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  "type": "article",
  "title": "हिमाचल के 148 सरकारी सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षकों का नया ड्रेस कोड प्रभावी, अगले सत्र से जुड़ेंगे 100 और संस्थान",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश सरकार ने 148 सीबीएसई मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और प्राचार्यों के लिए औपचारिक परिधान अनिवार्य कर दिया है, जबकि आगामी सत्र से 100 नए स्कूल जोड़ने की तैयारी है।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश के शिक्षा तंत्र में अनुशासन और एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के 148 केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) संबद्ध सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए नया ड्रेस कोड विधिवत रूप से प्रभावी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर लागू की गई इस व्यवस्था का मुख्य मकसद शिक्षण संस्थानों में एक सुव्यवस्थित, मर्यादित और पेशेवर माहौल तैयार करना है। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने इस नीतिगत बदलाव की आधिकारिक पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि यह परिधान संहिता शिक्षण परिसरों में कार्यरत सभी शिक्षकों और प्राचार्यों पर पूरी तरह लागू होगी।\n\nपेशेवर पहचान और मौसम के अनुकूल रंगों का चयन\nशिक्षा विभाग के अनुसार, नई परिधान नीति तय करते समय अध्यापकों की कार्यस्थल संबंधी सहूलियतों के साथ-साथ राज्य की विशिष्ट भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। शिक्षकों की वेशभूषा के लिए मुख्य रूप से तीन रंगों हल्का लाइलैक, लाइलैक पर्पल और नेवी ब्लू का चयन किया गया है। इसके अलावा सभी शिक्षकों के लिए जूते और अन्य आवश्यक सहायक सामग्रियों का रंग काला निर्धारित किया गया है, ताकि पूरे राज्य के इन विद्यालयों में एक समान और गरिमापूर्ण दृश्य पहचान स्थापित की जा सके।\n\nमहिला और पुरुष शिक्षकों के लिए निर्धारित परिधान प्रारूप\nमहिला शिक्षकों के लिए विभाग ने कई शालीन और औपचारिक विकल्प तय किए हैं। वे ब्लेजर के साथ साड़ी पहन सकती हैं, अथवा कुर्ता और कमीज के साथ पैंट, प्लाज़ो या सलवार का संयोजन चुन सकती हैं। इसके अतिरिक्त महिला शिक्षकों के पास टाई और ब्लेजर के साथ शर्ट-ट्राउजर पहनने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। वहीं पुरुष शिक्षकों के लिए औपचारिक शर्ट, ट्राउजर, टाई और ब्लेजर पहनना तय किया गया है। कार्यस्थल पर अनुशासन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी शिक्षकों के लिए ड्यूटी के दौरान पहचान पत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य रहेगा। साथ ही उनके ब्लेजर पर संबंधित विद्यालय अथवा शिक्षा विभाग का आधिकारिक लोगो भी लगा होगा।\n\nनियमों का दायरा और विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान\nयह परिधान संहिता केवल नियमित स्टाफ तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थानों में आउटसोर्स आधार पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर भी समान रूप से लागू रहेगी। हालांकि, मानवीय दृष्टिकोण और व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए नियमों में लचीलापन भी रखा गया है। यदि कोई शिक्षक चिकित्सीय आवश्यकता, दिव्यांगता या गर्भावस्था की स्थिति में है, तो संस्थान के प्रमुख की पूर्व अनुमति लेकर निर्धारित पोशाक में यथोचित बदलाव अथवा आवश्यक छूट प्राप्त की जा सकती है।\n\nशिक्षा सुधार, उपस्थिति प्रणाली और 100 नए सीबीएसई स्कूल\nयह निर्णय राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए चलाए जा रहे व्यापक सुधार कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। राज्य सरकार आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश भर में 100 नए सरकारी सीबीएसई स्कूल खोलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इन संबद्ध विद्यालयों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पहले ही करीब 2,000 अध्यापकों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं। शिक्षकों की उपस्थिति और समय की पाबंदी को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए अब स्कूलों में दिन में तीन बार हाजिरी दर्ज कराने की नई व्यवस्था भी शुरू की जा रही है।\n\nउत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रोत्साहन और पीएम श्री स्कूलों में श्रेणी नियम\nशिक्षा क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए सरकार पुरस्कार और सम्मान प्रणाली को भी सुदृढ़ बना रही है। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण सामाजिक और समावेशी पहल के तहत, आगामी शैक्षणिक सत्र से सरकारी पीएम श्री स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के आधिकारिक अभिलेखों में किसी भी जातिगत अथवा सामाजिक श्रेणी का उल्लेख नहीं किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने आश्वस्त किया है कि इस रिकॉर्ड सुधार के बावजूद पात्र परिवारों को वर्तमान सरकारी नियमों के अनुरूप मिलने वाले सभी कल्याणकारी लाभ और सुविधाएं पूर्ववत जारी रहेंगी।