# शिशुओं में भूख की कमी और खराब पाचन से राहत पाने के आसान घरेलू तरीके

> छोटे बच्चों के दूध न पीने या पाचन बिगड़ने के पीछे पेट में ऐंठन और कीड़े जैसी वजहें हो सकती हैं। विशेषज्ञ ने कुछ घरेलू उपचार सुझाए हैं, लेकिन किसी भी उपाय से पहले चिकित्सकीय परामर्श बेहद जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-10-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/shishuon-men-bhukha-ki-kami-aura-kharaba-pachana-se-rahata-pane-ke-asana-gharelu-tarike-44881 · **Language:** Hindi
**Tags:** शिशु स्वास्थ्य, पाचन उपाय, घरेलू नुस्खे, बच्चों का आहार, डॉक्टर की सलाह, मऊ

शिशु का अचानक दूध पीने से इनकार करना, सामान्य से कम खुराक लेना या फिर दूध पीते ही तुरंत उल्टी कर देना हर माता-पिता के लिए भारी परेशानी का सबब बन जाता है। इस प्रकार की शारीरिक परेशानी के पीछे कई सामान्य कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनमें शिशु का पेट पहले से भरा रहना, पेट में कीड़े होना या फिर पेट में मरोड़ और दर्द की समस्या शामिल है। मऊ स्थित आयुर्वेदिक यूनानी चिकित्सालय के चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद इमरान ने ऐसी असहज परिस्थितियों से निपटने के लिए कुछ पारंपरिक और सुरक्षित घरेलू सुझाव साझा किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी आगाह किया है कि नन्हे शिशुओं पर किसी भी प्रकार का नुस्खा आजमाने से पहले हमेशा एक योग्य डॉक्टर की सलाह अवश्य ली जानी चाहिए।

## दूध न पीने के सामान्य कारण और नाभि पर हींग का प्रयोग
डॉ. मोहम्मद इमरान के अनुसार जब कोई नन्हा बच्चा नियमित रूप से दूध पीने से कतराने लगे, तो सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि कहीं उसका पेट पहले से पूरी तरह भरा हुआ तो नहीं है। कई बार आंतों में कीड़े सक्रिय होने अथवा पेट में गैस और मरोड़ उठने की वजह से भी शिशु असहज होकर दूध से दूरी बना लेता है। ऐसी असहज स्थिति में डॉक्टर एक सरल घरेलू प्रक्रिया अपनाने का सुझाव देते हैं। इसके तहत थोड़ी सी शुद्ध हींग को हल्के गुनगुने पानी में अच्छी तरह घोल लें और फिर इस घोल को शिशु की नाभि के चारों ओर बेहद हल्के हाथों से धीरे-धीरे लगाएं। यह प्रक्रिया गैस और मरोड़ से राहत दिलाने में सहायक मानी जाती है।

## गाय या भैंस का दूध उबालते समय रखें इन बातों का ध्यान
डॉ. इमरान का कहना है कि कई बार छोटे बच्चों के लिए गाय अथवा भैंस का भारी दूध पचाना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनके शरीर में कफ बनने जैसी परेशानियां उभरने लगती हैं। पाचन की इस बाधा को दूर करने के लिए उन्होंने एक उपयोगी तरीका सुझाया है। जब भी बच्चे के लिए गाय या भैंस का दूध गर्म किया जा रहा हो, तो उसमें थोड़ी सी इलायची और मात्र एक चुटकी सोंठ का चूर्ण डालकर अच्छी तरह उबाल लेना चाहिए। इस तरह तैयार किया गया दूध बच्चों के पाचन तंत्र के लिए काफी सुपाच्य और हल्का साबित हो सकता है।

## दूध पिलाते समय दबाव न बनाएं, बड़े बच्चों के आहार में जोड़ें घी और काली मिर्च
खान-पान के दौरान बच्चों के साथ सख्ती बरतने को लेकर भी विशेषज्ञ ने अभिभावकों को सतर्क किया है। उनका कहना है कि शिशु को आहार या दूध देते समय किसी भी सूरत में जोर-जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए। दबाव डालकर खिलाने या पिलाने की कोशिश से बच्चे के स्वाभाविक खान-पान का चक्र और आदतें लंबे समय के लिए बिगड़ सकती हैं, इसलिए उसकी शारीरिक जरूरत को धैर्य से समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि बच्चा कुछ बड़ा हो चुका है और वह दाल, चावल या खिचड़ी जैसे ठोस आहार खाने लगा है, तो उसके भोजन में थोड़ी सी पिसी हुई काली मिर्च और शुद्ध गाय का घी मिलाया जा सकता है। यह संयोजन बच्चे की जठराग्नि और पाचन क्रिया को मजबूत बनाने में प्रभावी योगदान देता है।

