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  "type": "article",
  "title": "स्क्रीन पर चिपके बच्चों के जोड़ों में उठ रहा दर्द, अंबाला में डॉक्टरों ने दी चेतावनी",
  "summary": "अंबाला में कम उम्र के बच्चों और युवाओं में जोड़ों के दर्द की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल पर ज्यादा समय बिताना और फिजिकल एक्टिविटी में कमी इसके मुख्य कारण हैं।",
  "content": "अंबाला में बच्चों और युवाओं की बदलती दिनचर्या अब उनकी सेहत पर भारी पड़ने लगी है। एक समय था जब शाम ढलते ही मैदान बच्चों की किलकारियों से गूंज उठते थे, जहां क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी और साइकिलिंग जैसी आउटडोर गतिविधियों के जरिए उनका वक्त बीतता था। लेकिन आज के दौर में मैदान खाली रहते हैं और बच्चों की दुनिया मोबाइल स्क्रीन व ऑनलाइन गेमिंग तक सिमट कर रह गई है। वे घंटों एक ही जगह बैठकर स्क्रीन से चिपके रहते हैं, जिसका खामियाजा अब उनके शरीर को भुगतना पड़ रहा है। कम उम्र में ही घुटनों और जोड़ों में दर्द की गंभीर समस्याएं सामने आने लगी हैं, और अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में इस तरह की तकलीफ लेकर आने वाले बच्चों तथा युवाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।\n\nबदलती जीवनशैली और कम उम्र में जोड़ों का दर्द\nपारंपरिक तौर पर जोड़ों के दर्द को बुढ़ापे या बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन आधुनिक जीवनशैली ने इस परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है। अब सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बेहद कम उम्र के लोग भी पैरों, घुटनों और शरीर के अन्य जोड़ों में अकड़न व दर्द की शिकायत कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति के पीछे शारीरिक श्रम में भारी कमी और लगातार लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहना मुख्य वजह है। जब युवा और बच्चे लगातार कई-कई घंटे बिना हिले-डुले बिताते हैं, तो हड्डियों और मांसपेशियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।\n\nमोबाइल, ऑनलाइन गेमिंग और घटती शारीरिक गतिविधियां\nअंबाला शहर नागरिक अस्पताल में सेवाएं दे रही होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता के अनुसार, पहले जोड़ों के दर्द के मरीज अमूमन बुजुर्ग ही होते थे, लेकिन अब लगभग 20 साल के युवाओं में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों का बहुमूल्य समय घरों के भीतर स्मार्टफोन, टेलीविजन सेट और ऑनलाइन गेमिंग की वर्चुअल दुनिया में बर्बाद हो रहा है, जिसके चलते उन्हें जरूरी शारीरिक व्यायाम या खेलकूद का मौका नहीं मिल पाता है। यह निष्क्रियता उनके मस्कुलोस्केलेटल तंत्र को कमजोर कर रही है।\n\nखान-पान की आदतें और पोषण की कमी\nशारीरिक गतिविधियों की कमी के अलावा, खान-पान की गलत आदतें भी इस समस्या को और गंभीर बना रही हैं। बच्चों की थाली से घर का बना हुआ पौष्टिक भोजन गायब होता जा रहा है और उसकी जगह जंक फूड, पैकेज्ड आइटम तथा बाहर के फास्ट फूड ने ले ली है। इसके साथ ही, दैनिक आहार में ताजे फल और हरी सब्जियों की मात्रा भी बहुत कम हो गई है। डॉ. रजिता ने सलाह दी है कि सेहतमंद रहने के लिए बच्चों के भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों को प्रमुखता से शामिल किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने हल्दी, अदरक और अखरोट जैसी प्राकृतिक चीजों को भी दैनिक आहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया है, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।\n\nरोजाना एक से दो घंटे का शारीरिक श्रम है जरूरी\nविशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों और युवाओं को अपनी दिनचर्या में हर हाल में फिजिकल एक्टिविटी को जगह देनी चाहिए। प्रयास यह होना चाहिए कि प्रतिदिन कम से कम एक से दो घंटे खेलकूद, तेज वॉक, एक्सरसाइज या अपनी पसंद की किसी अन्य शारीरिक गतिविधि में बिताए जाएं। यदि किसी मजबूरीवश किसी को लंबे समय तक लगातार कुर्सी या बिस्तर पर बैठना पड़ता है, तो उसे बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट टहलना चाहिए। लगातार कई घंटों तक बैठे रहने से शरीर में रक्त का संचार यानी ब्लड सर्कुलेशन सुचारू नहीं रहता है, जिससे पैरों और जोड़ों में समस्याएं पैदा होने लगती हैं। इसलिए बैठे-बैठे भी पैरों और घुटनों की हल्की-फुल्की मूवमेंट या एक्सरसाइज करते रहना चाहिए।