# स्कूली बच्चों और फिट युवाओं में क्यों बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा? मेदांता ग्रुप के डॉक्टर नरेश त्रेहान ने दी बड़ी चेतावनी

> भारत में कोरोनरी आर्टरी डिजीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे स्कूली बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। मेदांता ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर नरेश त्रेहान ने इस उभरते स्वास्थ्य संकट के कारणों और बचाव के उपायों पर विस्तार से बात की है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/skuli-bachchon-aura-phita-yuvaon-men-kyon-barha-raha-harta-ataika-ka-khatara-medanta-group-ke-doktara-naresh-trehan-ne-di-bari-che-39409 · **Language:** Hindi
**Tags:** हार्ट अटैक, डॉक्टर नरेश त्रेहान, मेदांता हॉस्पिटल, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, फिटनेस, स्वास्थ्य सलाह, हृदय रोग

वर्तमान समय में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र से एक बेहद ही चिंताजनक और डरावना रुझान सामने आ रहा है। दिल की बीमारियां, जिन्हें पहले बढ़ती उम्र के साथ जोड़कर देखा जाता था, अब स्कूली बच्चों और फिट युवाओं को भी अपना शिकार बना रही हैं। हाल ही में अचानक सामने आए कई हृदय रोग के मामलों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है और युवाओं व बच्चों की सेहत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल के दौरों के मामलों में आई इस अप्रत्याशित तेजी पर देश के सुप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ और मेदांता ग्रुप के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर नरेश त्रेहान ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सभी आयु वर्ग के लोगों को सावधान करते हुए इस जानलेवा संकट से बचने के लिए कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारियां और सलाह साझा की हैं।

## स्कूली बच्चों में हार्ट अटैक की दिल दहला देने वाली घटनाएं
इस गंभीर स्वास्थ्य संकट की भयावहता को हाल ही में राजस्थान में घटी एक दुखद घटना से समझा जा सकता है। राजस्थान के दौसा जिले में एक चौदह वर्षीय छात्र करण की अचानक हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। सुबह के समय करण को अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ, जिसके बाद उसके पिता उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, पिता की तत्परता के बावजूद डॉक्टरों ने लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि वे बच्चे को बचाने में पूरी तरह असमर्थ रहे। यह दुखद घटना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि इसी इलाके में पिछले पांच महीनों के भीतर तीन युवाओं की इसी तरह अचानक मौत हो चुकी है, जो एक बेहद गंभीर स्थिति की ओर इशारा करती है।

> 
ऐसी ही एक और दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में भी सामने आई। यहां नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के जूनियर हाईस्कूल महुअवा में सातवीं कक्षा की छात्रा नेहा अचानक गिर गई और उसकी मौत हो गई। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि नेहा की जान जाने का कारण हार्ट अटैक ही था। स्कूल जाने वाले इन छोटे बच्चों के साथ हुई इन अनहोनी घटनाओं ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह से खारिज कर दिया है कि दिल की बीमारियां केवल बुजुर्गों या पहले से बीमार लोगों को ही प्रभावित करती हैं।

## फिट दिखने वाले युवाओं और महिलाओं में बढ़ता जोखिम
दिल की बीमारियों का यह खतरा केवल छोटे बच्चों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि तीस और चालीस साल के उन युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है जो बाहर से पूरी तरह स्वस्थ और फिट नजर आते हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई महिलाओं और पुरुषों में अचानक कार्डिएक अरेस्ट के मामले देखे गए हैं, जो नियमित रूप से व्यायाम करते थे और अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करते थे। इस स्थिति ने आम लोगों के साथ-साथ चिकित्सा जगत को भी हैरत में डाल दिया है कि आखिर फिट दिखने वाले लोग इसका शिकार क्यों बन रहे हैं।

इस विरोधाभास पर रोशनी डालते हुए डॉक्टर नरेश त्रेहान ने स्पष्ट किया कि बाहरी तौर पर फिट दिखना इस बात की गारंटी नहीं है कि आपके शरीर के भीतर दिल की धमनियां पूरी तरह से स्वस्थ हैं। कई लोग एक आकर्षक शरीर पाने के लिए सख्त डाइट और भारी वर्कआउट का सहारा लेते हैं, लेकिन वे अपने शरीर के भीतर पनप रहे साइलेंट खतरों से अनजान रहते हैं। तीस से चालीस वर्ष की फिट महिलाओं में दिल के दौरों के बढ़ते मामले यह दर्शाते हैं कि हमें केवल बाहरी फिटनेस पर निर्भर रहने के बजाय नियमित आंतरिक स्वास्थ्य जांच पर भी ध्यान देना चाहिए।

## भारत में महामारी की तरह पैर पसारती कोरोनरी आर्टरी डिजीज
डॉक्टर नरेश त्रेहान के अनुसार, भारत में कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी दिल की नसों में ब्लॉकेज की समस्या अत्यंत तीव्र गति से बढ़ रही है। यह समस्या अब देश में एक गंभीर महामारी का रूप धारण कर चुकी है। अगर हम इसकी तुलना पश्चिमी देशों से करें, तो जहां अमेरिका और यूरोप में केवल चार से पांच प्रतिशत आबादी ही कोरोनरी आर्टरी डिजीज से प्रभावित होती है, वहीं भारत में यह चिंताजनक आंकड़ा बढ़कर लगभग दस से बारह प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

