सितंबर और अक्टूबर में कटिंग से सजाएं अपनी बगिया, विशेषज्ञ से जानिए टहनियों से नए पौधे उगाने की सही विधि सितंबर और अक्टूबर का सुहावना मौसम कटिंग से नए पौधे तैयार करने का बेहतरीन अवसर देता है। बागवानी विशेषज्ञ के बताए नियमों का पालन कर घर पर ही खूबसूरत फूल और पौधे आसानी से उगाए जा सकते हैं। घर की बालकनी, खुली छत या छोटे से आंगन को मनमोहक फूलों और हरियाली से महकाना हर प्रकृति प्रेमी की चाहत होती है। यदि आप भी अपने आशियाने को हरा भरा रूप देना चाहते हैं, तो सितंबर और अक्टूबर के महीने आपके लिए बागवानी की नई शुरुआत करने का सबसे मुफीद अवसर लेकर आते हैं। इस बदलते मौसम की खासियत यह है कि आप केवल पुरानी टहनियों की कटिंग लगाकर दर्जनों नए पौधे आसानी से तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपको न तो भारी भरकम गमले खरीदने की दरकार है और न ही नर्सरी पर ढेर सारे पैसे खर्च करने पड़ते हैं। थोड़ी सी समझदारी और सही तकनीक अपनाकर आप बिना किसी अतिरिक्त लागत के अपनी बगिया को संवार सकते हैं। कटिंग तैयार करने की सही तकनीक और नाप एक नए और स्वस्थ पौधे के जन्म के लिए टहनी का सही चुनाव सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। कटिंग तैयार करने के लिए हमेशा किसी स्वस्थ और मजबूत पौधे की लगभग 4 से 6 इंच लंबी टहनी को ही चुनें। टहनी काटते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसके निचले सिरे की सभी पत्तियों को धीरे से हटा दिया जाए, जिससे मिट्टी के भीतर जाने वाला हिस्सा पूरी तरह साफ रहे। इसके बाद इस साफ टहनी को तैयार गमले में करीब 1 से 2 इंच की गहराई तक मिट्टी में दबाया जाना चाहिए। जब कटिंग की लंबाई सही अनुपात में होती है और उसका तना साफ रहता है, तब मिट्टी के संपर्क में आने पर उसमें से नई जड़ें फूटने की संभावना काफी बढ़ जाती है। जल निकासी और मिट्टी का सटीक संतुलन नया पौधा उगाने के लिए मिट्टी की बनावट और उसकी गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कटिंग लगाने के लिए सदा ऐसी भुरभुरी मिट्टी का उपयोग करना चाहिए, जिसमें डाला गया पानी नीचे से आसानी से बाहर निकल सके। मिट्टी के भीतर हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन रोज आवश्यकता से अधिक पानी उड़ेलने से बचना बहुत जरूरी है। यदि गमले में पानी जमा होने लगेगा तो नई कोमल कटिंग का निचला सिरा सड़ जाएगा और आपकी मेहनत बेकार हो जाएगी। इसी खतरे से बचने के लिए हमेशा बेहतर ड्रेनेज होल या जल निकासी वाले गमलों का ही चुनाव किया जाना चाहिए। मौसम की मार से बचाव और सही रोशनी नवोदित कटिंग को सीधे कड़े मौसम के हवाले नहीं किया जा सकता। कटिंग लगे गमलों को ऐसे स्थान पर स्थापित करें, जहां दिन के समय पर्याप्त उजाला और हल्की रोशनी तो पहुंचे, मगर उन पर तेज मूसलाधार बारिश या सीधे तीखी धूप का दबाव न पड़े। बरसात के मौसम में गमलों को किसी छत, छज्जे या सुरक्षित साए के नीचे रखना सबसे मुफीद रहता है। जब पौधे को संतुलित तापमान, हल्की छनकर आती रोशनी और नियंत्रित नमी मिलती है, तो वह बिना किसी झटके के बहुत तेजी से अपनी जड़ें फैलाने लगता है। गुलाब, गुड़हल और लताओं को उगाने के नियम गुड़हल और गुलाब जैसे सदाबहार फूलों के शौकीन लोग भी कटिंग के जरिए अपने पसंदीदा पौधों की संख्या बढ़ा सकते हैं। इसके लिए बस एक निरोगी टहनी का चुनाव करके उसकी निचली पत्तियां हटाएं और उपयुक्त जल निकासी वाली मिट्टी में रोप दें। चूंकि इन काष्ठीय फूलों में नई जड़ें फूटने में थोड़ा अधिक वक्त लगता है, इसलिए शुरुआत में धैर्य बरतना आवश्यक है। कई लोग उत्सुकता में कटिंग को बार-बार मिट्टी से बाहर खींचकर देखने लगते हैं कि जड़ें आईं या नहीं, इस घातक गलती से बचना चाहिए। इसके अलावा मनी प्लांट और चमेली भी घर में कटिंग से तैयार होने वाले बेहद आसान पौधे हैं। जहां मनी प्लांट उचित नमी मिलते ही तेजी से पनपने लगता है, वहीं चमेली की टहनी को सुरक्षित स्थान और संतुलित पानी की जरूरत होती है। पौधों के बीच की दूरी और क्यारी का प्रबंधन बरसात के इस मौसम में आप तुलसी के पुराने पौधों के बीच नए छोटे पौधे