चंबा-संघणी मार्ग पर खाई में गिरी बेकाबू कार, शिक्षिका की जान गई और दो मासूम बच्चों समेत चार घायल हिमाचल प्रदेश के चंबा में रविवार सुबह हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 33 वर्षीय अध्यापिका पुनीता देवी की मौत हो गई, जबकि उनके पति, दो बच्चे और भाभी गंभीर रूप से जख्मी हो गए। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी रास्तों पर एक बार फिर तेज रफ्तार और सुरक्षा उपायों की कमी ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। चंबा जिले के अंतर्गत आने वाले चंबा-संघणी मार्ग पर रविवार सुबह एक अनियंत्रित कार गहरी खाई में जा गिरी। इस भयानक सड़क दुर्घटना में कार सवार 33 वर्षीय स्कूल अध्यापिका पुनीता देवी की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, वाहन में मौजूद उनके पति, दो मासूम बच्चे और परिवार की एक अन्य बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों में तीन साल के मासूम बच्चे की हालत नाजुक बनी हुई है, जिसे बेहतर उपचार के लिए कांगड़ा स्थित उच्च चिकित्सा केंद्र भेजा गया है। सुबह ग्यारह बजे शल्यूंड नाले के पास हुआ हादसा यह हृदयविदारक घटना रविवार की सुबह लगभग 11 बजे उस समय घटी, जब परिवार अपने पैतृक गांव से सलूणी की ओर सफर कर रहा था। जानकारी के मुताबिक, बणी गांव निवासी 38 वर्षीय हरिंद्र कुमार अपनी पत्नी पुनीता देवी, छह साल की बेटी शानवी, तीन साल के बेटे समर्थ और अपनी 56 वर्षीय भाभी रेखा पत्नी दौलत राम के साथ कार में सवार होकर निकले थे। चंबा-संघणी मार्ग पर सफर के दौरान जब उनकी कार शल्यूंड नाले के समीप तीखे मोड़ पर पहुंची, तो चालक अचानक स्टीयरिंग पर से अपना संतुलन खो बैठा। देखते ही देखते कार सड़क से फिसलकर सीधी गहरी खाई में लुढ़क गई। खाई में गिरते ही वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और भीतर बैठे लोगों की चीख-पुकार मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने चलाया बचाव अभियान कार के खाई में गिरने की तेज आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोगों ने कठिन पहाड़ी ढलान पर उतरकर अत्यंत मशक्कत के बाद कार में फंसे सभी पांच लोगों को बाहर निकाला। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से घायलों को सिविल अस्पताल सलूणी पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद 33 वर्षीय पुनीता देवी को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में लगी गंभीर चोटों के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। मासूम समर्थ की हालत गंभीर, टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर हादसे में घायल हुए हरिंद्र कुमार, उनकी छह वर्षीय बेटी शानवी और 56 वर्षीय रेखा का सिविल अस्पताल सलूणी में प्राथमिक उपचार किया गया। बाद में सभी घायलों को बेहतर देखभाल के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा स्थानांतरित कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज चंबा में डॉक्टरों ने तीन वर्षीय समर्थ की स्थिति को अत्यंत चिंताजनक पाया। बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार न होने और आंतरिक चोटों के खतरे को देखते हुए उसे रविवार दोपहर बाद कांगड़ा जिले के प्रतिष्ठित टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। परिवार के बाकी सदस्यों का उपचार जारी है, जहां उनकी शारीरिक हालत स्थिर बताई जा रही है लेकिन वे गहरे मानसिक आघात में हैं। मेधावी शिक्षिका के निधन से क्षेत्र में शोक पुनीता देवी टिकरू स्कूल में बतौर अध्यापिका अपनी सेवाएं दे रही थीं और बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय थीं। उनके पति हरिंद्र कुमार सलूणी कॉलेज में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। पुनीता के आकस्मिक निधन की खबर से पूरे इलाके और उनके पैतृक गांव बणी में मातम छा गया है। पालमपुर के रहने वाले राजेश ने इस हादसे पर गहरा शोक प्रकट करते हुए बताया कि पुनीता डियूर विद्यालय में उनकी बेहद होनहार छात्रा रही थीं और हमेशा अपनी कक्षा में पहले स्थान पर आती थीं। उन्होंने भावुक होते हुए साझा किया कि महज चार दिन पूर्व ही रंगोत्सव के पावन अवसर पर पुनीता उनसे सुंडला स्थित दफ्तर में मिलने आई थीं। उनकी इस असामयिक मौत पर विश्वास कर पाना हर किसी के लिए बेहद कठिन हो रहा है। क्रैश बैरियर न होने पर ग्रामीणों में रोष चंबा-संघणी मार्ग पर शल्यूंड नाले के पास घटे इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा के बुनियादी ढांचों पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस खतरनाक मोड़ पर लोहे के क्रैश बैरियर लगे होते, तो कार खाई में गिरने से बच सकती थी और इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। सलूणी पंचायत के प्रधान मदन मोहन शर्मा ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि चंबा-संघणी मार्ग के इस संकरे