हमीरपुर पॉलीटेक्निक छात्र का मामला: ड्रोन ग्रांट का दावा निकला फर्जी, तीसरी मंजिल से गिरने की जांच में जुटी पुलिस हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले स्थित पॉलीटेक्निक कॉलेज के छात्र सर्वेश कुमार पीजीआई में भर्ती हैं। सेना के लिए ड्रोन निर्माण हेतु साढ़े तीन करोड़ रुपये की फंडिंग का पत्र फर्जी साबित हुआ है, और पुलिस अब साइबर धोखाधड़ी तथा बालकनी से गिरने के कारणों की गहराई से पड़ताल कर रही है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले स्थित बड़ू पॉलीटेक्निक कॉलेज के एक छात्र के साथ जुड़ा अजीबोगरीब मामला सामने आया है। इस घटना के केंद्र में छात्र सर्वेश कुमार हैं, जिनका इलाज फिलहाल पीजीआई में चल रहा है। वह हाल ही में कॉलेज भवन की तीसरी मंजिल से नीचे गिर गए थे, जिसके बाद से कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सेना के नाम पर ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए मिली साढ़े तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम फंडिंग का दावा पूरी तरह फर्जी निकला। सेना के अधिकारियों के हस्तक्षेप और कॉलेज प्रबंधन से बातचीत के बाद इस सच्चाई का खुलासा हुआ है, जिसके बाद पुलिस विभिन्न पहलुओं पर अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। गुरुवार दोपहर को एएसपी राजेश शर्मा के नेतृत्व में एक पुलिस दल ने बड़ू स्थित पॉलीटेक्निक संस्थान के हॉस्टल का दौरा किया। वहां पहुंचकर अधिकारियों ने गहन छानबीन की और सर्वेश के साथी छात्रों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा एएसपी ने संस्थान के प्रिंसिपल चंद्रशेखर से भी मुलाकात कर सेना को ड्रोन सौंपने से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटाई। शुरुआती जांच में सामने आया कि दोपहर करीब डेढ़ बजे जब लंच ब्रेक के दौरान सर्वेश अपने कमरे में लौटे तो उन्होंने अंदर से कुंडी लगा ली थी। इसके बाद वह बालकनी की छत से नीचे आ गिरे। पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में छात्र ने यह कदम उठाया और क्या इसके पीछे किसी प्रकार का मानसिक दबाव या साइबर धोखाधड़ी थी। मामले की तह में जाने पर पता चला कि सर्वेश कुमार को भारतीय सेना के आधिकारिक लोगो वाला एक पत्र मिला था। इस पत्र के माध्यम से दावा किया गया था कि उन्हें रक्षा उद्देश्यों के लिए ड्रोन विकसित करने के वास्ते 3.50 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट आवंटित किया गया है। इस कागजात के आधार पर कॉलेज प्रबंधन भी भ्रम में रहा और इस उपलब्धि की चर्चा चारों तरफ फैल गई। हालांकि, संस्थान ने अपनी तरफ से इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। प्रिंसिपल चंद्रशेखर ने मीडिया को बताया कि उन्हें इस साल 15 अक्टूबर को सेना की तरफ से एक फोन कॉल प्राप्त हुई थी, जिसके बाद मामले की पड़ताल शुरू की गई। इसके बाद 27 अक्टूबर को सेना ने छात्र से संबंधित रिकॉर्ड मांगा और वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद छात्र से बात की। दूसरी तरफ, हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक बलवीर सिंह ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि सेना से मिलने वाली ग्रांट और उससे जुड़ी अन्य औपचारिकताओं पर पुलिस अभी आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कह सकती क्योंकि जांच प्रक्रिया जारी है। पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि हॉस्टल परिसर से छात्र नीचे कैसे गिरा। हालांकि, अधिकारी छात्र के खुद कूदने की संभावना से भी इनकार नहीं कर रहे हैं। गंभीर हालत के चलते सर्वेश को हमीरपुर से चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया है। भोरंज के विधायक सुरेश कुमार ने पीजीआई पहुंचकर अस्पताल में भर्ती सर्वेश से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। डॉक्टरों के अनुसार छात्र