> 
भारत में इस बीमारी के इस कदर फैलने के पीछे तेजी से बदलती जीवनशैली, खराब खान-पान की आदतें और शारीरिक सक्रियता की कमी सबसे प्रमुख कारण हैं। आज के समय में हमारे भोजन में प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक वसा और चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जो सीधे तौर पर हमारी धमनियों को नुकसान पहुंचाती है। मानसिक तनाव और शारीरिक निष्क्रियता मिलकर इस समस्या को और अधिक गंभीर बना देते हैं।

## भारतीयों की आनुवंशिक संवेदनशीलता और घटती उम्र का दायरा
भारत में दिल की बीमारियों के इस संकट का एक और मुख्य पहलू हमारी आनुवंशिक संरचना भी है। चिकित्सा शोधों से पता चला है कि दक्षिण एशियाई लोगों, विशेष रूप से भारतीयों में दिल की बीमारियों के प्रति आनुवंशिक रूप से संवेदनशीलता बहुत अधिक होती है।

अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी देशों में दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियां, सीने में दर्द या एंजियोप्लास्टी और स्टेंट डलवाने की जरूरत आमतौर पर लोगों को पचास से साठ साल की उम्र के बाद पड़ती है। इसके विपरीत, भारत में यह समस्या काफी कम उम्र में ही दिखाई देने लगती है। पहले जहां भारत में चालीस से पचास वर्ष की उम्र के लोगों में दिल की बीमारियां देखी जाती थीं, वहीं अब यह सीमा और नीचे गिरकर तीस से चालीस साल के युवाओं तक पहुंच गई है, और अब तो स्कूली बच्चे भी इसके दायरे में आने लगे हैं।

## तंबाकू, डायबिटीज और पारिवारिक इतिहास का घातक प्रभाव
आनुवंशिकी के अलावा, हमारी आदतें भी धमनियों में ब्लॉकेज की प्रक्रिया को तेज करने का काम करती हैं। भारत में धूम्रपान और विभिन्न रूपों में तंबाकू का सेवन आज भी एक बहुत बड़ी समस्या बना हुआ है। तंबाकू शरीर के भीतर जाकर धमनियों की अंदरूनी दीवारों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है जिससे ब्लॉकेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

इसके साथ ही, भारत में डायबिटीज के मरीजों की एक विशाल संख्या है, जो दिल की बीमारियों के जोखिम को सीधे तौर पर बढ़ा देती है। डायबिटीज की वजह से रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं जिससे समय से पहले हार्ट अटैक आने की संभावना बढ़ जाती है। यदि किसी के माता-पिता को डायबिटीज या दिल की बीमारी रही हो, तो उनके बच्चों में भी भविष्य में इन बीमारियों के विकसित होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है।

## विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए बचाव के कारगर उपाय
इस खतरनाक बीमारी से खुद को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर नरेश त्रेहान ने दो चीजों पर विशेष रूप से ध्यान देने की सलाह दी है: पहला है स्वच्छ पर्यावरण और दूसरा है संतुलित खान-पान। अपने आसपास के वातावरण को साफ और प्रदूषण मुक्त रखकर हम अपने फेफड़ों और दिल पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम कर सकते हैं। इसके साथ ही, अपने भोजन पर नियंत्रण रखना बेहद आवश्यक है ताकि मोटापे जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सके, जो हृदय रोगों की जड़ है।

शारीरिक रूप से सक्रिय रहना भी दिल को स्वस्थ रखने का एक बेहद जरूरी नियम है। डॉक्टर त्रेहान के अनुसार, हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम बीस से चालीस मिनट तक तेज वॉक या कोई अन्य शारीरिक व्यायाम अवश्य करना चाहिए। इसके अलावा, मानसिक तनाव को दूर करने के लिए योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। रोजाना केवल पांच से दस मिनट तक प्राणायाम या गहरे सांस लेने के अभ्यास से पूरे दिन का तनाव काफी हद तक कम किया जा सकता है, जिससे दिल पर पड़ने वाला बोझ कम होता है।

## जीन सीक्वेंसिंग और हेल्थ होरोस्कोप की आधुनिक तकनीक
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हो रही प्रगति के चलते अब ऐसी अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं जो समय रहते किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य जोखिमों का सटीक पूर्वानुमान लगा सकती हैं। डॉक्टर त्रेहान ने बताया कि जीन सीक्वेंसिंग और आधुनिक तकनीकों की मदद से अब किसी भी व्यक्ति का 'हेल्थ होरोस्कोप' यानी स्वास्थ्य का व्यक्तिगत चार्ट तैयार करना संभव हो गया है।

