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  "type": "article",
  "title": "जवानी में ही घेर सकती हैं बुढ़ापे की ये पांच गंभीर बीमारियां, शरीर देता है ये शुरुआती संकेत",
  "summary": "जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक, जो क्रोनिक बीमारियां पहले बुजुर्गों को होती थीं, वे अब 20 से 30 साल के युवाओं को अपना शिकार बना रही हैं।",
  "content": "एक वक्त था जब नॉन-कम्युनिकेबल क्रोनिक बीमारियां सिर्फ बुजुर्गों की समस्या मानी जाती थीं। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और भूलने जैसी दिक्कतें अमूल्य तौर पर उम्रदराज लोगों में ही देखने को मिलती थीं, लेकिन समय के साथ हालात बदल चुके हैं और अब बीमारियां भी अपने निशाने बदल रही हैं। आज के दौर में 20 से 30 साल के युवा हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं, और भूलने की बीमारी भी अब कम उम्र के लोगों में आम होने लगी है। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के एक शोध में यह बात सामने आई है कि जो गंभीर बीमारियां पहले 50 या 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को होती थीं, वे अब जवानी में ही लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं।\n\nगतिहीन जीवनशैली और कम उम्र में बीमारियां\nइस संस्थान के प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट की डायरेक्टर एरिन मिचोस का कहना है कि कम उम्र में इन बीमारियों के पनपने की सबसे बड़ी वजह लोगों की गतिहीन दिनचर्या है। आज के समय में लोग अपना ज्यादातर वक्त बैठकर बिताते हैं, जिसकी वजह से शरीर स्थूल हो जाता है और कई प्रकार की बीमारियां आसानी से घेर लेती हैं। यही मुख्य कारण है कि आज के युवाओं में हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉयड और अल्जाइमर जैसी समस्याएं तेजी से पैर पसार रही हैं।\n\nब्रेन सिंकिंग की समस्या और युवा\nउम्र बढ़ने के साथ, खासकर 30 से 35 साल के बाद, दिमाग का सिकुड़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, हालांकि यह प्रक्रिया बेहद धीमी होती है और 60 साल के बाद इसमें तेजी आती है, जिसे ब्रेन सिंकिंग कहा जाता है। दिमाग की कोशिकाएं एक बार नष्ट होने के बाद दोबारा नहीं बनती हैं, इसलिए अगर यह सिकुड़न तेजी से होने लगे तो कई गंभीर परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। आज चिंता की बात यह है कि कुछ युवाओं में भी ब्रेन सिंकिंग की रफ्तार तेज हो गई है, जिसके लिए लोग खुद जिम्मेदार हैं। डायबिटीज, मोटापा, स्मोकिंग और अल्कोहल जैसे कई कारक इसके लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी माने जाते हैं।\n\nटाइप 2 डायबिटीज का बढ़ता खतरा\nपहले के दौर में डायबिटीज मुख्य रूप से बुजुर्गों की बीमारी हुआ करती थी, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार आज दुनिया भर में लगभग 50 करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। भारत को दुनिया की डायबिटीज राजधानी कहा जाता है, जहां 10 करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी के मरीज हैं। इनमें से कितने ही ऐसे लोग हैं जिन्हें यह पता ही नहीं होता कि उनके शरीर के भीतर डायबिटीज की बीमारी पल रही है। डायबिटीज एक ऐसा साइलेंट किलर है जिसके शुरुआती चरण में कोई भी स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते हैं, इसलिए 20 साल की उम्र से ही इससे बचाव के उपाय शुरू कर देना बेहद जरूरी हो जाता है।\n\nहाई ब्लड प्रेशर और अनसुनी चेतावनी\nभारत में हर चार में से एक वयस्क हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित है, जिससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने सारे युवा इसकी चपेट में आ चुके हैं। हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे दिल को कमजोर करती है और एक दिन किसी बड़ी हृदय संबंधी बीमारी के रूप में सामने आती है। जब खून नलियों की दीवारों पर बहुत तेज दबाव डालने लगता है, तो उसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है। चूंकि इसमें भी जल्दी कोई लक्षण नहीं दिखते, इसलिए इसका अनुमान लगाना काफी कठिन होता है। हमारे देश के लोगों में नियमित रूप से बीपी की जांच कराने की आदत नहीं होती है, और जब तक बीपी के कारण शरीर अंदर से पूरी तरह खोखला नहीं हो जाता, तब तक इसकी भनक तक नहीं लगती।\n\nस्ट्रोक और कोलोन कैंसर के बदलते आंकड़े\nस्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक किसी न किसी वजह से ऑक्सीजन की आपूर्ति कुछ समय के लिए बाधित हो जाती है। आम तौर पर पहले स्ट्रोक की समस्या बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन आजकल 20 साल के युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं, और तो और 18 से 34 साल की महिलाओं में भी स्ट्रोक के मामले सामने आने लगे हैं। स्ट्रोक के पीछे कई अलग-अलग वजहें हो सकती हैं, और राहत की बात यह है कि कम उम्र में स्ट्रोक होने पर यह कम जानलेवा साबित होता है, फिर भी इससे बचने के लिए एहतियात बरतना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन में यह भी पाया गया है कि 1980 से 1994 के बीच पैदा हुए लोगों में कोलोन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें कोलोरेक्टल कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा होते हैं, जबकि पहले युवाओं में यह बीमारी नहीं पाई जाती थी।