की सर्जरी होनी है क्योंकि उनके जबड़े और दोनों टांगों में फ्रैक्चर आया है, हालांकि गनीमत यह रही कि सिर में गंभीर चोट नहीं लगी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह बात भी सामने आई है कि कुछ समय पहले जोधपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद सर्वेश को 10 लाख रुपये का इनाम भी मिला था। इन सब बातों को जोड़कर यह आशंका जताई जा रही है कि क्या वह किसी शातिर साइबर ठग गिरोह के जाल में फंस गए थे, जिससे आहत होकर उन्होंने ऐसा खौफनाक कदम उठाने की कोशिश की। हालांकि स्थानीय पुलिस इस विषय पर अभी संयम बनाए हुए है और किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने से पहले हर एक कड़े सबूत की जांच कर रही है। भारतीय सेना के अंतर्गत आने वाली डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन यानी आईडेक्स डीआईओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साफ कर दिया है कि पिछले दो महीनों से सर्वेश शर्मा के प्रोजेक्ट को लेकर प्रसारित हो रही साढ़े तीन करोड़ रुपये की ग्रांट की खबर सरासर झूठी है। संस्था ने लोगों से अपील की है कि इस तरह की संवेदनशील जानकारियों की हमेशा सत्यता जांचनी चाहिए। आपको बता दें कि आईडेक्स भारत सरकार की एक प्रतिष्ठित पहल है जिसे रक्षा क्षेत्र में नए नवाचारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साल 2018 में रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन शुरू किया गया था। इसका आप पर असर यह घटना छात्रों और अभिभावकों को ऑनलाइन दावों और फर्जी फंडिंग पत्रों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी देती है। • छात्रों के लिए: किसी भी बड़ी फंडिंग या प्रोजेक्ट के दावे मिलने पर उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें। ऑनलाइन लुभावने प्रस्ताव साइबर धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकते हैं। • प्रशासनिक स्तर पर: शिक्षण संस्थानों को बाहरी प्रायोजन और अनुदान प्रस्तावों की गहन जांच करने की आवश्यकता है ताकि फर्जीवाड़े से बचा जा सके। • हमीरपुर में: स्थानीय युवाओं और अभिभावकों के बीच साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से बचाव को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसा क्यों हुआ यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों और साइबर धोखाधड़ी के संदेह के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसकी पुलिस और सेना द्वारा संयुक्त रूप से जांच की जा रही है। • फर्जी दस्तावेज: छात्र को सेना के लोगो वाला एक पत्र मिला था जिसमें साढ़े तीन करोड़ रुपये की ग्रांट का झूठा दावा किया गया था। • साइबर ठगी की आशंका: जोधपुर में इनाम मिलने के बाद छात्र के किसी ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होने की संभावना जताई जा रही है। • सेना का खंडन: रक्षा मंत्रालय की संस्था आईडेक्स ने स्पष्ट किया कि ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए किसी भी तरह की ग्रांट जारी नहीं की गई थी। सवाल-जवाब 1. सर्वेश कुमार किस संस्थान के छात्र हैं? सर्वेश कुमार हमीरपुर जिले के बड़ू पॉलीटेक्निक कॉलेज के छात्र हैं। 2. सर्वेश का इलाज कहां चल रहा है? उन्हें हमीरपुर से चंडीगढ़ पीजीआई के ट्रामा सेंटर में रेफर किया गया है जहां उनका इलाज जारी है। 3. कितने करोड़ की ग्रांट का दावा किया गया था? पत्र में सेना के लिए ड्रोन बनाने हेतु 3.50 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलने का दावा किया गया था। 4. आईडेक्स क्या है? आईडेक्स रक्षा क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय के अधीन भारत सरकार की एक पहल है। https://trendkia.com/himachal-pradesh/hamirpur-polytechnic-student-case-drone-grant-claim-proved-fake-as-police-probe-hostel-fall-53070 TrendKia — Har trend, sabse pehle.