## शिशुओं के लिए जायफल का इस्तेमाल और चिकित्सकीय सावधानी
छह महीने से कम उम्र के नन्हे शिशुओं के संदर्भ में डॉ. इमरान ने जायफल को दूध के साथ हल्का सा घिसकर जीभ पर लगाने का एक पारंपरिक नुस्खा भी बताया है। मगर इसके साथ ही उन्होंने कड़े शब्दों में यह चेतावनी भी दी है कि इतने छोटे शिशु को कोई भी बाहरी चीज देने से पूर्व बाल रोग विशेषज्ञ से विधिवत परामर्श करना अनिवार्य है। विशेषकर छह माह से छोटे बच्चों को बिना डॉक्टरी राय के मां के दूध या अनुशंसित दूध के अलावा कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए। किसी भी घरेलू प्रयोग को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लेना इसलिए भी जरूरी है ताकि बच्चे को किसी प्रकार की अप्रत्याशित एलर्जी, रिएक्शन अथवा अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना न करना पड़े।

## इसका आप पर असर
यह जानकारी छोटे बच्चों के पाचन विकारों और भूख न लगने की समस्या से जूझ रहे परिवारों के लिए सीधे तौर पर उपयोगी है।

- **खान-पान के नियम:** दूध पीते समय बच्चों पर किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक दबाव न बनाएं। इससे शिशु की प्राकृतिक भूख और खाने की आदतें सुरक्षित बनी रहती हैं।
- **शिशुओं की सुरक्षा:** छह महीने से छोटे बच्चों को बिना बाल रोग विशेषज्ञ के परामर्श के कोई भी घरेलू सामग्री न दें। ऐसा करने से नन्हे बच्चों को अप्रत्याशित एलर्जी या साइड इफेक्ट से बचाया जा सकता है।
- **आहार में सुधार:** ठोस आहार लेने वाले बड़े बच्चों के भोजन में थोड़ी काली मिर्च और गाय का घी शामिल करें। इससे बच्चे की आंतों का स्वास्थ्य और पाचन क्षमता बेहतर होती है।
- **उबालने की विधि:** गाय या भैंस का दूध देते समय इलायची और सोंठ डालकर ही उबालें। यह सावधानी बच्चे में कफ और पेट फूलने की समस्या को रोकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
छोटे बच्चों में भूख में गिरावट और पाचन संबंधित विकार पेट की संवेदनशीलता और अनुचित आहार प्रबंधन के कारण उत्पन्न होते हैं।

- **शारीरिक असुविधा:** आंतों में गैस, मरोड़ अथवा कीड़े होने से शिशु को पेट में दर्द का अनुभव होता है। इस असहजता के चलते बच्चा दूध अथवा ठोस आहार को स्वीकार करने से मना कर देता है।
- **भारी दूध का प्रभाव:** गाय या भैंस के अपरिष्कृत दूध की तासीर नवजात आंतों के लिए भारी हो सकती है। इसे ठीक से न पचा पाने पर बच्चे में कफ का जमाव और उल्टी की समस्या बढ़ जाती है।
- **जबरदस्ती का नतीजा:** अभिभावकों द्वारा बार-बार जबरन दूध पिलाने की कोशिश से बच्चे का पाचन तंत्र तनाव में आ जाता है। इससे बच्चा खाने-पीने से पूरी तरह विमुख होने लगता है।

## सवाल-जवाब

### 1. बच्चे के पेट में दर्द या मरोड़ होने पर नाभि पर क्या लगाना चाहिए?
हल्के गुनगुने पानी में थोड़ी सी हींग घोलकर बच्चे की नाभि के आसपास हल्के हाथों से लगाई जा सकती है।

### 2. गाय या भैंस का दूध सुपाच्य बनाने के लिए क्या मिलाना चाहिए?
दूध को उबालते समय उसमें थोड़ी इलायची और एक चुटकी सोंठ का पाउडर मिलाकर पकाना चाहिए।

### 3. ठोस आहार खाने वाले बच्चों के पाचन के लिए क्या उपयोगी है?
खिचड़ी, दाल या चावल जैसे आहार में गाय का घी और थोड़ी काली मिर्च पाउडर मिलाकर देना फायदेमंद माना जाता है।

### 4. क्या 6 महीने से छोटे बच्चों को सीधे घरेलू नुस्खे दिए जा सकते हैं?
नहीं, 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं को बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह के बिना कोई भी घरेलू उपचार या बाहरी चीज नहीं देनी चाहिए।

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