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  "type": "article",
  "title": "उत्तराखंड के पहाड़ों में मिलने वाली अनोखी सब्जी इस्कोश सेहत के लिए क्यों मानी जाती है बेहद गुणकारी",
  "summary": "उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में उगने वाली इस्कोश अपने रसीले स्वाद और भरपूर पोषक तत्वों के लिए पहचानी जाती है। फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट से युक्त यह सब्जी पाचन सुधारने, वजन साधने और त्वचा को स्वस्थ रखने में मददगार साबित होती है।",
  "content": "उत्तराखंड की हसीन वादियों में उगने वाली देसी हरी सब्जियों की अपनी एक अलग पहचान और पोषण क्षमता है। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय वनस्पति है इस्कोश, जिसे स्थानीय बोली में लोग इस्कुस अथवा छयोते के नाम से भी पुकारते हैं। अंग्रेजी में इस सब्जी को चायोटे (Chayote) कहा जाता है, जबकि देश के कई दूसरे हिस्सों में लोग इसे चौ-चौ (Chow Chow) के नाम से पहचानते हैं। वनस्पति विज्ञान की दुनिया में इसका औपचारिक वैज्ञानिक नाम सेचियम एडुल (Sechium edule) दर्ज है। हरे रंग और पतले व हल्के छिलके वाली यह सब्जी पहाड़ी खान-पान की परंपरा का एक बेहद स्वादिष्ट और गुणकारी हिस्सा मानी जाती है। इसके भीतर प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम और कई आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित खान-पान में इसके समावेश से पाचन तंत्र सुदृढ़ रहता है, अनियंत्रित वजन पर अंकुश लगाने में सहायता मिलती है और रक्तचाप का संतुलन साधने में अनुकूल परिणाम देखे जा सकते हैं।\n\nघरों की छतों और आंगनों में लहलहाने वाली बेल\nपहाड़ी अंचलों में बसे गांवों और कस्बों में इस्कोश की खेती के लिए किसी बड़े तामझाम की दरकार नहीं होती। लोग अपने घरों के आंगन में और छतों की मुंडेरों के सहारे इसकी लताएं बड़ी सहजता से चढ़ा देते हैं। इन हरी-भरी लताओं पर लटकते फल अपने हल्के-मीठे और रसीले स्वाद के लिए हर उम्र के लोगों के बीच खूब पसंद किए जाते हैं। रसोई में इस सब्जी की विविधता देखते ही बनती है। गृहणियां इसे सादी सूखी भुजिया के रूप में तैयार करती हैं, तरीदार रसेदार व्यंजन बनाती हैं, अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर पकाती हैं और कभी-कभी इसे स्वादिष्ट भरवां व्यंजनों तथा गरमा-गरम सूप का रूप भी दे देती हैं।\n\nकम कैलोरी और वजन नियंत्रण में कारगर पोषण\nदेहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी के अनुसार, इस्कोश की सबसे बड़ी खूबी इसका कम कैलोरी वाला स्वरूप है। जो लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं या अपने शरीर के बढ़ते भार को नियंत्रित रखना चाहते हैं, उनके लिए यह एक मुफीद विकल्प साबित होती है। इस सब्जी में पाया जाने वाला प्रचुर डाइटरी फाइबर पेट में पहुंचकर लंबे समय तक तृप्ति का एहसास बनाए रखता है। जब पेट देर तक भरा रहता है, तो बेवजह बार-बार कुछ तला-भुना खाने की तलब शांत रहती है, जिससे शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने का जोखिम घट जाता है। कम कैलोरी के साथ उच्च पोषक तत्वों का यह अनूठा मेल ही इसे पारंपरिक भोजन शैली का अनिवार्य अंग बनाता है।\n\nरक्तचाप संतुलन और हृदय की सुरक्षा\nआधुनिक जीवनशैली में रक्तचाप में उतार-चढ़ाव एक सामान्य किंतु गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। इस्कोश में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पोटैशियम शरीर के भीतर सोडियम के प्रतिकूल प्रभावों को संतुलित करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाता है। आहार में पोटैशियम की संतुलित मात्रा रक्त धमनियों की दीवारों को तनावमुक्त रखने में सहायक मानी जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर सामान्य सीमा के भीतर बना रहता है। इस तरह यह हृदय प्रणाली को अतिरिक्त दबाव से बचाने में स्वाभाविक रूप से योगदान देती है।