{
  "type": "article",
  "title": "हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा के एंटी जैमर ड्रोन प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय से 3.50 करोड़ रुपये का अनुदान मिला",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को सेना के लिए राडार और जैमर से बचने वाला ड्रोन विकसित करने के वास्ते 3.50 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय मंजूरी मिली है।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर (बड़ू) के एक होनहार छात्र ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में अध्ययनरत सर्वेश शर्मा ने भारतीय थल सेना के सामने आने वाली सीमा निगरानी की जटिल चुनौतियों को हल करने के उद्देश्य से एक विशेष तकनीक पर आधारित ड्रोन डिजाइन किया है। इस मानवरहित विमान की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता यह है कि यह विरोधी पक्ष के राडार की निगरानी प्रणाली से ओझल रहने में सक्षम है और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक जैमर के जरिए इसके संचार तंत्र को बाधित नहीं किया जा सकता।\n\nरक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत किए 3.50 करोड़ रुपये\nइस आधुनिक रक्षा समाधान को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (डीआईओ) और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडैक्स) की ओर से 3.50 करोड़ रुपये का विशाल अनुदान आधिकारिक रूप से मंजूर किया गया है। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश माहौर ने इस बजट आवंटन को अपनी औपचारिक मंजूरी प्रदान की है। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच रहने वाले सर्वेश के इस रक्षा प्रोजेक्ट को मिली वित्तीय स्वीकृति ने उनके शिक्षण संस्थान और पूरे राज्य का मान बढ़ाया है।\n\nप्रतियोगिता के मंच से मिली समाधान खोजने की प्रेरणा\nसर्वेश शर्मा की इस तकनीकी यात्रा की औपचारिक शुरुआत आईआईटी जोधपुर और भारतीय सेना की कोणार्क कोर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की ओपन कार्डबोर्ड ड्रोन प्रतियोगिता से हुई थी। उस प्रतिष्ठित तकनीकी आयोजन में देशभर के अग्रणी इंजीनियरिंग संस्थानों से आई 50 टीमों ने भाग लिया था और अपनी नवीन अवधारणाएं प्रस्तुत की थीं। उसी मंच पर सैन्य अधिकारियों द्वारा सीमाओं पर निगरानी व्यवस्था में आने वाली तकनीकी बाधाओं और जैमिंग से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ था।\n\nउस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सर्वेश की टीम ने चौथा स्थान हासिल करते हुए 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार अपने नाम किया था। वहां से मिले प्रोत्साहन के बाद सर्वेश ने सीमा सुरक्षा की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपना शोध कार्य शुरू किया। उन्होंने मात्र 87 हजार रुपये की बेहद सीमित लागत में प्रारंभिक प्रोटोटाइप तैयार कर अपनी तकनीकी समझ का लोहा मनवाया।\n\nरुद्रा एज टी-1 स्पेक्ट्रा ड्रोन की खूबियां और आईआईटी रुड़की में इनक्यूबेशन\nप्रारंभिक परीक्षणों में उत्साहजनक परिणाम मिलने के बाद सर्वेश ने डीआईओ और आईडैक्स पहल के तहत स्टार्टअप के रूप में वित्तीय सहयोग के लिए आवेदन जमा किया था। केंद्र सरकार से औपचारिक सहमति मिलने के बाद अब वह सेना के लिए रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा) नामक ड्रोन का पूर्ण विकास करेंगे। यह सैन्य उपकरण संवेदनशील सीमाओं पर गुप्त निगरानी और निगरानी डाटा एकत्र करने में निर्णायक साबित होगा, क्योंकि जैमिंग और राडार डिटेक्शन से बचाव के चलते यह सुरक्षित रूप से मिशन को अंजाम दे सकता है।\n\nरक्षा मंत्रालय ने परियोजना से संबंधित सभी वैधानिक और तकनीकी दस्तावेज पूरे करने के लिए 20 दिन की समयसीमा निर्धारित की है। इस पूरे शोध और निर्माण कार्य के लिए देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी रुड़की में विशेष इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित किया गया है। सर्वेश आईआईटी रुड़की की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में काम करेंगे, जहां इस परियोजना को अगले 20 महीनों की अवधि में पूरा करने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया है।\n\nसाधारण पृष्ठभूमि और संस्थान का गौरव\nसर्वेश शर्मा एक बेहद साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता संजीव शर्मा आजीविका के लिए दैनिक दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। पारिवारिक विषमताओं के बावजूद सर्वेश ने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने अपनी प्रारंभिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर की स्कूली शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाहनवीं से पूरी की और उसके बाद हमीरपुर में तकनीकी डिप्लोमा की राह चुनी।\n\nइस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर, कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख समीर भारती और संस्थान के सभी प्राध्यापकों ने छात्र को बधाई दी है। शिक्षकों ने विश्वास व्यक्त किया है कि आधुनिक रक्षा नवाचार के जरिए सर्वेश भारतीय सैन्य क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।\n\nइसका आप पर असर\nयह नवाचार भारतीय सैन्य निगरानी को स्वदेशी और किफायती तकनीक से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।