हिमाचल प्रदेश में आफत बना मानसून, 142 लोगों की मौत और 797 करोड़ का नुकसान, 11 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट जारी हिमाचल प्रदेश में मानसूनी आपदाओं और सड़क हादसों में 142 लोगों की जान जा चुकी है और 797.87 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने 11 अगस्त तक कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून की आवक के साथ ही प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं का ऐसा दौर शुरू हुआ है जिसने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है कि 30 जून से 6 अगस्त 2026 के मध्य राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश से उपजी आपदाओं और सड़क हादसों में 142 नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस भीषण प्राकृतिक तबाही के कारण राज्य को लगभग 797.87 करोड़ रुपये की संपत्ति और बुनियादी ढांचे के नुकसान का सामना करना पड़ा है। इस दौरान 224 नागरिक गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि वर्तमान मानसूनी सीजन राज्य के बुनियादी ढांचे और जनमानस के लिए कितना विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। मौसम विभाग का पूर्वाभास और जिलों में अलर्ट की स्थिति मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से जारी आधिकारिक चेतावनी के अनुसार, प्रदेश में बारिश का यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। विभाग ने 11 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने जानकारी दी है कि 10 अगस्त और 11 अगस्त को राज्य के कई संवेदनशील क्षेत्रों में अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। 10 अगस्त के दिन कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अगले दिन यानी 11 अगस्त को चंबा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर जिलों में अत्यंत भारी बारिश का अंदेशा जताया गया है। हालांकि 12 अगस्त के पश्चात वर्षा की तीव्रता में कुछ कमी दर्ज होने की संभावना व्यक्त की गई है, लेकिन कुछ स्थानों पर तेज बौछारें बनी रह सकती हैं। इससे पहले की स्थिति पर नजर डालें तो मौसम वैज्ञानिकों ने 7 अगस्त को बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में मध्यम से भारी वर्षा के लिए यलो अलर्ट जारी किया था। इसके बाद 8 और 9 अगस्त के दौरान कांगड़ा तथा सिरमौर जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी रखी गई है। 10 अगस्त को यलो अलर्ट का दायरा बढ़ाते हुए इसमें कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर और किन्नौर जिलों को शामिल किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में बादलों की गरज और तेज हवाओं के साथ राज्य के निचले व मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में भीषण बारिश का प्रकोप देखा जा सकता है। आपदा और हादसों में 142 मौतों का विस्तृत विवरण राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की व्यापक रिपोर्ट में मौतों के आंकड़ों को दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। कुल 142 मौतों में से 64 लोगों की मृत्यु प्रत्यक्ष रूप से भूस्खलन, बादल फटने और जलभराव जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई है, जबकि 78 अन्य लोगों ने बारिश के कारण खराब हुई सड़कों पर हुए हादसों में अपनी जान गंवाई है। वर्तमान में 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं और 194 मवेशियों व पशुओं की जान जाने की पुष्टि हुई है। प्राकृतिक आपदा से जुड़ी 64 मौतों के प्राथमिक कारणों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सबसे अधिक 21 लोगों की जान भारी पत्थरों या भारी पेड़ों के गिरने से हुई है। इसके अलावा पहाड़ खिसकने यानी भूस्खलन की चपेट में आने से 14 लोगों की मृत्यु हुई, 6 लोगों की मौत जहरीले सांपों के काटने से हुई, 5 लोग बिजली का करंट लगने से काल के गाल में समा गए, 4 लोग उफनते जलस्रोतों में डूब गए, 1 व्यक्ति की मौत अचानक आई फ्लैश फ्लड में बहने से हुई, 1 व्यक्ति की जान आग लगने की घटना में गई और 12 अन्य नागरिकों की मृत्यु आपदा संबंधी विभिन्न अन्य कारणों से हुई है। वहीं दूसरी तरफ, सड़कों की बदहाली और फिसलन के कारण हुए सड़क हादसों में 78 लोगों की मौत दर्ज की गई। जिलावार आंकड़ों के अनुसार सड़क हादसों में सबसे अधिक 12 मौतें कुल्लू जिले में हुई हैं। इसके बाद सिरमौर जिले में 11 मौतें, कांगड़ा और शिमला जिलों में 10-10 मौतें, चंबा जिले में 8 मौतें, सोलन जिले में 7 मौतें, ऊना जिले में 6 मौतें और किन्नौर जिले में 5 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा बिलासपुर, लाहौल-स्पीति और मंडी जिलों में 4-4 लोगों की जान गई है, जबकि हमीरपुर जिले में सड़क हादसे से 1 मौत दर्ज की गई है। आवासीय भवनों, दुकानों और कृषि भूमि को पहुंचा भारी नुकसान लगातार हो रही बारिश के कारण आम जनता की निजी संपत्ति और खेती को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसूनी आपदाओं में 22 मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं