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  "type": "article",
  "title": "हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर जारी, बारिश के चलते 253 लोगों की मौत और दर्जनों सड़कें बंद",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश में जारी मानसूनी बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आपदाओं और हादसों में अब तक 253 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई रास्ते और ट्रांसफॉर्मर ठप पड़े हैं।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश में मानसून की मानसूनी गतिविधियों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है और लगातार हो रही बारिश से राज्य के कई हिस्सों में हालात गंभीर बने हुए हैं। राज्य आपदा संचालन केंद्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले चौबीस घंटों के दौरान बारिश के असर से नब्बे से ज्यादा सड़कें बंद हो चुकी हैं, जबकि एक सौ से अधिक ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं और दर्जनों पेयजल योजनाओं का संचालन भी रुक गया है। प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, तीस अगस्त की शाम तक चौसठ सड़कें, दो सौ छब्बीस ट्रांसफॉर्मर और नौ पेयजल योजनाएं इस संकट की चपेट में थीं, लेकिन बारिश का यह सिलसिला थमने के बजाय और तेज हो गया, जिसके चलते इक्तीस अगस्त की सुबह तक बंद सड़कों का यह आंकड़ा बढ़कर अट्ठानवे तक पहुंच गया।\n\nअलग-अलग जिलों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान\n\nपहाड़ी राज्य के विभिन्न जिलों में इस प्राकृतिक आपदा का असर अलग-अलग स्तर पर देखने को मिल रहा है। यदि जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो मंडी में सबसे अधिक उनचास सड़कें बंद पड़ी हैं और नवासी ट्रांसफॉर्मर इस प्राकृतिक मार से प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, चंबा जिले में पंद्रह सड़कें और पांच ट्रांसफॉर्मर, कुल्लू में सोलह सड़कें, सोलन में चार सड़कें तथा पांच ट्रांसफॉर्मर, सिरमौर में पांच सड़कें और शिमला में दो सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह अवरुद्ध हो चुकी हैं। कांगड़ा और ऊना जिलों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही बनी हुई है, जहां क्रमशः सात और चार सड़कें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पेयजल आपूर्ति की बात करें तो हमीरपुर जिला इस मोर्चे पर सबसे अधिक प्रभावित रहा है, जहां सैंतीस जलापूर्ति योजनाएं बाधित होने से लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।\n\nमानसून सीजन के दौरान मौतों का बढ़ता आंकड़ा\n\nतीस जून से तीस अगस्त दो हजार छब्बीस के बीच संकलित की गई विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि इस पूरे मानसून सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुल दो सौ त्रेपन लोगों की जान जा चुकी है। इन दुखद हादसों में एक सौ चार मौतें सीधे तौर पर प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं के कारण हुईं, जबकि एक सौ उनचास लोगों ने विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई। यदि प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई मौतों का जिलावार विश्लेषण किया जाए, तो शिमला और कांगड़ा में सोलह-सोलह मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि सिरमौर में चौदह, चंबा में तेरह और मंडी में दस लोगों की मृत्यु हुई है। वहीं दूसरी ओर, सड़क हादसों का ग्राफ भी डराने वाला है, जिसमें सिरमौर और शिमला में उन्नीस-उन्नीस, चंबा और कांगड़ा में सत्रह-सत्रह, ऊना में अठारह तथा कुल्लू में सोलह लोगों की सड़क पर दुर्घटनाओं के चलते मौत हो गई है।\n\nरेलवे ट्रैक की मिट्टी बहने से टॉय ट्रेन सेवाएं ठप\n\nबारिश के इस तांडव का असर केवल सड़कों और बिजली तंत्र तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर पर्वतीय रेल सेवाओं पर भी पड़ा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते ऐतिहासिक शिमला-कालका नैरोगेज लाइन पर चलने वाली दस रेलगाड़ियों को फिलहाल रद्द कर दिया गया है। सोलन जिले के अंतर्गत रेलवे पटरी के एक हिस्से के पास से अचानक मिट्टी बह जाने के कारण रेलवे प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों ने रविवार को मीडिया को जानकारी दी कि कोटी और गुम्मन रेलवे स्टेशनों के बीच अचानक भूस्खलन होने से पटरी के नीचे की पूरी मिट्टी खिसक गई, जिससे रेल की पटरियां हवा में लटकती हुई नजर आईं। सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रेलवे ने शनिवार रात से ही इस खंड पर चलने वाली लोकप्रिय टॉय ट्रेन का संचालन पूरी तरह रोक दिया था। शिमला रेलवे स्टेशन के अधीक्षक संजय गेवर ने पुष्टि की कि रविवार को कालका और शिमला के बीच चलने वाली सभी दस ट्रेनों का परिचालन रद्द कर दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पटरियों की सुरक्षा पुख्ता करने और पूरी स्थिति का तकनीकी आकलन करने के बाद ही इस मार्ग पर रेल सेवाओं को दोबारा शुरू करने पर कोई निर्णय लिया जाएगा।