\n\nबुढ़ापे की बीमारियों से बचाव के उपाय\nबुढ़ापे से जुड़ी इन सभी गंभीर बीमारियों से खुद को बचाना बहुत आसान है। हमें बस अपने बुजुर्गों की जीवनशैली और उनके खान-पान को अपनाना होगा। रात में समय पर सोना और सुबह जल्दी जागना चाहिए, साथ ही कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी और सुकून भरी नींद लेनी चाहिए जिसमें बार-बार आंख न खुले। इसके अलावा हर रोज अपने शरीर को शारीरिक श्रम से थकाना चाहिए, भारी चीजें उठानी चाहिए, पैदल चलना चाहिए और नियमित रूप से एक्सरसाइज करनी चाहिए। खाने-पीने के मामले में प्राचीन भारतीय परंपराओं का पालन करना चाहिए और बीमारी फैलाने वाली अनहेल्दी चीजों से दूरी बनानी चाहिए। फास्ट फूड, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, पिज्जा और बर्गर जैसी चीजों को आज ही अपनी डाइट से पूरी तरह हटा देना चाहिए। जितना संभव हो सके घर का बना शुद्ध और साबुत अनाज से तैयार भोजन ही खाना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों का भरपूर सेवन करने से सेहत दुरुस्त रहती है, जबकि ज्यादा चीनी और नमक के सेवन से बचना चाहिए। ताजे फलों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, मानसिक तनाव से दूर रहें, सामाजिक मेल-जोल को बढ़ाएं और हमेशा खुश रहने की कोशिश करें। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोध और दिशानिर्देशों के बारे में अधिक जानने के लिए आप Johns Hopkins Medicine की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयुवाओं में बुढ़ापे की बीमारियों के बढ़ने से रोजमर्रा की जीवनशैली, स्वास्थ्य खर्चों और दीर्घकालिक कार्यक्षमता पर सीधा और गहरा असर पड़ता है।\n\n• भारत में: देश भर के युवाओं को अब अपनी जीवनशैली और खान-पान में तत्काल बदलाव करने की जरूरत है ताकि कम उम्र में गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।\n• स्वास्थ्य खर्च: कम उम्र में डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी क्रोनिक बीमारियों की चपेट में आने से पारिवारिक मेडिकल खर्चों में भारी बढ़ोतरी होती है।\n• दैनिक दिनचर्या: लोगों को सिडेंटरी लाइफस्टाइल छोड़कर रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद और नियमित शारीरिक व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा।\n• खान-पान में बदलाव: फास्ट फूड और जंक फूड का सेवन पूरी तरह बंद करके घर का बना पौष्टिक और साबुत अनाज वाला भोजन अपनाना अनिवार्य हो गया है।\n• नियमित जांच: बीपी और ब्लड शुगर जैसे मामलों में शुरुआती लक्षण न दिखने के कारण नियमित मेडिकल जांच कराना बेहद आवश्यक हो गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयुवाओं में गंभीर बीमारियों के पनपने के पीछे मुख्य कारण बदलती हुई आधुनिक जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतें और शारीरिक सक्रियता की कमी है।\n\n• गतिहीन जीवनशैली: अधिकांश समय बैठकर बिताने के कारण शरीर स्थूल हो जाता है और मेटाबॉलिक गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं।\n• खान-पान की आदतें: प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, अत्यधिक चीनी और नमक का सेवन शरीर में बीमारियों की नींव रखता है।\n• तनाव और नींद की कमी: अपर्याप्त नींद और बढ़ता मानसिक तनाव शरीर की आंतरिक प्रणाली को कमजोर कर देता है।\n• जैविक कारक: स्मोकिंग और अल्कोहल जैसे हानिकारक कारक मस्तिष्क और धमनियों की कार्यप्रणाली को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कौन सी यूनिवर्सिटी ने युवाओं में क्रोनिक बीमारियों पर रिसर्च की है?\nजॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह प्रमाण दिया गया है कि क्रोनिक बीमारियां अब जवानी में होने लगी हैं।\n\n2. कम उम्र में इन बीमारियों के होने का सबसे बड़ा कारण क्या है?\nलोगों की दिनचर्या का गतिहीन होना और अधिकांश समय बैठकर बिताना इसका सबसे बड़ा कारण है।\n\n3. भारत में कितने वयस्कों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है?\nभारत में हर 4 में से 1 वयस्क हाई ब्लड प्रेशर का शिकार है।\n\n4. भारत को दुनिया में किस नाम से जाना जाता है?\nभारत को डायबिटीज कैपिटल ऑफ वर्ल्ड कहा जाता है जहाँ 10 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं।\n\n5. ब्रेन सिंकिंग किसे कहा जाता है?\nउम्र बढ़ने के साथ दिमाग की कोशिकाओं का सिकुड़ना ब्रेन सिंकिंग कहलाता है जो 60 के बाद तेजी से होता है।\n\n6. कोलोन कैंसर के मामले किन लोगों में ज्यादा आ रहे हैं?\n1980 से 1994 के बीच पैदा लेने वाले लोगों में कोलोन कैंसर के मामले ज्यादा आ रहे हैं।\n\n7. बुढ़ापे की इन बीमारियों से बचने के लिए कितनी नींद जरूरी है?\nकम से कम 7 से 8 घंटे की सुकून भरी और बिना टूटने वाली नींद लेनी चाहिए।\n\n8. किन चीजों का सेवन आज से ही छोड़ देना चाहिए?\nफास्ट फूड, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, पिज्जा और बर्गर जैसी चीजें खाना आज से ही छोड़ देना चाहिए।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-10-22",
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