\n\nसंतुलित आहार से जोड़ों की सेहत का रखरखाव\nजोड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित खान-पान सबसे बड़ी कुंजी है। भोजन में हल्दी और अदरक का नियमित इस्तेमाल सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, अखरोट में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए गुणकारी हैं। पालक, सरसों और मेथी जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां विभिन्न प्रकार के विटामिंस और मिनरल्स का बेहतरीन स्रोत होती हैं। टमाटर और अन्य मौसमी फलों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और जोड़ों की सेहत को सुधारते हैं। होम्योपैथी उपचार पद्धति का जिक्र करते हुए डॉ. रजिता ने बताया कि इसमें मरीज के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर कई तरह की दवाइयां दी जाती हैं, जिनमें Rhus Tox और Bryonia जैसी औषधियों का मुख्य रूप से उल्लेख मिलता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की दवा का सेवन हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह और देखरेख के बाद ही किया जाना चाहिए।\n\nवजन का बढ़ना और घुटनों पर बढ़ता दबाव\nडॉ. रजिता ने आगाह किया कि घुटनों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए शरीर के वजन को नियंत्रित रखना भी उतना ही अनिवार्य है। शारीरिक रूप से सक्रिय न रहने के कारण मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं और अवांछित वजन बढ़ने से घुटनों के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है। यही अतिरिक्त दबाव और कमजोरी मिलकर भविष्य में जोड़ों की गंभीर बीमारियों को बुलावा देती है, जिससे समय रहते बचना बेहद जरूरी है।\n\nइसका आप पर असर\nकम उम्र में जोड़ों का दर्द बच्चों के शारीरिक विकास और भविष्य की गतिशीलता पर बुरा असर डाल सकता है।\n\n• भारत में: डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण देश भर के बच्चों में मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित कर outdoor गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए।\n• अंबाला में: अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में मौसम बदलने के साथ जोड़ों के दर्द के युवा मरीज पहुंच रहे हैं। स्थानीय अभिभावकों को बच्चों के खान-पान में सुधार लाने और उन्हें रोजाना एक से दो घंटे खेलकूद में व्यस्त रखने की सख्त जरूरत है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कम उम्र के बच्चों में जोड़ों के दर्द की मुख्य वजह क्या है?\nमोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग के कारण शारीरिक गतिविधियों में कमी आना और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना मुख्य वजह है।\n\n2. अंबाला में किस अस्पताल में युवा जोड़ों के दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं?\nअंबाला शहर नागरिक अस्पताल में बच्चे और युवा जोड़ों के दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।\n\n3. जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कितनी शारीरिक गतिविधि जरूरी है?\nबच्चों और युवाओं को रोजाना एक से दो घंटे खेलकूद, वॉक या एक्सरसाइज करनी चाहिए।\n\n4. खान-पान में किन चीजों को शामिल करने की सलाह दी गई है?\nडाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, हल्दी, अदरक और अखरोट शामिल करने की सलाह दी गई है।\n\n5. होम्योपैथी में जोड़ों के दर्द के लिए किन दवाओं का उल्लेख किया जाता है?\nहोम्योपैथी में Rhus Tox और Bryonia जैसी दवाओं का उल्लेख किया जाता है, जिनका सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-09-04",
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