\n\nइसका आप पर असर\nइस नीतिगत कदम से हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षिक माहौल, शिक्षकों की दिनचर्या और भावी प्रवेश अवसरों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• हिमाचल प्रदेश में: राज्य के 148 सीबीएसई स्कूलों में तैनात नियमित और आउटसोर्स शिक्षकों को अब निर्धारित रंग और प्रारूप में ही परिधान पहनकर स्कूल आना होगा। दिन में तीन बार दर्ज होने वाली उपस्थिति व्यवस्था से शिक्षकों की कार्यशैली और समय की पाबंदी पर सीधा असर पड़ेगा।\n• अभिभावकों और छात्रों के लिए: आगामी शैक्षणिक सत्र से 100 नए सीबीएसई स्कूल खुलने से स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली अंग्रेजी माध्यम और केंद्रीय पाठ्यक्रम शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। इसके कारण कई परिवारों को अपने बच्चों के लिए महंगे निजी स्कूलों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।\n• पीएम श्री स्कूल रिकॉर्ड: सरकारी पीएम श्री स्कूलों में नए सत्र से विद्यार्थियों के दस्तावेजों में सामाजिक श्रेणी दर्ज नहीं की जाएगी, जिससे परिसरों में समानता बढ़ेगी। हालांकि, छात्रवृत्ति और सरकारी सहायता प्राप्त करने वाले परिवारों की किसी भी कल्याणकारी योजना के लाभ पर कोई रोक नहीं लगेगी।\n• विशेष परिस्थितियों में राहत: गर्भवती, दिव्यांग अथवा स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे शिक्षकों को विद्यालय प्रमुख से विशेष अनुमति लेकर ड्रेस कोड में छूट प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। इस व्यवस्था से जरूरतमंद कर्मचारियों को अनावश्यक शारीरिक परेशानी से बचाव का व्यावहारिक रास्ता मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nराज्य सरकार ने सरकारी शिक्षण संस्थानों की सामाजिक प्रतिष्ठा सुधारने, अनुशासन स्थापित करने और आधुनिक शिक्षण मानकों के अनुरूप व्यवस्था तैयार करने के लिए यह फैसला लिया है।\n\n• व्यावसायिक छवि का निर्माण: सरकारी विद्यालयों में निजी संस्थानों के समकक्ष पेशेवर शिक्षण माहौल तैयार करना और शिक्षकों की संस्थागत पहचान को सशक्त बनाना इस कदम की प्राथमिक वजह रही। अधिकारियों के अनुसार शिक्षकों का एकरूप परिधान विद्यार्थियों पर भी सकारात्मक और अनुशासित प्रभाव डालता है।\n• सीबीएसई रूपांतरण की व्यापक योजना: राज्य सरकार अपनी बुनियादी शिक्षा को आधुनिक सीबीएसई ढांचे में ढाल रही है, जिसके अंतर्गत 2,000 नई नियुक्तियां और नए विद्यालय जोड़े जा रहे हैं। ड्रेस कोड और तीन बार उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था इसी प्रशासनिक पुनर्गठन का हिस्सा है।\n• समानता और गरिमा को बढ़ावा: पीएम श्री स्कूलों में श्रेणी विवरण हटाने और शिक्षकों के लिए एक समान कोड लाने के पीछे परिसरों में समानता की भावना विकसित करना है। सरकार का उद्देश्य इन स्कूलों को राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श शिक्षा मॉडल के रूप में स्थापित करना है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ड्रेस कोड हिमाचल प्रदेश के किन विद्यालयों पर लागू किया गया है?\nयह नया ड्रेस कोड हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई बोर्ड के तहत संचालित 148 सरकारी स्कूलों में लागू किया गया है।\n\n2. शिक्षकों के परिधान के लिए कौन-से रंग निर्धारित किए गए हैं?\nड्रेस कोड के लिए हल्का लाइलैक, लाइलैक पर्पल और नेवी ब्लू रंग तय किए गए हैं, जबकि जूतों व अन्य एक्सेसरीज के लिए काला रंग तय है।\n\n3. क्या आउटसोर्स शिक्षकों के लिए भी यह ड्रेस कोड अनिवार्य है?\nहां, यह ड्रेस कोड सभी शिक्षकों और प्राचार्यों पर लागू होगा, जिसमें आउटसोर्स आधार पर कार्यरत शिक्षक भी शामिल हैं।\n\n4. किन परिस्थितियों में ड्रेस कोड से छूट मिल सकती है?\nचिकित्सीय आवश्यकता, दिव्यांगता अथवा गर्भावस्था की स्थिति में संस्थान प्रमुख की अनुमति से आवश्यक छूट या बदलाव संभव है।\n\n5. राज्य में अगले शैक्षणिक सत्र से कितने और सीबीएसई स्कूल खोले जाएंगे?\nराज्य सरकार आगामी शैक्षणिक सत्र से 100 नए सरकारी सीबीएसई स्कूल खोलने की तैयारी कर रही है।\n\n6. शिक्षकों की हाजिरी व्यवस्था में क्या बदलाव किया जा रहा है?\nशिक्षकों की जवाबदेही और उपस्थिति व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए दिन में तीन बार हाजिरी दर्ज करने का नियम शुरू किया जा रहा है।\n\n7. पीएम श्री स्कूलों में श्रेणी का उल्लेख हटाने से क्या कल्याणकारी लाभ बंद होंगे?\nनहीं, अभिलेखों में श्रेणी न होने के बावजूद पात्र परिवारों को सभी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नियमों के अनुसार मिलता रहेगा।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-02",
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