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  "title": "दीवाली पर हिमाचल प्रदेश में 20 साल बाद लौटेगी लॉटरी, सुक्खू सरकार के फैसले पर भड़का विपक्ष",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए दो दशक से बंद लॉटरी योजना को दीवाली बंपर से दोबारा शुरू करने की घोषणा की है, जिस पर विपक्षी भाजपा ने युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाकर तीखा हमला बोला है।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य में करीब दो दशक बाद सरकारी लॉटरी को दोबारा शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश की डगमगाती आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने और राजस्व के नए स्रोत तलाशने के उद्देश्य से सरकार दीवाली बंपर के साथ लॉटरी का परिचालन फिर से शुरू करने जा रही है। विधानसभा सत्र के दौरान उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सरकार की इस योजना को सार्वजनिक करते हुए स्पष्ट किया कि लॉटरी शुरू करने से जुड़ी तमाम औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है। हालांकि, सरकार के इस कदम के सामने आते ही राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।\n\nदीवाली बंपर से होगी शुरुआत, 100 करोड़ से अधिक राजस्व का लक्ष्य\nउद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने राज्य विधानसभा में सरकार का रुख साफ करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश वर्तमान में गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में प्रदेश के खजाने को मजबूती देने के लिए कड़े और नए फैसले लेना बेहद आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि आगामी दीवाली के पावन पर्व पर राज्य में लॉटरी योजना का आगाज कर दिया जाएगा। सरकार का शुरुआती अनुमान है कि शुरुआती दौर में ही लॉटरी बिक्री से हिमाचल प्रदेश को लगभग 10 करोड़ रुपये की आय होगी। वहीं, जब यह व्यवस्था पूरी तरह से सुचारू हो जाएगी, तो राज्य सरकार को इससे हर साल 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलने की उम्मीद जताई गई है।\n\nपंजाब मॉडल का हवाला और मुख्यमंत्री सुक्खू का तर्क\nलॉटरी के समर्थन में दलील देते हुए उद्योग मंत्री ने पड़ोसी राज्य पंजाब का उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार हर साल लॉटरी के माध्यम से करीब 150 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व अर्जित करती है। हिमाचल प्रदेश के नागरिक भी लंबे समय से पंजाब और अन्य राज्यों की लॉटरी टिकटें खरीदते आ रहे हैं, जिससे हिमाचल का पैसा बाहर चला जाता है और अन्य राज्यों को आर्थिक फायदा पहुंचता है। इसी राजस्व क्षति को रोकने के लिए हिमाचल में अपनी लॉटरी शुरू करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि लॉटरी को जुए के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह किस्मत का खेल है। मंत्री ने स्वीकार किया कि इस फैसले का विरोध भी हो रहा है, लेकिन मौजूदा आर्थिक संकट में यह कदम उठाना राज्य हित में जरूरी था।\n\nरोजगार के वादों पर भाजपा का करारा प्रहार\nसरकार के इस कदम पर सुंदरनगर से भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावों के दौरान सत्ता में आने के लिए हर साल 1 लाख नौकरियां देने का वादा किया गया था। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के करीब 4 साल पूरे होने को हैं, जिसके हिसाब से अब तक प्रदेश के युवाओं को लगभग 4 लाख रोजगार मिल जाने चाहिए थे। लेकिन रोजगार के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रहने के बाद अब सुक्खू सरकार युवाओं को नौकरियों के बजाय दीवाली पर लॉटरी का तोहफा बांटने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे राज्य के लाखों शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया।\n\nदो दशकों का इतिहास और भाजपा की चेतावनी\nभाजपा विधायक ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश में लॉटरी कोई नई बात नहीं है, लेकिन सामाजिक दुष्परिणामों को देखते हुए इसे करीब 20 साल पहले भाजपा की प्रेम कुमार धूमल सरकार ने बंद कर दिया था। उस ऐतिहासिक फैसले के बाद राज्य में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार आई और बाद में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, लेकिन किसी भी मुख्यमंत्री ने जनहित को ध्यान में रखते हुए लॉटरी को दोबारा शुरू करने की वकालत नहीं की। राकेश जम्वाल ने ऐलान किया कि जैसे ही राज्य में भाजपा की वापसी होगी, इस लॉटरी योजना को तुरंत प्रभाव से फिर से बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का काम युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बनाना है, न कि उन्हें रातों-रात अमीर बनने का झांसा देने वाली योजनाओं में धकेलना।