\n\nमौसम विभाग का आने वाले दिनों के लिए अलर्ट\n\nमौसम से जुड़ी मुश्किलें अभी कम होती नजर नहीं आ रही हैं क्योंकि मौसम विज्ञान विभाग ने अगले चार दिनों तक राज्य के विभिन्न इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई है। शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने इक्तीस अगस्त से तीन सितंबर तक के लिए हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में शनिवार शाम से ही हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी है। शनिवार शाम के बाद से धौलाकुआं क्षेत्र में अड़तीस दशमलव पांच मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस दौरान सबसे ज्यादा है। इसके अलावा घाघस में तीस मिलीमीटर, पालमपुर में तेईस दशमलव आठ मिलीमीटर, मुरारी देवी में बाईस मिलीमीटर, काहू में ग्यारह दशमलव छह मिलीमीटर और पंडोह में दस मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम कार्यालय के अनुसार इस दौरान कई स्थानों पर बादलों के गरजने के साथ तीव्र बौछारें पड़ीं और बिजली भी कड़की। गौरतलब है कि तीस जून को मानसून के आधिकारिक आगमन के बाद से लेकर अब तक राज्यभर में बारिश जनित विभिन्न आपदाओं के कारण कुल एक हजार एक सौ चौरासी करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान आंका जा चुका है।\n\nइसका आप पर असर\nहिमाचल प्रदेश में जारी मानसूनी बारिश और आपदाओं का सीधा असर स्थानीय नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन, आवागमन और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है।\n\n  - भारत में: पहाड़ी राज्यों में इस तरह के भारी मानसूनी व्यवधानों से देश के अन्य हिस्सों से वहां यात्रा करने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को अपनी योजनाएं बदलनी पड़ सकती हैं। इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का असर समग्र आपदा राहत कोष और परिवहन तंत्र पर भी पड़ता है।\n\n  - हिमाचल प्रदेश में: राज्य के विभिन्न जिलों में 98 सड़कें और कई ट्रांसफॉर्मर ठप होने से रोजमर्रा की आवाजाही और बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थानीय निवासियों को पानी की किल्लत और बंद रास्तों के कारण लंबी दूरी तय करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।\n\n  - यातायात सुरक्षा: कालका-शिमला टॉय ट्रेन और अन्य मार्गों के बंद होने से दैनिक यात्रियों और पर्यटकों की यात्रा अनिश्चित हो गई है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा करने से पहले संबंधित रेलवे और परिवहन अधिकारियों से ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।\n\n  - मौसम सतर्कता: मौसम विभाग द्वारा अगले चार दिनों तक जारी किए गए येलो अलर्ट को देखते हुए लोगों को अनावश्यक रूप से पहाड़ी या भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की यात्रा करने से बचना चाहिए। स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान अब तक कुल कितनी मौतें हुई हैं?\nमानसून सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुल 253 लोगों की जान जा चुकी है।\n\n2. वर्तमान में राज्य में कितनी सड़कें बंद हैं?\nताजा रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण 98 सड़कें बंद पड़ी हैं।\n\n3. कालका-शिमला रेल मार्ग पर ट्रेन सेवाएं क्यों रद्द की गई हैं?\nकोटी और गुम्मन स्टेशनों के बीच रेलवे पटरी के पास मिट्टी बह जाने के कारण सुरक्षा कारणों से 10 ट्रेनें रद्द की गई हैं।\n\n4. मौसम विभाग ने कब तक के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है?\nमौसम विज्ञान केंद्र ने 31 अगस्त से 3 सितंबर तक के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।\n\n5. मानसून के कारण अब तक राज्य को कुल कितने आर्थिक नुकसान का अनुमान है?\nराज्यभर में बारिश से जुड़ी घटनाओं के कारण अब तक 1,184 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।\n\n6. किस जिले में सबसे अधिक पेयजल योजनाएं बाधित हुई हैं?\nहमीरपुर जिले में सबसे अधिक 37 जलापूर्ति योजनाएं बाधित हुई हैं।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-31",
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    "हिमाचल प्रदेश मानसून",
    "शिमला बारिश",
    "आपदा प्रबंधन",
    "कालका शिमला टॉय ट्रेन",
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  "site": "TrendKia"
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