# हार्ट में ब्लॉकेज देखते ही क्या लग जाता है स्टेंट, जानिए कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह

> एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज दिखने मात्र से हर मरीज को स्टेंट की जरूरत नहीं होती है। जालंधर के सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर दिबांशु गुप्ता ने बताया कि स्टेंट लगाने का फैसला किन गंभीर परिस्थितियों और लक्षणों के आधार पर किया जाता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/when-does-a-heart-blockage-actually-require-a-stent-cardiologist-explains-20419 · **Language:** Hindi
**Tags:** हार्ट ब्लॉकेज, स्टेंट, एंजियोग्राफी, कार्डियोलॉजिस्ट, हार्ट अटैक, दिल की सेहत

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या एंजियोग्राफी के दौरान दिल की धमनियों में रुकावट या ब्लॉकेज नजर आते ही तुरंत स्टेंट डालना आवश्यक हो जाता है। इस विषय पर जालंधर स्थित सर्वोदय अस्पताल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. दिबांशु गुप्ता, का स्पष्ट कहना है कि रिपोर्ट में ब्लॉकेज दिखना और उस खास ब्लॉकेज के लिए वास्तव में स्टेंट की आवश्यकता होना, दोनों बिल्कुल अलग और स्वतंत्र बातें हैं। मरीजों के मन में इस बात को लेकर काफी उलझन रहती है कि किस स्थिति में स्टेंट की वाकई जरूरत पड़ती है और कब हार्ट अटैक के दौरान एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया जीवन रक्षक साबित होती है।

 

## हर रुकावट या ब्लॉकेज के लिए स्टेंट जरूरी नहीं
 यह सोचना पूरी तरह गलत है कि हर पाए जाने वाले ब्लॉकेज पर स्टेंट लगाना ही एकमात्र समाधान है। किसी भी मरीज के मामले में स्टेंट का उपयोग करने का निर्णय केवल रुकावट के प्रतिशत को देखकर नहीं लिया जाता है। इसके लिए डॉक्टर कई अन्य अहम पहलुओं पर गौर करते हैं, जैसे कि मरीज को कितने गंभीर लक्षण महसूस हो रहे हैं, ब्लॉकेज दिल की किस धमनी में और कितनी गहराई में स्थित है, उस धमनी के भीतर रक्त के प्रवाह में कितनी बाधा उत्पन्न हुई है और मरीज की समग्र चिकित्सकीय स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री कैसी है। इन सभी कारकों की पूरी समीक्षा के बाद ही कार्डियोलॉजिस्ट किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचते हैं।

 

## गंभीर हार्ट अटैक में कब बनता है जीवन रक्षक
 दूसरी ओर, एक्यूट कोरोनरी आर्टरी ऑक्लूज़न जैसी आपातकालीन स्थिति में, जहां अचानक कोई मुख्य धमनी पूरी तरह से बंद हो जाती है या फिर कोई बड़ा और गंभीर दिल का दौरा पड़ता है, वहां स्टेंट वाकई एक जीवन रक्षक कदम साबित होता है। ब्लॉक हो चुकी कोरोनरी धमनी को जितनी कम से कम देरी में दोबारा खोल दिया जाता है, दिल की मांसपेशियों को होने वाला नुकसान उतना ही कम होता है। मेडिकल इमरजेंसी के दौरान अस्पताल पहुंचने के शुरुआती नब्बे मिनट के भीतर इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लेना सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है। समय पर यह इलाज मिलने से मरीज के पूरी तरह से ठीक होने और जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

 

## सीने के हर दर्द में नहीं होती तत्काल स्टेंट की जरूरत
 यह भी जरूरी नहीं है कि सीने में उठने वाले हर दर्द के पीछे कोई बहुत बड़ा ब्लॉकेज हो जिसके लिए तुरंत स्टेंट डालना पड़े। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को लगातार सीने में दर्द बना हुआ है या दर्द का दायरा बढ़ता जा रहा है, ब्लड प्रेशर में भारी अस्थिरता है, दिल की धड़कन अचानक अनियमित हो गई है, हृदय कमजोर पड़ने के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं या फिर खून की सामान्य जांच रिपोर्ट में दिल को नुकसान पहुंचने की आशंका नजर आ रही है, तो बिना एक पल गंवाए तुरंत विस्तृत जांच करवाना बेहद आवश्यक हो जाता है। ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में किसी भी तरह की देरी करना मरीज की जान पर भारी पड़ सकता है।

 

## ब्लॉकेज की लोकेशन भी तय करती है अगला कदम
 दिल की किस धमनी में रुकावट आई है, यह बात भी इलाज की दिशा तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए, बाईं मुख्य धमनी यानी लेफ्ट मेन डिज़ीज़ में अगर बहुत ज्यादा सिकुड़न पाई जाती है, या फिर एक साथ कई अलग-अलग धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज मौजूद हैं, अथवा दिल की पंपिंग क्षमता काफी नीचे आ गई है, तो ऐसी स्थिति में रक्त के प्रवाह को सामान्य करना अनिवार्य हो जाता है। हालांकि, कुछ चुनिंदा मामलों में स्टेंट लगाने के बजाय ओपन बाईपास सर्जरी करना एक अधिक सुरक्षित और उपयुक्त चिकित्सीय विकल्प साबित होता है।

 

## स्वस्थ जीवनशैली और दवाइयों का महत्व
 दिल की बीमारियों का इलाज केवल स्टेंट डालने की प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसके बाद लंबी अवधि की रिकवरी और सुरक्षा के लिए एक अनुशासित जीवनशैली अपनानी पड़ती है। इसमें धूम्रपान की आदत को पूरी तरह छोड़ना, ताजे फल और हरी सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लेना, अपनी फिटनेस के अनुसार नियमित रूप से व्यायाम करना, वजन को नियंत्रण में रखना और मानसिक तनाव को दूर रखना शामिल है। इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने वाली दवाइयां, खून को पतला रखने वाली औषधियां, ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने वाले नुस्खे और सीने के दर्द को नियंत्रित करने वाली दवाएं भी संपूर्ण हृदय देखभाल का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** दिल से जुड़ी बीमारियों और एंजियोग्राफी से जुड़े भ्रम दूर होने से मरीजों को अनावश्यक डर से राहत मिलती है और समय पर सही इलाज चुनने में मदद मिलती है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज दिखते ही स्टेंट लगाना अनिवार्य होता है?
नहीं, एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज दिखना और स्टेंट की जरूरत होना दो अलग बातें हैं। डॉक्टर लक्षणों और अन्य चिकित्सीय स्थितियों को देखकर फैसला लेते हैं।

### 2. हार्ट अटैक के दौरान स्टेंट कब सबसे ज्यादा मददगार होता है?
अचानक धमनी पूरी तरह बंद होने या गंभीर हार्ट अटैक के मामले में, अस्पताल पहुंचने के नब्बे मिनट के भीतर स्टेंट लगाने से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।

### 3. क्या सीने के हर दर्द में तुरंत स्टेंट की जरूरत पड़ती है?
सीने के हर दर्द में तुरंत स्टेंट नहीं लगता, लेकिन लगातार बढ़ता दर्द, अनियमित धड़कन या दिल कमजोर होने के संकेत मिलने पर तुरंत जांच जरूरी है।

### 4. स्टेंट लगाने के बाद किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
स्टेंट के बाद धूम्रपान छोड़ना, हरी सब्जियां खाना, नियमित व्यायाम करना, तनाव कम करना और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां समय पर लेना आवश्यक है।

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