हिमाचल प्रदेश के सोलन में फर्जी एनआईए अधिकारी ने दंपती को दो दिन किया डिजिटल अरेस्ट, डराकर ऐंठे 72.10 लाख रुपये सोलन जिले के नालागढ़ में शातिरों ने बुजुर्ग दंपती को आतंकवाद का डर दिखाकर दो दिन डिजिटल अरेस्ट रखा और बैंक मैनेजर की चेतावनी के बावजूद 72.10 लाख रुपये ऐंठ लिए। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में साइबर ठगों ने एक उच्च पद से सेवानिवृत्त बुजुर्ग दंपती को दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 72.10 लाख रुपये ऐंठ लिए। जालसाजों ने आतंकवाद विरोधी दस्ते की कार्रवाई का खौफ दिखाकर बुजुर्ग दंपती को डराया और उनकी जिंदगी भर की सारी जमापूंजी हड़प ली। पंजाब नेशनल बैंक नालागढ़ शाखा के प्रबंधक ने दंपति को आधे घंटे तक समझाया और साइबर धोखाधड़ी की चेतावनी दी, लेकिन खौफजदा पति-पत्नी ने बैंक मैनेजर की बात नहीं मानी। उन्होंने संपत्ति खरीदने का झूठा बहाना बनाकर अपनी सभी एफडी तुड़वाई और पूरी रकम ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दी। आतंकी कनेक्शन का खौफ और दो दिन का डिजिटल अरेस्ट ठगी का यह मामला 5 सितंबर को शुरू हुआ, जब बुजुर्ग दंपती के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले शातिर ने खुद को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) का प्रमुख प्रकाश अग्रवाल बताया। उसने दंपती को डराते हुए कहा कि उनका आधार कार्ड आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है और वे एंटी टेररिज़्म स्क्वायड के रडार पर हैं। इसके बाद जालसाजों ने दंपती से उनके बैंक खाता नंबर, आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे गोपनीय दस्तावेज हासिल कर लिए। शातिरों ने दोनों को उनके ही घर में दो दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर मानसिक प्रताड़ना दी और सुरक्षा जांच के नाम पर 72.10 लाख रुपये जमा कराने का दबाव बनाया। इसके साथ ही जालसाजों ने उनसे एक दस्तावेज में खुद को बीमार लिखने के लिए भी कहा। बैंक मैनेजर की चेतावनी को किया नजरअंदाज डिजिटल अरेस्ट के खौफ में आकर पति-पत्नी तुरंत नालागढ़ स्थित पंजाब नेशनल बैंक पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी सभी सावधि जमा (एफडी) समय से पहले तुड़वाने की मांग की। इतनी बड़ी राशि अचानक निकालने और दंपती के चेहरे पर घबराहट देखकर बैंक प्रबंधक सौरभ मोक्टा को शक हुआ। सौरभ मोक्टा ने दंपती को अपने केबिन में बैठाकर आधे घंटे तक समझाया कि यह ठगी का मामला हो सकता है। हालांकि, डरे हुए दंपती ने बैंक मैनेजर की सलाह खारिज कर दी और पैसे निकालने के लिए जमीन खरीदने की झूठी बात कही। आखिर में बैंक प्रबंधन की चेतावनियों को दरकिनार करते हुए उन्होंने 72.10 लाख रुपये शातिरों के खातों में ट्रांसफर करवा दिए। व्हाट्सएप ग्रुप से खुला राज, 1930 पर शिकायत दर्ज इस बड़ी ठगी का खुलासा तब हुआ जब दंपती ने पेंशनर्स के एक व्हाट्सएप ग्रुप में गलती से एक पत्र साझा किया। इस पत्र में उन्होंने खुद को हृदय रोगी बताते हुए मदद की गुहार लगाई थी। ग्रुप में जुड़े पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त प्रबंधक अश्वनी घई ने जब यह पत्र देखा तो वे तुरंत दंपती के घर पहुंचे। काफी समझाने-बुझाने के बाद दंपती ने आपबीती बताई। इसके बाद अश्वनी घई ने तुरंत पंजाब नेशनल बैंक को सूचित किया, लेकिन तब तक ठग खातों से पैसे निकाल चुके थे। अपनी पूरी कमाई गंवाने के बाद बुजुर्ग दंपती ने राष्ट्रीय पुलिस साइबर हेल्पलाइन 1930 पर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इसका आप पर असर यह मामला देश और प्रदेश भर के नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के