त्वचा पर लाल चकत्ते और खुजली को न समझें सामान्य समस्या, डॉक्टर ने दी सोरायसिस से सतर्क रहने की सलाह शरीर पर उभरने वाले लाल दाने और पपड़ीदार त्वचा सोरायसिस के संकेत हो सकते हैं, जिसकी अनदेखी करने पर अवसाद और हृदय से जुड़ी गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं। त्वचा पर अचानक उभरने वाले निशान या चकत्तों को अक्सर लोग मौसमी एलर्जी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना सेहत पर बहुत भारी पड़ सकता है। यदि शरीर के किसी भी हिस्से या चेहरे पर लगातार लाल धब्बे बने हुए हैं और सामान्य घरेलू देखभाल के बाद भी ठीक नहीं हो रहे हैं, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। समय पर सही पहचान और डॉक्टरी परामर्श न मिलने पर त्वचा की यह स्थिति आगे चलकर काफी गंभीर और घातक रूप ले सकती है। सोरायसिस और त्वचा को होने वाला गंभीर नुकसान विभिन्न तरह के फंगल संक्रमण त्वचा को प्रभावित करते हैं, लेकिन इनमें सोरायसिस को सबसे खतरनाक विकारों में से एक माना जाता है। डॉक्टर अमरजीत सिंह वर्मा के अनुसार, यह समस्या धीरे-धीरे त्वचा पर लाल रंग के मोटे चकत्ते विकसित करती है और त्वचा की संरचना को अंदरूनी रूप से नुकसान पहुंचाती है। इसके साथ ही शरीर में कई अन्य तरह के संक्रमण भी पनपने लगते हैं, जो आगे चलकर अन्य जटिल बीमारियों को जन्म देने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि लक्षण दिखने के शुरुआती दौर में ही इसकी पहचान कर इलाज शुरू करना अनिवार्य होता है। इस बीमारी का चिकित्सा चक्र काफी लंबा चलता है, इसलिए लाल चकत्तों को हल्के में लेना जानलेवा जोखिम पैदा कर सकता है। मानसिक स्वास्थ्य और दिल की सेहत पर गहरा असर सोरायसिस केवल बाहरी त्वचा तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी व्यापक रूप से प्रभावित करता है। डॉक्टर वर्मा के अनुसार, इस रोग से पीड़ित लोगों में डिप्रेशन यानी अवसाद का शिकार होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा प्रत्यक्ष तौर पर भले न दिखे, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे शारीरिक लक्षण भी सामने आते हैं जो हार्ट अटैक यानी दिल के दौरे के जोखिम को काफी मजबूत करते हैं। मेडिकल कॉलेज के छात्रों द्वारा किए गए शोध और विभिन्न अध्ययनों में भी यह बात पुख्ता हुई है कि सोरायसिस के प्रभाव शरीर के लिए बेहद संवेदनशील और खतरनाक होते हैं। पहचानें सोरायसिस के प्रमुख लक्षण इस बीमारी के प्राथमिक लक्षणों में त्वचा की सतह पर उभरे हुए लाल रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। वक्त बीतने के साथ इन लाल चकत्तों पर सफेद या चांदी के रंग जैसी सूखी पपड़ी जमने लगती है। इस पपड़ी के कारण मरीज को लगातार तेज खुजली और जलन का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि त्वचा फटने लगती है और उसमें से खून रिसने लगता है। इसके अलावा एक प्रमुख लक्षण नाखूनों में भी दिखाई देता है, जहां नाखूनों पर छोटे-छोटे गड्ढे बन जाते हैं या वे असामान्य रूप से मोटे होने लगते हैं। इन संकेतों को कभी भी साधारण एलर्जी समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। बचाव के तरीके और आधुनिक उपचार प्रणाली वर्तमान समय में सोरायसिस को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक बायोलॉजिकल माध्यमों की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही स्थिति की गंभीरता के अनुसार विशेष दवाइयों और मेडिकल क्रीमों का इस्तेमाल भी किया जाता है। डॉक्टर वर्मा ने स्पष्ट किया है कि मरीजों को किसी भी सूरत में बिना विशेषज्ञ की सलाह के मेडिकल स्टोर से कोई भी क्रीम या मलहम खरीदकर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि ऐसी लापरवाही बीमारी को और अधिक भड़का सकती है। बचाव के लिए त्वचा को कभी भी रूखा या बेजान न होने दें और नियमित रूप से मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करते