# स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर: गुजरात में 184 बच्चे संदिग्ध संक्रमण की चपेट में, चांदीपुरा वायरस से 22 की जान गई

> गुजरात में चांदीपुरा एन्सेफलाइटिस के चलते 15 साल से कम उम्र के 22 बच्चों की जान जा चुकी है, जबकि राज्य भर में 184 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/svasthya-vibhaga-alarta-para-gujarat-men-184-bachche-sndigdha-snkramana-ki-chapeta-men-chandipura-virus-se-22-ki-jana-gai-13922 · **Language:** Hindi
**Tags:** चांदीपुरा वायरस, गुजरात स्वास्थ्य, प्रफुल्ल पानसेरिया, सैंडफ्लाई, एन्सेफलाइटिस, स्वास्थ्य अलर्ट

गुजरात राज्य में चांदीपुरा एन्सेफलाइटिस संक्रमण के कारण स्थितियां बेहद चिंताजनक बनी हुई हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में इस खतरनाक संक्रामक बीमारी की चपेट में आने से 15 वर्ष से कम आयु के 22 बच्चों की दुखद मृत्यु हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम विवरण के अनुसार, अब तक कुल 184 संदिग्ध मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं। लैब जांच में 35 मरीजों के नमूनों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है, जबकि 11 अन्य संदिग्ध नमूनों के जांच परिणाम अभी आने शेष हैं। राज्य भर में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए संपूर्ण चिकित्सा तंत्र को सतर्क कर दिया गया है।

## अस्पताल में भर्ती मरीज और राज्य की स्वास्थ्य तैयारियां
स्वास्थ्य स्थिति के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने बताया कि वर्तमान में राज्य के विभिन्न नागरिक अस्पतालों में 7 पॉजिटिव मरीजों का सघन इलाज चल रहा है। इसके साथ ही एक राहत भरी खबर यह भी है कि स्वास्थ्य में सुधार होने के पश्चात 6 पॉजिटिव मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। जान गंवाने वाले सभी 22 पीड़ित 15 साल से कम उम्र के बच्चे थे, जिसके चलते बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने आगे बताया कि गांधीनगर, साबरकांठा-हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट तथा भावनगर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती पीड़ित बच्चों का बेहतरीन इलाज विशेषज्ञों की देखरेख में जारी है। राज्य सरकार ने आम नागरिकों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने और पूर्ण सतर्कता बरतने की अपील की है। यदि किसी बच्चे में अचानक तेज बुखार, उल्टी या अन्य कोई गंभीर लक्षण नजर आए, तो परिजनों को बिना कोई समय गंवाए निकटतम सरकारी अस्पताल में संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।

## क्या है चांदीपुरा वायरस और इसका उद्गम इतिहास
चांदीपुरा एन्सेफलाइटिस एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से सैंडफ्लाई यानी रेत मक्खी और अन्य कीटों के काटने से इंसानों में फैलती है। यह आर्बोवायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई की लार ग्रंथि में रहता है और कीट के काटने पर शरीर में प्रवेश कर मस्तिष्क में गंभीर सूजन पैदा कर देता है। इसके अलावा, यह वायरस डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर में भी पाया जाता है। यद्यपि कीटों के काटने से ही यह वायरस प्रसारित होता है, फिर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके सभी संभावित कारकों पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

इतिहास पर दृष्टि डालें तो चांदीपुरा वायरस की पहली बार पहचान वर्ष 1965 में हुई थी। उस समय महाराष्ट्र राज्य के नागपुर जिले में स्थित चांदीपुरा गांव में एक मरीज के भीतर यह वायरस पाया गया था, जिसके आधार पर इसका नाम चांदीपुरा पड़ा। अत्यधिक सूक्ष्म आकार की यह रेत मक्खी नम मिट्टी और दीवारों की दरारों में पनपती है, जिससे कीट नियंत्रण इस बीमारी की रोकथाम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

## चांदीपुरा वायरस संक्रमण के मुख्य लक्षण
इस वायरस से संक्रमित होने पर बच्चों के शरीर में कई तीव्र लक्षण दिखाई देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर सही इलाज पाने के लिए इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है

- **अचानक तेज बुखार:** मरीज को अचानक अत्यधिक उच्च तापमान का बुखार महसूस होता है।
- **उल्टी और जी मिचलाना:** पीड़ित बच्चे को लगातार उल्टी होती है और जी मिचलाने की शिकायत बनी रहती है।
- **सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी:** तेज सिरदर्द के साथ-साथ शरीर में सुस्ती और कमजोरी आ जाती है।
- **बेहोशी और दौरे:** गंभीर स्थिति में मरीज सुधबुध खो बैठता है या उसे दौरे पड़ने लगते हैं।
- **दिमागी सूजन:** यह वायरस सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिससे मस्तिष्क में सूजन उत्पन्न हो जाती है।

## बचाव के प्रभावी उपाय और सुरक्षा गाइडलाइंस
चांदीपुरा वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए दो स्तरों पर सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। पहला स्तर व्यक्तिगत सुरक्षा का है, जिसके तहत लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा। परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं, घर के अंदर और बाहर मॉस्किटो रेपेलेंट का प्रयोग करें तथा सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी लगाएं। इसके साथ ही अपने घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें और जलजमाव वाले स्थानों की तुरंत सफाई करें।

सुरक्षा का दूसरा स्तर सामुदायिक सुरक्षा का है, जिस पर सरकारी एजेंसियां कार्य कर रही हैं। इसके अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकाय कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं ताकि रेत मक्खी और मच्छरों के पनपने को रोका जा सके। साथ ही जिन स्थानों पर पानी जमा होने की आशंका है, वहां जल निकासी की व्यवस्था की जा रही है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** माता-पिता को बच्चों में अचानक तेज बुखार या उल्टी जैसे लक्षणों के प्रति सतर्क रहना चाहिए और कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए।
- **गुजरात में:** गांधीनगर, राजकोट, पाटन, भावनगर और साबरकांठा क्षेत्र के निवासियों को जलजमाव से बचना चाहिए और लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. गुजरात में चांदीपुरा वायरस से कितने बच्चों की मौत हुई है?
गुजरात में चांदीपुरा वायरस के कारण 15 वर्ष से कम उम्र के 22 बच्चों की मौत हुई है।

### 2. चांदीपुरा वायरस के मुख्य लक्षण क्या हैं?
इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, लगातार उल्टी, तेज सिरदर्द, कमजोरी, बेहोशी और दिमागी सूजन शामिल हैं।

### 3. चांदीपुरा वायरस कैसे फैलता है?
यह वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई यानी रेत मक्खी और एडीज मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता है।

### 4. पहली बार चांदीपुरा वायरस कहां और कब पाया गया था?
यह वायरस सबसे पहले वर्ष 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में एक मरीज में पाया गया था।

### 5. चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?
पूरी बांह के कपड़े पहनें, मॉस्किटो रेपेलेंट और मच्छरदानी का उपयोग करें तथा अपने आसपास जलजमाव न होने दें।

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