हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे का शिकार हुए साहित्यकार रमेश मस्ताना, बुलेट सवार लेखक की मौत से सदमे में साहित्य जगत धर्मशाला के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में प्रसिद्ध पहाड़ी लेखक रमेश मस्ताना का निधन हो गया है। दिवाली से ठीक पहले हुई इस दुर्घटना के बाद पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश कर रही है और साहित्य प्रेमियों में शोक की लहर है। हिमाचल प्रदेश के जाने-माने साहित्यकार रमेश मस्ताना का एक भीषण सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है। यह दुखद घटना 5 नवंबर की रात को पेश आई, जब वह अपनी बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने घर की तरफ लौट रहे थे। रास्ते में किसी अज्ञात वाहन ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे के बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के सामने आने के बाद से स्थानीय पुलिस मामले की गहनता से जांच-पड़ताल कर रही है और अज्ञात वाहन की तलाश जारी है। त्योहार के नजदीक इस प्रकार की दुर्घटना होने से उनके गृहजिले और पूरे साहित्यिक समुदाय में गहरा सन्नाटा पसर गया है। चंबी इलाके में हुआ हादसा और शैक्षणिक उपलब्धियां यह पूरी घटना कांगड़ा जिले के शाहपुर के अंतर्गत आने वाले चंबी क्षेत्र में घटी। रमेश मस्ताना अपनी शिक्षा के क्षेत्र में भी एक विशिष्ट पहचान रखते थे। उन्होंने कांगड़ा के ऐतिहासिक धर्मशाला कॉलेज से हिंदी विषय में अपनी स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की थी। वह धर्मशाला कॉलेज के हिंदी विभाग से पहले ऐसे छात्र थे जिन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था। उनका परिवार शैक्षणिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनका जन्म नेरटी गांव में लच्छमन दास और फूलां देवी के परिवार में हुआ था। उनके दादा ज्ञानचंद अपने दौर में लाहौर के एक मदरसे में उर्दू के शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे थे, जबकि उनके पिता भी अध्यापन कार्य से जुड़े थे। इसके अलावा उनके दोनों बेटे भी शिक्षा के क्षेत्र में ही सेवारत हैं। समृद्ध साहित्यिक सफर और प्रमुख कृतियां रमेश मस्ताना ने साहित्य की विभिन्न विधाओं में प्रचुर लेखन कार्य किया था। उन्होंने कविता, कहानी, आलेख, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत, समालोचना और सर्वेक्षण जैसी लगभग एक दर्जन पुस्तकों का सृजन किया था। उनकी प्रमुख रचनाओं में लोक विश्वासों पर केंद्रित 'आस्था के दीप: लोक विश्वास' और लोक सांस्कृतिक विषयों पर आधारित 'लोकमानस के दायरे' शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने पांगी घाटी की संस्कृति को सहेजते हुए 'पांगी-घाटी की पगडंडियाँ एवं परछाइयां' पुस्तक प्रभात शर्मा के साथ मिलकर लिखी थी। उनकी अन्य चर्चित कृतियों में हिमाचली पहाड़ी कविता संग्रह 'पक्खरु बोलै', हिंदी कविता संग्रह 'काग़ज़ के फूलों में', तथा आलेख संग्रह 'मिट्टिया दी पकड़' और 'मेरया मितरा' प्रमुख रूप से शुमार हैं। सम्मान और साहित्यिक जगत में शोक अपने उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित किया जा चुका था। उन्हें वर्ष 1999 में पहाड़ी साहित्य सम्मान, वर्ष 2001 में आचार्य मानद सम्मान और वर्ष 2008 में गुरुकुल साहित्य सम्मान प्रदान किया गया था। इसके बाद वर्ष 2011 में उन्हें साहित्य विभूति सम्मान मिला, वर्ष 2012 में लालचंद प्रार्थी कला संस्कृति राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया और वर्ष 2020 में उन्हें शाहपुर गौरव साहित्य पुरस्कार मिला था। उनके आकस्मिक निधन पर प्रदेश भर के प्रमुख रचनाकारों, कथाकारों और कवियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। इसका आप पर असर इस दुखद दुर्घटना से साहित्य जगत और स्थानीय समुदाय में शोक का माहौल है। • हिमाचल में: इस घटना ने सड़क सुरक्षा और रात के समय आवाजाही के दौरान सुरक्षा के उपायों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय निवासियों और लेखकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है। • जांच पड़ताल: पुलिस इस मामले में हिट एंड रन के तहत अज्ञात वाहन की तलाश कर रही है। इससे वाहन चालकों की लापरवाही का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। ऐसा क्यों हुआ यह हादसा तब हुआ जब लेखक रात के समय अपने वाहन से घर लौट रहे थे और किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। • घटना का समय: यह हादसा 5 नवंबर की रात को हुआ जब रमेश मस्ताना अपनी बुलेट बाइक से घर वापस जा रहे थे। • अज्ञात वाहन की टक्कर: चंबी के पास किसी अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मारी, जिसके बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए। • पुलिस जांच: इस मामले में पुलिस ने हिट एंड रन के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और वाहन की पहचान करने की कोशिश कर रही है। सवाल-जवाब 1. रमेश मस्ताना कौन थे? रमेश मस्ताना हिमाचल प्रदेश के एक प्रसिद्ध पहाड़ी साहित्यकार और लेखक थे। 2. यह दुर्घटना कब और कहां हुई? यह दुर्घटना 5 नवंबर की रात को कांगड़ा के शाहपुर के चंबी में हुई। 3. रमेश मस्ताना की शिक्षा के बारे में क्या जानकारी है? उन्होंने धर्मशाला कॉलेज से हिंदी संभाग में एमए किया था और वह कॉलेज के पहले स्वर्ण पदक विजेता थे। 4. उन्हें कौन-से प्रमुख पुरस्कार मिले थे? उन्हें 1999 में पहाड़ी साहित्य सम्मान और 2020 में शाहपुर गौरव साहित्य पुरस्कार सहित कई सम्मान मिले थे। https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-pradesh-me-sadak-hadse-ka-shikaar-huye-sahityakar-ramesh-mastana-57042 TrendKia — Har trend, sabse pehle.