# उठते-बैठते चटकते हैं घुटने तो जानिए कब यह सामान्य है और कब खतरे की घंटी

> कम उम्र में जोड़ों से चटकने की आवाज गैस के बुलबुलों या लिगामेंट्स की वजह से हो सकती है, लेकिन इसके साथ दर्द और सूजन होना गंभीर परेशानी का संकेत है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/uthate-baithate-chatakate-hain-ghutane-to-janie-kaba-yaha-samanya-hai-aura-kaba-khatare-ki-ghnti-55598 · **Language:** Hindi
**Tags:** घुटनों में दर्द, क्रेपिटस, जोड़ों की सेहत, ऑर्थोपेडिक्स, घुटनों से आवाज, स्वास्थ्य सुझाव

कम उम्र में सीढ़ियां चढ़ते, नीचे बैठते या अचानक खड़े होते समय जोड़ों से चटकने अथवा कट-कट की आवाज सुनाई देना काफी लोगों के साथ होता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को क्रेपिटस के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर लोग इसे बुढ़ापे की निशानी मानकर घबरा जाते हैं या फिर पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। हर बार घुटने की यह आवाज किसी गंभीर विकार का संकेत नहीं होती, लेकिन कुछ खास लक्षणों के साथ दिखने पर यह किसी अंदरूनी समस्या की तरफ इशारा भी कर सकती है। डॉ. अतुल मिश्रा, चेयरमैन, ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट, फोर्टिस नोएडा के अनुसार जोड़ों की इस आवाज के पीछे जैविक और शारीरिक दोनों तरह की वजहें मौजूद होती हैं।

## जोड़ों से आवाज आने की मुख्य शारीरिक वजहें
हड्डियों के जोड़ों के बीच साइनोवियल फ्लूइड नाम का एक गाढ़ा चिकना तरल पदार्थ मौजूद होता है। यह तरल हड्डियों के बीच घर्षण को रोकता है और जोड़ों को सुचारू रूप से मुड़ने में मदद करता है। जब जोड़ पर दबाव बदलता है, तो इस तरल के भीतर हवा या गैस के सूक्ष्म बुलबुले बन जाते हैं। जोड़ के मुड़ने पर जब ये बुलबुले फूटते हैं, तो चटकने जैसी आवाज पैदा होती है। इसके अतिरिक्त घुटने के ढांचे को सहारा देने वाले टेंडन और लिगामेंट्स भी कई बार अपनी स्वाभाविक स्थिति से थोड़ा खिसकते हैं और वापस अपनी जगह पर लौटते समय कट-कट की ध्वनि उत्पन्न करते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है और इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं होती।

## युवाओं में चटकन पैदा करने वाले लाइफस्टाइल कारक
यदि कम आयु के युवाओं में लगातार घुटनों से आवाज आ रही है, तो इसके पीछे रोजमर्रा की आदतें और शारीरिक फिटनेस की कमी भी एक बड़ा कारण हो सकती हैं। जांघ की मांसपेशियों का कमजोर पड़ना घुटने के जोड़ पर अतिरिक्त भार डालता है। इसके अलावा लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों का अभाव और शरीर का बढ़ता वजन घुटने के संतुलन को बिगाड़ देता है। गलत तकनीक और गलत पोस्चर में कसरत करने से भी जोड़ पर अनुचित तनाव पड़ता है। कुछ परिस्थितियों में घुटने की कटोरी यानी पटेला अपनी सही सीध में गति नहीं कर पाती या उसके आसपास का कार्टिलेज घिसने लगता है, जिससे आवाज लगातार आने लगती है।

## किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टरी जांच है जरूरी
केवल आवाज आना किसी बड़ी बीमारी का पक्का प्रमाण नहीं है, लेकिन आवाज के साथ शरीर के अन्य चेतावनी भरे संकेत दिखने पर सतर्क हो जाना चाहिए। यदि चटकने के साथ-साथ घुटने में लगातार दर्द बना रहे, जोड़ में सूजन आ जाए, अकड़न महसूस हो या सामान्य रूप से चलने-फिरने में बाधा उत्पन्न होने लगे, तो यह सामान्य बात नहीं है। इस तरह की स्थिति ऑस्टियोआर्थराइटिस, कार्टिलेज में किसी चोट या घुटने की अन्य गंभीर समस्याओं की वजह से पैदा हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में तुरंत किसी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए और आवश्यक जांच करानी चाहिए।

