कम उम्र में क्यों झड़ रहे युवाओं के बाल, हेयर ट्रांसप्लांट कराने से पहले किन बातों का रखना चाहिए ध्यान फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के डॉक्टर सचिन गुप्ता के अनुसार, 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं में बाल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। हेयर ट्रांसप्लांट कराने से पहले इसके कारणों, सही तकनीकों और सावधानियों को समझना बेहद जरूरी है। आजकल के दौर में 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं के बीच बाल झड़ने की परेशानी काफी तेजी से पैर पसार रही है। पहले जहां गंजेपन की समस्या आमतौर पर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलती थी, वहीं अब कॉलेज जाने वाले छात्र और नई नौकरी की शुरुआत करने वाले युवा भी इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। बालों का यह समय से पहले झड़ना न केवल व्यक्ति के चेहरे के लुक को प्रभावित करता है, बल्कि उसके आत्मविश्वास को भी कमजोर कर देता है। यही मुख्य वजह है कि बड़ी संख्या में युवा इस समस्या से निजात पाने के लिए हेयर ट्रांसप्लांट का सहारा ले रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली चमकदार सफलता की कहानियां और आकर्षक सस्ते पैकेज लोगों को बहुत जल्दी अपनी तरफ खींच लेते हैं। हालांकि, यह बात पूरी तरह सच है कि हर इंसान के लिए हेयर ट्रांसप्लांट का विकल्प सही नहीं होता है और इसे महज एक साधारण ब्यूटी ट्रीटमेंट समझने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। युवाओं में क्यों बढ़ रहा है ट्रांसप्लांट का क्रेज फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के डॉक्टर सचिन गुप्ता के साथ हुई बातचीत में यह बात सामने आई कि कम उम्र में हेयर ट्रांसप्लांट के प्रति दीवानगी बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें काम कर रही हैं। पहली वजह यह है कि बीते कुछ समय में युवाओं के बीच हेयर लॉस की समस्या में काफी इजाफा हुआ है। दूसरी सबसे बड़ी वजह डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया की दुनिया है। जब लोग इंटरनेट पर हेयर ट्रांसप्लांट के शानदार और सफल नतीजे देखते हैं, तो उन्हें यह बात समझ आती है कि गंजेपन का पक्का इलाज संभव है। इसी जानकारी के मिलने के बाद युवा भी अपने गंजेपन को दूर करने के लिए इसे एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में देखना शुरू कर देते हैं। हर हेयर फॉल में जरूरी नहीं है ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉक्टर सचिन गुप्ता स्पष्ट करते हैं कि हर तरह के बाल झड़ने की समस्या का समाधान हेयर ट्रांसप्लांट बिल्कुल नहीं होता है। कई मामलों में लोगों के बाल शरीर में जरूरी पोषण की कमी, थायराइड जैसी मेडिकल समस्याओं, अत्यधिक तनाव या फिर अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों की वजह से गिरने लगते हैं। ऐसे तमाम मामलों में सीधे ट्रांसप्लांट करने के बजाय पहले मूल कारण का इलाज करना डॉक्टरों की प्राथमिकता होनी चाहिए। हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया मुख्य रूप से मेल पैटर्न हेयर लॉस यानी आनुवंशिक गंजेपन के मामलों में सबसे ज्यादा और बेहतर परिणाम देती है। इसलिए, बिना किसी चिकित्सकीय जांच के सिर्फ बाल झड़ते देख तुरंत ट्रांसप्लांट का फैसला ले लेना किसी भी लिहाज से समझदारी भरा कदम नहीं माना जाता है। सर्जिकल प्रक्रिया है, इसलिए लापरवाही है खतरनाक डॉक्टर सचिन गुप्ता चेतावनी देते हुए बताते हैं कि आजकल लोग हेयर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर प्रक्रिया को बहुत हल्के में लेने की गलती करने लगे हैं, जबकि हकीकत में यह एक पूरी तरह से सर्जिकल प्रक्रिया है। भले ही इसे बहुत बड़ी सर्जरी की श्रेणी में न रखा जाए, लेकिन फिर भी इसे पूरी सतर्कता और मेडिकल प्रोटोकॉल के साथ ही किया जाना चाहिए। यदि चुने गए क्लिनिक में साफ-सफाई का स्तर ठीक नहीं है, डॉक्टर और वहां का मेडिकल स्टाफ पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं, या फिर पूरी प्रक्रिया को सही नियमों के तहत अंजाम नहीं दिया जाता है, तो मरीज को गंभीर संक्रमण का खतरा उठना पड़ सकता है। इसके अलावा कई बार गलत तरीकों के कारण नतीजे इतने खराब और बेढंगे आते हैं कि सिर के बाल बेहद अननेचुरल नजर आने लगते हैं और दूर से ही साफ पता चल जाता है कि व्यक्ति ने कोई कृत्रिम ट्रांसप्लांट कराया है। एफयूई, एफयूटी और डीएचआई तकनीकों में अंतर आजकल लोगों के बीच एफयूई, एफयूटी और डीएचआई जैसी विभिन्न तकनीकों के नाम बहुत सुनने को मिलते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इनके बीच के तकनीकी अंतर से पूरी तरह अनजान रहते हैं। एफयूटी एक पुरानी तकनीक है, जिसमें सिर के पीछे की त्वचा की एक पट्टी काटकर निकाली जाती थी और फिर उस जगह पर टांके लगाने की जरूरत पड़ती थी। अब मेडिकल साइंस में इस पुराने तरीके का इस्तेमाल बहुत कम देखने को