और ढलान वाले हिस्से में सुरक्षा बैरियरों की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि इस जोखिम भरे मोड़ के बारे में लोक निर्माण विभाग को पहले भी कई बार सूचित किया जा चुका था, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पुलिस ने शुरू की दुर्घटना के कारणों की जांच सड़क दुर्घटना की सूचना मिलने के उपरांत पुलिस प्रशासन हरकत में आया। डीएसपी रंजन शर्मा ने पुष्टि की कि हादसे की खबर मिलते ही थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस का एक दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गया था। पुलिस अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया और दुर्घटनाग्रस्त वाहन का जायजा लेते हुए कानूनी प्रक्रिया आरंभ की। डीएसपी ने जानकारी दी कि मृतका के शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस वाहन के अनियंत्रित होने के सही कारणों, संभावित तकनीकी खराबी अथवा मानवीय भूल की बारीकी से जांच कर रही है। इसका आप पर असर हिमाचल के पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए यह दुर्घटना बुनियादी सुरक्षा खामियों की ओर गंभीर संकेत करती है। • भारत में: पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले सभी चालकों को तीखे मोड़ों पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए और वाहनों की गति सीमित रखनी चाहिए। पर्वतीय सड़कों पर अप्रत्याशित मोड़ों से निपटने के लिए समय-समय पर ब्रेक और स्टीयरिंग की तकनीकी जांच कराना बेहद जरूरी है। • चंबा और हिमाचल में: चंबा-संघणी मार्ग के शल्यूंड नाले जैसे जोखिम भरे हिस्सों पर सफर करते समय यात्रियों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। स्थानीय नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा लोक निर्माण विभाग से खतरनाक ढलानों पर अविलंब क्रैश बैरियर स्थापित करने की मांग तेज हो सकती है। • आपातकालीन सहायता: पहाड़ी इलाकों में दुर्घटना के समय ग्रामीणों की त्वरित प्रतिक्रिया घायलों की जान बचाने में निर्णायक साबित होती है। इस हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल बच्चे को टांडा मेडिकल कॉलेज स्थानांतरित करने से स्पष्ट है कि पर्वतीय उप-मंडलों में त्वरित ट्रॉमा केयर की उपलब्धता कितनी महत्वपूर्ण है। • प्रशासनिक जवाबदेही: पंचायत द्वारा पहले से सूचित किए जाने के बावजूद सुरक्षा बैरियर न लगने का मामला विभागीय लापरवाही की जांच को बढ़ावा दे सकता है। इससे जिले के अन्य संवेदनशील ब्लैक स्पॉट्स की पहचान और वहां सुरक्षा तार या रेलिंग लगाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। ऐसा क्यों हुआ यह दर्दनाक हादसा चालक के अचानक वाहन पर से नियंत्रण खो देने और सड़क किनारे मजबूत सुरक्षा ढांचा न होने के कारण घटित हुआ। पहाड़ी मार्ग की जटिल बनावट ने इस दुर्घटना के प्रभाव को और अधिक घातक बना दिया। • सीधा कारण: रविवार सुबह करीब 11 बजे चंबा-संघणी मार्ग पर शल्यूंड नाले के पास तीखे मोड़ पर चालक ने कार पर से नियंत्रण खो दिया, जिसके चलते वाहन सीधे गहरी खाई में जा गिरा। • क्रैश बैरियर का अभाव: सड़क के इस संवेदनशील मोड़ पर लोहे या कंक्रीट के सुरक्षा बैरियर मौजूद नहीं थे, जो अनियंत्रित कार को नीचे खाई में लुढ़कने से रोक सकते थे। • प्रशासनिक अनदेखी: स्थानीय पंचायत प्रधान के अनुसार लोक निर्माण विभाग को इस मार्ग के खतरनाक हिस्सों पर बैरियर लगाने के संबंध में पूर्व में सचेत किया गया था, परंतु समय रहते कोई सुरक्षा कदम नहीं उठाए गए। • जांच जारी: पुलिस प्रशासन और डीएसपी रंजन शर्मा के अनुसार वाहन के फिसलने के तकनीकी, यांत्रिक या मानवीय कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि वास्तविक परिस्थितियों का पता चल सके। सवाल-जवाब 1. चंबा में यह सड़क हादसा किस स्थान और समय पर हुआ? यह दुर्घटना रविवार सुबह लगभग 11 बजे चंबा-संघणी मार्ग पर शल्यूंड नाले के पास घटित हुई। 2. इस हादसे में किसकी जान गई है? कार हादसे में टिकरू स्कूल की 33 वर्षीय अध्यापिका पुनीता देवी की जान चली गई। 3. कार में सवार कौन-कौन से लोग घायल हुए हैं? मृतका के पति हरिंद्र कुमार, छह वर्षीय बेटी शानवी, तीन वर्षीय बेटा समर्थ और भाभी रेखा हादसे में घायल हुए हैं। 4. गंभीर रूप से घायल बच्चे को कहां रेफर किया गया है? तीन साल के बेटे समर्थ की नाजुक हालत को देखते हुए उसे कांगड़ा जिले के टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। 5. सड़क सुरक्षा को लेकर स्थानीय पंचायत ने क्या शिकायत की? सलूणी पंचायत के प्रधान ने बताया कि लोक निर्माण विभाग को पहले अवगत कराने के बावजूद इस मार्ग पर क्रैश बैरियर नहीं लगाए गए थे। https://trendkia.com/himachal-pradesh/chamba-sanghani-marga-para-khai-men-giri-bekabu-kara-shikshika-ki-jana-gai-aura-do-masuma-bachchon-sameta-chara-ghayala-49405 TrendKia — Har trend, sabse pehle.