\n\nनशा नीति और सामाजिक दुष्परिणामों पर गंभीर सवाल\nविपक्ष ने सरकार की राजस्व नीतियों पर सवाल उठाते हुए इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए घातक बताया। राकेश जम्वाल ने कहा कि इससे पहले भी सरकार ने भांग की खेती को वैध बनाने के पीछे अर्थव्यवस्था मजबूत करने और रोजगार पैदा करने का तर्क दिया था। एक तरफ प्रदेश में नशे का जाल लगातार गहराता जा रहा है, जिससे युवाओं की असमय मौतें हो रही हैं और कई परिवार तबाह हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लॉटरी जैसी योजनाओं को बढ़ावा देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल खजाना भरने की होड़ में लगी है और इस फैसले का आम लोगों तथा युवा पीढ़ी के जीवन पर क्या बुरा प्रभाव पड़ेगा, इसकी पूरी तरह अनदेखी कर रही है।\n\nपर्यटन विकास और स्थायी राजस्व के वैकल्पिक उपाय\nभाजपा ने तर्क दिया कि राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए केवल लॉटरी ही एकमात्र रास्ता नहीं है, बल्कि सरकार के पास कई अन्य टिकाऊ विकल्प मौजूद हैं। हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिन पर ध्यान देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए जम्वाल ने कहा कि पहले भी बिना सामाजिक नुकसान पहुंचाए राज्य के संसाधनों का विकास किया गया था। सरकार को नए टूरिज्म प्रोजेक्ट्स, निवेश प्रोत्साहन और स्थायी रोजगार के साधनों पर काम करना चाहिए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके और राज्य को दीर्घकालिक वित्तीय मजबूती मिल सके।\n\nइसका आप पर असर\nहिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दो दशक बाद लॉटरी योजना की बहाली से राज्य के वित्तीय परिदृश्य और आम नागरिकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• हिमाचल प्रदेश में: राज्य में दीवाली बंपर से सरकारी लॉटरी की आधिकारिक बिक्री शुरू हो जाएगी। इससे स्थानीय नागरिक पड़ोसी राज्यों के बजाय अपने ही प्रदेश में लॉटरी टिकट खरीद सकेंगे।\n• राज्य के राजस्व पर: शुरुआती चरण में हिमाचल सरकार को 10 करोड़ रुपये और बाद में सालाना 100 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। इस पैसे का इस्तेमाल राज्य के बजटीय घाटे को कम करने में किया जा सकता है।\n• युवाओं और रोजगार पर: विपक्षी दलों के विरोध के बीच लॉटरी योजना से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष टिकट बिक्री केंद्रों के माध्यम से कुछ तात्कालिक रोजगार पैदा हो सकते हैं, हालांकि सामाजिक चिंताओं पर बहस जारी रहेगी।\n• भारत में: पड़ोसी राज्य पंजाब की तरह हिमाचल भी अब लॉटरी से राजस्व जुटाने वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा। इससे अंतरराज्यीय लॉटरी कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हिमाचल प्रदेश में लॉटरी कब से शुरू होने जा रही है?\nहिमाचल प्रदेश सरकार दीवाली के अवसर पर दीवाली बंपर के साथ राज्य लॉटरी योजना को फिर से शुरू करने जा रही है।\n\n2. लॉटरी शुरू करने से हिमाचल सरकार को कितनी आय की उम्मीद है?\nसरकार को शुरुआती दौर में लगभग 10 करोड़ रुपये और उसके बाद सालाना 100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने का अनुमान है।\n\n3. हिमाचल प्रदेश में लॉटरी कितने समय से बंद थी?\nहिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी पिछले लगभग दो दशकों (20 साल) से बंद थी, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में बंद किया गया था।\n\n4. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लॉटरी को लेकर क्या बयान दिया है?\nमुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि लॉटरी भाग्य का खेल है और इसे जुआ नहीं माना जाना चाहिए।\n\n5. विपक्ष (भाजपा) ने सरकार के इस फैसले का विरोध क्यों किया है?\nभाजपा ने आरोप लगाया है कि सरकार हर साल 1 लाख नौकरियां देने का वादा पूरा करने में विफल रही है और अब रोजगार के बदले युवाओं को लॉटरी थमाकर उनके भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।\n\n6. पंजाब सरकार लॉटरी से सालाना कितना राजस्व अर्जित करती है?\nहिमाचल के उद्योग मंत्री के अनुसार, पंजाब सरकार को लॉटरी से सालाना लगभग 150 करोड़ रुपये की आय होती है।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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