# हिमाचल प्रदेश में आईपीएस अधिकारी संजीव गांधी पर धोखाधड़ी का मुकदमा, कांस्टेबल के पैसों से जुड़ा है मामला

> शिमला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी पर सरकारी फंड के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का मामला दर्ज किया गया है। एक कांस्टेबल ने अपनी जेब से खर्च किए गए 1.87 लाख रुपये न मिलने की शिकायत दर्ज कराई है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-pradesh-men-ips-adhikari-sanjeev-gandhi-para-dhokhadhari-ka-mukadama-kanstebala-ke-paison-se-jura-hai-mamala-50550 · **Language:** Hindi
**Tags:** संजीव गांधी, शिमला पुलिस, हिमाचल प्रदेश न्यूज, आईपीएस अधिकारी, वित्तीय अनियमितता

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। राज्य के एक आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार गांधी पर अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और फर्जीवाड़े के आरोप में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस थाना सदर शिमला में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत यह आपराधिक मामला दर्ज किया गया है और पुलिस इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच-पड़ताल कर रही है।

## ड्यूटी के दौरान कांस्टेबल ने खर्च किए थे पैसे
इस पूरे मामले की शुरुआत पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत से हुई। कांस्टेबल को वर्ष 2024 और 2025 के दौरान आधिकारिक आयोजनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न सामान खरीदने का जिम्मा सौंपा गया था। उस समय अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि इस काम में जो भी व्यक्तिगत पैसा खर्च होगा, उसका पूरा भुगतान बाद में कर दिया जाएगा। कांस्टेबल ने अपनी जेब से कुल 1,87,890 रुपये खर्च करके सभी जरूरी व्यवस्थाएं कीं और अपने सारे असली बिल संबंधित कार्यालय में जमा करवा दिए। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन बिलों को आधिकारिक तौर पर भुगतान के लिए मंजूर भी कर लिया गया था।

## हस्ताक्षर करवाने के बावजूद नहीं मिला बकाया
शिकायतकर्ता कांस्टेबल के मुताबिक, छह फरवरी 2026 को उस समय के एसएसपी संजीव कुमार गांधी ने उन्हें अपने पास बुलाया और भुगतान से जुड़े वाउचर पर उनके हस्ताक्षर ले लिए। अधिकारी ने उन्हें समझाया था कि यह कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए बेहद जरूरी है और ऐसा होते ही स्वीकृत राशि उनके बैंक खाते में भेज दी जाएगी। लेकिन कांस्टेबल का आरोप है कि वाउचर पर साइन करने के बाद भी उन्हें एक भी रुपया नहीं मिला। जब उन्होंने जुलाई 2026 में इस बारे में अकाउंट ब्रांच से पूछताछ की, तो पता चला कि वह फंड की राशि पहले ही निकाली जा चुकी थी, लेकिन उनके खाते में ट्रांसफर नहीं की गई थी, जिसके कारण उन्हें अपनी उधारी चुकाने के लिए खुद ही पैसों का इंतजाम करना पड़ा।

## फंड से अवैध निकासी और दस्तावेजों में गड़बड़ी
इस शिकायत के बाद जब पुलिस के वित्तीय रिकॉर्ड की आंतरिक जांच की गई, तो लगभग दो साल के अंतराल में एक जिला पुलिस फंड से करीब 2,35,000 रुपये की संदिग्ध अवैध निकासी का मामला उजागर हुआ। रिकॉर्ड की पड़ताल में सामने आया कि संजीव कुमार गांधी का तबादला होने के वक्त उस फंड में भारी कमी आ गई थी, जिसे पाटने के लिए कथित तौर पर कांस्टेबल के स्वीकृत बिलों के पैसों को उसी फंड के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। शुरुआती दस्तावेजों की जांच में धोखाधड़ी और सरकारी धन के गलत इस्तेमाल के पक्के संकेत मिलने के बाद सदर थाने में नया मुकदमा दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस इस मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है और तमाम साक्ष्यों को खंगाल रही है।

## इसका आप पर असर
यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, पुलिस महकमे के भीतर वित्तीय प्रबंधन और सरकारी धन के लेन-देन से जुड़े नियमों को गहराई से प्रभावित करता है।

- **हिमाचल प्रदेश में:** इस घटना के बाद राज्य के सभी पुलिस थानों और प्रशासनिक कार्यालयों में वित्तीय रिकॉर्ड्स की आंतरिक जांच तेज हो सकती है। सरकारी खरीद और बिल भुगतान की पुरानी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उच्च स्तर पर नए निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
- **शिमला में:** स्थानीय पुलिस महकमे और जिला प्रशासन के भीतर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कड़े कदम उठाए जाने की संभावना है। कांस्टेबल स्तर के कर्मचारियों और निचले पायदान के कर्मियों के बिल भुगतान के मामलों में अब अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा कानूनी मामला वित्तीय रिकॉर्ड्स की आंतरिक जांच और एक कांस्टेबल द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के बाद सामने आया है। आधिकारिक दस्तावेजों में हेराफेरी और फंड की कमी को पाटने के लिए किए गए प्रशासनिक फेरबदल इस विवाद का मुख्य कारण बने।

- **अनियमित खर्च और बिल अटकाना:** वर्ष 2024 और 2025 के दौरान आधिकारिक आयोजनों के लिए कांस्टेबल द्वारा किए गए खर्च का भुगतान रोकने के लिए फंड के पैसों का अन्यत्र उपयोग किया गया था।
- **फंड की कमी को छुपाना:** तबादले के वक्त जिला पुलिस फंड में आए पैसों की कमी को पूरा करने के लिए कांस्टेबल के स्वीकृत बिलों की राशि को जबरन फंड खाते में डायवर्ट कर दिया गया था।
- **शिकायत और जांच:** वाउचर पर हस्ताक्षर करवाने के बावजूद पैसे न मिलने पर जब कांस्टेबल ने अकाउंट्स ब्रांच से जानकारी निकाली, तो वित्तीय अनियमितता का यह पूरा खेल उजागर हो गया।

## सवाल-जवाब

### 1. यह मामला किस पुलिस थाने में दर्ज किया गया है?
यह मामला शिमला के पुलिस थाना सदर में दर्ज किया गया है।

### 2. इस मामले में किस आईपीएस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है?
तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया है।

### 3. कांस्टेबल ने अपनी जेब से कुल कितने रुपये खर्च किए थे?
कांस्टेबल ने व्यवस्थाओं पर कुल 1,87,890 रुपये अपनी जेब से खर्च किए थे।

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