# हिमाचल की सीमा कुमारी ने 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य जीतकर रचा इतिहास, सरकार देगी एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार

> चंबा के रेटा गांव की रहने वाली सीमा कुमारी ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स में 10 हजार मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल कर भारत का 16 साल का इंतजार समाप्त कर दिया।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-ki-seema-kumari-ne-10-hajara-mitara-daura-men-kansya-jitakara-racha-itihasa-sarakara-degi-eka-karora-rupaye-ka-nakada-pur-38448 · **Language:** Hindi
**Tags:** सीमा कुमारी, एशियन गेम्स, हिमाचल प्रदेश, एथलेटिक्स, चंबा, सुखविंदर सिंह सुक्खू, 10000 मीटर दौड़

जापान में चल रहे एशियाई खेलों के ट्रैक से भारत के लिए एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश के एक सुदूर गांव की रहने वाली धाविका सीमा कुमारी ने महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही देश ने लगभग 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस विशिष्ट स्पर्धा में एशियाई मंच पर पदक का सूखा समाप्त किया है। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने वाली इस एथलीट को राज्य की खेल नीति के प्रावधानों के अनुसार सरकार से 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।

## कठिन हालात और आर्थिक तंगी के बीच बीता बचपन
चंबा जिले के दुर्गम रेटा गांव से ताल्लुक रखने वाली सीमा की यह यात्रा आसान नहीं रही। छह बच्चों के परिवार में वे सबसे छोटी संतान हैं। साल 2012 में उनके पिता का देहांत हो गया था, जिसके बाद पूरे घर के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनकी मां केसरी देवी के कंधों पर आ गई। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि शुरुआती दौर में सीमा के पास अभ्यास के लिए बुनियादी रनिंग शूज तक उपलब्ध नहीं थे। इन तमाम रुकावटों के बावजूद उनका खेल के प्रति लगाव कभी कम नहीं हुआ। खेल को गंभीरता से अपनाने के लिए उन्होंने कक्षा सात में ही अपना गांव छोड़ दिया और बेहतर माहौल तथा कोचिंग सुविधाओं के लिए धर्मशाला स्थित साई हॉस्टल का रुख किया।

## मां के अटूट भरोसे ने दी सपनों को उड़ान
सीमा की खेल यात्रा में उनकी मां का त्याग बेहद निर्णायक साबित हुआ। वर्ष 2017 में जब उनका चयन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित एशियन यूथ चैंपियनशिप के लिए हुआ, तब यात्रा और प्रतियोगिता के खर्च जुटाने के पैसे नहीं थे। ऐसी विषम परिस्थिति में मां केसरी देवी ने अपनी जमापूंजी, यानी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर अपनी बेटी को विदेश भेजा। सीमा ने भी मां के इस भरोसे को टूटने नहीं दिया और वहां कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। गुरुवार को जब जापान में सीमा का मुकाबला चल रहा था, तब उनकी मां अपने घर पर टकटकी लगाए टेलीविजन स्क्रीन पर बेटी के हर कदम को देख रही थीं।

## राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन
वर्ष 2018 में सीमा खेलो इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा बनीं, जिससे उनके खेल को नई दिशा मिली। वे चार बार की राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं और विश्व एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में उनका नाम एशियन यूथ ओलंपिक की रजत पदक विजेता के तौर पर भी दर्ज है। वर्ष 2024 में हांगकांग में आयोजित 17वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में उन्होंने 10,000 मीटर वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वर्तमान एशियाड में उतरने से पहले उन्होंने इसी साल 10,000 मीटर में 32:02.43 का अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत समय दर्ज कराया था, जो भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और वैश्विक एथलेटिक्स रिकॉर्ड्स में उनका पर्सनल बेस्ट मार्क है।

## सीएम सुक्खू और दिग्गज खिलाड़ियों ने दी बधाई
सीमा की इस ऐतिहासिक जीत के बाद उन्हें देश भर से सराहना मिल रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस गौरवशाली उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा, 
> "चंबा जिला के रेटा गांव की बेटी सीमा कुमारी जी ने एशियाई खेलों में 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य जीतकर पूरे देश का मान बढ़ाया है।"
 मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही उनकी आगामी 5,000 मीटर प्रतियोगिता के लिए भी अपनी शुभकामनाएं दीं। राज्य की वर्तमान खेल नीति के तहत सरकार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता को 5 करोड़, रजत पदक विजेता को 3 करोड़ और कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार देती है। वहीं भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान तथा पुलिस उपाधीक्षक अजय ठाकुर ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से सीमा की लगन और ऐतिहासिक प्रदर्शन की जमकर तारीफ की।

## इसका आप पर असर
यह उपलब्धि जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने और दूरदराज के प्रतिभावान खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं दिलाने में एक मिसाल बनेगी।