## घुटनों को मजबूत और सेहतमंद रखने के आसान उपाय
घुटनों की सेहत को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने के लिए दैनिक दिनचर्या में कुछ साधारण बदलाव करना बेहद असरदार साबित होता है। जांघों और घुटने के आसपास की मांसपेशियों को ताकत देने वाले हल्के व्यायाम नियमित रूप से करने चाहिए। शारीरिक वजन को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है ताकि जोड़ों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में हल्का टहलें। यदि व्यायाम के दौरान सही तकनीक का ध्यान रखा जाए और जोड़ों को सक्रिय रखा जाए, तो क्रेपिटस की परेशानी से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

## इसका आप पर असर
घुटनों से आने वाली आवाज को समझकर सही समय पर सावधानी बरतने से जोड़ों की लंबी उम्र सुनिश्चित की जा सकती है।

- **शारीरिक गतिविधि पर प्रभाव:** लंबे समय तक एक ही जगह बिना हिले-डुले बैठने की आदत को बदलना जरूरी है। हर एक घंटे में थोड़ा टहलने और जांघों को मजबूत करने वाली हल्की कसरत शुरू करने से जोड़ों का घर्षण रुकता है।
- **वजन प्रबंधन की जरूरत:** शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे घुटने के जोड़ों पर पड़ता है। आहार और दिनचर्या को संतुलित रखकर वजन नियंत्रित करने से कार्टिलेज पर पड़ने वाला अनुचित भार कम हो जाता है।
- **डॉक्टरी जांच का पैमाना:** यदि चटकने के साथ दर्द, सूजन या चलने में लाचारी महसूस हो, तो घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। तुरंत किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर एक्स-रे या जरूरी जांच कराएं ताकि समस्या गंभीर न बने।
- **कसरत का सही तरीका:** जिम या घर पर व्यायाम करते समय गलत तकनीक से बचें। विशेषज्ञ की देखरेख में सही पोस्चर सीखकर ही स्क्वैट्स या भारी वजन उठाने वाली एक्सरसाइज करें।

## ऐसा क्यों हुआ
घुटनों से कट-कट की आवाज आने के पीछे शारीरिक बनावट और जीवनशैली से जुड़ी कई स्पष्ट वजहें मौजूद हैं।

- **सीधा जैविक कारण:** घुटने के जोड़ में मौजूद साइनोवियल द्रव के भीतर गैस के बुलबुले बनते और फूटते हैं। इसके अलावा लिगामेंट्स और टेंडन के अपनी जगह से हिलकर वापस आने के दौरान चटकने की आवाज उत्पन्न होती है।
- **मांसपेशियों और कार्टिलेज की स्थिति:** जांघ की मांसपेशियों की कमजोरी और पटेला यानी घुटने की कटोरी का सही दिशा में न घूमना जोड़ पर असामान्य दबाव बनाता है। कार्टिलेज में घिसाव या चोट आने से भी हड्डियों के बीच चिकनाई की कमी हो जाती है।
- **आधुनिक जीवनशैली का असर:** निरंतर बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों में कमी और गलत पोस्चर में व्यायाम करना जोड़ों के लचीलेपन को नुकसान पहुंचाता है। जब इन कारणों के साथ दर्द या सूजन जुड़ती है, तो यह ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थिति का रूप ले सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. घुटनों से कट-कट की आवाज आने को मेडिकल भाषा में क्या कहते हैं?
चिकित्सा विज्ञान में जोड़ों से चटकने या कट-कट की आवाज आने की स्थिति को क्रेपिटस कहा जाता है।

### 2. बिना दर्द के घुटनों से आवाज आना क्या किसी गंभीर बीमारी का संकेत है?
केवल आवाज आना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, यह अक्सर तरल में गैस के बुलबुले फूटने या लिगामेंट्स की गति के कारण होता है।

### 3. किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए?
अगर आवाज के साथ घुटने में दर्द, सूजन, अकड़न या चलने-फिरने में परेशानी महसूस हो, तो तुरंत ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

### 4. कम उम्र में घुटनों के चटकने के पीछे कौन सी आदतें जिम्मेदार हैं?
लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक कसरत की कमी, जांघ की कमजोर मांसपेशियां, बढ़ता वजन और गलत तरीके से एक्सरसाइज करना इसके मुख्य कारण हैं।

### 5. घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
नियमित रूप से हल्की कसरत करें, जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाएं, वजन नियंत्रित रखें और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचें।

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