\n\n• भारत में: सीमावर्ती इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों को दुर्गम और संवेदनशील मोर्चों पर राडार रोधी निगरानी की उन्नत प्रणाली प्राप्त होगी। इससे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और जैमिंग के दौरान भी सैन्य टुकड़ियों को सटीक जमीनी जानकारी बिना किसी व्यवधान के मिलती रहेगी।\n• हिमाचल प्रदेश में: राज्य के तकनीकी शिक्षा संस्थानों और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों को नवाचार के प्रति नया विश्वास मिलेगा। यह सफलता साबित करती है कि छोटे शहरों के पॉलिटेक्निक संस्थानों से भी राष्ट्रीय रक्षा स्तर के आधुनिक स्टार्टअप खड़े किए जा सकते हैं।\n• युवा शोधकर्ताओं के लिए: कम बजट और सीमित साधनों के बावजूद ठोस व्यावहारिक समस्याओं पर काम करने वाले छात्रों को सरकारी अनुदान का सीधा रास्ता दिखाई देगा। रक्षा उत्पादन में स्टार्टअप योजनाओं और केंद्रीय सहायता के नए अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।\n• रक्षा उद्योग पर: महंगे विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय स्तर पर विकसित प्रोटोटाइप को सेना की सीधी जरूरतों के अनुरूप ढालना आसान होगा। बीस महीने में तैयार होने वाला यह प्रोजेक्ट रक्षा निर्माण तंत्र को गति देगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारतीय सेना की सीमा निगरानी में राडार ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बढ़ते खतरों ने एक सुरक्षित समाधान तैयार करने की तात्कालिक आवश्यकता पैदा की थी।\n\n• सीधे कारण: पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर तैनात सैनिकों को ऐसे मानवरहित विमानों की जरूरत थी जो जैमिंग उपकरणों के सक्रिय होने पर भी संपर्क न खोएं। सर्वेश शर्मा ने इस रणनीतिक कमी को भांपकर राडार और जैमर रोधी तकनीकी संरचना तैयार की।\n• प्रेरक परिस्थितियां: आईआईटी जोधपुर और सेना की कोणार्क कोर की संयुक्त प्रतियोगिता में सैन्य अधिकारियों ने सीमा पर आ रही दिक्कतों को साझा किया था। इस विमर्श से प्रेरित होकर छात्र ने 87 हजार रुपये में पहला प्रोटोटाइप तैयार कर अपनी अवधारणा साबित की।\n• नीतिगत ढांचा: रक्षा मंत्रालय की डीआईओ और आईडैक्स योजनाएं युवा उद्यमियों और छात्रों के तकनीकी विचारों को सीधे वित्तीय संबल देने के लिए बनाई गई हैं। प्रोजेक्ट की तकनीकी उपादेयता और परीक्षण परिणामों के आधार पर ही इस बड़े बजट को मंजूरी दी गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सर्वेश शर्मा कौन हैं और वे कहां पढ़ाई कर रहे हैं?\nसर्वेश शर्मा हिमाचल प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर (बड़ू) में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं।\n\n2. रक्षा मंत्रालय ने किस प्रोजेक्ट के लिए 3.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं?\nयह वित्तीय सहायता भारतीय सेना के लिए राडार और जैमर से बचने वाले 'रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)' नामक निगरानी ड्रोन को विकसित करने के लिए दी गई है।\n\n3. इस तकनीकी परियोजना का इनक्यूबेशन कहां किया जाएगा?\nइस पूरे प्रोजेक्ट का इनक्यूबेशन सेंटर आईआईटी रुड़की की प्रयोगशाला में बनाया गया है।\n\n4. ड्रोन के निर्माण और प्रोजेक्ट को पूरा करने की समयसीमा क्या तय की गई है?\nप्रोजेक्ट की औपचारिकताएं 20 दिनों में पूरी होनी हैं और इसे 20 महीनों की अवधि में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।\n\n5. सर्वेश को इस प्रोजेक्ट की प्रेरणा कहां से मिली थी?\nउन्हें यह प्रेरणा आईआईटी जोधपुर और कोणार्क कोर की संयुक्त राष्ट्रीय ड्रोन प्रतियोगिता के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़ी चर्चा से मिली थी।\n\n6. प्रारंभिक प्रोटोटाइप तैयार करने में कितना खर्च आया था?\nसर्वेश ने इस प्रोजेक्ट का पहला प्रोटोटाइप केवल 87 हजार रुपये की लागत में तैयार किया था।\n\nप्रेरणा और सबक\nसंसाधनों के अभाव को अपनी सीमा न मानकर कठिन परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।\n\n• समस्या को अवसर बनाना: सैन्य अधिकारियों द्वारा बताई गई व्यावहारिक समस्या को केवल सुना नहीं बल्कि उस पर शोध कर समाधान खोजा। व्यावहारिक जरूरतों को समझकर की गई कोशिश हमेशा सार्थक परिणाम देती है।\n• सीमित साधनों में शुरुआत: बड़े बजट का इंतजार किए बिना केवल 87 हजार रुपये में पहला प्रोटोटाइप बनाकर अपनी तकनीकी योग्यता साबित की। नवाचार के लिए धन से अधिक स्पष्ट सोच और लगन की आवश्यकता होती है।\n• पृष्ठभूमि को बाधा न बनने देना: पिता की दिहाड़ी मजदूरी और आर्थिक कठिनाइयों को अपनी प्रगति के आड़े नहीं आने दिया। शिक्षा और लगन के बल पर राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में अपनी जगह बनाई।\n• अवसरों का समय पर लाभ: राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और सरकारी स्टार्टअप पहलों में समय पर आवेदन कर अपने प्रोजेक्ट को मुकाम तक पहुंचाया। सही मंच का चयन नवाचार को बड़े स्तर तक ले जाता है।",
  "url": "https://trendkia.com/himachal-pradesh/hamirpur-ke-chhatra-sarvesh-sharma-ke-anti-jammer-drone-project-ko-defence-ministry-se-3-50-crore-rupaye-ka-anudan-mila-36835",
  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-23",
  "tags": [
    "सर्वेश शर्मा",
    "हमीरपुर पॉलीटेक्निक",
    "रक्षा मंत्रालय",
    "भारतीय सेना",
    "आईडैक्स",
    "आईआईटी रुड़की",
    "सैन्य ड्रोन",
    "रुद्रा एज टी 1"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}