\n\nडायबिटीज प्रबंधन और रक्त शर्करा का संतुलन\nमधुमेह के रोगियों को अपने दैनिक भोजन में ग्लाइसेमिक प्रभाव और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। डॉ. सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि इस्कोश एक कम कैलोरी वाली सब्जी है, जिसे डायबिटीज से जूझ रहे व्यक्ति भी अपनी संतुलित थाली का हिस्सा सहजता से बना सकते हैं। इसके भीतर मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पाचन क्रिया को धीमा करके कार्बोहाइड्रेट के अचानक अवशोषण को रोकने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया से भोजन के तुरंत बाद खून में ग्लूकोज के स्तर में आने वाले अचानक उछाल को नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, किसी भी गंभीर विकार के स्थायी उपचार के लिए केवल इस सब्जी पर निर्भर रहने के बजाय संपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श का पालन करना ही उचित दृष्टिकोण है।\n\nत्वचा की चमक और कोशिकाओं का संरक्षण\nउम्र के असर और पर्यावरणीय प्रदूषण से हमारी त्वचा की कोशिकाएं लगातार प्रभावित होती रहती हैं। इस्कोश में पाए जाने वाले ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। यह क्रिया त्वचा के आंतरिक ऊतकों को क्षतिग्रस्त होने से बचाती है, जिससे चेहरे पर असमय झुर्रियों और ढीलेपन को थामने में मदद मिल सकती है। प्राकृतिक रूप से त्वचा की ताजगी और जवां रंगत बनाए रखने की चाह रखने वालों के लिए यह एक पौष्टिक आहार सिद्ध हो सकती है।\n\nगर्भावस्था में पोषण संबंधी आवश्यकताएं\nगर्भावस्था के नाज़ुक दौर में महिला के शरीर को न केवल अपनी ऊर्जा बल्कि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए भी विविध माइक्रोन्यूट्रीएंट्स की दरकार होती है। इस्कोश में उपस्थित विभिन्न विटामिन और खनिज शरीर की इन बुनियादी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोगी योगदान दे सकते हैं। हालांकि, गर्भधारण के समय प्रत्येक महिला की शारीरिक स्थिति और पोषण जरूरतें पूरी तरह भिन्न होती हैं, इसलिए इस दौरान इसे खान-पान में शामिल करने का स्तर और लाभ संबंधित व्यक्ति की समग्र आहार योजना पर ही निर्भर करता है।\n\nरसोई में बहुमुखी उपयोग और सलाद के तौर पर सेवन\nयह पहाड़ी सब्जी अपनी उच्च जल सामग्री और बेहद सौम्य स्वाद की वजह से हर प्रकार की पाक शैली में ढल जाती है। पहाड़ी घरों में लोग इसे आलू के साथ भुजिया बनाकर या मसालों से भरपूर रसेदार तरी के साथ खाना पसंद करते हैं। बुजुर्गों अथवा गरिष्ठ भोजन से परहेज करने वाले लोगों के लिए इसे बहुत कम तेल और हल्के मसालों में पकाकर एक सुपाच्य आहार तैयार किया जा सकता है। सब्जी के अतिरिक्त, कई लोग इसकी ताजगी का आनंद लेने के लिए इसे बारीक काटकर कच्चे सलाद के रूप में भी चाव से खाते हैं। पारंपरिक खेती की यह पहाड़ी धरोहर अब मैदानी और शहरी इलाकों के जागरूक उपभोक्ताओं के बीच भी अपनी पौष्टिकता के दम पर तेजी से लोकप्रिय हो रही है।\n\nइसका आप पर असर\nउत्तराखंड की पारंपरिक सब्जी इस्कोश को नियमित भोजन में शामिल करने से आम लोगों को पोषण और खान-पान से जुड़े कई प्रत्यक्ष स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।\n\n• उत्तराखंड में: पहाड़ी क्षेत्रों के निवासी अपने आंगन और छतों पर आसानी से उगने वाली इस बेल से साल भर ताजा पोषण प्राप्त कर सकते हैं। यह स्थानीय स्तर पर बिना किसी अतिरिक्त खर्च के मिलने वाली एक सुलभ और पौष्टिक मौसमी सब्जी है।\n• देशभर के पाठकों के लिए: मैदानी और शहरी इलाकों में रहने वाले लोग चौ-चौ या चायोटे के नाम से इसे बाजारों से खरीदकर अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। यह कम कैलोरी वाली सब्जी उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो महंगे सप्लीमेंट्स के बिना घरेलू पोषण बढ़ाना चाहते हैं।