रहें। इसके साथ ही तनाव से पूरी तरह दूरी बनाए रखना भी सोरायसिस के असर को काबू में रखने के लिए बेहद जरूरी है। इसका आप पर असर त्वचा पर दिखने वाले असामान्य लाल चकत्तों को समय पर पहचानना शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। • दैनिक जीवन पर असर: त्वचा पर लगातार खुजली, जलन और पपड़ी बनने से रोजमर्रा के काम और नींद प्रभावित हो सकती है। इसे समय पर पहचानकर सही उपचार कराने से दिनचर्या सामान्य बनी रहती है। • इलाज का खर्च और समय: सोरायसिस का इलाज लंबा चलता है, इसलिए शुरुआती स्तर पर ही डॉक्टर से परामर्श लेना आर्थिक और शारीरिक दोनों दृष्टि से फायदेमंद रहता है। बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मनमानी क्रीम खरीदने का खर्च और नुकसान दोनों बढ़ सकता है। • गंभीर बीमारियों से बचाव: इस बीमारी की अनदेखी करने से डिप्रेशन और दिल की बीमारियों का अप्रत्यक्ष खतरा बढ़ जाता है। शुरुआती निदान से इन गंभीर जटिलताओं से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है। • त्वचा की सुरक्षा: नियमित रूप से मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करने और तनाव को नियंत्रित रखने से त्वचा का फटना और खून निकलने की समस्या रुक सकती है। किसी भी तरह के खुद से इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है। ऐसा क्यों हुआ सोरायसिस एक गंभीर विकार है जो त्वचा पर लाल चकत्ते और पपड़ी पैदा करता है तथा इसके कई आंतरिक कारण और प्रभाव होते हैं। • त्वचा संक्रमण और फंगल जटिलताएं: डॉक्टर अमरजीत सिंह वर्मा के अनुसार त्वचा से जुड़े विभिन्न विकार होते हैं, जिनमें सोरायसिस धीरे-धीरे त्वचा की संरचना को नुकसान पहुंचाते हुए अन्य संक्रमणों को बढ़ावा देता है। यह स्थिति अन्य स्वास्थ्य विकारों को उत्पन्न करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। • मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का जुड़ाव: इस बीमारी के चलते मरीजों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है और शोध में इसके ऐसे लक्षण भी पाए गए हैं जो अप्रत्यक्ष तौर पर हार्ट अटैक की संभावना को प्रबल करते हैं। मेडिकल छात्रों द्वारा किए गए अध्ययनों में भी इन लक्षणों की गंभीरता की पुष्टि हुई है। • आगे की देखभाल और उपचार: बीमारी की रोकथाम के लिए अब बायोलॉजिकल थेरेपी, विशेष दवाइयों और क्रीमों का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि त्वचा को सूखने से बचाना, मॉइश्चराइजर लगाना, तनावमुक्त रहना और स्व-उपचार से बचना ही इसके नियंत्रण के मुख्य उपाय हैं। सवाल-जवाब 1. सोरायसिस बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं? इसके शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर लाल रंग के उभरे हुए चकत्ते बनना, उन पर सफेद या चांदी जैसी पपड़ी जमना, खुजली और जलन होना शामिल है। 2. क्या सोरायसिस का असर नाखूनों पर भी दिखाई देता है? हां, सोरायसिस के कारण नाखूनों में छोटे-छोटे गड्ढे पड़ सकते हैं या वे असामान्य रूप से मोटे हो सकते हैं। 3. क्या सोरायसिस से डिप्रेशन और दिल की बीमारी का खतरा हो सकता है? डॉक्टर के अनुसार सोरायसिस के मरीजों में डिप्रेशन की संभावना बढ़ जाती है और इसमें ऐसे अप्रत्यक्ष लक्षण भी पाए गए हैं जो हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। 4. सोरायसिस से पीड़ित मरीजों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? मरीजों को त्वचा में नमी बनाए रखने के लिए मॉइश्चराइजर लगाना चाहिए, तनाव से दूर रहना चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी क्रीम नहीं लगानी चाहिए। https://trendkia.com/health/tvacha-para-lala-chakatte-aura-khujali-ko-na-samajhen-samanya-samasya-doctor-ne-di-psoriasis-se-satarka-rahane-ki-salaha-53827 TrendKia — Har trend, sabse pehle.