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  "type": "article",
  "title": "योग से हार्ट अटैक का खतरा घट सकता है 40 प्रतिशत तक, AIIMS के डॉ. अंबुज रॉय ने वैज्ञानिक शोध से लगाई मुहर",
  "summary": "AIIMS दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के मुताबिक, ICMR के 'योगा-केयर' ट्रायल समेत कई बड़े अध्ययनों ने साबित किया है कि नियमित योग से हार्ट अटैक के बाद प्रतिकूल घटनाएं 40 प्रतिशत तक कम हो सकती हैं और अस्पताल में दोबारा भर्ती होने का खतरा 30 प्रतिशत तक घट सकता है.",
  "content": "योग अब सिर्फ परंपरा नहीं, मेडिकल साइंस की कसौटी पर भी खरा\nभारत की पुरानी योग परंपरा को अब आधुनिक मेडिकल साइंस का भी समर्थन मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर जहां दुनियाभर में करोड़ों लोग योगाभ्यास करते हैं, वहीं मेडिकल जर्नल्स और क्लिनिकल ट्रायल्स में योग की उपलब्धियां दर्ज हो रही हैं. यह बदलाव बता रहा है कि योग अब महज आस्था का विषय नहीं, बल्कि धीरे-धीरे साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य विकल्प के रूप में अपनी जगह बना रहा है. खासकर हृदय रोग के क्षेत्र में उभर रहे वैज्ञानिक प्रमाण इस दिशा में बेहद अहम हैं.\n\nपिछले दो दशकों में तेज़ हुई योग पर रिसर्च\nAIIMS दिल्ली के कार्डियोलोजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के अनुसार, योग पर वैज्ञानिक शोध का दायरा पिछले 20 सालों में तेज़ी से बढ़ा है. उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि योग पर प्रकाशित लगभग 90 प्रतिशत साइंटिफिक रिसर्च पेपर पिछले 20 वर्षों में ही सामने आए हैं और पिछले 10 साल में यह रफ्तार और तेज़ हुई है. बायोमेडिकल रिसर्च के प्रमुख सर्च इंजन पबमेड में योग से जुड़े क्लिनिकल ट्रायल्स की संख्या हालिया दशक में पिछले दशक की तुलना में दोगुनी से भी ज़्यादा हो चुकी है. यह ट्रेंड साफ बताता है कि योग को अब मेडिकल रिसर्च की मुख्यधारा में गंभीरता से लिया जाने लगा है.\n\nICMR का 'योगा-केयर' ट्रायल, कार्डियक रिहैबिलिटेशन में एक मील का पत्थर\nहृदय रोगियों के लिए योग की उपयोगिता को सबसे मज़बूती से साबित करने का काम किया है ICMR द्वारा फाइनेंस 'योगा-केयर' ट्रायल ने. यह अध्ययन साल 2020 में जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हुआ था. इसे योग आधारित कार्डियक रिहैबिलिटेशन पर अब तक का सबसे बड़ा रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल माना जाता है. भारत के 24 केंद्रों में करीब 4000 हार्ट अटैक से उबर रहे मरीजों पर यह परीक्षण किया गया. नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे. जिन मरीजों ने 75 प्रतिशत या उससे ज़्यादा योग सत्रों में भाग लिया, उनमें प्रतिकूल हृदय संबंधी घटनाएं 40 प्रतिशत तक कम देखी गईं. इसके अलावा इन मरीजों ने हार्ट अटैक के बाद बेहतर स्वास्थ्य स्थिति दर्ज की और सामान्य जीवन में अपेक्षाकृत जल्दी वापसी की.\n\nइस ट्रायल की अहमियत सिर्फ इसके नतीजों तक सीमित नहीं है. इसने यह भी साबित किया कि योग का मूल्यांकन उसी कठोरता से किया जा सकता है, जिस कठोरता से दवाओं और मेडिकल उपकरणों की वैज्ञानिक जांच होती है. यानी योग को अब दवाओं की तरह ही परखा जा सकता है.\n\n'केयरमैच' विश्लेषण: अस्पताल में दोबारा भर्ती होने का खतरा 30 प्रतिशत कम\nहाल के 'केयरमैच' एनालिसिस ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण नतीजे दिए हैं. इस विश्लेषण के मुताबिक, योग आधारित पुनर्वास पारंपरिक कार्डियक रिहैबिलिटेशन जितना ही फायदेमंद हो सकता है. इससे मरीज़ों की जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ और दोबारा अस्पताल में भर्ती होने की आशंका करीब 30 प्रतिशत तक घट गई. भारत जैसे देश में यह निष्कर्ष खास मायने रखता है, क्योंकि पारंपरिक कार्डियक रिहैबिलिटेशन सेवाएं महंगी हैं और छोटे शहरों व ग्रामीण इलाकों में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं. इसके उलट योग तुलनात्मक रूप से सस्ता, सुलभ और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य विकल्प है.