हिमाचल के रूपिन दर्रे पर अचानक हिमपात में दबीं 2,000 से अधिक भेड़-बकरियां, राहत दल मौके पर भेजा गया हिमाचल प्रदेश में किन्नौर और शिमला सीमा पर स्थित रूपिन दर्रे पर भारी बर्फबारी के चलते निचले इलाकों की ओर लौट रहे चरवाहों के 2,000 से अधिक मवेशी बर्फ में फंस गए हैं. हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने खानाबदोश चरवाहों की मुश्किलें बेहद बढ़ा दी हैं. किन्नौर जिले के सांगला और शिमला जिले के डोडरा-क्वार क्षेत्र को आपस में जोड़ने वाले रूपिन दर्रा क्षेत्र में 26 सितंबर को हुए तेज हिमपात के बाद 2,000 से ज्यादा भेड़-बकरियों के मोटी बर्फ की चादर के नीचे दब जाने की गंभीर आशंका सामने आई है. सर्दियों की दस्तक से पहले अपने मवेशियों को लेकर निचले गर्म इलाकों की तरफ उतर रहे गद्दी चरवाहे इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गए, जिससे उनका भारी नुकसान हुआ है. सर्दियों के प्रवास के दौरान अचानक हुआ भारी हिमपात किन्नौर और उसके आस-पास की ऊंची चोटियों पर पिछले दिनों भारी वर्षा के साथ अचानक तेज बर्फबारी शुरू हो गई थी. उस दौरान पारंपरिक गद्दी चरवाहे अपने पूरे रेवड़ के साथ रूपिन दर्रे के संकरे रास्तों से होकर निचले सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे थे. दर्रे की ऊंचाई पर पहुंचते ही एकाएक भारी बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे पूरा इलाका सफेद चादर में लिपट गया और जानवरों का आगे बढ़ना पूरी तरह नामुमकिन हो गया. कई चरवाहे जो पीछे थे वे तो समय रहते सुरक्षित लौटने में कामयाब रहे, मगर जो दल दर्रे के मुख्य हिस्से तक पहुंच चुके थे, उनके लिए न तो आगे बढ़ना संभव रहा और न ही वहां से तुरंत नीचे उतरना आसान था. प्रशासन ने गठित किया संयुक्त बचाव दल घटना की जानकारी सामने आते ही प्रशासन तुरंत हरकत में आया. राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने डोडरा-क्वार के उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को फौरन संयुक्त बचाव दल तैयार करने के निर्देश जारी किए. इस विशेष राहत अभियान में स्थानीय चरवाहों, होमगार्ड के जवानों, पुलिस बल और राजस्व विभाग के कर्मियों को शामिल किया गया है. यह बचाव टीम बुधवार को रूपिन दर्रे के सबसे ऊंचे हिस्से तक पहुंचने में सफल रही. दल के सदस्य सैटेलाइट फोन के जरिए लगातार जिला प्रशासन के संपर्क में बने हुए हैं और जमीनी स्थिति की ताजा जानकारी साझा कर रहे हैं. तीन फीट से अधिक बर्फ, सिर्फ बड़े मवेशियों के सींग नजर आ रहे राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि रूपिन दर्रा क्षेत्र में तीन फुट से अधिक मोटी बर्फ जमा हो चुकी है. चरवाहों की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक बर्फ के भारी दबाव के कारण लगभग 2,000 छोटे-बड़े जानवर दब चुके हैं. बर्फ के ऊपर केवल कुछ बड़े जानवरों के सींग ही दिखाई दे रहे हैं, जबकि बर्फ में दबी भेड़ों और बकरियों की वास्तविक स्थिति का अभी कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पा रहा है. राहत की बात यह है कि इस गंभीर आपदा में किसी भी चरवाहे या इंसान की जान जाने की खबर नहीं है, सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं. बर्फ पिघलने पर होगा वास्तविक नुकसान का आकलन, मिलेगा विशेष पैकेज राजस्व मंत्री ने आगे जानकारी दी कि संबंधित विभागों के तकनीकी अधिकारियों का एक और दल जल्द ही मौके पर भेजा जाएगा, जो पूरे इलाके में हुए कुल नुकसान का विस्तृत ब्योरा तैयार करेगा. वास्तविक नुकसान की पुष्टि तभी हो पाएगी जब वहां जमी बर्फ पिघलेगी और पशुओं की विधिवत गिनती की जाएगी. सरकार ने प्रभावित पशुपालकों को भरोसा दिलाया है कि नुकसान के सटीक आकलन के तुरंत बाद राहत सहायता राशि वितरित की जाएगी और चरवाहों की आजीविका को सहारा देने के लिए एक विशेष राहत पैकेज की व्यवस्था भी की जाएगी. रूपिन दर्रा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा को जोड़ने वाला एक बेहद अहम और दुर्गम