हिमाचल में विजिलेंस का दोहरा प्रहार: सिरमौर में वन अधिकारी और सोलन में पटवारी घूसखोरी में नपे हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए सिरमौर में दस हजार रुपये की घूस लेते वन अधिकारी को दबोचा और सोलन में ऑनलाइन रिश्वत मांगने वाले पटवारी पर केस दर्ज किया। हिमाचल प्रदेश में सरकारी तंत्र के भीतर पनप रही रिश्वतखोरी पर नकेल कसते हुए सतर्कता विभाग ने दो अलग-अलग जिलों में सख्त कदम उठाए हैं। सिरमौर जिले के पांवटा साहिब इलाके में वन विभाग के एक अधिकारी को नकदी लेते हुए मौके पर ही पकड़ा गया। वहीं सोलन जिले में भूमि से जुड़े काम के बदले डिजिटल माध्यम से घूस मांगने वाले राजस्व विभाग के पटवारी के विरुद्ध औपचारिक मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने आरोपियों की बातचीत रिकॉर्ड करके अधिकारियों को सौंपी थी, जिसके आधार पर कानून का शिकंजा कसा गया। पांवटा साहिब में जाल बिछाकर पकड़ा गया वन विभाग का अधिकारी सिरमौर के पांवटा साहिब क्षेत्र स्थित भंगानी रेंज में तैनात अधिकारी सुमंत को दस हजार रुपये की नकदी लेते हुए सतर्कता दस्ते ने रंगे हाथों काबू किया। पीड़ित इकराम ने बताया कि खनन कार्य के सिलसिले में उसके ट्रैक्टर को जब्त करने और चालान न काटने के बदले यह अधिकारी लंबे समय से रुपये की मांग कर रहा था। बार-बार के दबाव से तंग आकर उसने सतर्कता विभाग से संपर्क साधा और बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग अधिकारियों के हवाले कर दी। शिकायत की पुष्टि होते ही जांच टीम ने रणनीति बनाई और पांवटा साहिब की चुंगी नंबर-6 पर जाल बिछा दिया। आरोपी ने पीड़ित को इसी स्थान पर रकम लेकर बुलाया था। जैसे ही रुपयों का लेन-देन हुआ, सतर्कता टीम ने दबिश देकर अधिकारी को पकड़ लिया। अचानक हुई इस गिरफ्तारी से इलाके के वन कार्यालयों में हड़कंप मच गया। विजिलेंस के डीएसपी रमाकांत ठाकुर ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि अधिकारी पर केस दर्ज कर कानूनी जांच शुरू कर दी गई है। सोलन में ऑनलाइन घूस मांगने वाले पटवारी पर गिरी गाज दूसरा मामला सोलन के बंदोबस्त विभाग से जुड़ा है, जहां तैनात पटवारी अंकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता विकास कंवर का आरोप है कि उसकी पैतृक जमीन के बंटवारे यानी तकसीम की कानूनी प्रक्रिया निपटाने के एवज में पटवारी ने ₹1,500 की अनुचित मांग रखी थी। काम अटकाए जाने के डर से परेशान नागरिक ने सतर्कता ब्यूरो को लिखित शिकायत दी। पीड़ित के अनुसार पटवारी ने यह रिश्वत नकद लेने के बजाय गूगल-पे के जरिए ट्रांसफर करने को कहा था और इसके लिए अपना मोबाइल नंबर साझा किया था। शिकायतकर्ता ने बातचीत का पूरा ऑडियो साक्ष्य सतर्कता ब्यूरो को सौंपा। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के सोलन स्थित पुलिस थाने में 3 नवंबर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत यह मुकदमा दर्ज कर आगे की पड़ताल शुरू की गई है। प्रशासन की चेतावनी: घूसखोरी पर कोई समझौता नहीं इन मामलों के बाद पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने साफ किया कि रिश्वत की रकम या कर्मचारी का पद चाहे जो भी हो, ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि किसी भी सरकारी दफ्तर में यदि कोई कर्मचारी नाजायज रकम की मांग करता है, तो तुरंत सतर्कता विभाग को सूचना दें ताकि पारदर्शी व्यवस्था बनाई जा सके। इसका आप पर असर सरकारी महकमों में काम कराने वाले नागरिकों के लिए यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि अनुचित मांगों के आगे झुकने की बजाय कानूनी रास्ता अपनाना असरदार साबित हो सकता है। • हिमाचल प्रदेश में: यदि किसी भी सरकारी दफ्तर में जमीन बंटवारे या चालान के नाम पर नाजायज रकम मांगी जाती है, तो लोग बेझिझक विजिलेंस को साक्ष्य सौंप सकते हैं। इससे रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों पर तुरंत शिकंजा कसने में मदद मिलेगी। • भारत में: डिजिटल पेमेंट या नकद घूस मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ ऑडियो रिकॉर्डिंग कानूनी सबूत के तौर पर बेहद अहम साबित हो रही है। आम नागरिक बिना डरे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच की मांग कर सकते हैं। • राजस्व मामलों में: जमीन के बंटवारे या तकसीम जैसे रोजमर्रा के कामों में पटवारियों की मनमानी पर लगाम लगेगी। नागरिकों को अपने जायज काम के लिए तय सरकारी प्रक्रिया के अलावा कोई अतिरिक्त रकम देने की जरूरत नहीं है। • वाहन व खनन चालान में: अधिकारियों द्वारा चालान या जब्ती की धमकी देकर पैसे ऐंठने के चलन पर रोक लगेगी। वाहन मालिक सीधे उच्चाधिकारियों या सतर्कता टीम को ऐसे मामलों की जानकारी दे सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ सरकारी पदों पर बैठे कर्मियों द्वारा अपने विवेकाधीन अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए आम नागरिकों को परेशान करने की प्रवृत्ति इन कार्रवाइयों की मुख्य वजह बनी। पीड़ितों द्वारा रिश्वत देने से इनकार करते हुए बातचीत का साक्ष्य जुटाना इस पूरे मामले को अंजाम तक पहुंचाने वाला मुख्य बिंदु रहा। • अधिकारों का दुरुपयोग: रेंज अफसर ने खनन कार्य के दौरान ट्रैक्टर जब्ती और चालान का भय दिखाकर नागरिक पर दबाव बनाया था। इसी तरह पटवारी ने जमीन बंटवारे की अनिवार्य फाइल को अटकाकर अवैध रकम ऐंठने की कोशिश की। • डिजिटल और ऑडियो साक्ष्य: दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं ने मांग को चुपचाप स्वीकार करने के बजाय कॉल रिकॉर्डिंग और फोन नंबर जैसे अकाट्य सबूत जुटाए। यह सामग्री विजिलेंस ब्यूरो के लिए त्वरित कार्रवाई का ठोस आधार बनी। • जीरो टॉलरेंस नीति: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत सतर्कता ब्यूरो द्वारा त्योहारों के दौरान सरकारी तंत्र में बढ़ती घूसखोरी पर निगरानी तेज की गई है। उच्चाधिकारियों के कड़े रुख के चलते शिकायत मिलते ही तुरंत जाल बिछाया गया। सवाल-जवाब 1. सिरमौर में वन अधिकारी को किस आरोप में पकड़ा गया? रेंज अफसर सुमंत पर एक ट्रैक्टर का खनन चालान न करने और जब्ती रोकने के एवज में दस हजार रुपये की रिश्वत मांगने और लेने का आरोप है। 2. सोलन में पटवारी के खिलाफ क्या मामला सामने आया है? पटवारी अंकुर पर जमीन के बंटवारे की प्रक्रिया निपटाने के लिए ₹1,500 की घूस गूगल-पे के जरिए मांगने का आरोप है, जिस पर 3 नवंबर को एफआईआर दर्ज की गई। 3. विजिलेंस टीम ने वन अधिकारी को कहां से गिरफ्तार किया? सतर्कता टीम ने पांवटा साहिब स्थित चुंगी नंबर-6 पर जाल बिछाकर आरोपी अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ा। 4. पटवारी पर किस कानून के तहत कार्रवाई की गई है? पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत पुलिस थाना सोलन में मुकदमा दर्ज किया गया है। https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-men-vijilensa-ka-dohara-prahara-sirmaur-men-vana-adhikari-aura-solan-men-patavari-ghusakhori-men-nape-56198 TrendKia — Har trend, sabse pehle.