- **भारत में:** अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में 16 साल बाद मिले इस पदक से लंबी दूरी की धाविकाओं के प्रशिक्षण और फंडिंग में तेजी आएगी। राष्ट्रीय खेल अकादमियों और साई हॉस्टलों में नामांकित ग्रामीण महिला एथलीटों को बेहतर उपकरण और छात्रवृत्ति मिलने के रास्ते खुलेंगे।
- **हिमाचल प्रदेश में:** चंबा जैसे सुदूर पहाड़ी जिलों में खेल बुनियादी ढांचे और सिंथेटिक ट्रैक की मांग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य के उभरते खिलाड़ियों को सरकार की खेल नीति के तहत नकद पुरस्कार और रोजगार प्रोत्साहन का सीधा लाभ दिखेगा।
- **युवा एथलीटों के लिए:** आर्थिक तंगी का सामना कर रहे उभरते खिलाड़ियों को सरकारी योजनाओं के जरिए आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। वे खेलो इंडिया और राज्य स्तरीय हॉस्टलों में प्रवेश लेकर औपचारिक प्रशिक्षण का लाभ उठा सकते हैं।
- **महिला खिलाड़ियों के लिए:** ग्रामीण पृष्ठभूमि की बेटियों को खेलों में करियर बनाने के लिए सामाजिक और पारिवारिक समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी। इस जीत से परिजन अपनी बेटियों को जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में भेजने के लिए प्रेरित होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
सीमा कुमारी की यह कामयाबी वर्षों के अनुशासित प्रशिक्षण, पारिवारिक बलिदान और सरकारी खेल विकास योजनाओं के व्यवस्थित समन्वय का प्रत्यक्ष परिणाम है।

- **कठोर प्रारंभिक प्रशिक्षण:** सातवीं कक्षा में साई हॉस्टल धर्मशाला से जुड़ने के कारण सीमा को समय रहते पेशेवर तकनीक और निरंतर कोचिंग मिल सकी। इसी अनुशासित माहौल ने उन्हें घरेलू और क्षेत्रीय स्पर्धाओं के लिए तैयार किया।
- **पारिवारिक समर्थन और त्याग:** पिता के निधन के बाद मां द्वारा अपनी बचत तोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजने के निर्णय ने उनके मनोबल को बनाए रखा। परिवार के इस अटूट विश्वास के कारण वे खेल छोड़ने के दबाव से बची रहीं।
- **खेलो इंडिया और संस्थागत मदद:** साल 2018 में खेलो इंडिया योजना का हिस्सा बनने के बाद उन्हें उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं और निरंतर अभ्यास के अवसर मिले। इसी क्रमबद्ध प्रगति के चलते वे राष्ट्रीय चैंपियन बनीं और एशियाड पदक जीतने में सफल रहीं।

## सवाल-जवाब

### 1. एशियन गेम्स में सीमा कुमारी ने कौन सा पदक जीता है?
सीमा कुमारी ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया है।

### 2. इस स्पर्धा में भारत को कितने समय बाद पदक मिला है?
भारत ने करीब 16 साल के लंबे इंतजार के बाद महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में यह पदक जीता है।

### 3. हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें कितना नकद पुरस्कार दिया जाएगा?
राज्य की खेल नीति के अनुसार कांस्य पदक विजेता होने के नाते उन्हें 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि मिलेगी।

### 4. सीमा कुमारी हिमाचल प्रदेश के किस जिले और गांव की निवासी हैं?
वे हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के सुदूर रेटा गांव की रहने वाली हैं।

### 5. 10,000 मीटर में सीमा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय क्या है?
इस स्पर्धा में उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 32:02.43 है, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है।

### 6. शुरुआती दौर में उन्होंने खेल प्रशिक्षण कहां से हासिल किया?
उन्होंने कक्षा सात में अपना गांव छोड़ दिया था और धर्मशाला स्थित साई हॉस्टल से खेल का प्रशिक्षण लिया।

## प्रेरणा और सबक
संसाधनों के घोर अभाव और विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद शीर्ष मुकाम हासिल करने की यह कहानी जीवन में दृढ़ संकल्प का महत्व सिखाती है।

- **संसाधनों की कमी को बहाना न बनाएं:** दौड़ने के लिए बुनियादी जूते न होने के बावजूद सीमा ने अपने लक्ष्य का पीछा करना नहीं छोड़ा। उपलब्ध परिस्थितियों में निरंतर अभ्यास करना किसी भी क्षेत्र में सफलता की पहली सीढ़ी है।
- **शुरुआती दौर में कड़े फैसले लेना जरूरी:** खेल में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए उन्होंने बहुत कम उम्र में घर छोड़ दिया और हॉस्टल में अनुशासित जीवन चुना। अपने सपनों को साकार करने के लिए आराम के दायरे से बाहर निकलना आवश्यक होता है।
- **पारिवारिक सहयोग की ताकत:** विषम परिस्थितियों में एक-दूसरे के सपनों पर भरोसा जताना सबसे बड़ा संबल साबित होता है। मां के त्याग और समर्थन ने एक अभावग्रस्त पृष्ठभूमि से निकली बेटी को विश्व पटल पर स्थापित कर दिया।

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