रोपकर अपनी क्यारी को घना बना सकते हैं। ठीक इसी तर्ज पर सदाबहार के बड़े पौधों के पास छोटे सदाबहार के पौधे लगाए जा सकते हैं, जो वक्त बीतने के साथ फैलकर पूरी क्यारी को रंग बिरंगे फूलों से भर देते हैं। गमले या क्यारी में रोपाई करते समय पौधों के बीच पर्याप्त दूरी का ध्यान रखना अनिवार्य है, ताकि उनकी जड़ों और शाखाओं को फैलने के लिए पूरी खुली जगह मिल सके। विशेषज्ञ की सलाह और सावधानियां बागवानी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. सत्यनारायण के अनुसार, कटिंग लगाने के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि गमले की मिट्टी में नमी बनी रहे, लेकिन किसी भी सूरत में वहां पानी जमा न हो। डॉ. सत्यनारायण ने बताया कि सितंबर और अक्टूबर का मौसम कई तरह के पौधों को उगाने के लिए बेहद अनुकूल साबित हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक पौधे की टहनी मौसम और वातावरण के प्रति अलग ढंग से प्रतिक्रिया देती है, इसलिए अनुकूल पौधे का चुनाव करने के साथ-साथ उसकी नियमित और सतर्क देखभाल करना सफलता की कुंजी है। इसका आप पर असर घर में बागवानी करने वाले लोगों के लिए यह खबर बिना किसी खर्च के सुंदर बगीचा तैयार करने का सीधा रास्ता दिखाती है। • लागत में बचत: महंगे नए पौधे खरीदने के बजाय घर में मौजूद टहनियों से पौधे उगाए जा सकते हैं। इससे नर्सरी पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से पूरी राहत मिलती है। • मौसम का लाभ: सितंबर और अक्टूबर का मौसम पौधों में नई जड़ें जमाने के लिए सबसे अनुकूल होता है। इस सीमित अवधि का सही उपयोग करके घर की बगिया को आसानी से संवारा जा सकता है। • सजावट में मदद: बालकनी और कम जगह वाले घरों में भी छोटे गमलों की मदद से हरियाली बढ़ाई जा सकती है। इससे घर के वातावरण को आकर्षक और तरोताजा बनाए रखने में मदद मिलती है। • पौधों की सुरक्षा: गमले में पानी जमा होने से रोकने के आसान तरीकों से पौधे सड़ने से बचते हैं। सही तकनीक अपनाने से हर टहनी के पनपने की उम्मीद बढ़ जाती है। ऐसा क्यों हुआ सितंबर और अक्टूबर के महीनों में पौधों की कटिंग तेजी से पनपने के पीछे मौसमी बदलाव और संतुलित वातावरण मुख्य कारक होते हैं। इस समय हवा में उपयुक्त नमी बनी रहती है, जो जड़ों के विकास में सहायक होती है। • मौसम की अनुकूलता: मानसून के अंत और हल्की ठंड की शुरुआत में मिट्टी का तापमान स्थिर रहता है। यह संतुलित जलवायु नई टहनियों को सूखने से बचाती है और जड़ें बनने की रफ्तार तेज करती है। • अत्यधिक धूप का अभाव: गर्मियों की झुलसाने वाली धूप के मुकाबले इस मौसम में रोशनी सौम्य होती है। हल्की धूप मिलने से कोमल टहनियां बिना किसी तनाव के विकास कर पाती हैं। • उचित नमी का स्तर: इस समय वातावरण में बनी प्राकृतिक नमी मिट्टी को लंबे समय तक नम रखती है। इससे बार-बार पानी डालने की मजबूरी खत्म हो जाती है और कटिंग सुरक्षित रहती है। सवाल-जवाब 1. कटिंग लगाने के लिए टहनी की लंबाई कितनी होनी चाहिए? कटिंग तैयार करने के लिए किसी स्वस्थ पौधे की लगभग 4 से 6 इंच लंबी टहनी लेनी चाहिए। 2. टहनी को मिट्टी में कितनी गहराई तक लगाना चाहिए? टहनी के निचले हिस्से की पत्तियां साफ करके उसे लगभग 1 से 2 इंच की गहराई तक मिट्टी में दबाना चाहिए। 3. कटिंग लगाने के लिए किस मौसम को सबसे अच्छा माना गया है? बागवानी विशेषज्ञ के अनुसार सितंबर और अक्टूबर का मौसम कटिंग से पौधे तैयार करने के लिए बहुत अनुकूल होता है। 4. कटिंग वाले गमले में पानी डालते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए? मिट्टी में केवल हल्की नमी बनाए रखनी चाहिए और गमले में पानी जमा होने से बचाना चाहिए ताकि तना न सड़े। 5. घर पर किन फूलों और पौधों की कटिंग आसानी से लगाई जा सकती है? गुड़हल, गुलाब, मनी प्लांट, चमेली, तुलसी और सदाबहार जैसे पौधों की कटिंग घर पर लगाई जा सकती है। https://trendkia.com/health/sitnbara-aura-aktubara-men-katinga-se-sajaen-apani-bagiya-visheshajna-se-janie-tahaniyon-se-nae-paudhe-ugane-ki-sahi-vidhi-34374 TrendKia — Har trend, sabse pehle.