\n\n49 स्टडी के विश्लेषण में ब्लड प्रेशर पर भी दिखा असर\n49 अलग-अलग अध्ययनों के एक संयुक्त विश्लेषण ने यह भी स्पष्ट किया कि योग के नियमित अभ्यास से औसतन सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 5 मीमी-एचजी और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 3 मीमी-एचजी की कमी आती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड प्रेशर में इतनी कमी भी स्ट्रोक और हार्ट अटैक के जोखिम को उल्लेखनीय रूप से घटा सकती है.\n\nशरीर के भीतर कैसे काम करता है योग?\nशोध बताते हैं कि योग शरीर में ऑटोनॉमिक संतुलन को बेहतर करता है, हार्ट-रेट वैरिएबिलिटी बढ़ाता है और तनाव से जुड़े हार्मोनल सीक्रेशन को कम करता है. साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य को मज़बूत बनाने में भी मदद करता है. ये सभी पहलू हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी माने जाते हैं. यानी योग सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि मन और दिल दोनों को एक साथ दुरुस्त रखने में सक्षम है. यही वजह है कि विशेषज्ञ अब इसे एक व्यापक और समग्र हृदय देखभाल उपकरण के रूप में देख रहे हैं.\n\nइसका आप पर असर\n• दिल के मरीजों के लिए: हार्ट अटैक के बाद जो मरीज़ महंगी कार्डियक रिहैबिलिटेशन सुविधाओं तक नहीं पहुंच सकते, वे नियमित योग को एक किफायती और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित विकल्प के रूप में अपना सकते हैं.\n• छोटे शहरों और गांवों में: जहां कार्डियक रिहैबिलिटेशन सेंटर उपलब्ध नहीं हैं, वहां के मरीज़ नियमित योग अभ्यास से अस्पताल में दोबारा भर्ती होने का खतरा करीब 30 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं.\n• हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ों के लिए: योग से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर औसतन 5 मीमी-एचजी तक कम हो सकता है, जिससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का जोखिम उल्लेखनीय रूप से घट सकता है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. AIIMS के किस डॉक्टर ने योग और हृदय रोग पर जानकारी दी?\nAIIMS दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय ने योग से हृदय रोगियों को होने वाले फायदों पर जानकारी साझा की.\n\n2. 'योगा-केयर' ट्रायल क्या था और इसके नतीजे क्या रहे?\nयह ICMR द्वारा फाइनेंस, भारत के 24 केंद्रों में लगभग 4000 हार्ट अटैक के मरीजों पर किया गया सबसे बड़ा रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल था. जिन मरीजों ने 75 प्रतिशत या उससे अधिक योग सत्रों में भाग लिया, उनमें प्रतिकूल हृदय घटनाएं 40 प्रतिशत तक कम हुईं.\n\n3. योग से ब्लड प्रेशर पर क्या असर पड़ता है?\n49 अध्ययनों के संयुक्त विश्लेषण के मुताबिक, योग से औसतन सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 5 मीमी-एचजी और डायस्टोलिक में 3 मीमी-एचजी की कमी आती है.\n\n4. 'केयरमैच' एनालिसिस ने क्या संकेत दिया?\nइसने बताया कि योग आधारित पुनर्वास पारंपरिक कार्डियक रिहैबिलिटेशन जितना लाभदायक हो सकता है और इससे दोबारा अस्पताल में भर्ती होने की आशंका करीब 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है.\n\n5. योग पर कितने प्रतिशत वैज्ञानिक शोध पेपर पिछले 20 साल में आए हैं?\nउपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योग पर प्रकाशित लगभग 90 प्रतिशत साइंटिफिक रिसर्च पेपर पिछले 20 वर्षों में ही सामने आए हैं.\n\n6. 'योगा-केयर' ट्रायल किस जर्नल में और किस साल प्रकाशित हुआ?\nयह ट्रायल 2020 में जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हुआ था.\n\n7. योग हृदय को किन तरीकों से फायदा पहुंचाता है?\nयोग शरीर में ऑटोनॉमिक संतुलन सुधारता है, हार्ट-रेट वैरिएबिलिटी बढ़ाता है, तनाव से जुड़े हार्मोनल सीक्रेशन को कम करता है और मानसिक स्वास्थ्य को मज़बूत बनाता है.",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-06-21",
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