# हिमाचल के बागवानों की मेहनत रंग लाई, कुल्लू का सिंदूरी अनार अब सीधे दुबई की मंडियों में

> हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से 1.3 मीट्रिक टन सिंदूरी अनार का निर्यात दुबई के लिए किया गया है। इस कदम से राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में स्थानीय फलों की पहुंच मजबूत करने में मदद मिल रही है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-ke-bagavanon-ki-mehanata-rnga-lai-kullu-ka-sinduri-anara-aba-sidhe-dubai-ki-mndiyon-men-50829 · **Language:** Hindi
**Tags:** हिमाचल प्रदेश बागवानी, कुल्लू अनार निर्यात, सुखविंदर सिंह सुक्खू, एपीडा, दुबई निर्यात, भुंतर एफपीओ

हिमाचल प्रदेश के बागवानी उत्पादों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक मजबूत और खास पहचान बनानी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए कुल्लू जिले में पैदा होने वाली सिंदूरी किस्म के अनार की एक बड़ी खेप संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के दुबई शहर में भेजी गई है। इस खेप का कुल वजन 1.3 मीट्रिक टन है। राज्य सरकार इस सफलता को स्थानीय किसानों और बागवानों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के साथ-साथ हिमाचली फलों को सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और अहम कदम मान रही है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वीरवार को एक बयान में कहा कि सरकार किसानों और बागवानों को उनकी मेहनत का सही और उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि हिमाचल के कृषि और बागवानी से जुड़े उत्पादों को देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ दुनिया भर के बाजारों में भी जगह मिले, ताकि उत्पादकों को अपने माल के लिए बेहतरीन विपणन के अवसर मिल सकें और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

 

## छह सौ किसानों के संगठन से जुटाई गई खेप

दुबई भेजे गए इस सिंदूरी अनार को कुल्लू के स्थानीय किसानों और भुंतर स्थित किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ के माध्यम से सफलतापूर्वक एकत्र किया गया था। इस संगठन के साथ लगभग 600 किसान सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस सामूहिक प्रयास के जरिए किसानों ने अपनी उपज को एक मंच पर इकट्ठा किया। दुबई के बाजार में अनार की इस खेप को पहुंचाने में जिन प्रमुख किसानों ने अपनी फसल की आपूर्ति की है, उनमें रीना देवी, संजय कुमार, नितिश कुमार और वीर सिंह गुलेरिया के नाम शामिल हैं। इन सभी की मेहनत का ही परिणाम है कि स्थानीय फल अब सात समंदर पार अपनी चमक बिखेर रहे हैं।

इस पूरे निर्यात की प्रक्रिया को आसान बनाने और इसे पूरा करने में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपीडा के चंडीगढ़ में स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने बहुत महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है। इस सरकारी संस्था की मदद से स्थानीय किसानों को अपने फल बेचने के लिए सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहुंच बनाने का एक बहुत ही शानदार अवसर प्राप्त हुआ है, जिससे भविष्य में अन्य उत्पादों के लिए भी रास्ते खुलेंगे।

 

## गुणवत्ता सुधार पर जोर और ओमान को पहले भेजे गए फल

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसके लिए कृषि और बागवानी उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री से जुड़ी सुविधाओं को लगातार उन्नत किया जा रहा है और निर्यात को बढ़ावा देने के वास्ते हर संभव सहायता मुहैया कराई जा रही है। उन्होंने राज्य के सभी किसानों और बागवानों से यह अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की आधुनिक मांग और पसंद के अनुसार ही उच्च गुणवत्ता वाली फसलों और फलों की पैदावार करें। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो हिमाचल के फल वैश्विक बाजारों में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान हमेशा के लिए स्थापित कर सकते हैं।

फलों के निर्यात को बढ़ावा देने की इस कोशिश की शुरुआत इसी साल जून के महीने में भी देखने को मिली थी, जब शिमला जिले के जड़ोल-टिक्कर और बागी इलाकों के छह प्रगतिशील किसानों ने मिलकर 400 किलोग्राम चेरी और 400 किलोग्राम प्लम की अपनी पहली खेप ओमान देश को भेजी थी। कुल्लू के अनार का दुबई जाना और शिमला की चेरी तथा प्लम का ओमान तक पहुंचना इस बात का साफ संकेत है कि हिमाचल के पारंपरिक बागवानी क्षेत्रों में पैदा होने वाली चीजों के लिए अब विदेशी बाजारों में लगातार नई संभावनाएं खोजी जा रही हैं। सरकार का पूरा ध्यान किसानों को बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था देने और उत्पादों के निर्यात का दायरा बढ़ाने पर है।

## इसका आप पर असर
यह निर्यात हिमाचल प्रदेश के कृषि और बागवानी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादकों को आर्थिक लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है।

- **भारत में:** देश भर के किसानों को अपनी पारंपरिक फसलों के अलावा उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती करने और उन्हें सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की प्रेरणा मिलती है।
- **हिमाचल प्रदेश में:** कुल्लू और आसपास के जिलों के सैकड़ों बागवानों को बेहतर विपणन अवसर मिलने से उनकी आय में सीधा इजाफा होगा और बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह निर्यात राज्य सरकार की ओर से कृषि उत्पादों के विपणन तंत्र को सुधारने और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की मांग को पूरा करने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

- **सामूहिक संगठन की भूमिका:** भुंतर स्थित किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर अपनी उपज को बड़े पैमाने पर एकत्र किया।
- **संस्थागत सहयोग:** कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय ने निर्यात प्रक्रिया को पूरा करने में तकनीकी और प्रशासनिक मदद दी।
- **गुणवत्ता पर जोर:** किसानों द्वारा वैश्विक मानकों के अनुरूप सिंदूरी किस्म के उच्च गुणवत्ता वाले अनार का उत्पादन किया जाना इस सफलता का आधार बना।

## सवाल-जवाब

### 1. कुल्लू से किस फल का निर्यात किया गया है?
कुल्लू जिले से सिंदूरी किस्म के अनार का निर्यात किया गया है।

### 2. अनार की इस खेप का कुल वजन कितना था?
अनार की इस खेप का कुल वजन 1.3 मीट्रिक टन था।

### 3. यह खेप किस देश में भेजी गई है?
यह खेप संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में भेजी गई है।

### 4. इस निर्यात में कितने किसान जुड़े हुए हैं?
भुंतर स्थित किसान उत्पादक संगठन से लगभग 600 किसान जुड़े हुए हैं।

### 5. किस संस्था ने इस निर्यात में सहयोग किया है?
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने इसमें सहयोग किया है।

### 6. इससे पहले हिमाचल से कौन से फल ओमान भेजे गए थे?
इसी साल जून में शिमला से 400 किलोग्राम चेरी और 400 किलोग्राम प्लम ओमान भेजे गए थे।

## प्रेरणा और सबक
कुल्लू के किसानों और भुंतर के एफपीओ की यह सफलता मेहनत और सहकारिता की ताकत का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है।

- **सामूहिक ताकत:** छोटे किसानों ने एफपीओ के जरिए जुड़कर अपनी उपज को बड़े पैमाने पर इकट्ठा किया और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया।
- **गुणवत्ता पर ध्यान:** वैश्विक मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली फसलें उगाने से स्थानीय उत्पादों को विदेशों में पहचान मिलती है।
- **सरकारी सहयोग का लाभ:** एपीडा और राज्य प्रशासन की सहायता का सही उपयोग करके किसान अपने उत्पादों का दायरा बढ़ा सकते हैं।

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