पर्वतीय मार्ग है. इसका आप पर असर हिमाचल के ऊंचे दर्रों पर अचानक मौसम बिगड़ने से खानाबदोश चरवाहों की आजीविका और पशुधन सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा हो गया है. • हिमाचल प्रदेश में: ऊंचाई वाले इलाकों में प्रवास कर रहे गद्दी और स्थानीय चरवाहों को अपने पशुओं की भारी क्षति झेलनी पड़ रही है. राज्य सरकार के विशेष राहत पैकेज से पीड़ित पशुपालकों को वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है. • भारत में: देश भर के पर्वतीय ट्रैकर्स और पर्यटकों के लिए चेतावनी जारी की गई है कि उच्च हिमालयी दर्रों पर मौसम का रुख पलक झपकते जानलेवा हो सकता है. सीमावर्ती और दुर्गम रास्तों पर यात्रा की योजना बना रहे लोगों को स्थानीय मौसम बुलेटिन देखकर ही आगे बढ़ना चाहिए. • स्थानीय प्रशासन के लिए: उप-मंडल स्तर पर उपग्रह फोन और होमगार्ड युक्त त्वरित बचाव दलों की उपस्थिति दुर्गम सीमांत क्षेत्रों में जीवन रक्षक साबित हो रही है. आने वाले हफ्तों में सर्दियों की शुरुआत के साथ अन्य दर्रों पर निगरानी कड़ी करने की जरूरत होगी. • पशुपालकों के लिए: सर्दियों की मौसमी आवाजाही के दौरान पशुओं को बर्फबारी से बचाने के लिए सुरक्षित ठहराव और आपात शेल्टर की व्यवस्था करना अनिवार्य हो जाता है. स्थानीय चरवाहों को प्रशासन के साथ वायरलेस या सैटेलाइट संपर्क व्यवस्था में तालमेल रखना होगा. ऐसा क्यों हुआ किन्नौर और शिमला जिलों की सीमा पर स्थित रूपिन दर्रे में मवेशियों के दबने की घटना अचानक आए मौसम परिवर्तन और मौसमी प्रवास के संयोग का नतीजा है. • अचानक भारी बर्फबारी: 26 सितंबर को किन्नौर के ऊपरी इलाकों में तेज बारिश के साथ अचानक भारी हिमपात शुरू हो गया, जिससे दर्रे पर तीन फीट से अधिक बर्फ जमा हो गई. इस अप्रत्याशित बर्फीले तूफान ने संकरे रास्ते को अवरुद्ध कर दिया. • सर्दियों का मौसमी प्रवास: गद्दी और स्थानीय चरवाहे हर साल ठंड बढ़ने से पहले अपने विशाल रेवड़ को लेकर चराई के लिए निचले इलाकों की ओर लौटते हैं. यह आपदा ठीक उसी वक्त आई जब मवेशी दर्रे के सबसे ऊंचे और खुले भाग को पार कर रहे थे. • दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां: रूपिन दर्रा समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित एक पथरीला और संकरा दर्रा है, जहां से बर्फबारी शुरू होने के बाद त्वरित निकास संभव नहीं होता. आगे बढ़ चुके जानवरों के लिए न तो आगे का रास्ता बचा और न ही पीछे लौटना संभव रहा. सवाल-जवाब 1. रूपिन दर्रे पर क्या घटना हुई है? 26 सितंबर को अचानक हुई तीन फीट से अधिक भारी बर्फबारी के कारण रूपिन दर्रे में 2,000 से अधिक भेड़-बकरियां बर्फ के नीचे दब गई हैं. 2. रूपिन दर्रा किन क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है? यह दर्रा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के सांगला और शिमला जिले के डोडरा-क्वार क्षेत्र को जोड़ता है, तथा हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित है. 3. क्या इस प्राकृतिक आपदा में कोई जनहानि हुई है? राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के अनुसार सभी चरवाहे सुरक्षित हैं और किसी भी इंसान के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है. 4. बचाव अभियान में कौन-कौन से विभाग शामिल हैं? डोडरा-क्वार एसडीएम के निर्देश पर स्थानीय चरवाहों, होमगार्ड, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मियों को मिलाकर एक संयुक्त बचाव दल मौके पर भेजा गया है. 5. प्रभावित चरवाहों को सरकार किस प्रकार मदद देगी? बर्फ पिघलने के बाद नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाएगा और सरकार प्रभावित पशुपालकों को एक विशेष राहत पैकेज के जरिए सहायता प्रदान करेगी. https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-ke-rupin-darre-para-achanaka-himapata-men-dabin-2-000-se-adhika-bhera-bakariyan-rahata-dala-mauke-para-bheja-gaya-41204 TrendKia — Har trend, sabse pehle.