मिलता है। वर्तमान समय में सबसे ज्यादा लोकप्रिय और अपनाई जाने वाली तकनीक एफयूई है, जिसमें सर्जन द्वारा एक-एक बाल की जड़ को निकालकर जरूरत के हिसाब से गंजे हिस्से पर लगाया जाता है। वहीं दूसरी ओर, डीएचआई तकनीक को उपरोक्त दोनों ही पुरानी तकनीकों का सबसे उन्नत और आधुनिक रूप माना जाता है। इस आधुनिक विधि में निकाले गए बालों को शरीर के बाहर बहुत कम समय के लिए रखा जाता है और तुरंत प्रत्यारोपित कर दिया जाता है, जिससे सफल और अच्छे परिणाम मिलने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। सस्ते पैकेजों के झांसे में न आएं डॉक्टर सचिन गुप्ता का कहना है कि आज के समय में तमाम संस्थान सस्ते पैकेज और लंबी-चौड़ी गारंटी का झांसा देकर सीधे-साधे लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने का काम करते हैं। लेकिन सिर्फ कम कीमत और विज्ञापनों को देखकर अपना फैसला सुना देना बिल्कुल ठीक नहीं है। इंसान की जिंदगी में हेयर ट्रांसप्लांट का मौका आमतौर पर सिर्फ एक ही बार आता है और इसका असर लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए यह परखना बेहद जरूरी है कि प्रक्रिया को अंजाम देने वाले डॉक्टर पूरी तरह प्रशिक्षित हैं या नहीं और संबंधित क्लिनिक में उचित साफ-सफाई के साथ जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। सिर्फ इस दावे से प्रभावित न हों कि आपको बहुत बड़ी संख्या में बाल लगा दिए जाएंगे। एक सही और अनुभवी डॉक्टर हमेशा मरीज की व्यक्तिगत जरूरत, उसके गंजेपन की वास्तविक स्थिति और डोनर एरिया की क्षमता को अच्छी तरह परखने के बाद ही तय करता है कि सिर पर कितने बाल लगाए जाने चाहिए। रिजल्ट आने में कितना समय लगता है डॉक्टर सचिन गुप्ता समझाते हैं कि ट्रांसप्लांट प्रक्रिया के तुरंत बाद नए बाल उगना शुरू नहीं हो जाते हैं। शुरुआत में केवल बालों की जड़ों को करीने से रोपित किया जाता है। इलाज के शुरुआती दिनों में लगाए गए कुछ बाल झड़ भी सकते हैं, जो कि पूरी तरह से एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे बालों की नई ग्रोथ का सिलसिला शुरू होता है। अमूमन 2 से 3 महीने के भीतर नए बाल निकलने लगते हैं, जबकि 6 से 8 महीने बीतने पर एक अच्छा और साफ बदलाव दिखाई देने लगता है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया का फाइनल और पूरा रिजल्ट सामने आने में लगभग 1 से डेढ़ साल तक का लंबा समय लग सकता है। डॉक्टर सचिन गुप्ता यह भी बताते हैं कि ट्रांसप्लांट के दौरान सिर के पिछले हिस्से से बाल लेकर आगे लगाए जाते हैं, जो आमतौर पर काफी लंबे वक्त तक टिके रहते हैं। मगर इसका मतलब यह कतई नहीं है कि माथे के पास या आगे के बाकी प्राकृतिक बाल भविष्य में कभी नहीं झड़ेंगे। यदि बालों की उचित देखभाल नहीं की गई और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक जरूरी दवाइयां या इलाज समय पर नहीं लिया गया, तो वक्त के साथ आपके बाकी बाल भी झड़ सकते हैं। इसलिए केवल एक बार ट्रांसप्लांट करवा लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसके बाद सही मेडिकल ट्रीटमेंट और नियमित देखभाल भी उतनी ही जरूरी होती है। इसका आप पर असर यह खबर मुख्य रूप से कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या से जूझ रहे युवाओं और हेयर ट्रांसप्लांट करवाने का विचार कर रहे लोगों के लिए बेहद उपयोगी है। • भारत में: देश भर के युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हेयर लॉस और बिना डॉक्टर की सलाह के सस्ते क्लीनिकों में ट्रांसप्लांट कराने के खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ती है। • फरीदाबाद में: स्थानीय स्तर पर अमृता हॉस्पिटल जैसे बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों की सलाह से लोगों को सही और सुरक्षित मेडिकल विकल्प चुनने में मदद मिलती है। सवाल-जवाब 1. कम उम्र में युवाओं के बाल क्यों झड़ रहे हैं? बढ़ते तनाव, खराब जीवनशैली और आधुनिक खानपान के कारण 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं में बाल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। 2. क्या हर तरह के हेयर फॉल में हेयर ट्रांसप्लांट किया जाता है? नहीं, पोषण की कमी, थायराइड या तनाव के कारण झड़ने वाले बालों में पहले मूल कारण का इलाज किया जाता है, ट्रांसप्लांट मुख्य रूप से आनुवंशिक गंजेपन के लिए होता है। 3. हेयर ट्रांसप्लांट के लिए सबसे लोकप्रिय तकनीक कौन सी है? आज के समय में एफयूई तकनीक सबसे ज्यादा अपनाई जाती है, जिसमें एक-एक बाल की जड़ को निकालकर जरूरत वाली जगह पर लगाया जाता है। 4. हेयर ट्रांसप्लांट का पूरा रिजल्ट आने में कितना समय लगता है? ट्रांसप्लांट के बाद नए बालों की पूरी ग्रोथ और फाइनल रिजल्ट सामने आने में लगभग 1 से डेढ़ साल तक का समय लग सकता है। https://trendkia.com/health/why-are-young-people-going-bald-early-and-what-to-know-before-getting-a-hair-transplant-10871 TrendKia — Har trend, sabse pehle.