अंदर डालना स्थिति को बिगाड़ सकता है। • चिकित्सीय जांच: आंखों में लालिमा, सूजन या लगातार पानी आने पर घरेलू उपचार के बजाय फौरन बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें। समय पर ली गई सलाह बच्चे की दृष्टि को स्थायी क्षति से बचाती है। ऐसा क्यों हुआ बच्चों की आंखों में काजल लगाने से होने वाले नुकसान के पीछे चिकित्सा विज्ञान और स्वच्छता से जुड़े कई ठोस कारण हैं। • रासायनिक और अशुद्ध तत्व: बाजार के काजल में रंग और कृत्रिम रसायन मिलाए जाते हैं, जो संवेदनशील त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली के लिए हानिकारक होते हैं। ये तत्व सीधे तौर पर एलर्जी और जलन पैदा करते हैं। • अस्वच्छ हाथों से संपर्क: काजल लगाते समय उंगलियों के माध्यम से रोगाणु सीधे आंख की सतह तक पहुंच जाते हैं। शिशुओं की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण यह संपर्क तेजी से बैक्टीरियल संक्रमण का रूप ले लेता है। • घरेलू निर्माण में स्वच्छता की कमी: घर पर काजल बनाते और रखते समय रोगाणुमुक्त वातावरण नहीं मिल पाता। वातावरण में मौजूद धूल और सूक्ष्म जीव आसानी से काजल के मिश्रण में मिलकर संक्रमण का कारण बनते हैं। • शिशुओं द्वारा आंखें रगड़ना: काजल के कण आंख में जाने पर होने वाली चुभन से बच्चे अपनी आंखें रगड़ते हैं। इस घर्षण से आंख के कोमल ऊतकों पर खरोंच आने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। सवाल-जवाब 1. क्या छोटे बच्चों की आंखों में काजल लगाना सुरक्षित है? बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शुक्ला के अनुसार, बच्चों की आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं और काजल लगाने से संक्रमण व एलर्जी का खतरा रहता है। 2. बाजार में मिलने वाले काजल से बच्चों को क्या नुकसान हो सकता है? बाजार के काजल में रासायनिक पदार्थ और कृत्रिम रंग होते हैं, जो आंखों में जलन, लालिमा, खुजली और पानी आने की समस्या पैदा कर सकते हैं। 3. क्या घर पर बना देसी काजल बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होता है? नहीं, घर पर बने काजल को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता क्योंकि बनाने और रखने के दौरान स्वच्छता की कमी से उसमें हानिकारक सूक्ष्म जीव पनप सकते हैं। 4. अगर बच्चे की आंख में धूल चली जाए तो क्या करना चाहिए? धूल जाने पर किसी भी तरह का काजल या घरेलू नुस्खा अपनाने के बजाय आंख को केवल साफ पानी से धोना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 5. बच्चे की आंख में कौन से लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? यदि आंख में लालिमा, सूजन, लगातार पानी आना या दर्द की शिकायत दिखे, तो बिना देरी किए बाल रोग विशेषज्ञ या नेत्र चिकित्सक को दिखाना चाहिए। https://trendkia.com/health/shishuon-ki-najuka-ankhon-men-kajal-lagana-para-sakata-hai-bhari-pediatrician-ne-ginae-khatare-43833 TrendKia — Har trend, sabse pehle.