हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसों में कमी के बीच सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, लागू होगी पांच चरणों वाली नई सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग की सड़कों के लिए नई सुरक्षा ऑडिट नीति लागू करने को मंजूरी दी है, जिसके तहत परियोजना लागत का एक प्रतिशत सुरक्षा के लिए आरक्षित होगा। हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी रास्तों पर सफर को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। साल 2023 के मुकाबले साल 2024 में राज्य के भीतर सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस सकारात्मक बदलाव को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार ने सड़कों की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले सड़क नेटवर्क के लिए एक व्यापक सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति को मंजूरी दी गई है। इस नीति का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में किसी भी नई या पुरानी सड़क की योजना बनाने, उसके रेखांकन, निर्माण कार्य, संचालन और निरंतर रखरखाव की पूरी प्रक्रिया में सड़क सुरक्षा को एक अनिवार्य और अभिन्न हिस्से के रूप में शामिल किया जाए। पहाड़ी राज्य में सुरक्षा के नए मानक की जरूरत हिमाचल प्रदेश जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण पर्वतीय राज्य में सड़कों की स्थिति और उनकी बनावट सीधे तौर पर मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। सड़क संबंधी संरचनात्मक खामियों की समय रहते पहचान करने और उनका वैज्ञानिक तथा व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय सड़क कांग्रेस के तकनीकी दिशा-निर्देशों और विभिन्न सिफारिशों के अनुकूल एक बेहद व्यवस्थित सड़क सुरक्षा ऑडिट ढांचे को अंगीकार किया है। इस नवनिर्मित नीति का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के भीतर सड़क बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता में आमूलचूल सुधार करना, भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका और उनके जोखिम को न्यूनतम स्तर पर लाना और साथ ही सभी प्रकार के सड़क उपयोगकर्ताओं, जिनमें पैदल यात्री और वाहन चालक शामिल हैं, के लिए एक बेहद सुरक्षित और भरोसेमंद सड़क तंत्र का विकास करना है। सड़क निर्माण और सुरक्षा के पांच महत्वपूर्ण चरण इस नई ऑडिट नीति की रूपरेखा के अंतर्गत किसी भी प्रस्तावित या वर्तमान सड़क परियोजना के जीवन चक्र में कुल पांच अलग-अलग और अत्यंत संवेदनशील चरणों के दौरान गहन सड़क सुरक्षा ऑडिट किया जाना अनिवार्य बनाया गया है। इन चरणों को इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है - व्यवहार्यता या प्रारंभिक डिजाइन चरण: इस शुरुआती चरण में ऑडिट करने वाले विशेषज्ञ मुख्य रूप से सड़क के लिए चुने गए मार्ग की भौगोलिक व्यवहार्यता, सड़क के अलाइनमेंट (संरेखण), प्रमुख चौराहों की स्थिति, सड़क के क्रॉस-सेक्शन और पहले से मौजूद सड़क नेटवर्क के साथ उसके संपर्क का गहराई से परीक्षण करेंगे ताकि शुरुआती स्तर पर ही गलतियों को सुधारा जा सके। - विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) चरण: इस चरण में ज्यामितीय डिजाइन की सूक्ष्मता, सड़क पर लगाए जाने वाले विभिन्न संकेतकों, सड़क चिह्नांकन, रात के समय रोशनी की समुचित व्यवस्था, शारीरिक रूप से संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ताओं जैसे पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए बनाई जाने वाली सुविधाओं के साथ-साथ सड़क के किनारों पर आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। - निर्माण कार्य का चरण: सड़क के निर्माण के दौरान किए जाने वाले ऑडिट में कार्यस्थल की समग्र सुरक्षा, निर्माण के समय यातायात को सुचारू रूप से मोड़ने की प्रबंधन योजना, वहां काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और परियोजना के शुरुआती चरणों में ऑडिटर्स द्वारा दिए गए सुरक्षा सुझावों के जमीनी अनुपालन का गहन निरीक्षण किया जाएगा। - यातायात के लिए खोलने से पूर्व का चरण: सड़क का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद और उस पर आम जनता के वाहनों की आवाजाही शुरू करने से ठीक पहले एक विशेष दल द्वारा दिन और रात दोनों समय सड़क का व्यापक तथा व्यावहारिक निरीक्षण किया जाएगा ताकि किसी भी अनदेखी खामी को तुरंत सुधारा जा सके। - पहले से निर्मित सड़कों का ऑडिट: पहले से चालू और निर्मित सड़कों का भी समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य समय के साथ उभरने वाले नए जोखिमों, सड़क के घिसने या प्राकृतिक बदलावों के कारण पैदा होने वाली सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान करना और उनका समय पर