बढ़ते खतरों के प्रति सतर्क करता है। • भारत में: सरकारी एजेंसियां कभी भी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी नागरिक को डिजिटल अरेस्ट या रिमांड पर नहीं लेती हैं। यदि आपको एनआईए, सीबीआई या पुलिस अधिकारी बनकर कोई कॉल करे तो तुरंत फोन काटकर राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर सूचित करें। • हिमाचल प्रदेश में: सोलन और नालागढ़ क्षेत्र के बैंक ग्राहकों को बड़ी वित्तीय लेनदेन करते समय बैंक मैनेजरों की चेतावनी और सलाह को गंभीरता से लेना चाहिए। संदिग्ध स्थिति में बैंक अधिकारियों और स्थानीय पुलिस से तुरंत संपर्क करके सत्यापन करना अनिवार्य है। • वरिष्ठ नागरिकों के लिए: बुजुर्गों को अपने बैंक खातों और व्यक्तिगत दस्तावेजों जैसे आधार व पैन की जानकारी अज्ञात फोन कॉल्स पर साझा नहीं करनी चाहिए। किसी भी वित्तीय फैसले से पहले परिवार के सदस्यों या विश्वसनीय सहयोगियों की सलाह अवश्य लें। • बैंक खाता सुरक्षा: बैंक में अचानक बड़ी एफडी तुड़वाने या पैसे ट्रांसफर करने से पहले सुरक्षा कारणों की जांच खुद जरूर करें। बैंक अधिकारी धोखाधड़ी से बचाने के लिए सवाल पूछते हैं, इसलिए उनसे सही स्थिति साझा करना ही समझदारी है। ऐसा क्यों हुआ यह ठगी साइबर अपराधियों द्वारा अपनाई गई सुनियोजित फर्जी पहचान और अत्यधिक मानसिक दबाव बनाने की रणनीति के कारण संभव हुई। अपराधियों ने डर का माहौल बनाकर पीड़ितों को बैंक अधिकारियों की सलाह तक अनदेखा करने पर मजबूर कर दिया। • फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल: जालसाजों ने खुद को एनआईए का शीर्ष अधिकारी बताकर फर्जी आधार दुरुपयोग और आतंकी गतिविधियों का आरोप लगाया। इस गंभीर आरोप के कारण सेवानिवृत्त दंपती पूरी तरह से भयभीत हो गए। • दो दिन का डिजिटल अरेस्ट: अपराधियों ने दंपती को दो दिनों तक उनके घर में ही डिजिटल अरेस्ट रखकर बाहरी दुनिया से अलग-थलग कर दिया। लगातार निगरानी और प्रताड़ना के कारण पीड़ितों को सोचने-समझने का अवसर नहीं मिला। • बैंक में झूठ बोलने का दबाव: ठगों के खौफ के कारण दंपती ने बैंक प्रबंधक सौरभ मोक्टा की चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने पैसे निकालने के लिए संपत्ति खरीदने का मनघड़ंत बहाना बनाया, जिससे बैंक अधिकारी समय रहते लेनदेन नहीं रोक सके। • व्हाट्सएप ग्रुप से खुला भेद: घटना के बाद पीड़ित दंपती ने पेंशनर्स के व्हाट्सएप ग्रुप में मदद के लिए पत्र पोस्ट किया। रिटायर्ड बैंक मैनेजर अश्वनी घई ने इसे देखकर व्यक्तिगत पहल की, तब जाकर पुलिस हेल्पलाइन 1930 पर मामला दर्ज कराया गया। सवाल-जवाब 1. सोलन में दंपती के साथ कितने रुपये की ठगी हुई? साइबर अपराधियों ने दंपती से 72.10 लाख रुपये ठग लिए। 2. ठगों ने किस अधिकारी का नाम लेकर दंपती को फोन किया था? फोन करने वाले ने खुद को एनआईए का प्रमुख प्रकाश अग्रवाल बताया था। 3. बैंक में मैनेजर ने दंपती को क्या सलाह दी थी? पंजाब नेशनल बैंक नालागढ़ के मैनेजर सौरभ मोक्टा ने दंपती को आधे घंटे तक समझाया था कि यह धोखाधड़ी हो सकती है। 4. मामले का खुलासा कैसे हुआ? दंपती द्वारा पेंशनर्स ग्रुप में साझा किए गए पत्र को देखकर रिटायर्ड बैंक मैनेजर अश्वनी घई उनके घर पहुंचे और पूरी बात सामने आई। 5. घटना के बाद दंपती ने कहां शिकायत दर्ज कराई? पीड़ित दंपती ने राष्ट्रीय पुलिस साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई है। https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-pradesh-ke-solan-men-pharji-nia-adhikari-ne-dnpati-ko-do-dina-kiya-dijitala-aresta-darakara-ainthe-72-10-lakha-rupaye-30213 TrendKia — Har trend, sabse pehle.