\n• वजन घटाने वालों के लिए: इसमें मौजूद प्रचुर फाइबर पेट को लंबे समय तक तृप्त रखता है जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। इसके सेवन से बिना कमजोरी महसूस किए रोजाना की कैलोरी खपत को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।\n• रक्तचाप और शुगर पीड़ितों के लिए: पोटैशियम की मौजूदगी शरीर में सोडियम के प्रभाव को घटाकर रक्तचाप संतुलित करने में सहायक होती है। वहीं इसका फाइबर खून में शुगर के अचानक उछाल को थामने में मददगार साबित होता है।\n• त्वचा की देखरेख के लिए: इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं। इससे चेहरे की कुदरती चमक बनाए रखने और उम्र के असर को धीमा करने में मदद मिल सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nउत्तराखंड की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां इस्कोश की बेल के विकास के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती हैं, जिससे यह पहाड़ों की पहचान बन चुकी है। साथ ही इसके विशिष्ट बायोएक्टिव घटक इसे स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद उपयोगी बनाते हैं।\n\n• अनुकूल पर्वतीय वातावरण: हिमालय की तलहटी वाली नमी और मध्यम ठंडी जलवायु इस बेल को बिना किसी रासायनिक खाद के तेजी से फैलने में मदद करती है। घरों के आंगन और छतों की धूप इसे फलने-फूलने के लिए जरूरी प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करती है।\n• पोषक तत्वों की प्रचुरता: इस सब्जी की संरचना में जल, फाइबर, विटामिन सी और पोटैशियम का प्राकृतिक रूप से आदर्श संतुलन पाया जाता है। यही संरचना इसे पाचन को हल्का रखने और शरीर के अंदरूनी तंत्र को संतुलित करने में सक्षम बनाती है।\n• पारंपरिक जीवनशैली की निर्भरता: विषम पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों में ताजी हरी सब्जियों की त्वरित उपलब्धता हमेशा से एक चुनौती रही है। ऐसे में घरों में आसानी से उगने वाली इस्कोश पारंपरिक पहाड़ी भोजन का एक स्थायी और विश्वसनीय माध्यम बन गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस्कोश सब्जी को अन्य किन नामों से जाना जाता है?\nइसे स्थानीय स्तर पर इस्कुस या छयोते, अंग्रेजी में चायोटे और भारत के अन्य भागों में चौ-चौ के नाम से जाना जाता है।\n\n2. इस्कोश का वैज्ञानिक नाम क्या है?\nइस पौष्टिक सब्जी का औपचारिक वैज्ञानिक नाम सेचियम एडुल (Sechium edule) है।\n\n3. इस्कोश में मुख्य रूप से कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?\nइसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।\n\n4. यह सब्जी वजन कम करने में किस प्रकार मददगार है?\nकम कैलोरी और उच्च फाइबर से युक्त होने के कारण यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है, जिससे वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है।\n\n5. क्या डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज इसे खा सकते हैं?\nहां, इसका फाइबर ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में और पोटैशियम ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।\n\n6. पहाड़ी घरों में इस्कोश को किस तरह पकाया और खाया जाता है?\nइसे सूखी भुजिया, तरीदार रसेदार सब्जी, भरवां व्यंजन, पौष्टिक सूप और कच्चे सलाद के रूप में खाया जाता है।",
  "url": "https://trendkia.com/health/uttarakhand-ke-paharon-men-milane-vali-anokhi-sabji-iskos-sehata-ke-lie-kyon-mani-jati-hai-behada-gunakari-50130",
  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-10-21",
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