प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। ऑडिटरों के लिए तय की गई सख्त अर्हताएं इस दूरगामी नीति को जमीनी स्तर पर निष्पक्षता और सटीकता से लागू करने के लिए सड़क सुरक्षा ऑडिट के काम को बेहद विशेषज्ञ हाथों में सौंपने का निर्णय लिया गया है। नीति के नियमों के मुताबिक, सड़क सुरक्षा ऑडिट केवल उन्हीं व्यक्तियों द्वारा किया जा सकेगा जो भारतीय सड़क कांग्रेस से प्रमाणित 'रोड सेफ्टी ऑडिटर' हों। इसके अलावा, विभागीय स्तर पर ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस कार्य के लिए योग्य माना जाएगा जिन्होंने सड़क सुरक्षा ऑडिट से संबंधित विशेष 15 दिवसीय प्रमाणन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया हो। इसके साथ ही, ऑडिट करने वाले अधिकारियों के पास पहाड़ी इलाकों में सड़कों के निर्माण और उनके प्रबंधन का कम से कम 10 वर्ष का व्यावहारिक अनुभव होना अनिवार्य किया गया है। इस नीति का एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य पहलू ऑडिट करने वाले दल की पूर्ण निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। नियमों के अनुसार, ऑडिट करने वाले विशेषज्ञ पूरी तरह से स्वतंत्र होने चाहिए। उनका उस विशिष्ट सड़क परियोजना के मूल डिजाइन तैयार करने, उसके निर्माण कार्य को निष्पादित करने या उसके दैनिक संचालन और प्रबंधन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी संबंध नहीं होना चाहिए। इस स्वतंत्रता से यह सुनिश्चित होगा कि ऑडिट रिपोर्ट बिना किसी विभागीय दबाव या पक्षपात के पूरी तरह से पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित होगी। संस्थागत ढांचे को मजबूत बनाने के लिए रोड सेफ्टी सेल इस सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति के सुचारू और प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय में एक विशेष और समर्पित 'रोड सेफ्टी सेल' की स्थापना की जाएगी। यह नवनिर्मित सेल पूरे राज्य में चल रहे सड़क सुरक्षा ऑडिट कार्यक्रमों की बारीकी से निगरानी करेगा, परियोजनाओं की प्रगति का निरंतर आकलन करेगा और राज्य स्तर पर योग्य और अनुभवी ऑडिटरों का एक विस्तृत पैनल तैयार करेगा। इसके अतिरिक्त, यह सेल विभिन्न ऑडिट रिपोर्टों के बाद किए गए सुधारात्मक कार्यों की अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए भी जिम्मेदार होगा। इंजीनियरों, ठेकेदारों और अन्य संबंधित हितधारकों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाने के लिए यह सेल नियमित अंतराल पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आम जनता के लिए सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियानों का भी आयोजन करेगा। नीति के कड़े प्रावधानों के तहत लोक निर्माण विभाग के अभियंता-प्रमुख द्वारा हर तिमाही में इस पूरे कार्यक्रम और इसकी प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी, जिससे इसकी व्यावहारिक उपयोगिता बनी रहे और जहां भी आवश्यकता हो, तुरंत सुधार किए जा सकें। परियोजना बजट में अनिवार्य वित्तीय हिस्सेदारी नीति में एक बेहद ठोस वित्तीय व्यवस्था भी की गई है ताकि सुरक्षा मानकों से धन की कमी के कारण समझौता न हो। इसके तहत राज्य में एक करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना के कुल बजट में से अनिवार्य रूप से एक प्रतिशत हिस्सा केवल सड़क सुरक्षा ऑडिट और उससे जुड़े सुधारात्मक उपायों के लिए आरक्षित रखा जाएगा। इसके अलावा, सड़कों पर लगाए जाने वाले संकेतक, सड़क चिह्नांकन, वाहनों की गति को नियंत्रित करने वाले उपायों, कार्यस्थल प्रबंधन, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्तों, साइकिल ट्रैक के निर्माण, पहाड़ी ढलानों पर सुरक्षात्मक दीवारें और बैरियर लगाने, चौराहों के सुधार और ज्यामितीय डिजाइनों से जुड़े भारतीय सड़क कांग्रेस के विभिन्न मानकों और तकनीकी मैनुअलों का पूरी तरह से पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। इस कड़े कदम से यह सुनिश्चित होगा कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बनने वाली नई सड़कें अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के सर्वोच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार की जाएं। सुरक्षा पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के विचार राज्य के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस नीति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश के पूरे सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, सक्षम और अत्यधिक मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में क्रियान्वित की जाने वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में मानवीय जीवन की सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह नई सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति सड़क विकास के प्रत्येक चरण में आने वाले संभावित खतरों और कमियों को समय से पहले पहचानने में मदद करेगी और सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करेगी। सुरक्षित सड़कें न केवल भयानक हादसों को रोकने और अनमोल जिंदगियों को बचाने में सहायक होती हैं, बल्कि वे राज्य के दूरदराज के इलाकों में आर्थिक तरक्की और बेहतर परिवहन संपर्क को भी बढ़ावा देती हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने यह भी साझा किया कि राज्य सरकार स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट को एक मजबूत प्रशासनिक संस्था का रूप देकर और हर स्तर पर जवाबदेही तय करके सड़क सुरक्षा के प्रति एक बहुत ही सक्रिय, वैज्ञानिक और आधुनिक दृष्टिकोण अपना रही है। उन्होंने राज्य की जनता को भरोसा दिलाया कि मानव जीवन की सुरक्षा सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है और प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित तथा दीर्घकालिक सड़क बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए हर संभव नीतिगत प्रयास जारी रखे जाएंगे। हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसों के आधिकारिक आंकड़े राज्य सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के कड़ाई से पालन के लिए किए गए निरंतर प्रयासों के बेहद सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने शुरू हो गए हैं। साल 2023 की तुलना में साल 2024 के दौरान हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के कुल मामलों में 6.48 प्रतिशत की उत्साहजनक गिरावट दर्ज की गई है। प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जहां साल 2023 में राज्य के भीतर कुल 2,253 सड़क हादसे दर्ज किए गए थे, वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा काफी हद तक सिमटकर 2,107 रह गया। इसी प्रकार, इन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के आंकड़ों में भी भारी गिरावट देखी गई है। साल 2023 में जहां राज्य की सड़कों पर विभिन्न दुर्घटनाओं में 892 लोगों की असमय मृत्यु हुई थी, वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा कम होकर 806 दर्ज किया गया। सरकार का लक्ष्य इस नई नीति के माध्यम से इन आंकड़ों को और भी नीचे लाना है ताकि हिमाचल प्रदेश की सड़कें यात्रियों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित बन सकें। इसका आप पर असर • यात्रियों और पर्यटकों के लिए: हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय रास्तों पर सफर अब और अधिक सुरक्षित हो जाएगा क्योंकि नए डिजाइन और सुरक्षा मानकों की कड़ी जांच की जाएगी। • हिमाचल प्रदेश में स्थानीय लोगों के लिए: सड़क अवसंरचना के व्यवस्थित सुधार से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और दैनिक सफर में सुरक्षा के साथ सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी। सवाल-जवाब 1. हिमाचल प्रदेश की नई सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति क्या है? यह लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़कों के लिए लागू की गई एक व्यापक नीति है, जिसके तहत सड़कों के योजना निर्माण से लेकर संचालन तक पांच अलग-अलग चरणों में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया गया है। 2. सड़क दुर्घटनाओं को लेकर राज्य में क्या सकारात्मक बदलाव देखा गया है? साल 2023 की तुलना में साल 2024 में हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी आई है और सड़क हादसों में होने वाली मौतें 892 से घटकर 806 रह गईं। 3. सड़क सुरक्षा ऑडिट के पांच चरण कौन से हैं? इसके पांच चरणों में प्रारंभिक व्यवहार्यता चरण, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) चरण, निर्माण चरण, सड़क खोलने से पूर्व का चरण और चालू सड़कों का समय-समय पर ऑडिट शामिल है। 4. इस ऑडिट को करने के लिए क्या योग्यताएं तय की गई हैं? ऑडिट केवल भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) से प्रमाणित ऑडिटर या 15 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त वे विभागीय कर्मचारी कर सकते हैं जिन्हें पहाड़ी सड़कों के निर्माण का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव हो। 5. सुरक्षा ऑडिट के लिए वित्तीय बजट का क्या नियम बनाया गया है? एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में कुल लागत का एक प्रतिशत अनिवार्य रूप से सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए निर्धारित किया जाएगा। https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachal-pradesh-men-saraka-hadason-men-kami-ke-bicha-sukhu-sarakara-ka-bara-phaisala-lagu-hogi-pancha-charanon-vali-nai-saraka-su-10353 TrendKia — Har trend, sabse pehle.