इस व्यक्तिगत चार्ट के जरिए डॉक्टर किसी व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना का विश्लेषण कर यह पता लगा सकते हैं कि उसे भविष्य में किन बीमारियों, जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन रेजिस्टेंस या हाई ब्लड प्रेशर का खतरा अधिक हो सकता है। यह जानकारी मिलने के बाद व्यक्ति समय रहते अपनी जीवनशैली में आवश्यक सुधार कर सकता है और समय-समय पर जरूरी मेडिकल टेस्ट कराकर गंभीर खतरों से बच सकता है। चूंकि दिल की बीमारियों की शुरुआत शरीर के भीतर काफी पहले ही हो जाती है, इसलिए यह आधुनिक तकनीक लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण हथियार साबित हो सकती है।

## इसका आप पर असर
शारीरिक स्वास्थ्य की निगरानी के पारंपरिक तौर-तरीकों में अब बड़ा बदलाव करना जरूरी हो गया है ताकि समय रहते दिल की बीमारियों के खतरों को टाला जा सके।

- **जल्दी हेल्थ स्क्रीनिंग:** आपको अपने परिवार के सदस्यों के लिए बहुत कम उम्र से ही नियमित कार्डियोवैस्कुलर जांच शुरू कर देनी चाहिए। इससे शरीर के भीतर पनप रहे हाई कोलेस्ट्रॉल या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे मूक खतरों का समय रहते पता चल जाता है।
- **दैनिक व्यायाम:** आपको अपनी दिनचर्या में कम से कम बीस से चालीस मिनट का शारीरिक व्यायाम या तेज वॉक अवश्य शामिल करना चाहिए। यह साधारण सी आदत धमनियों में ब्लॉकेज के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है।
- **खान-पान में बदलाव:** आपको अपने घर में प्रोसेस्ड फूड और अनहेल्दी फैट के इस्तेमाल को तुरंत कम कर देना चाहिए। इसके स्थान पर पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार अपनाकर मोटापे और संबंधित बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।
- **तनाव का प्रबंधन:** आप रोजाना केवल पांच से दस मिनट प्राणायाम या योग के लिए निकालकर अपने दिल को सुरक्षित रख सकते हैं। यह संक्षिप्त अभ्यास मानसिक तनाव के स्तर को घटाकर आपके दिल पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे आनुवंशिक संवेदनशीलता, आधुनिक जीवनशैली और छिपी हुई मेटाबॉलिक बीमारियां मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

- **आनुवंशिक संवेदनशीलता:** पश्चिमी देशों के मुकाबले दक्षिण एशियाई और विशेष रूप से भारतीय लोगों में आनुवंशिक रूप से दिल की बीमारियों का खतरा बहुत अधिक होता है। इस वजह से धमनियों में ब्लॉकेज की समस्या पचास या साठ साल के बजाय तीस या चालीस साल की उम्र में ही शुरू हो जाती है।
- **जीवनशैली और खान-पान में बदलाव:** तेजी से हुए शहरीकरण के कारण लोगों की शारीरिक सक्रियता काफी कम हो गई है और प्रोसेस्ड फूड का सेवा बढ़ गया है। ये आदतें शरीर में समय से पहले मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती हैं जो नसों को संकुचित कर देती हैं।
- **डायबिटीज और तंबाकू का सेवन:** भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या अत्यधिक है और साथ ही तंबाकू का सेवन भी बहुत आम है। ये दोनों कारक शरीर में खून की धमनियों को कमजोर करते हैं जिससे दिल तक खून पहुंचने की प्रक्रिया में रुकावट आती है।

## सवाल-जवाब

### 1. 14 साल जैसी कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक क्यों हो रहा है?
आनुवंशिक कारकों, नसों में होने वाले मूक नुकसान और मेटाबॉलिक समस्याओं के कारण बच्चों में भी अचानक कार्डिएक अरेस्ट की दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं।

### 2. भारत में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का स्तर पश्चिमी देशों की तुलना में कितना है?
पश्चिमी देशों में यह समस्या लगभग 4% से 5% लोगों में देखी जाती है, जबकि भारत में यह आंकड़ा चिंताजनक रूप से बढ़कर 10% से 12% तक पहुंच गया है।

### 3. क्या पूरी तरह से फिट दिखने वाले व्यक्ति को भी हार्ट अटैक हो सकता है?
हां, बाहरी फिटनेस हमेशा आंतरिक धमनियों के स्वास्थ्य की गारंटी नहीं देती है, क्योंकि हाई कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं छिपी रह सकती हैं।

### 4. डॉक्टर नरेश त्रेहान ने रोजाना कितने समय तक व्यायाम करने की सलाह दी है?
डॉक्टर नरेश त्रेहान ने प्रतिदिन कम से कम 20 से 40 मिनट तेज चलने या व्यायाम करने और 5 से 10 मिनट तक योग या प्राणायाम करने की सलाह दी है।

### 5. चिकित्सा तकनीक में 'हेल्थ होरोस्कोप' क्या होता है?
हेल्थ होरोस्कोप जीन सीक्वेंसिंग के जरिए तैयार किया जाने वाला एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य चार्ट है, जिससे भविष्य में होने वाली बीमारियों के खतरों का पता लगाया जा सकता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._