अब सुरंगों और फ्लाईओवर से सुलझेगा शिमला का ट्रैफिक जाम, सरकार खर्च करेगी 2200 करोड़ हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिमला में जाम से निजात दिलाने के लिए 2200 करोड़ रुपए की परियोजना तैयार की है, जिसमें एशियन डेवलपमेंट बैंक की फंडिंग से सुरंगें, फ्लाईओवर और केबल-स्टे ब्रिज बनाए जाएंगे। विधानसभा फ्लाईओवर दिसंबर 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रोज लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्लान तैयार कर लिया है। शहर में वैकल्पिक सड़कें, फ्लाईओवर और सुरंगें बनाने पर करीब 2200 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस पूरी परियोजना की फंडिंग एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी एडीबी के जरिए की जाएगी। एडीबी की फंडिंग से बनेंगी दो सुरंगें शिमला शहर में प्रस्तावित दो अहम सुरंग परियोजनाओं को लेकर हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की तरफ से होटल होलीडे होम में पहली स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन मीटिंग बुलाई गई। इस बैठक में अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और स्थानीय हितधारकों ने शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की। विधायक हरीश जनार्था बोले, सुरंग दोनों तरफ से जुड़नी चाहिए बैठक में स्थानीय विधायक हरीश जनार्था ने साफ कहा कि टॉलैंड से आईजीएमसी तक बन रही सुरंग को हाईवे से जोड़ने की दिशा में काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह सुरंग आईजीएमसी और फोरलेन दोनों से जुड़नी चाहिए, वरना इसे मंजूर नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि तभी शहर का ट्रैफिक कम होगा। अगर सुरंग बनने के बाद भी जाम और दूरी कम नहीं हुई तो इसका कोई फायदा नहीं होगा, इसलिए निर्माण कंपनी को इस बात का खास ख्याल रखना होगा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की टीम से कहा कि सुरंग को फोरलेन से जोड़ने को लेकर जल्द स्टडी करवाई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि यह प्रोजेक्ट फिजिबिलिटी के लिहाज से कितना व्यावहारिक है। जनार्था ने केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए 2200 करोड़ रुपए खर्च होने जा रहे हैं और इस राशि का एक भी पैसा गलत जगह खर्च नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों को ध्यान में रखते हुए शहर में बुनियादी ढांचा तैयार करना जरूरी है। आईजीएमसी जंक्शन और निगम विहार तक बनेंगी सुरंगें बैठक में शिमला की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और बढ़ते वाहनों के दबाव को कम करने के मकसद से दो प्रस्तावित सुरंगों पर विस्तार से बात हुई। पहली सुरंग आईजीएमसी जंक्शन से सेंट बीड्स कॉलेज के पास आईपीएच पंप हाउस तक बनाई जाएगी। दूसरी सुरंग एचपी पीडब्ल्यूडी हट्स यानी हिमफेड पेट्रोल पंप के पास से निगम विहार यानी डाकघर के नीचे तक बनेगी। बैठक में इन दोनों परियोजनाओं की शुरुआती रूपरेखा, इनसे होने वाले फायदे, तकनीकी पहलुओं और निर्माण के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर प्रेजेंटेशन दिया गया। मौजूद हितधारकों ने ट्रैफिक मैनेजमेंट, पर्यावरण की सुरक्षा, स्थानीय लोगों की सहूलियत और निर्माण के दौरान सुरक्षा को लेकर कई सुझाव भी दिए। सुझावों को डीपीआर में किया जाएगा शामिल हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने कहा कि बैठक में मिले सुझावों का बारीकी से अध्ययन कर उन्हें जहां तक मुमकिन होगा, प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इन सुरंगों के बनने से शिमला में जाम की समस्या घटेगी, सफर में लगने वाला समय कम होगा और शहरवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी आवागमन में आसानी होगी। परियोजना के डीपीआर सलाहकार ने भी प्रस्तावित सुरंगों से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी साझा की। दिसंबर 2026 तक तैयार हो जाएगा विधानसभा फ्लाईओवर विधानसभा के पास बन रहा फ्लाईओवर दिसंबर 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसका काम तेज रफ्तार से चल रहा है और दिसंबर में इसका लोकार्पण किया जाना प्रस्तावित है। इस फ्लाईओवर के बनने के बाद जाम से काफी हद तक राहत मिलेगी। हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इसके लिए विक्ट्री टनल, टॉलैंड जंक्शन, छोटा शिमला, शिमला बाईपास, कुफरी रोड और आईजीएमसी जंक्शन पर सर्वे भी करवाया है। इस सर्वे में सामने आया कि संजोली जंक्शन से रोजाना करीब 27,266 वाहन गुजरते हैं, छोटा शिमला से 24,967 वाहन और विक्ट्री टनल से हर दिन 37,734 वाहन निकलते हैं। इस पूरी योजना के लिए ड्रोन से भी सर्वे