और नष्ट हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त 39 मकानों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है, जिससे कई परिवार बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। व्यावसायिक गतिविधियों को भी करारा झटका लगा है, जहां 90 दुकानें और सड़क किनारे बने ढाबे बारिश के पानी और मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन की सुरक्षा के लिए निर्मित 142 गौशालाएं भी ध्वस्त हो गई हैं। खेती-किसानी पर पड़े प्रभाव की बात करें तो प्रदेश में 72.04 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह से बह गई है या नष्ट हो गई है। सड़कें बाधित, नेशनल हाईवे-5 की स्थिति और बिजली-पानी का संकट पहाड़ों से मलबा गिरने और सड़कों के धंसने के चलते राज्य भर में आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। वर्तमान में प्रदेश भर की 120 मुख्य और संपर्क सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जिनमें एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल है। किन्नौर जिले में निगुलसरी के पास भूस्खलन के कारण बाधित हुए नेशनल हाईवे 5 को कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार की शाम को बहाल कर दिया गया है। बंद पड़ी सड़कों में सर्वाधिक 38 सड़कें मंडी जिले में हैं। इसके अलावा कुल्लू में 31 सड़कें, सिरमौर में 26 सड़कें, शिमला में 13 सड़कें, चंबा और कांगड़ा में 5-5 सड़कें, ऊना में 2 सड़कें तथा किन्नौर जिले में 1 सड़क मलबे के कारण अवरुद्ध है। बारिश और भूस्खलन का सीधा प्रभाव बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर भी पड़ा है। बिजली आपूर्ति ढांचा चरमराने से राज्य में 39 बिजली ट्रांसफार्मर ठप्प पड़े हुए हैं। इनमें कुल्लू जिले में 20 ट्रांसफार्मर, शिमला में 11 ट्रांसफार्मर, सोलन में 7 ट्रांसफार्मर और चंबा जिले में 1 ट्रांसफार्मर बंद है। पेयजल योजनाओं पर भी गहरा असर पड़ा है, जहां कुल 60 पेयजल योजनाएं मलबे व गाद के कारण ठप्प पड़ी हैं। इनमें सिरमौर जिले की 33 पेयजल योजनाएं, हमीरपुर जिले की 13 योजनाएं और बिलासपुर जिले की 3 प्रमुख पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रशासनिक चेतावनी और देशव्यापी मानसून का हाल राज्य में लगातार बिगड़ते मौसम और भूस्खलन के बढ़ते खतरों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने नागरिकों व पर्यटकों के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे उफनती नदियों, खड्डों, बरसाती नालों और पहाड़ियों के संवेदनशील कटाव वाले क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहें। आपदा राहत दल, लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग बंद सड़कों, ठप्प पड़े बिजली ट्रांसफार्मरों और प्रभावित पेयजल योजनाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर, मानसून का यह भीषण प्रकोप केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के बड़े हिस्से में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 15 राज्यों के लिए भारी बारिश, मेघगर्जन और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया है। इसका आप पर असर • भारत में: हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों और वाहन चालकों को लैंडस्लाइड और बंद सड़कों के कारण अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। • हिमाचल प्रदेश में: स्थानीय निवासी नदियों, नालों और भूस्खलन आशंकित पहाड़ी ढलानों से दूर रहें और बिजली-पानी की बहाली के प्रशासनिक अपडेट पर ध्यान दें। सवाल-जवाब 1. हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान कुल कितने लोगों की जान गई है? 30 जून से 6 अगस्त 2026 के बीच हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं और सड़क हादसों में कुल 142 लोगों की मौत हो चुकी है। 2. मौसम विभाग ने 10 और 11 अगस्त को किन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है? 10 अगस्त को कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर तथा 11 अगस्त को चंबा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर जिलों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 3. मानसूनी आपदाओं से हिमाचल प्रदेश को कितना नुकसान पहुंचा है? प्रदेश को मानसून की वजह से अब तक लगभग 797.87 करोड़ रुपये का अनुमानित वित्तीय नुकसान हो चुका है। 4. हिमाचल प्रदेश में कितनी सड़कें और हाईवे बंद पड़े हैं? राज्य में भूस्खलन के कारण 120 सड़कें बाधित हैं, जिनमें एक नेशनल हाईवे भी शामिल है। निगुलसरी में बंद एनएच-5 को बहाल कर दिया गया है। 5. राज्य में बिजली और पानी की आपूर्ति पर क्या प्रभाव पड़ा है? प्रदेश में 39 बिजली ट्रांसफार्मर और 60 पेयजल योजनाएं मलबे व क्षति के कारण प्रभावित हुई हैं। https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-pradesh-men-aphata-bana-manasuna-142-logon-ki-mauta-aura-797-karora-ka-nukasana-11-agasta-taka-bhari-barisha-ka-alarta-ja-14702 TrendKia — Har trend, sabse pehle.