हिमाचल के सात मंदिरों में उमड़े 10 लाख से अधिक भक्त, श्री नैना देवी जी में पहुंचे सबसे ज्यादा श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव के दौरान राज्य के सात प्रमुख शक्तिपीठों और मंदिरों में कुल 10,25,726 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस दौरान की गई सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन की सराहना की है। हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर नवरात्रि उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं का भारी सैलाब देखने को मिला, जहां सूबे के सात बड़े शक्तिपीठों में माता रानी के दर्शन के लिए कुल 10,25,726 भक्त पहुंचे। इस नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन के दौरान राज्यभर के विभिन्न मंदिरों में कुल 1,04,520 वाहनों की आवाजाही भी दर्ज की गई, जिससे यह साबित होता है कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग इस पवित्र अवसर पर हिमाचल पहुंचे थे। इस विशाल आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश पुलिस के कामकाज की खुलकर प्रशंसा की है। विभिन्न मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की संख्या नवरात्रि के इन नौ पवित्र दिनों के दौरान सबसे अधिक श्रद्धालु श्री नैना देवी जी मंदिर में पहुंचे, जहाँ कुल 3,95,226 भक्तों ने माथा टेका। इसके अलावा अन्य प्रमुख मंदिरों में भी भारी भीड़ का सिलसिला लगातार बना रहा। श्री ज्वालामुखी जी मंदिर में 1,80,000 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर में 1,39,000 भक्तों ने अपनी हाजिरी लगाई। सिरमौर जिले के त्रिलोकपुर स्थित श्री बाला सुंदरी जी मंदिर में 1,06,600 श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही श्री चामुंडा देवी जी में 70,500, श्री ब्रजेश्वरी देवी जी में 69,400 और श्री बगलामुखी जी मंदिर में 65,000 श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए पहुँचे थे। पहाड़ी क्षेत्रों में भीड़ और यातायात प्रबंधन की चुनौतियाँ पहाड़ी इलाकों में स्थित इन शक्तिपीठों तक जाने वाले रास्ते आमतौर पर संकरे होते हैं और वहाँ वाहनों की पार्किंग के लिए जगह भी काफी सीमित होती है। ऐसे में लाखों की संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को संभालना प्रशासन और पुलिस के लिए एक बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य था। इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस ने भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक संचालन, सुव्यवस्थित पार्किंग और कतार प्रबंधन के लिए पहले से ही व्यापक और पुख्ता इंतजाम किए थे। इन्हीं समन्वित प्रयासों का परिणाम था कि सभी भक्त बिना किसी बड़ी परेशानी के शांतिपूर्ण ढंग से अपने आराध्य के दर्शन करने में सफल रहे। पुलिस और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पुलिस कर्मियों के समर्पण भाव, उनकी कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर कार्यकुशलता की विशेष तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इन पवित्र स्थलों पर आने वाले लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा का ध्यान रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस सफल आयोजन के पीछे पुलिस, जिला प्रशासन, विभिन्न मंदिर न्यासों, होमगार्ड और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल और सामूहिक प्रयास मुख्य रूप से जिम्मेदार रहे। मुख्यमंत्री ने उन पुलिस जवानों की भी सराहना की जिन्होंने लंबी ड्यूटी के दौरान मुस्तैद रहकर यह सुनिश्चित किया कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े। प्रशासन का सहयोग और आपातकालीन सहायता अपील इस बड़े धार्मिक आयोजन को सुचारू रूप से चलाने में मंदिर प्रबंधन समितियों, स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवकों ने भी बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया, जिसके लिए मुख्यमंत्री ने सभी का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही सरकार की तरफ से प्रदेश के नागरिकों और बाहर से आने वाले पर्यटकों से यह अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की पुलिस सहायता, अग्निशमन सेवा या एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन जरूरत पड़ने पर वे चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाली हेल्पलाइन ईआरएसएस-112 का उपयोग कर सकते हैं। पुलिस महानिदेशक की प्रतिक्रिया राज्य के डीजीपी अशोक तिवारी ने मुख्यमंत्री द्वारा की गई इस सराहना और प्रोत्साहन के लिए उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मिला यह प्रोत्साहन बल के जवानों को और अधिक संवेदनशीलता, समर्पण और व्यावसायिक दक्षता के साथ जनसेवा करने के लिए प्रेरित करता है। पुलिस महानिदेशक ने नवरात्रि के दौरान व्यवस्थाओं को संभालने वाले संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों, सभी पर्यवेक्षण अधिकारियों और मैदानी स्तर पर तैनात पुलिस कर्मियों के कड़े परिश्रम की प्रशंसा की। उन्होंने दोहराया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस राज्य में आने वाले हर एक श्रद्धालु और पर्यटक की सुरक्षा तथा सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए हमेशा पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसका आप पर असर यह समाचार मुख्य रूप से राज्य के धार्मिक पर्यटन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़ा हुआ है। • आम नागरिक और पर्यटक: हिमाचल प्रदेश की यात्रा करने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भविष्य में बेहतर यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था का लाभ मिलेगा। भीड़भाड़ वाले त्योहारों के दौरान प्रशासन द्वारा किए जाने वाले कड़े इंतजामों से यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम बनेगी। • आपातकालीन सहायता: किसी भी संकट या जरूरत के समय नागरिक चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाली हेल्पलाइन ईआरएसएस-112 का उपयोग करके तुरंत पुलिस, अग्निशमन या एम्बुलेंस की मदद ले सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ धार्मिक उत्सवों के दौरान राज्य के शक्तिपीठों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और उसकी व्यवस्थाओं के पीछे कई प्रशासनिक कारण जुड़े होते हैं। • त्योहार का प्रभाव: नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव के दौरान हर साल देश भर से लाखों श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों में माता के दर्शन के लिए आते हैं। • भौगोलिक चुनौतियाँ: पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित मंदिरों तक पहुँचने वाले मार्ग संकरे होते हैं और वहाँ पार्किंग की जगह सीमित होने के कारण विशेष प्रशासनिक और पुलिस प्रबंधन की आवश्यकता पड़ती है। • सरकारी निगरानी: सरकार और पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम यातायात और शांतिपूर्ण दर्शन सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्ययोजना और बेहतर आपसी समन्वय तैयार किया था। सवाल-जवाब 1. नवरात्रि के दौरान हिमाचल के मंदिरों में कुल कितने श्रद्धालुओं ने दर्शन किए? राज्य के सात प्रमुख शक्तिपीठों और मंदिरों में कुल 10,25,726 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। 2. किस मंदिर में सबसे अधिक श्रद्धालुओं की संख्या दर्ज की गई? श्री नैना देवी जी मंदिर में सबसे अधिक 3,95,226 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। 3. यह नवरात्रि उत्सव किस अवधि के दौरान आयोजित किया गया था? यह उत्सव 11 से 19 अक्तूबर, 2026 तक आयोजित किया गया था। 4. त्योहार के दौरान कुल कितने वाहनों की आवाजाही दर्ज हुई? इन नौ दिनों के दौरान कुल 1,04,520 वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई। 5. आपातकालीन स्थिति में कौन सी हेल्पलाइन का उपयोग किया जा सकता है? आपातकालीन सहायता के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध ईआरएसएस-112 हेल्पलाइन का उपयोग किया जा सकता है। https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-ke-sat-mandiro-me-umde-10-lakh-se-adhik-bhakt-49780 TrendKia — Har trend, sabse pehle.