कराया गया, जिसमें यह देखा गया कि सुबह और शाम के पीक आवर्स में शहर के किन हिस्सों में सबसे ज्यादा जाम लगता है। सात प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 2200 करोड़, 2032 तक दिखेगा असर इस पूरी परियोजना का मकसद शहर की परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना, जलवायु के अनुकूल और सुरक्षित कनेक्टिविटी विकसित करना और शिमला को लंबे समय के लिए जाम की समस्या से टिकाऊ राहत दिलाना है। इसके तहत शिमला के लिए सात बड़ी अवसंरचना परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें आईजीएमसी सुरंग के अलावा चक्कर बाईपास और एमएलए क्रॉसिंग पर वायाडक्ट, रेलवे पार्किंग से होटल होलीडे होम तक केबल-स्टे ब्रिज, विक्ट्री टनल जंक्शन पर वायाडक्ट, मंजीयाठ में एंबुलेंस रोड, मेहली-प्रीत नगर से लवासा चौकी तक सड़क का उन्नयन और शहर में पैदल यात्रियों के लिए सुविधाओं का विकास शामिल है। इन सभी परियोजनाओं पर करीब 2,200 करोड़ रुपए निवेश किए जाने का प्रस्ताव है। आईजीएमसी सुरंग परियोजना के तहत करीब 1.45 किलोमीटर लंबाई की दो सुरंगें बनाई जाएंगी, जिनमें से एक 910 मीटर और दूसरी 540 मीटर लंबी होगी। ये सुरंगें आईजीएमसी को सीधे छोटा शिमला से और छोटा शिमला को संजौली से जोड़ेंगी। इससे वाहनों को सचिवालय क्षेत्र से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। डीपीआर में हुई स्टडी के मुताबिक अगर यह परियोजना 2032 तक पूरी हो जाती है तो आईजीएमसी जंक्शन से संजौली चौक तक के रास्ते पर करीब 27 प्रतिशत और नवबहार से संजौली चौक तक के रास्ते पर करीब 36 प्रतिशत तक ट्रैफिक कम हो जाएगा। इससे समय की बचत होगी और जाम की समस्या भी घटेगी। रेलवे पार्किंग से होटल हॉलीडे होम तक बनेगा केबल-स्टे ब्रिज शिमला के ट्रैफिक को ज्यादा सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में रेलवे पार्किंग से होटल हॉलीडे होम तक एक केबल-स्टे ब्रिज बनाने का भी प्रस्ताव है। इस तरह के पुल में सड़क का मुख्य हिस्सा ऊंचे खंभों से निकलने वाली मजबूत स्टील केबलों के सहारे टिका होता है और हर केबल सीधे खंभे से जुड़ी होती है। इसका आप पर असर यह प्रोजेक्ट सीधे तौर पर शिमला में रहने वाले लोगों और वहां आने वाले पर्यटकों को असर करेगा। • भारत में: पहाड़ी शहरों में जाम की समस्या आम है, ऐसे में एडीबी की फंडिंग से शिमला में बन रहा यह मॉडल आगे दूसरे पहाड़ी राज्यों के शहरों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। • शिमला में: सुरंगें, फ्लाईओवर और केबल-स्टे ब्रिज बनने से रोज जाम में फंसने वाले शिमला के नागरिकों का सफर आसान होगा, आईजीएमसी जैसे अस्पताल तक पहुंचना जल्दी हो सकेगा, और दिसंबर 2026 तक विधानसभा फ्लाईओवर बनकर तैयार होने से जल्द राहत मिलनी शुरू हो जाएगी। सवाल-जवाब 1. शिमला में यातायात सुधारने के लिए कितनी लागत का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है? करीब 2200 करोड़ रुपए की लागत से शिमला में वैकल्पिक सड़कें, फ्लाईओवर और सुरंगें बनाई जाएंगी। 2. इस प्रोजेक्ट की फंडिंग कौन कर रहा है? इस प्रोजेक्ट की फंडिंग एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी एडीबी के जरिए की जाएगी। 3. आईजीएमसी सुरंग परियोजना में कितनी सुरंगें बनेंगी और उनकी लंबाई कितनी होगी? इसमें करीब 1.45 किलोमीटर लंबाई की दो सुरंगें बनाई जाएंगी, जिनमें से एक 910 मीटर और दूसरी 540 मीटर लंबी होगी। 4. विधानसभा फ्लाईओवर कब तक बनकर तैयार होगा? विधानसभा के पास बन रहा फ्लाईओवर दिसंबर 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा और उसी महीने इसका लोकार्पण किया जाना प्रस्तावित है। 5. सर्वे के मुताबिक शिमला में सबसे ज्यादा वाहन कहां से गुजरते हैं? सर्वे के अनुसार विक्ट्री टनल से रोजाना सबसे ज्यादा 37,734 वाहन गुजरते हैं, इसके बाद संजोली जंक्शन से 27,266 और छोटा शिमला से 24,967 वाहन रोज गुजरते हैं। 6. डीपीआर स्टडी के मुताबिक 2032 तक ट्रैफिक में कितनी कमी आने का अनुमान है? डीपीआर स्टडी के मुताबिक आईजीएमसी जंक्शन से संजौली चौक तक के रास्ते पर करीब 27 प्रतिशत और नवबहार से संजौली चौक तक के रास्ते पर करीब 36 प्रतिशत तक ट्रैफिक कम होने का अनुमान है। 7. इस पूरी योजना के तहत शिमला के लिए कितनी बड़ी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं? इस योजना के तहत शिमला के लिए सात बड़ी अवसंरचना परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिन पर करीब 2200 करोड़ रुपए खर्च होंगे। https://trendkia.com/himachal-pradesh/aba-surngon-aura-phlaiovara-se-sulajhega-shimla-ka-traiphika-jama-sarakara-kharcha-karegi-2200-karora-7636 TrendKia — Har trend, sabse pehle.